नफ़्स-ए-रसूल

मौलाना अहमद रज़ा खान बरेलवी के वालिद, हज़रत अल्लामा नकी अली खान (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपनी किताब में आयते मुबाहिला की तफसीर मे तहरीर फ़रमाया है कि हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) रसूलुल्लाह ﷺ का ‘नफ़्स’ हैं।

आयत-ए-मुबाहिला में मौजूद लफ़्ज़ ﴿أَنْفُسَنَا وَأَنْفُسَكُمْ﴾ में “नफ़्स” से मुराद हज़रत अली करमल्लाहु वज्हहु हैं।

यह वही मुक़ाम है जहाँ अल्लामा नकी अली खान (रहमतुल्लाह अलैह) ने हज़रत अली (रज़ि.) को “नफ़्स-ए-रसूल” (यानी नबी-ए-करीम ﷺ का नफ़्स) क़रार दिया है—जैसा कि आयत-ए-मुबाहिला (सूरह आले इमरान, आयत 61) में इसका मफ़हूम वाज़ेह है।

📕 तफ़सीर अलम नशरा, सफा: 88
मुसन्निफ़: हज़रत मौलाना नकी अली खान (रहमतुल्लाह अलैह)


नोट: हम अहले-सुन्नत वल जमाआत का अकीदा है की  रसूलल्लाह ﷺ के बाल मुबारक भी सबसे अफजल है, और
मौला अली तो रसूलल्लाह ﷺ की नफ्स है भाला उम्मत मे उनसे अफजल कोन हो सकता.

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