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8 hadiths regarding The Mahdi Alahissalam

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1. The Mahdi will be from the family of Prophet Muhammad (SAW)

“The world will not come to pass until a man from among my family, whose name will be my name, rules over the Arabs.”

– Prophet Muhammad (Tirmidhi Sahih, Vol. 9, P. 74; Abu Dawud, Sahih, Vol. 5, P. 207; also narrated by Ali ibn Abu Talib, Abu Sa’id, Umm Salma, Abu Hurayra)

2. He will spread justice and equality & eradicate tyranny and opression

“Allah will bring out from concealment al-Mahdi from my family and just before the day of Judgment; even if only one day were to remain in the life of the world, and he will spread on this earth justice and equity and will eradicate tyranny and oppression.”

– Prophet Muhammad (Musnad Ahmad Ibn Hanbal, Vol. 1, P. 99)

3. The Mahdi will rise even if it is one day before Qiyamah

“Even if only a day remains for Qiyamah to come, yet Allah will surely send a man from my family who will fill this world with such justice and fairness, just as it initially was filled with oppression.”

– Prophet Muhammad (Abu Dawood)

4. The Mahdi will emerge within a single night

“The promised Mahdi will be among my family. God will make the provisions for his emergence within a single night.”

– Prophet Muhammad (Ibn Majah, Sahih, Vol. 2, P. 519)

5. The Mahdi will be a descendant of Fatima

“The promised Mahdi will be among my progeny, among the descendants of Fatima.”

– Prophet Muhammad, narrated by Umm Salmah, the Prophet’s wife (Abu Dawud, Sahih, Vol. 2, P. 207; Ibn Majah, Sahih, Vol. 2, P. 519)

6. The Mahdi will be from the household of the Prophet (Ahlul-Bayt)

“Al-Mahdi is one of us, the members of the household (Ahlul-Bayt).”

– Prophet Muhammad (Sunan Ibn Majah, Vol. 2, Tradition No. 4085)

7. An army will proceed from Syria to attack the Mahdi and be swallowed into the ground

“After the death of a Ruler there will be some dispute between the people. At that time a citizen of Madina will flee (from Madina) and go to Makkah. While in Makkah, certain people will approach him between Hajrul Aswad and Maqaame Ibraheem, and forcefully pledge their allegiance to him.

Thereafter a huge army will proceed from Syria to attack him but when they will be at Baida, which is between Makkah and Madina, they will be swallowed into the ground.”

– Prophet Muhammad, narrated by Umm Salmah, the Prophet’s wife (Abu Dawood)

8. Jesus will descend and pray behind the Mahdi

“A group of my Ummah will fight for the truth until near the day of judgment when Jesus, the son of Mary, will descend, and the leader of them will ask him to lead the prayer, but Jesus declines, saying: “No, Verily, among you Allah has made leaders for others and He has bestowed his bounty upon them.”

– Prophet Muhammad (Sahih Muslim)

हज़रते अमीर खुसरो र० और बूअली शाह कलंदर र० का खूबसूरत वाक़िआ..

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हज़रते अमीर खुसरो र० और बूअली शाह कलंदर र० का खूबसूरत वाक़िआ..

हज़रते अमीर खुसरो हज़रते महबूबे इलाही ख़्वाजा निजामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह के मुरीद थे एक बार हज़रते महबूबे इलाही ने फरमाया:
ऐ खुसरो हर जुमेरात के दिन हज़रते बूअली शाह कलंदर के यहां महफिल होती है, आप इस महफिल में शिरकत किया कीजिए पीरो मुर्शिद का हुक्म था.
हज़रते अमीर खुसरो ने जाना शुरू कर दिया एक जुमेरात की महफिल में हज़रते बूअली शाह कलंदर ने फरमाया खुसरो हमने कभी भी अल्लाह के नबी स०अ०व० की कचहरी में (दरबार) में तुम्हारे पीर महबूबे इलाही को नहीं देखा….
यह बात सुनकर हजरत अमीर खुसरो बहुत परेशान हो गए आपको अपने पीर से बेहद मोहब्बत थी और जैसा कि हर मुरीद को अपने पीर से बेहद मोहब्बत होती है, अमीर खुसरो को भी थी? आप काफी परेशान रहने लगे..
एक दिन हज़रते महबूबे इलाही ने फरमाया: खुसरो, परेशान दिखते हो क्या बात है?
अमीर खुसरो ने फरमाया: सय्यदी ऐसी कोई बात नहीं.
मगर पीर ने मुरीद के बेचैनी दिल का हाल जान लिया था पूछने लगे बताओ क्या बात है? किस बात से परेशान हो?
हज़रत अमीर खुसरो ने पूरा माजरा बता दिया इस पर हज़रते महबूबे इलाही ने फरमाया कि अगली बार जब हज़रते बूअली शाह कलंदर ऐसा कुछ फरमाएं तो उनसे अर्ज करना कि आप मुझे अल्लाह के नबी स०अ०व० की कचहरी (दरबार) में पहुंचा दे मैं अपने शैख को खुद ही तलाश कर लूंगा…
हजरत अमीर खुसरो बहुत खुश हो गए कुछ दिन बाद फिर हज़रते बूअली शाह कलंदर ने ऐसा ही फरमाया तो आपने कहा हज़रत आप मुझे अल्लाह के नबी स०अ०व० की कचहरी (दरबार) में पहुंचा दें मैं अपने शैख को खुद ही तलाश कर लूंगा.. तो हजरत बूअली शाह कलंदर मुस्कुराए और आपके सीने पर हाथ रखा तो जब आंखें बंद की तो दिल की आंख खुल गई और हज़रत अमीर खुसरो बारगाहे महबूबीयत यानी बारगाहे रिसालत में पहुंच गए और पहुंचकर हर वली अल्लाह का चेहरा देखने लगे मगर हज़रते महबूबे इलाही नजर ना आए. इतने में अल्लाह के रसूल ने फरमाया ऐ खुसरो किसको तलाश करते हो?
अमीर खुसरो ने फ़रमाया हुजूर अपने शैख को तलाश करता हूं. कुर्बान जाए मेरे आका ने फरमाया इससे ऊपर वाली कचहरी (दरबार) में जाओ तो आप उससे ऊपर वाली कचहरी (दरबार)में चले गए वहां भी मेरे आका मौजूद थे हजरत अमीर खुसरो फिर हर वली अल्लाह चेहरा देखने लगे मगर आपको आपके शैख नजर ना आए. अल्लाह के हबीब ने यहां भी अमीर खुसरो से मुखातिब हुए फरमाया खुसरो किसे तलाश करते हो? अर्ज की हुजूर अपने शैख को तलाश करता हूं फरमाया इससे ऊपर वाली कचहरी मंज़िल में जाओ इस तरह करते करते अमीर खुसरो सातवीं कचेहरी (मनजील) जो के आखिरी कचहरी (मंज़िल) तक पहुंच गए और हर वली का चेहरा देखने लगे हर मंजिल के साथ साथ इन्हें अपने पीर को देखने की तड़प बढ़ती जा रही थी वहां भी अल्लाह के नबी स०अ०व० मौजूद थे और आप के बिल्कुल करीब एक बुजुर्ग थे और इनके बिल्कुल पीछे एक और बुजुर्ग, नबी स०अ०व० ने इनसे फरमाया कि कभी पीछे भी देख लिया कीजिए तो जैसे ही उन्होंने पीछे देखा तो वह हज़रते महबूबे इलाही थे और इनके बिल्कुल आगे जो बुजुर्ग थे वलियों के सरदार हजरत गौसे आजम पीराने पीर थे हजरत अमीर खुसरो ने इतने दिनों की परेशानी के बाद अपने शैख का यह मकाम देखा तो वलियों के दरमियान में से अपने शैख तक पहुंचने की कोशिश की यहां साथ ही हजरते बूअली शाह कलंदर ने अपना हाथ उठा लिया और आप साथ ही फिर इसी दुनिया ए फानी में आ गए लेकिन आप वजद में थे झूमते झूमते अपने शैख के आस्ताने तक आए और यह कलाम लिखा..

नमी दानम के आखिर चूं मनम दीदार.

ये सारे वाकिये में कुछ बातें बहुत अहम है एक यह है कि जिस तरह अल्लाह के हबीब स०अ०व० हर कचहरी (मंज़िल) में मौजूद है इसी तरह आप हर जगह मौजूद है और अपने हर उम्मती का अहवाल और नाम तक जानते हैं जभी तो अमीर खुसरो का नाम लेकर मुखातिब हुए दूसरी यह कि हजरते बूअली शाह कलंदर अमीर खुसरो को उनके शैख उनके पीर का मकाम दिखाना चाहते थे..
यह वाकिये में हज़रत अमीर खुसरो की सबसे बड़ी खुश किस्मती यह है के हुजूर स०अ०व० सात मर्तबा मुखातिब हुए और सात मर्तबा अल्लाह के रसूल स०अ०व० का दीदार हुआ.. अल्लाहु अकबर…
इससे बढ़कर एक उम्मती के लिए खुश किस्मती क्या हो सकती है? मालिक हमें भी अपने नबी स०अ०व० के बारगाह में कुबुल फरमाए आमीन…
मोहे अपने ही रंग में रंग दो निजाम…