हदीस:तक्लीफ़ न दी जाए।

بِسْمِ اللٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ

ह़ुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
“मालदार का (मालदारी के बावुजूद दूसरे के माली ह़ुक़ूक़ की अदाएगी में) ताख़ीर करना ज़ुल्म है।”
[बुख़ारी, अस़्स़ह़ीह़, रक़म: 2270]

ह़ुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
“और काम लेने में उसे इतनी तक्लीफ़ न दी जाए जो कि वोह बर्दाश्त न कर सके।”
[मुस्लिम, अस़्स़ह़ीह़, रक़म: 166 2]

आजिर को हिदायत की गई है कि वो अजीर से बक़द्रे इस्तेत़ाअ़त काम ले। ह़ुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
“और उसे उस काम की तक्लीफ़ न दो जो उस से न हो सके।”
[बुख़ारी, अस़्स़ह़ीह़, रक़म: 5703]