وعندي لكم آل النبي مودة سَلَبْتُمْ بها قلبي وصارَله عِنْدُ أترجونَ من أبناء هندٍ مودة وَقَدْ أرضَعَتْهُمْ دَرَّ بِغضَتِها هِنْدُ وأَدْعُو سِفاهاً غيرَآلِكَ سادتي وهل أنا إنْ وُفقتُ إلا لهم عبدُ
اے آلِ نبیﷺمیرے پاس آپکی محبت ہی ہے اس محبت کے ساتھ آپ نےمیرے دل کو سلب کرلیا کہ وہ جسم سے جدا ہوگیا ہے ان کے لئے۔کیا تم ہندہ (ہند بنت عتبہ ابن ربیعہ زوجہ ابوسفیان) کےبیٹوں سے محبت کی امید رکھتے ہو جب کہ آلِ نبیﷺ کی مخالفت کے لئے ہندہ نے ان کو دودھ پلایا۔آپ ﷺ کی آل جو میرے سردار ہیں کےعلاوہ ان کو میں بے وقوف کہہ کے بلاتا ہوں جب میں آل کی طرف کھڑا ہوں تو صرف غلام ہی ہوں۔
ديوان البوصيري/إلهي عَلَى كلِّ الأمورِ لَكَ الحمْدُإلهي عَلَى كلِّ الأمورِ لَكَ الحمْدُ/ رقم القصيدة ۱۳۷۳۱ شرف الدين أبو عبد الله محمد بن سعيد بن حماد بن عبد الله الصنهاجي البوصيري المصري ؒ(شکریہ بتعاون وقاص علی قلندری قادری بھائی و قاسم علی بھائی عکس اشعار)
सलातीन ए बनु उमैय्या ने फर्ज़न्दाने रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम को क़त्ल किया और “हज़रत अली, हज़रत इमामे हसन, और हज़रत इमामे हुसैन अलैहमुस्सलाम पर (माज़अल्लाह) लानत भेजते थे” और रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम के अहलेबैत पर क़िस्म क़िस्म के मज़ालीम (ज़ुल्मो सितम) ढाये “मैं उनको दुश्मन जनता हूँ और उनको मुसलमान नही कहता बल्कि मुनाफ़िक़ो में शुमार करता हूँ”
20th_Muharram_Ul_Haram_61st_Hijri 20th October 680
Khanwada E Rasoolullah #Ahle_Bait_E_Rasoolullah Alaihimusalam Ki Kufa Se Shaam Rawangi 💔😭
Asiraane Karbala Ahle Bait Athar (عليهم الصلاة والسلام) Kee Rawaangi e Mulk Shaam Yazeed Bin Mu’awiyah (Lanatullah) Ke Kehne Par :
Ubaydullah Ibn Ziyad (Lanatullah) Ne Zahr Bin Qays Ko Bulaaya Aur Us Ke Saaath Hazrat Imam Hussain (عليه السلام) Aur Aap Ke Saathiyo’n Ke Mubaarak Saro’n Ko Yazeed (La’een) Ke Paas Bheja. Kyun Ki Yazeed bin Mu’awiyah (Lanatullah) Kee Taraf Se Ek Qaasid Ubaydullah Ibn Ziyaad (Lanatullah) Ke Liye Yeh Hukm Le Kar Aaya Tha Ki Woh Imam Husssin (عليه السلام) Ka Saara Saaz-o Saamaan Aur Un Ke Ahle Bait (عليهم الصلاة والسلام) Ke Baqiyya Afraad Ko Us Ke Paas Bhej De.
– References [Ibn Jawzi Fi Al-Radd ‘Ala Al-Muta’assib Al-‘Anid Al-Mani’ Min Dhammi Yazid,/56,
Ibn Athir Fi Al-Kamil Fi Al-Tarikh, 04/83.]
Imam Hussain (عليه السلام) Ka Sar Neza Par Rakh Kar Koofa Kee Tamaam Galiyo’n Aur Koocho’n Me Tash’hir Kara Ke Agle Din Maa Un Ke Ham-Raahiyo’n Ke Saro’n Ke Zahr Bin Qays Ke Saath Shaam Kee Taraf Rawaana Kiya Tha, Un Dono’n Me Se Jo Rahe Ho’n Un Ke Ham-Raah Ek Dasta Fauj Ka Bhi Tha.
Aurte’n Oonto’n Par Baghair Mehmal (Kajaawah, Kaathi) Ke Sawaar Karaa’i Ga’i’n Aur Imam Zain ul Abideen (عليه السلام) Ke Haath Paa’o’n Aur Gardan Me Zanjir Daal Dee Ga’i, Aap Ne Na To Hath-Kadi, Bedi Aur Tauq Pehnaate Hu’e Kuchh Bole Aur Na Asna’-e Raah Me Kuchh Un Logo’n Se Ham-Kalaam Hu’e Yaha’n Tak Ki Shaam Pahonch Ga’e.
– Reference
[Ibn Khaldoon Fi Tarikh Ibn Khaldoon, 02/546.]
Yazidi Kafir Mal’uno Ne Ahle Bait Paak Ko Kufa Se Shaam Taweel Raste Se Le Gaye Is Liye Ke Agar Ye Mal’un Kufa Se Shaam Shidhe Raste Se Jaate To Unhe Ye Dar Tha Ke Is Raste Mai Aane Wale Gaon Wa Shaher Ke Log Kahi Un Par Hamla Na Kar De Kyunke Us Raaste Mai Aane Wale Kuchh Shaher Aur Gaon Muhibban E Ahle Bait Ke The Wallahu Aalam Wa Rasooluhu.
Kufa Se Shaam Ke Raste Mai Aane Wale Maqam Gaon Wa Shaher Ke Naam :
क़ुरान में सूरह बक़र को बक़र यानि गाय वाली सूरह इसलिए कहा जाता है कि इसमें हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और एक गाय का ज़बरदस्त वाक़िया है,जो कि आयत नं0 67 से 73 तक है,आईये उसकी तफसील जानते हैं
बनी इस्राईल में एक नेक शख्स था जिसका एक छोटा सा बेटा था,उस शख्स ने एक बछिया बड़ी मुहब्बत से पाली थी,जब उसकी मौत का वक़्त करीब आया तो वो बछिया को लेकर एक जंगल में गया और उसको मौला के सुपुर्द करके वहीं छोड़ आया कि जब मेरा बेटा जवान हो जाए तो ये उसके काम आए,वो तो मर गया और गाय जंगल में और उसका बेटा मां के पास परवरिश पाता रहा,लड़का भी नेक और परहेज़गार था जब वो बड़ा हो गया तो उसकी मां ने उससे कहा कि तेरे बाप ने उस जंगल में तेरे लिए एक गाय छोड़ी है और उसकी निशानियां बताई तू जाकर उसे ले आ,लड़का गया और पहचान कर गाय ले आया,अब उसकी मां ने कहा कि इसे बाज़ार ले जा और 3 अशर्फियों से कम में हरगिज़ न बेचना और बेचने से पहले मुझे ज़रूर बता देना,लड़का गया और उसे एक खरीदार मिला उसने कीमत पूछी इसने 3 अशर्फी बताया और मां की इजाज़त शर्त है उसने कहा कि 6 दूंगा मगर मां से ना पूछ,लड़के ने नहीं बेचा और वापस आ गया,सारा माजरा मां से कहा तो मां ने कहा कि 6 अशर्फी में बेच देना मगर सौदा होने से पहले मुझसे पूछ लेना,लड़का फिर बाज़ार गया फिर वही गाहक मिला अब उसने 12 अशर्फियां देने को कहा मगर मां से ना पूछे,लड़का फिर वापस आ गया,उसकी मां अक़लमंद थी वो समझ गयी कि ये गाहक कोई आम आदमी नहीं बल्कि फ़रिश्ता है जो इम्तिहान लेने की गर्ज़ से आया है,उसने लड़के को फिर बाज़ार भेजा और कहा कि जाकर उनसे पूछ कि हम गाय बेचें कि रोके रहें,लड़का गया तो उस फ़रिश्ते ने कहा कि अपनी मां से कहना कि अभी जल्दी न करे कि अनक़रीब बनी इस्राईल को इस गाय की सख्त ज़रूरत पड़ने वाली है और जब वो इसको खरीदना चाहें तो कीमत ये तय करना कि पूरी खाल को सोने की अशर्फियों से भर दिया जाए,ये कहकर वो ग़ायब हो गया लड़का घर को वापस आ गया*_उधर बनी इस्राईल में आबील या आमील नाम का एक शख्स था जिसकी कोई औलाद नहीं थी,उसके चचाज़ाद भाई ने जायदाद की लालच में आकर उसका क़त्ल कर दिया और उसकी लाश को दूसरी बस्ती में फेंक आया,और दूसरे दिन खुद ही उसके खून का मुद्दई बनकर बस्ती वालों पर उसके चचा के क़त्ल का मुक़दमा करके उनसे उसके खून का बदला यानि खून बहा लेना चाहा,वहां के लोगों से जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने पूछा तो उन लोगों ने साफ़ इनकार कर दिया और आपसे दुआ की दरख्वास्त की कि आपही कुछ हल फरमायें,आपने बारगाहे खुदावन्दी में दुआ की तो मौला फरमाता है कि ऐ मूसा इनसे कह कि एक गाय ज़बह करके उसका गोश्त इस मक़तूल की लाश पर मारें तो लाश खुद ही ज़िंदा होकर अपने क़ातिल का नाम बताएगी,आपने बनी इस्राईल को रब का ये फरमान सुना दिया जिस पर वो कहने लगे कि आप हमसे मज़ाक कर रहे हैं हम आपसे क़ातिल का सुराग चाह रहे हैं और आप हमें गाय ज़बह करने का हुक्म दे रहे हैं इस पर आप फरमाते हैं कि मेरे रब ने मुझे ऐसा ही हुक्म दिया है तब वो सोचने लगे की शायद ये गाय कोई ख़ास गाय होगी और उसकी निशानियां पूछने लगे तो आप फरमाते हैं कि वो ना तो बिलकुल बूढ़ी हो और ना जवान बल्कि बीच की उम्र की हो,इससे बनी इस्राईल को तशफ्फी नहीं हुई और उन्होंने उसका रंग पूछा तो आप फरमाते हैं कि उसका रंग ज़र्द है जो देखने वालों को भला मालूम होता है इस पर भी उनकी समझ में नहीं आया और जानकारी चाही तो आप फरमाते हैं कि ना तो उससे खेती सैराब की गयी हो और ना ही उसने हल चलाया हो,और ना उसके जिस्म पर कोई दाग धब्बा हो तब बनी इस्राईल कहते हैं कि अब आपने पूरी बात बतायी अब हम ऐसी गाय को ढूंढ़ लेंगे,और बिल आखिर ढूंढ़ते ढूंढ़ते वो उसी लड़के के पास पहुंच गए जब उन्होंने गाय खरीदना चाहा तो उसने वही कीमत बता दी जो फ़रिश्ते ने कही थी,चूंकि बनी इस्राईल पर इलज़ाम आयद था और उनको इस इल्ज़ाम से बचना था तो उन्होंने इतनी भारी कीमत पर वो गाय खरीद ली और उसे ज़बह करके उसका गोश्त लाश पर मारा तो बहुकमे खुदावन्दी लाश ने फ़ौरन अपने क़ातिल यानि चचाज़ाद भाई का नाम बता दिया,अब उसके क़त्ल के जुर्म में उसका क़त्ल किया गया और उधर उस लड़के को रब की अता से बेशुमार दौलत मिल गई_*
हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि नबी ने जब ये फ़रमाया कि तुम गाय ज़बह करो तो बनी इस्राईल चाहते तो कोई भी गाय ज़बह करके इतनी मुश्किलात में ना पड़ते और ना इतनी भारी कीमत पर गाय खरीदनी पड़ती मगर ये मुसीबत उन्होंने खुद मोल ली,कि जैसे जैसे नबी से सवाल करते जाते वैसे वैसे उस पर शर्तें बढ़ती जाती,लिहाज़ा किसी भी बुज़ुर्ग या वली से अगर किसी सवाल का जवाब मिल गया हो तो फ़ौरन वहां से उठ जाए और फ़िज़ूल के सवाल करके उस पर पाबंदियां ना लगवानी चाहिए
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का ज़माना नबी करीम सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की विलादत से 2300 साल क़ब्ल है
इब्ने माज़ा हदीस न.121 में मुआविया ने ज़िक्र ए अली सुन कर ऐसे नामुनासिब कलेमात कहे जिससे सामने वाले साहबी को सुनकर गुस्सा आ गया और उन्हीने फ़ज़ीलत ए अली ए मुर्तज़ा बयान की ★•★•★•★•★ सही मुस्लिम हदीस न.6220 में मुआविया ने अमर बिन साद बिन अबि वक़्क़स से सवाल किया अली ए मुर्तज़ा को गाली क्यों नही देते..?? ★•★•★•★•★ सुनन तिर्मिज़ी में हदीस 3724 में भी यही रिवायत दर्ज है कि मुआविया ने तुम क्यों गाली नही देते हज़रत अली ए मुर्तज़ा को ★•★•★•★•★ मुआविया ने हज़रत उमर से ज़्यादा खुद खिलाफत का अहल बताया और भरे मजमे में हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर को रुसवा किया और वो मौत के ख़ौफ से खामोश रहे…! सही बुखारी हदीस 4108 ★•★•★•★•★ मुआविया के गवर्नर बर सारे मिम्बर ए रसूल पे बैठ कर साहबी के रसूल अली ए मूर्तज़ा को गालियाँ देते थे.! सही बुखरी हदीस #3703 सही मुस्लिम हदीस #6229 ★•★•★•★•★ सही मुस्लिम हदीस #4061 साहबी रसूल एबाद बिन समेद राज़ीअल्लाह अन्हा की बताई हुई हदीस पर मुआविया ने इंकार किया और झठी हदीस होने का दावा किया जिस पर हज़रत एबाद रज़ियल्लाहु अन्हा ने कहा :- मुआविया की नाक ख़ाक आलूद हो मैं इसके लश्कर में एक रात भी नही रहना चाहता ★•★•★•★•★ मुआविया बिन अबु सुफियान जान बूझ कर रासुल्लाह की हराम की हुई चीज़ों को बिना परवाह किये इस्तेमाल करता था और शहादत के इमाम हसन पर गुस्ताखाना रवैया दिखाया सही मुस्लिम हदीस #4776 ★•★•★•★•★ सुनन अबु दाऊद हदीस न. #4131 इस हदीस में सहाबा ए रासुल्लाह का साफ़ दावा है कि मुआविया उनको हराम माल खाने का हुक्म और नाहक़ क़त्ल करने कि ताक़ीद करता था.! ★•★•★•★•★ जैसा कि उसने अज़ीम साहबी ए रसूल अम्मार ए यासिर को सिफ़्फ़ीन में क़त्ल करवाया , जिनके लिए नबी ए पाक ने इर्शाद फ़रमाया था कि अम्मार को एक बाघी जमात क़त्ल करेगी जो जहन्नम की तरफ बुलाने वाली होगी सही बुखारी हदीस न.2812 सही मुस्लिम हदीस न.7320 ★•★•★•★•★ आखिरी हादिस जिस्से ये वाज़ेह हो जाएगा कि , जो अक़ीदा इन मौलवी हज़रात ने ऊम्मत को सिखाया है कि सहाबा की जमात बक्शी हुई हैं, उनकी मग़फ़िरत हो चुकी है इस हदीस से उनके इस झूठ से भी पर्दा उठ जाएगा कि, अल्लाह के नबी की साफ अल्फाज़ो में हदीस वारिद हुई है सही बुखरी, जिल्द न.8 में , बाब ए फ़ज़ाईल ए कौसर में हदीस न.6585 जिस में साफ लिखा हैं सहाबा की जमात में से कुछ जन्नत में जायेगे और कुछ जहन्नम में जाएगे सही बुख़ारी हदीस #6585