Hijab Hmari Shan, Hmari Pahchan aur Hmari Waqar

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Hijab Kyu karti Hain Muslim Auratein?
Islam me Hijab Ka Matlab kya hai?
ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ
Haq Baat Sabke Saath

रसूल अल्लाह ﷺ ने हमारी तरफ़ मुतवज्जा हो कर फ़रमाया: मुहाजिरीन की जमात! पाँच बातें हैं जब तुम उनमें मुबतेला हो जाओगे, और मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ उस बात से कि तुम उसमें मुबतला हो, वो पाँच बातें ये हैं~
1 पहली ये कि जब किसी क़ौम में खुले आम फहश ( फ़िस्क़ ओ फ़ुजूर और ज़िनाकारी ) होने लग जाये, तो उनमें ऐसी बीमारीयां फूट पड़ती हैं जो उनसे पहले के लोगों में ना थीं,
2 दूसरी ये कि जब लोग नाप तौल में कमी करने लग जाते हैं तो वो क़हत (सूखा, अकाल, भुखमरी), मुआशी तंगी और अपने हुक्मरानों की ज़्यादती का शिकार हो जाते हैं,
3 तीसरी ये कि जब लोग अपने मालों की ज़कात अदा नहीं करते हैं तो अल्लाह ताला आसमान से बारिश को रोक देता है, और अगर ज़मीन पर चौपाए ना होते तो आसमान से पानी का एक क़तरा भी ना गिरता,
4 चौथी ये कि जब लोग अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के अहद ओ पैमान को तोड़ देते हैं तो अल्लाह ताला उन पर उनके इलावा लोगों में से किसी दुश्मन को मुसल्लत कर देता है, वो जो कुछ उनके पास होता है छीन लेता है,
5 पांचवीं ये कि जब उनके हुक्मरान अल्लाह ताला की किताब के मुताबिक़ फ़ैसले नहीं करते, और अल्लाह ने जो नाज़िल किया है उसको इख़्तियार नहीं करते, तो अल्लाह ताला उनमें फूट और इख़्तिलाफ़ डाल देता है।
Sunan Ibne majah: jild 5, Kitab Al fitan 36, hadith no. 4019
Grade Sahih
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“05 Jumadal-Aakhir , 1441 Hijri
01 Feb. (Sat.) 2019.”

Topic :- ❝World Hijaab Day (01st February.)
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World Hijab Day ki Shuruwat Nazma Khan ne 1st February 2013 me kiya tha. Jo aaj puri duniya ki 140 Mumalik (Countries) me manaya jata hai.

Hijab aapki pahchan chhupata nahi balki jahir karta hai ki aap Ba-Ijjat Khandan aur ek Gairat mand Maa-Baap ki tarbiyat aafta ek Muslim Khatoon hain.

Deen-E-Islam me Hijaab (Parda) ke talluq se Allah ne Qur’an me kayi maqam par apna huqm najil kiya hai gaur karen.

Irshad-e-Baari Ta-ala ;

❝Aye Imaan walo ! apni Aurato se keh do ki apni nazre bacha kar rahe aur apni sharamgah ki hifazat kare aur apne singaar ko zaahir na kare siway utna jitna khula rehta hai aur dupatte apne seeno par dale rakhe aur apna singaar zaahir na kare siway apne Shauhar par.
{Surat-un-Noor (24) : Ayat No.- 31}

❝Aye Aurton! apne gharo me thehri raho aur Zamaan-e-Jahiliat ki tarah apne aapko dikhati na phiro. Namaz Qayam karo aur zakaat ada karo. Allah aur uske Rasool (ﷺ) ke hukmo ki pabandi karo._
{Surat-ul-Ahzab (33) : Ayat No.- 33}

❝Aye Nabi (S.A.W) ! Aap apne biwiyon, apni betiyon aur momino ki auraton ko kah dijiye ke wah apni Chadarein apne upar latka liya krein is tarah jyada taukah hai ke wah pahchan li jayein aur unhe sataya na jaye aur Allah Ta-aala maaf krne wala, raham karne wala hai”
📖{Surat-ul-Ahzab (33) : Ayat No.- 59}
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Hadees-e-Rasool ﷺ

Abdullah Bin Mash’hud (R.A) se riwayat hai ke Nabi-e-Akram ﷺ ne farmaya : “Aurat (Sarapa) Parda hai, Jab wah bahar nikalti hai to Saitan usko takta hai”.
{Jamiat-Tirmizi : H. No.- 1173 (Sahih)}

Lardke, Lardkiyon Jaisa Banao Singhar Karne Me Masroof Hain, To Lardkiyan, Lardkon Ka Mushabehat ikhtiyar (Copying Style) Me Sar Garam Hain.

Halanke Abdullah Bin Abbas (R.A) Farmate Hain :

_Rasool’Alllah ﷺ ne un Mardon par Lanat bheji hai jo Aurton jaisa chal chalan ikhtiyar kare aur un Auraton par Lanat bheji hai jo Mardon jaisa chal chalan ikhtiyar kare ;

ibne Abbas (R.A) Ne Bayan Kiya Ki Nabi-e-Akram (Sallallahu Alaihi Wasallam) ne Un Mardon Par Lanat Bheji Jo Aurton Jaisa Chal Chalan Ikhtiyaar Karen aur Un Aurton Par Lanat Bheji Jo Mardon Jaisa Chal Chalan Ikhtiyaar Karen._
📚(Sahih Bukhari : H. No.- 5885)

Lekin aise Hazraat Allah Taala Ka Ye Farmaan Bhi Yaad rakhein ;

(وَمَنۡ یُّشَاقِقِ اللّٰہَ وَ رَسُوۡلَہٗ  فَاِنَّ اللّٰہَ شَدِیۡدُ الۡعِقَابِ.)

“Aur Jo Allah aur Uske Rasool Ki Mukhalifat Kare To Allah Taala Aise Logon Ko Sakht Saza Dene Waala Hai”._
{Surat-ul-Anfaal (08): Ayat No.- 13}

Jis tarah Deen-E-Islam me Parda (Hijaab) hai thik waise hi Hindu Mazhab me bhi Parda karne ka huqm hai.
(Rigved – Book No.- 08 : Padh No.- 33 : Mantra No.- 19)
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Some Quotes About Hijaab.

_۩ Aurat se Ilm cheen liya jaye to Naslon me Jehalat Safar Karegi,_
_Aur ilm ke naam par Pardah cheen liya jaye to Be-Hayai Naslon me Safar Karegi.

_۩ Taraqqi aur Bulandi ke liye Be-Haya hona jaroori nahi,_
_Kapde utar kar tarakki milti to aaj Gadhe (Donkeys) Khinjir (Pig) Aur Kutte (Dogs) Atomi-Science-daan (Scientist) hote.

_۩ Parda dil ka hota, Is Jumle (Sentence) ki wajah se aadhi Insaniyat Nangi (Nude) ho gai hai._

_۩ Agar koi aisa kahta hai to fir mujhe wo btaye aapki aur hamari Maa Aayisha (R.A), Fatima (R.A) etc… se jyadah saaf Dil hai kya aapka???
_In Paak auraton ne sabse Paak Mardon {Sahaba (R.A)} se parda kiya tha, Jara sochiye._

Hijab is for body, Haya is for Soul.

“A Women’s Best Jewellery is her Shyness – Hazrat Fatima Bint-e-Prophet Muhammad Peace be Upon Him”.

Hijab is Faith not Fashion.

It’s not just a hijab. It’s our key to Jannah.

Personally, I wear hijab when I go to Masjid to pray, but today I am wearing it for all my Muslim sisters who are suffering and being discriminated to tell them that you are not alone. #Hijab for me is modesty of soul.”
#EmpoweredinHijab
#WorldHijabDay

I feel proud in #hijab. Hijab is my identity of being a Muslim woman.
HIjab is not an ARAB CULTURE; it is the identity of being people of ALLAH.
And I choose to wear it because I feel safe and protected in my HIJAB.”-
Yusra Chishti, India

The Hijab has not been a hindrance for me to see the world, study abroad, and be a vocal woman. Islam empowered me with the #Hijab; It is my identity and I am pleased to share the same identity with my fellow Muslim sisters.”-
Shahina, Egypt

“My Hijab is my dignity, my respect, and my honour, and i will never ever trade it for this temporary world.”

Our mission is to fight discrimination against Muslim women through awareness and education

मुझे आज भी ये #तरक्की अच्छी नहीं लगती,
.
_दुपट्टे के बिना किसी की भी बेटी अच्छी नहीं लगती..

आज की औरतें कई किलो का वजनी ज़ेवर तो पहन सकती है मगर अफ़सोस,_
फूल सा दुपट्टा इन्हे सर पर रखने में बोझ लगता है!

इज्जतदार घराने की एक पहचान ये भी है कि,
उनकी औरतों के सर हमेशा ढके हुए और जिस्म के लिबास ढ़ीले होते हैं.
तालीम जिसके अंदर दाखिल होती है वह सादगी इख्तियार करता है
और जिसके उपर से गुजर जाती है वह मॉडर्न बन जाता है

ऑफिस में काम करने वाली लड़कियों से पूछो की तुम्हें सकून कहाँ मिलता है जवाब होगा घर में।_
_होटलों में काम करने वाली लड़कियों से पूछो तुम्हें आराम  कहाँ मिलता है जवाब होगा घर मे।_
_एयर होस्टेस से पूछो तुम्हें चैन और राहत कहाँ मिलती है तो वह भी घर में।_
_शॉपिंग मॉल में काम करने वाली सेल्स गर्ल से पूछो आराम कहाँ मिलता है तो कहेगी सिम्पल सी बात है घर में।_
_लेकिन यह दो टके बॉयलर फार्मी लिबरल कहते हैं मुसलमानोँ ने औरतों को घर में कैद कर रखा है।
बुलंद रखना निगाह अपनी, ख्याल अपना, मिजाज़ अपना
ना गुमराह हुए कदम कुछ इस तरह रखना वकार अपना
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अरे इन लोगो की हैसियत ही इतनी है के जो औरतें पर्दा करती है उन्हें यह हिजड़े लोग जानवर कह कर मुखातिब करते है तो जरा उनसे कोई पूछे के
क्या जानवर भी कपड़ा पहनता है?
उसे अच्छे बुरे और सही ग़लत की सोच होती है या नहीं?
जानवर के लिए भी एक कमरा, एक टॉयलेट बनाया जाता है?
अगर यह सारी चीजें जानवर जहां चाहता है वहीं करता है, जैसे चाहता है वैसे रहता है, जो चाहता है वह करता है, जब जी में जो आता है वहीं करता है और यह तुम भी चाहते हो और कर भी रहे हो फिर तुम जानवर हुए या जो एक उसूल पे चले वह। बेशर्म लोगो ने पीएचडी, एलएलबी, एम टेक, एम एससी, बी कॉम जैसी डिग्रियां भी ले रखी है, यह लोग तर्क की बात करते है तो तुम्हारा चला कहा जाता है जब यह सारे सवालात किए जाते है? यह लोग कहते है के हम क्या पहनेंगे कहा जाएंगे यह सारी चीजें हम तय करेंगे, मेरी ज़िन्दगी मेरी मर्जी
सही है मना किसने किया या तेरे को किसने कहा है के पर्दा करो या नकाब और हिजाब में रहो, जिस तरह तुम अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जी रही हो उसी तरह दूसरे लोग भी अपने तरीके से जी रहे है, तुम अपना फैसला खुद करती हो मै भी अपना फैसला खुद करती हू, तुम्हारी जिस्म तुम्हारी ज़िन्दगी तुम्हारी मर्जी उसी तरह मेरी ज़िन्दगी मेरी दुनिया और मेरी आखिरत, जब तुम दूसरो के बोलने पे यह कहती हो के मेरी मर्जी चलेगी आप होते कौन है मेरी ज़िन्दगी में दखल देने वाले तो फिर क्या तुम दूसरो (जो पर्दा करती हो)  के बारे में कौन होती हो बोलने वाली?
जिसकी ज़िन्दगी दूसरो की नौकरी करने और गुलामी करने में गुजरी हो, जो खुद नौकरों और गुलामों वाली ज़िन्दगी गुजर रही हो सिर्फ क्यों पैसे के लिए यानी के यह बात ज़ाहिर होता है के इनके पास पैसे की जरूरत है जो खुद गुलामी करके हासिल कर रही है, चलो कल्ह से तुम सिर्फ इधर – उधर घूमो नौकरों वाली कम छोड़ दो मतलब के तुम अपनी जॉब छोड़ दो और जैसे रहती थी पहले वैसे रहो? क्या पहले और बाद के ज़िन्दगी में कुछ फर्क आयि है? अगर अाई तो कौन कौन सी फर्क?
बस तुम दूसरो कि गलामी और खुशामद करके पैसे कमाने को अपनी शान समझती हो, और बेशर्मी का आलम तो यह है के इसी को इस तरह समझा रही है जैसे यह परिस्तान की मल्लिका हो और इनके आगे पीछे चार चार कनिज और खादिमा हो। नहीं बल्कि यह खुद दासिया बनने के लायक है और बनी भी हुई है। नाम बदल देने से काम तो नहीं बदल जाती, कभी किसी शहजादी को देखी हो काम करते हुए? नहीं ना मगर उसके पीछे उसकी जरूरतों को पूरी करने के लिए हमेशा बे शुमार कानिज गुलाम लगे रहते है बस तुम्हारी भी इन्हीं कनीज और गुलामों के इतनी ही हैसियत है इससे ज्यादा कुछ नहीं। यह लोग यहां से सऊदी और दुबई जाया करती है जॉब (नौकर ही नौकरी करता है) करने तो ये लोग जब खुद इतनी शसक्त है, आज़ाद है तो दूसरो के मतलब अपने मैनेजर या बॉस के अंडर में रहकर कैसे काम कर लेती है या फिर वाहा भी इनका अपनी आज़ादी वाला ही उसूल चलता है? अगर नहीं तो फिर यह दूसरो कि बन कर खुद को ज्यादा काबिल बनती है, गुलामों के जैसे ज़िन्दगी बिताने वाले empowered कि बात करते है, सिर्फ इन्हें पैसे की जरूरत पड़ती और पैसे के लिए नौकरी करते है लोग, अगर नहीं तो फिर सऊदी अरबिया की औरतें यहां नौकरी करने क्यों नहीं आती है जबकि वाहा शरीयत नाफिज है और वह इसलाम के उसूलों पे चलती है, और यह लोग आज़ाद है, शसक्त है तो यह लोग उनकी कनीज बनने को तैयार क्यों है?
मुझे मालूम है जन्नत की हकीकत
मगर दिल को खुश रखने को गालिब ख्याल अच्छा है।
ज़ाहिर सी बात है के इंसान की फितरत है यह जब वह किसी मुसीबत या तकलीफ में रहता है तो वह यही चाहता है के मै जिन हालात में हू उसमे और लोग शामिल हो जाए यानि वह अपने जैसे लोगो की तादाद बढ़ाना चाहते है और उसके लिए अपने तरीके  को हर किसी के सामने अच्छा ही दिखाना पड़ता है ताकि लोग उससे मूताशिर हो।
चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात
यहां सब आज़ाद है जिसे जो चाहे करे, मगर मै अगर अपनी मर्जी से पर्दा करती हूं तो फिर तकलीफ क्यों?
हमारा जीना हमारा मरना सिर्फ अल्लाह के लिए, मुझे दुनिया का सबसे आला अखलाक वाला रहनुमा मिला है , और मेरी ज़िन्दगी में सबसे ज्यादा किसी की अहमियत है तो वह मेरे आका मोहम्मद ﷺ है, मै अपनी ख्वाहिश को भी तर्क कर सकती हू नबी के फरमान के सामने,
हम अपना मायार ज़माने से जुदा रखते है
हम तो महबूब भी महबूब – ए – खुदा रखते है।
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بسم الله الرحمن الرحيم
رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم کی اطاعت !
رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: جس نے میری اطاعت کی اس نے اللہ کی اطاعت کی، اور جس نے میری نافرمانی کی اس نے اللہ کی نافرمانی کی ۱؎۔
«سنــن ابــن ماجہ -3»
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#World_Hijaab_Day.
#01st_February .
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Wa Akhiru Dawana Anilhamdulillahe Rabbil A’lameen !!!_
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Appeal:-* Share To All Friends, Family Relatives And Groups Etc & Get Best Rewards From ✺Allah (S.W.T)
Jazak Allahu Khairan
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Agar isme koi galti ho gyi ho to jarur Islah krein, Jazak Allahu Khairan.

Har Baat Daleel ke Saath

Hmari Dua hai ke Allah Muslim Mard Aur Auraton ko Ba hya bnaye. Aameen

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