मौला के घोड़े का जिक्र क़ुरान में

मौला के घोड़े का जिक्र क़ुरान में

मुझे दौड़ते हुऐ घोड़ों की कसम ! मुझे उन के पैर से उड़ती हुई चिंगारियों की कसम ! जिन्होंने सुबह के वक्त हमला किया गुबार उड़ाया और दुश्मनों की सफो में घुसगये*

तारीख ऐ तबरी में है कि ये आयत हज़रत अली के जंग के जात ऐ सलासिल को फतह करने के मौके पर नाजिल हुई
नबी ऐ पाक फतह की खबर सुन कर खुश हुए और अली को पेशवाई को बाहर आये जब मौला पर नज़र पड़ी तो फोरन घोड़े से उतर आऐ ओर फरमाया

ऐ अली अगर मुझे उम्मत के गुमराह होने का खौफ ना होता तो में तुम्हारे बारे में वो बात कहता जिस से लोग तुम्हारी ख़ाक ऐ पा को बा-तौर ऐ ख़ाक ऐ शिफा ले जाते