इरशाद ए मुस्तफ़ा ﷺ शान ए अली

✔ इरशाद ए मुस्तफ़ा ﷺ
✔ शान ए अली

✔ मौला मुर्तज़ा सय्यदना अली इब्ने अबी तालिब का मक़ाम ओ मर्तबा शान ओ अज़मत इतनी आला है के मुनाफ़िक़ सिफ़्त ख़ारजी सिफ़्त लोगों को हज़म नही होती

✔ हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम ने इरशाद फ़रमाया

✔ ऐ अली !

✔ तेरा ख़ून मेरा ख़ून है
✔ तेरा गोश्त मेरा गोश्त है
✔ तेरा जिस्म मेरा जिस्म है
✔ तेरे बाल मेरे बाल हैं
✔ तेरी औलाद मेरी औलाद है
✔ तेरा दादा और मेरा दादा एक है
✔ तेरी और मेरी नस्ल एक है
✔ तेरा और मेरा नूर एक है

✔ हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम ने इरशाद फ़रमाया 👇👇👇👇👇

✔ जिसने अली की मदद की उसने मेरी मदद की
✔ अली का हक़ इस उम्मत पर ऐसा है जैसे बाप का बेटे पर
✔ अली से मोमिन ही मोहब्बत करेगा
✔ अली से मुनाफ़िक़ ही दुश्मनी करेगा
✔ अली मुझसे है और मैं अली से हूँ
✔ अली का चेहरा देखना इबादत है
✔ अली का ज़िक्र भी इबादत है

✔ अली की मुहब्बत गुनाहों को ऐसे खा जाती है जैसे आग लकड़ी को
✔ अली की मिसाल इस उम्मत में ऐसी है जैसे क़ुरआन ए पाक में क़ुल्होवल्लाहो अहद
✔ मेरा क़र्ज़ अली अदा करने वाला है
✔ जिसका मैं मौला हूँ उसका ये अली मौला है
✔ हक़ अली के साथ है और अली हक़ के साथ
✔ मैं और अली इस उम्मत के बाप हैं
✔ मैं इल्म का शहेर हूँ और अली उसका दरवाज़ा*
✔ अली इमामुल मुबीन है
✔ अली का रास्ता सीधा रास्ता है
✔ अली का दुश्मन मेरा दुश्मन है
✔ अगर एक तरफ़ सारे बनी आदम हों और दूसरी तरफ़ सिर्फ़ अली हो तो अली का साथ देना
✔ मैं और अली एक ही नूर से है
✔ अली जन्नत और दोज़ख़ तख़सीम करने (बाटने) वाला है
✔ अली दुनिया और आख़िरत में मेरा भाई है
✔ अली की मोहब्बत ज़ानी के दिल में जमा नही हो सकती
✔ अली से दुश्मनी मुनाफ़िक़ रखता है
✔ अली से दुश्मनी करने वाला वलादुज़्ज़िना (हरामी) है
✔ अली से दुश्मनी करने वाला हैज़ी बच्चा (नापाक औलाद) है
✔ अली हिदायत का चिराग़ है
✔ अली को मुझसे ऐसी मन्ज़िलत हासिल है जैसा हारून को मूसा से
✔ ऐ अली तू बा मन्ज़िले काबा है
✔ अली अरब का सरदार है
✔ ऐ अली तेरा मुहिब मेरा मुहिब है और तेरा दुश्मन मेरा दुश्मन है
✔ जिसका मैं वली हूँ उसका अली वली है
✔ अली क़यामत के दिन मेरे हौज़ का मालिक है
✔ अली की मुहब्बत निफ़ाक़ से दूर रखती है
✔ मैं और अली एक शजर से हैं बाक़ी इंसान मुख़्तलिफ़ दरख़्त से हैं
✔ मेरे बाद अली मेरी उम्मत का आलिम है
✔ अली मेरे इल्म की तिजोरी है
✔ अली मेरा राज़दार है
✔ अली का गोशा गोशा ईमान से भरा हुआ है
✔ जिसने अली को तकलीफ़ दी उसने मुझे तकलीफ़ दी

( कर्रमअल्लाहो वजहुल करीम )

✔ हर जां अली मिलेंगें ना दामन बचाईये ✔
✔ बचना हो अली से तो जहन्नम में जाईये ✔

हदीस :मा तॅह़तों से बद ख़ुल्क़ी

*بِسْمِ اللٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ*

ह़ुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
“अपने मा तॅह़तों से बद ख़ुल्क़ी करने वाला जन्नत में दाख़िल न होगा।”
[तिरमिज़ी, अस्सुनन, रक़म: 1946]

ह़ुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
“मा तॅह़तों से अच्छा सुलूक बरकत का ज़रीआ़ बनता है और उन से बद ख़ुल्क़ी बद बख़्ती लाती है।”
[अबू दावूद, अस्सुनन, रक़म: 5162]

ह़ुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
“तुम में से कोई भी (अपने ख़ादिम या मुलाज़िम को) येह न कहे कि अपने आक़ा को खाना खिलाओ, अपने आक़ा को वुज़ू करवाओ, अपने आक़ा को पानी पिलाओ, बल्कि मज़दूर या ख़ादिम को स़िर्फ़ येह कॅहना चाहिये: मेरे सरदार। और तुम से कोई यूँ भी न कहे: मेरे ग़ुलाम, मेरी लौंडी, बल्कि चाहिये कि वोह कहे मेरे नौजवान मुलाज़िम, मेरी मुलाज़ेमा और मेरे बेटे।”
[बुख़ारी, अस़्स़ह़ीह़, रक़म: 2414]