The Tallest Dome in the Deccan and India

The Tallest Dome in the Deccan and India

The tomb of Hazrat Syed Shah Raju Husaini Bandanawazi, the Great Chishti Saint buried in Hyderabad, India.

The tomb of Hazrat Syed Shah Raju Husaini Bandanawazi sutuated in Hyderabad is the tallest tomb in Deccan and India and was built by Sultan Abul Hasan Qutb Shah Hamadani, the last monarch of the Qutb Shahi Period in 1686.

Sultan Abul Hasan Qutb Shah Hamadani was the Mureed (Disciple) of Hazrat Syed Shah Raju Husaini Bandanawazi and remained in the Khanqah of Hazrat Syed Shah Raju Husaini Bandanawazi from the age of 14 to 28 years after his migration from Hamadan, Iran to Hyderabad Deccan at a young age of 14 years.

Soon after his arrival in Hyderabad Deccan, he became the Mureed of Hazrat Syed Shah Raju Husaini Bandanawazi and remained in the Khanqah of Hazrat Syed Shah Raju Husaini for a period of 14 years.

Hazrat Syed Shah Raju Husaini used to address him as Tana Shah (The Young King) and his Master and Murshid prophesied that his disciple Abul Hasan Hamadani will become the Sultan of the powerful Qutb Shahi Kingdom in Deccan.

At the age of 28 years he became the son-in-law of Sultan Abdullah Qutb Shah who did not have son. Sultan Abdullah Qutb Shah declared his son-in-law Abul Hasan Hamadani as his Crown Prince and soon after he became the Monarch of the Qutb Shahi Kingdom at the age of 28 years after passing away of Sultan Abdullah Qutb Shah.

He was the last Monarch of the Qutb Shahi Period and ruled Deccan for a period of 14 years. He was ascetic and mystic Sultan and he twice toured all the cities, towns and villages in his domain in Deccan to resolve the problems of the general public during his 14 years rule as the most benevolent and tolerant ruler of Deccan.

As a mystic and ascetic Sultan he created harmony and brotherhood among his subjects.

The powerful Mughal Emperor from North India Aurangzeb invaded the domains of Qutb Shahi dynasty and in 1686 laid seige to Golconda Fort.

Sultan Abul Hasan Qutb Shah and his army under the military command of the famous Iranian army General Abdul Razzaq Lari belonging to Lar City near Shiraz, Iran defended the historical fort city of Golconda in Hyderabad for a period of nine months and inflicted heavy casualties to the Imperial Mughal army from North India.

The Imperialist Mughal army by bribing the gate keeper of Fatah Darwaza entered Golconda at midnight and conquered the Golconda Fort in 1687.

Sultan Abul Hasan Qutb Shah, the Great Last Monarch of the Qutb Shahi Kingdom was arrested and imprisoned in the Aurangabad Fort by the Imperial Mughal army from North India.

He remained in the Aurangabad prison for a period of 14 years and devoted his life to worship and supplication. He died in Aurangabad prison at the age of 56 years and was buried in Aurangabad Fort.

The Muslims and Non-Muslims in Deccan visit the grave of this benevolent and tolerant King to pay tributes to this great ruler of Deccan.

बू अ’ली शाह क़लन्दर

बू अ’ली शाह क़लन्दर
(1209 – 1324)
शैख़ शरफ़ुद्दीन बू-अ’ली क़लंदर, साहिब जज़्ब-ओ-साहिब-ए-करामत थे। औलिया-ए-नामदार में से हैं। आपकी विलादत 605 हिज्री मुताबिक़ 1209 ई’स्वी को पानीपत में हुई। आप इमाम-ए-आ’ज़म अबू-हनीफ़ा की औलाद में से हैं। ये भी कहा जाता है कि आप शैख़ जमालुद्दीन हांस्वी के ख़ाला-ज़ाद भाई थे। आप के वालिद का नाम फ़ख़्रुद्दीन और वालिदा का नाम बी-बी फ़ातिमा है। बा’ज़ का खयाल है कि बी-बी हाफ़िज़ जमाल है।
बू-अ’ली क़लंदर कहलाने की वज्ह-ए-तस्मिया ये है कि हज़रत मौला अ’ली कर्मुल्लाह वज्हहु ने जब आप को दरिया से बाहर निकाला तो आप उसी वक़्त से मस्त-अलस्त हो गए और उसी दिन से शरफ़ुद्दीन बू-अ’ली क़लंदर कहलाने लगे।

आप को रहबर की तलाश हुई। बा’ज़ का ख़याल है कि आप मुरीद-ओ-ख़लीफ़ा ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी और शैख़ शहाबुद्दीन के आ’शिक़ थे। ये भी कहा जाता है कि आप मुरीद-ओ-ख़लीफ़ा ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी क् थे। बा’ज़ का ख़्याल है कि आप मुरीद-ओ-ख़लीफ़ा शैख़ नज्मुद्दीन क़लंदर के थे। बा’ज़ के नज़्दीक आप मुरीद-ओ- ख़लीफ़ा शैख़ शहाबुद्दीन आ’शिक़-ए- ख़ुदा के थे जो मुरीद-ओ-ख़लीफ़ा शैख़ इमामुद्दीन अब्दाल के थे और वो मुरीद-ओ-ख़लीफ़ा ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी के थे।
आप के मक्तूबात का एक मजमूआ’ ब-नाम इख़्तियारुद्दीन किताबी शक्ल में सामने आया। ये मक्तूबात तौहीद के मज़ामीन का उ’म्दा नमूना हैं। मस्नवी बू-अ’ली क़लंदर अगर्चे मुख़्तसर है मगर रुमूज़-ए-तौहीद और मआ’रिफ़ से माला-माल है। आप के दूसरे अश्आ’र रुबाइ’यात, ग़ज़ल और दूसरी अस्नाफ़ पर मुश्तमिल हैं।
दीवान-ए-शरफ़ुद्दीन बू-अ’ली क़लंदर फ़ारसी में एक अ’ज़ीम तसव्वुफ़ की किताब है। आपने हज़रत अ’ली के बारे फ़ारसी में मशहूर शे’र लिखा
हैदरीयम क़लंदरम मस्तम
बंदा-ए-मुर्तज़ा अ’ली हस्तम
पेशवा-ए-तमाम रा न-दानम
कि सग-ए-कू-ए-शे’र-ए-यज़दानम

हज़रत बू-अ’ली शाह क़लंदर के मुरीद-ए-मजाज़ हज़रत मख़दूम सय्यद लतीफ़ुद्दीन दानिश-मंद बड़े पाया के बुज़ुर्ग हुए जिनका मज़ार मोड़ा तालाब बिहार शरीफ़ में मरजा’-ए-ख़लाएक़ है।
मज़ार-ए-पुर अनवार पानीपत में मरजा’-ए-ख़लाएक़ है।
شیخ شرف الدین بوعلی قلندر، صاحب جذب وصاحب کرامت تھے۔ اولیائےنامدارمیں سے ہیں۔ آپ کی ولادت 605ھ مطابق 1209ء کو پانی پت میں ہوئی۔ آپ امام اعظم ابوحنیفہ کی اولادمیں سےہیں۔ یہ بھی کہاجاتاہے کہ آپ شیخ جمال الدین ہانسوی کےخالہ زادبھائی تھے۔ آپ کےوالد کانام فخرالدین اور والدہ کانام بی بی فاطمہ ہے۔بعض کاخیال ہے کہ بی بی حافظ جمال ہے۔
بوعلی قلندرکہلانے کی وجہ تسمیہ یہ ہے کہ حضرت مولیٰ علی کرم اللہ وجہہ نےجب آپ کودریاسےباہرنکالا توآپ اسی وقت سےمست الست ہوگئے اور اسی دن سے شرف الدین بوعلی قلندرکہلانےلگے۔

آپ کورہبرکی تلاش ہوئی ۔بعض کاخیال ہے کہ آپ مریدوخلیفہ خواجہ قطب الدین بختیارکاکی اور شیخ شہاب الدین کےعاشق تھے۔ یہ بھی کہاجاتاہےکہ آپ مریدوخلیفہ خواجہ قطب الدین بختیارکاکی کےتھے۔ بعض کاخیال ہےکہ آپ مریدوخلیفہ شیخ نجم الدین قلندرکےتھے ۔بعض کےنزدیک آپ مریدوخلیفہ شیخ شہاب الدین عاشق خداکےتھے جومریدوخلیفہ شیخ امام الدین ابدال کے تھےاوروہ مریدوخلیفہ خواجہ قطب الدین بختیارکاکی کےتھے۔
ﺁﭖ ﮐﮯ ﻣﮑﺘﻮﺑﺎﺕ ﮐﺎ ﺍﯾﮏ ﻣﺠﻤﻮﻋﮧ ﺑﻨﺎﻡ ﺍﺧﺘﯿﺎﺭﺍﻟﺪﯾﻦ ﮐﺘﺎﺑﯽ ﺷﮑﻞ ﻣﯿﮟ ﺳﺎﻣﻨﮯ ﺁﯾﺎ۔ ﯾﮧ ﻣﮑﺘﻮﺑﺎﺕ ﺗﻮﺣﯿﺪ ﮐﮯ ﻣﻀﺎﻣﯿﻦ ﮐﺎ ﻋﻤﺪﮦ ﻧﻤﻮﻧﮧ ﮨﯿﮟ۔ ﻣﺜﻨﻮﯼ ﺑﻮ ﻋﻠﯽ ﻗﻠﻨﺪﺭ ﺍﮔﺮﭼﮧ ﻣﺨﺘﺼﺮ ﮨﮯ ﻣﮕﺮ ﺭﻣﻮﺯ ﺗﻮﺣﯿﺪ اور ﻣﻌﺎﺭﻑ ﺳﮯ ﻣﺎﻻ ﻣﺎﻝ ﮨﮯ۔ ﺁﭖ ﮐﮯ ﺩﻭﺳﺮﮮ ﺍﺷﻌﺎﺭ ﺭﺑﺎﻋﯿﺎﺕ، ﻏﺰﻝ ﺍﻭر ﺩﻭﺳﺮی اصناف پر مشتمل ہیں۔
دیوان شرف الدین بو علی قلندر فارسی میں ایک عظیم تصوف کی کتاب ہے۔ آپ نے حضرت علی کے بارے فارسی میں مشہور شعر لکھا

حیدریم قلندرم مستم
بندہ مرتضٰی علی ہستم
پیشوائے تمام را ندانم
کہ سگِ کوئے شیرِ یزدانم

حضرت بو علی شاہ قلندر کے مرید مجاز حضرت مخدوم سید لطیف الدین دانشمند بڑے پایہ کے بزرگ ہوئے جن کا مزار موڑہ تالاب بہار شریف میں مرجع خلائق ہے۔

مزار پرانوار پانی پت میں مرجع خلائق ہے۔

Qaul e Ghaus e Azam

#मुहब्बत क्याहै?

एक दफा हज़रत सय्यिदिना शैख मुहय्युद्दीन अब्दुल क़ादिर जीलानी قدس سرہ النورانی से दरियाफ्त किया गया कि:
“मुहब्बत क्या है?”
तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने फ़रमाया:
“मुहब्बत” महबूब की तरफ से दिल में एक तशवीश(बेकरारी) होती है फिर दुनियां उसके सामने ऐसी होती है जैसे अंगूठी का हल्क़ा या छोटा सा हुजूम, मुहब्बत एक नशा है जो होश खत्म कर देता है,आशिक़ ऐसे मह्व हैं कि अपने महबूब के मुशाहिदा के सिवा किसी चीज़ का इन्हे होश नहीं,वो ऐसे बीमार हैं कि अपने मतलूब (यानी महबूब)को देखे बगैर तन्दुरुस्त नहीं होते,वो अपने खालिक़ की मुहब्बत के अलावा कुछ नहीं जानते और उसके ज़िक्र के सिवा किसी चीज़ की ख्वाहिश नहीं रखते-“

*#ख़ौफ_क्या_है?*

हज़रत महबूबे सुब्हानी,क़ुत्बे रब्बानी शैख अब्दुल क़ादिर जीलानीرحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से खौफ के मुताल्लिक़ दरियाफ्त किया गया तो आपرحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने फ़रमाया कि:
“उसकी बहुत सी क़िस्में हैं (1)खौफ…ये गुनाहगारों को होता है,(2)रुहबा…ये आबिदीन को होता है,(3)खशियत….ये ओलमा को होती है-“*
नीज़ इरशाद फ़रमाया:
“गुनाहगार का खौफ अज़ाब से,आबिद का खौफ इबादत के सवाब के ज़ाया होने से और आलिम का खौफ ताआत में शिर्के खफी से होता है-“

*#वज्द_क्या_है?*

हज़रत सय्यिदिना शैख मुहय्युद्दीन अब्दुल क़ादिर जीलानी क़ुत्बे रब्बानीرحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से वज्द के बारे में दरियाफ्त किया गया तो आपرحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने इरशाद फ़रमाया:
“रूहुल्लाहعزوجل के ज़िक्र की हलावत में मुस्तग़रक़ हो जाए और हक़ तआला के लिए सच्चे तौर पर गैर की मुहब्बत दिल से निकाल दे-“


(بهجة الاسرار ) *#वफा_क्या_है?*

हज़रत शैख मुहय्युद्दीन अब्दुल क़ादिर जीलानी قدس سرہ النورانی से दरियाफ्त किया गया कि:
“वफा क्या है ?”
तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने इरशाद फ़रमाया:
“वफा ये है कि अल्लाह عزوجل की हराम कर्दा चीज़ों में अल्लाह عزوجل के हुक़ूक़ की रिआयत करते हुए ना तो दिल में इनके वसवसों पर ध्यान दे और ना ही इन पर नज़र डाले और अल्लाह عزوجل की हुदूद की अपने क़ौल और फअल से हिफाज़त करे,उसकी रज़ा वाले कामों की तरफ ज़ाहिर व बातिन से पूरे तौर पर जल्दी की जाए-“
?*

(بهجة الاسرار) *#सिद्क़_क्या_है

हज़रत सय्यिदिना शैख मुहय्युद्दीन अब्दुल कादिर जीलानी क़ुत्बे रब्बानी رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से सिद्क़ के बारे में दरियाफ्त किया गया तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने फ़रमाया कि:
“(1)….अक़्वाल में सिद्क़ तो ये है कि दिल की मुवाफिक़त क़ौल के साथ अपने वक़्त में हो-“
“(2)….आमाल में सिद्क़ ये है कि आमाल इस तसव्वुर के साथ बजा कि अल्लाहعزوجل उसको देख रहा है और खुद को भूल जाए-“
(المرجع السابق، ص۲۳۵)

(تفريح الخاطر، ص۱۸) *#सब्र_की_हक़ीक़त*

हज़रत सय्यिदिना शैख अब्दुल क़ादिर जीलानी क़ुत्बे रब्बानी गौसे समदानी رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से सब्र के मुताल्लिक़ दरियाफ्त किया गया तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने फ़रमाया कि:
“बला ओ मुसीबत के वक़्त अल्लाह عزوجل के साथ हुस्ने अदब रखे और उसके फैसलों के आगे सरे तस्लीम खम कर दे-“
(بهجة الاسرار، ذکرشي من اجوبته ممايدل علي قدم راسخ،)*

*#शुक्र_क्या_है?

सय्यिदिना शैख मुहय्युद्दीन अब्दुल क़ादिर जीलानी رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से शुक्र के बारे में दरियाफ्त किया गया तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने इरशाद फ़रमाया कि:
“शुक्र की हक़ीक़त ये है कि आजिज़ी करते हुए नेमत देने वाले की नेमत का इक़रार हो और इसी तरह आजिज़ी करते हुए अल्लाहعزوجل के एहसान को माने और ये समझ ले कि वो शुक्र अदा करने से आजिज़ है-“
(بهجة الاسرار، ذکرشي من اجوبته ممايدل علي قدم راسخ، ص۲۳۴) *#*

दुनियां_को_दिल_से_निकाल_दो

हुज़ूर सय्यिदिना गौसे आज़म शैख अब्दुल क़ादिर رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से दुनियां के बारे में पूछा गया तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने फ़रमाया कि:
“दुनियां को अपने दिल से मुकम्मल तौर पर निकाल दे फिर वो तुझे ज़रर यानी नुक़सान नहीं पहुंचाएगी-“

*#तवक्कुल_की_हक़ीक़त*

हज़रत महबूबे सुब्हानी क़ुत्बे रब्बानी सय्यिदिना शैख अब्दुल क़ादिर जीलानी رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से तवक्कुल के बारे में दरियाफ्त किया गया तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने इरशाद फ़रमाया कि:
“दिल अल्लाह عزوجل की तरफ लगा रहे और उसके गैर से अलग रहे-“
नीज़ इरशाद फ़रमाया कि:
“तवक्कुल ये है कि जिन चीज़ों पर क़ुदरत हासिल है उनके पोशीदा राज़ को मारिफत की आंख से झांकना और “मज़हबे मारिफत” में दिल के यक़ीन की हक़ीक़त का नाम एतिक़ाद है क्यूंकि वो लाज़मी उमूर हैं इनमें कोई एतराज़ करने वाला नुक़्स नहीं निकाल सकता-“

*#तवक्कुल_और_इख्लास*

हज़रत सय्यिदिना शैख अब्दुल क़ादिर जीलानी हुज़ूर गौसे पाक رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ से दरियाफ्त किया गया कि:
“तवक्कुल क्या है?”
तो आप رحمۃ اللہ تعالیٰ علیہ ने फ़रमाया कि:
“तवक्कुल की हक़ीक़त इख्लास की हक़ीक़त की तरह है और इख्लास की हक़ीक़त ये है कि कोई भी अमल,बदला हासिल करने के लिए ना करे और ऐसा ही तवक्कुल है कि अपनी हिम्मत को जमा करके सुकून से अपने रब عزوجل की तरफ निकल जाए…!”
(المرجع السابق، ص۲۳۳

Halat-e-Namaz me Maula Ali Alaihissalam ka Khayal

Halat-e-Namaz me Maula Ali Alaihissalam ka Khayal, Sunnat-e-Tajdar-e-Kainat hai! SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam

Hazrat Abdullah ibne Nujaiyy RadiAllahu Anhu farmate hain ke Hazrat Maula Ali Alaihissalam ne farmaya ke Mai din raat me 2 dafa Huzoor Nabi-e-Akram SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ki Bargah me Haazir hota. Jab Mai Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ki Khidmat-e-Aqdas me raat ke waqt haazir hota (aur Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam Namaz ada farma rahe hote) to Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam Mujhe ijazat inayat farmane ke liye Khaanste.
Is Hadees ko Imam Nasai aur Ibne Majjah ne riwayat kiya hai.

Hazrat Abdullah ibne Nujaiyy RadiAllahu Anhu bayan karte hain ke Sayyeduna Maula Ali Alaihissalam ne farmaya: Sehri ke waqt ek sa’at aisi thi ke jisme Mujhe Huzoor Nabi-e-Akram SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ki Bargah me Haazir hona nasib hota. Pas agar Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam Namaz padhne keliye Khade hote to Mujhe batane keliye Tasbeeh farmate pas ye Mere liye ijazat hoti aur agar Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam Namaz na padh rahe hote to Mujhe ijazat inayat farma dete.
Is Hadees ko Imam Ahmed bin Hanbal ne riwayat kiya hai.

  1. Nasayi, Sunan, 3/12, #1212
    Ibne Majjah, Sunan, 2/1222, #3708
    Nasayi, Sunan al Kubra, 1/360, #1136
    Ibne Abi Shaybah, Musannaf, 5/242, #25676
  2. Ahmed bin Hanbal, Musand, 1/77, #57
    Dr. Tahir ul Qadri, Kanzul Mattalib fee Manaqib Ali ibne Abi Talib Alaihi-Mussalam

Apni Namaz me bhi Kainat ka Tajdar Jinko na bhuley, Usse tumhe taklif hai? Kya mu dikhaoge marne ke baad Allah aur Rasool ko! SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam.