मोमिन और मोमिना के सरदार

यौम ए गदीर की मुबारकबाद पेश करना हजरत उमर इब्ने खत्ताब (रजिअल्लाह अन्हो) से साबित है.👇

रसूलल्लाह ﷺ ने फरमाया : तुम्हें मालूम नहीं है कि मैं मोमिनों की जानों से ज़्यादा उनके लिए बेहतर हूँ। लोगों ने कहा, ऐसा ही है। रसूलल्लाह ﷺ ने हज़रत अली का हाथ पकड़े हुए उनसे कहा कि ‘मैं जिसका सरदार हूँ, उसके ये अली सरदार हैं। ऐ अल्लाह! तू उसको दोस्त रख जो इसको दोस्त रखे और तू उससे दुश्मनी रख जो इससे दुश्मनी रखे।’

रिवायत का बयान है कि इसके बाद हज़रत उमर बिन खत्ताब (रज़ि.) मिले और कहने लगे: ‘ऐ अबु तालिब के बेटे! तुम्हें मुबारक हो। आप तो हर मोमिन और मोमिना के सरदार हो गए।’

📚 यनाबीउल मवद्दत, सफाह : 54
मुस्न्नीफ : अल्लामा जलील शेख सुलेमान हुसैनी बलखी कन्दूजी हनफी
सुन्नी मुफ्ती-ए-आज़म कुस्तुनतुनिया