Yaum e Jung e Badr 17 Ramzan

Sayyeduna Maula Ali (عليه السلام) Se Marvi Hai Ke Huzoor (صلى الله عليه وآله وسلم) Ne Ashab-e-Badr Ke Liye Farmaya:
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Allah Ta’ala Ne Ahle Badr Ki Taraf Tawajjoh Farmayi Aur Farmaya : Tum Jo Amal Karna Chahte Ho Karo Beshaq Tumhare Liye Jannat Lazim Hogayiee! (Maine Tumhe Maaf Kardiya.)
.
Reference :
– Bukhari, 4/1463, #3762
– Muslim, 4/1941, #2494
– An Najabat Fee Manaqibis Sahabati wal Qarabat RadiAllahu Anhum
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اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَ عَلَی اٰلِ سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَ بَارِکْ وَ س٘لِّمْ

#ज़ग_ए_बदर ओर #मौला_अली ع

जंग ए बदर में जिस वक्त मुशरिकों के
लश्कर से अतबा शेबा ओर वलिद जेसे
पेहलवान मेदान में आकर इस्लाम के सिपाहियों को ललकारा तों उस वक्त हुजूर मुहम्मद ﷺ के हुक्म से उबेदा
बीन हारिस ر , हमजा बीन अब्दुल मुतालिब ع ओर हज़रत अली इब्ने अबी तालिबع उनसे जंग करने
के लिए मेदान में आये …
_
हज़रत उबेदा ر , अतबा के मुक़ाबिल..,
हज़रत हम्ज़ा ۴, शेबा के मुक़ाबिल ..,
ओर हज़रत अली ۴ , वलिद से लडने के लिए तेयार हुए .. मोरीख ने बयान किया है के हजरत अली ۴ ने अपने
दुश्मन वलिद को पेहले ही वार में कत्ल कर दिया था ..
उनके बाद वो हज़रत हम्ज़ा ۴ की मदद के लिए आये ओर शेबा को भी तलवार से दो तुकडे कर दिया … उसके बाद हज़रत अली۴ ओर हज़रत हम्ज़ा ۴ ,
हजरत उबेदा ر की मदद के लिए गये
ओर अतबा को भी कत्ल कर दिया …
_
इस तरह हज़रत अली ۴ , मुशरीकों के
लश्कर के तीनों पेहलवानों के कत्ल में
शरीक थे.., इस लिए जब हज़रत अली ۴ ने
मुवावीया को ख़त लिखा तो उसमें
आक ۴ ने ये लिखा :: 👇👇👇👇👇
“वो तलवार जिससे मेने एक ही दिन में तुम्हारे दादा (अतबा), तुम्हारे मामा
(वलीद) ओर तुम्हारे भाई (हनजला) ओर
तुम्हारे चाचा (शेबा) को कत्ल किया वो आज भी मेरे पास है.”
_
मोरीखींन ने लिखा के जंग ए बदर
में दुश्मनों के70सिपाही मारे गए जिसमें अबू जहल उमेया बीन खल्फ नजर
बीन हारिस ओर दुसरे काफी काफीरों के सरदार सामिल थे जिसमें 35को हज़रत अली ۴
की तलवार से वासिल जहन्नुम हूए ..
उसके इलावा दुसरो के कत्ल में भी
आप ۴ की तलवार ने जौह़र दिखाये …
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इमाम जाफर मुहम्मद बाकिर۴ से
मरवी है कि आप फरमाते थे कि ,
बदर के रोज़ एक फरीस्ते ने जिसका नाम
‘रिजवान’ था आसमान से पूकार कर कहा :

ला फता इल्लाअली ला शैफ इल्ला जुल्फिकार !
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
नहीं है अल ۴ के सिवा कोई बहादुर और नहीं जुल्फिकार के सिवा कोई तलवार !
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Reference :
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[Arjah-ul-Matalib Fi Sirat
Amir-ul-Mominin ۴ , Saf’h-780.]
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