
हजरत अब्दुल्लाह इब्न उमर रजियल्लाहु अन्हुमा से मर्वी है कि रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : मेरी उम्मत में सबसे पहले मेरी शफाअत अपने अहले – बैत के लिये होगी।.
📗 (सवाइके मुहर्रका सफा : 778)
हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : क्यामत के रोज चार किस्म के आदमियों की शफाअत करूंगा।
१, जो मेरी आल व औलाद की इज्जत करेगा,
२, जो उनकी जरुरियात को पूरा करेगा,
३, जब वह किसी काम में परेशान हो जायें तो उनके उमूर को पाए तकमील तक पहुंचाने के लिए सरगरमे अमल हो जाएय और
४ जो अपने दिल और जुबान से उनका चाहने वाला हो।
📗 (मनाकिबे अहले – बैत सफा : 70 , सवाइके मुहर्रका सफा : 692 व 589)

