Shab e Baraat ki ibaadaat

Shab e Baraat ki ibaadaat

1- Surah Yaseen ki tilawat (3 times):

1st time:Umar me barkat ki niyyat se b- 2nd time:Rizq me barkat ki niyyat se

3rd time:Husn Qaatima (Yaani imaan ki haalat me maut hone ki niyyat se)

2- 6 Rakaat Nafil namaz (2-2 rakaat karke):

3- Tilawat:

a- Surah al Fatiha C- Surah al kafiroon e- Surah al Naas (14 times) b- Ayat al kursi (14 times) (14 times) d- Surah al Falaq (14 times) (14 times) f- Sura tauba ki last aayat (1 time)

4- Durood Sharif: Allahuma Salli Wasallim Alan nabiyyi al ummiyi wa aalihi.(300 times)


5- Duaein:



– Allahumarzuqni Qalban taqiyan minash shirki naqiyan la faajiran wala shaqiya. (21 times)

– Allahuma innaka kareemun tuhibbul afwa faafu anni. (100 times) – Allahuma inni As alukal afwa wal aafiyata wal muaafaatad daaimata fid duniya wal aakhirah. (21 times)

– Aauzu Bi afuwika min iqaabika aauzu birizaaka min Saqatika wa aauzubiki minka jalla wajhuka Allahuma la uhsi sana an alaika anta kama asnaita alaa nafsik. (11 times)

– Sajada laka khayali wa suwadi wa aamana bika fuwaadi fa haazihi yadi wama jannaitu biha alaa nafsi, ya azeemu yarjaa likulli azeem, igfiriz zambal azeem, sajada wajhi lillazi khalaqa hu wa sawwara hu wa shaqqa samiaahu wa basarahu. (7 times)

– La ilaaha illa anta subhaanaka inni kuntu min az zaalimeen. (70 times) – Astagfirullah al’azeem Al lazee la ilaaha illa huwa al hayyul qayyumu wa atoobu ilaihi

(70 time) 6- Surah Dughaan: (1 time)

7- 4 rakaat Salatut Tasbeeh

Tasbeeh: Subhanallahi wal hamdulillahi wa la ilaaha illalahu wallahu akbar

Tarteeb: Allama Habib Ahmed Al Huseni.

*शबे बरात*
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*हदीस* – *_मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि “जब शाबान की 15वीं रात आये तो तुम लोग रात को इबादत करो और दिन को रोज़ा रखो,बेशक इस रात में खुदाये तआला आसमाने दुनिया पर तजल्ली फरमाता है और ऐलान करता है कि है कोई मगफिरत का तलबगार कि मैं उसे बख्श दूं है कोई रोज़ी मांगने वाला कि मैं उसे रोज़ी दूं है कोई बला व मुसीबत से छुटकारा मांगने वाला कि मैं उसे रिहाई दूं रात भर ये ऐलान होता रहता है यहां तक कि फज्र तुलु हो जाती है_*

*📚📕 इब्ने माजा,जिल्द 1,सफह 398*
*📚📕 मिश्कात,सफह 115*
*📚📕 अत्तरगीब,जिल्द 2,सफह 52*

*हदीस* – *_उम्मुल मोमेनीन सय्यदना आईशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं कि एक रात हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मेरे पास से अचानक उठकर चले गए,जब मैंने उन्हें ना पाया तो उनकी तलाश में निकली तो आपको जन्नतुल बक़ी के कब्रिस्तान में पाया कि आपका सर मुबारक आसमान की तरफ था,जब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने मुझे देखा तो फरमाया कि ऐ आईशा क्या तुझे ये गुमान था कि अल्लाह का रसूल तुम पर जुल्म करेगा इस पर मैंने अर्ज़ की कि या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मैंने सोचा कि शायद आप अपनी किसी और बीवी के पास तशरीफ ले गए हैं,तो आप फरमाते हैं कि आज शाबान की 15वीं रात है आज रात मौला तआला इतने लोगों को बख्शता है जिनकी तादाद बनी क़ल्ब की बकरियों से भी ज़्यादा होती है_*

*📚📕 तिर्मिज़ी,जिल्द 1,सफह 403*
*📚📕 इब्ने माजा,जिल्द 1,हदीस 1389*
*📚📕 मिश्कात,सफह 114*

*सोचिये कि जब एक नबी कब्रिस्तान जा सकते हैं तो फिर उम्मती क्यों नहीं जा सकते,इस हदीस से कब्रिस्तान और मज़ारों पर जाना साबित हुआ*

*हदीस* – *_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रमज़ान के अलावा सबसे ज़्यादा रोज़े शाबान में रखते थे यहां तक कि कभी कभी पूरा महीना रोज़े से गुज़ार देते,सहाबिये रसूल हज़रत ओसामा बिन ज़ैद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से इसकी वजह पूछी तो आप फरमाते हैं कि इस महीने में बन्दे के आमाल खुदा की तरफ उठाये जाते हैं तो मैं ये चाहता हूं कि जब मेरे आमाल खुदा की तरफ जायें तो मैं रोज़े से रहूं_*

*📚📕 निसाई,जिल्द 3,सफह 269*

*हदीस* – *_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि बेशक इस रात अल्लाह तआला तमाम मख्लूक़ की बख्शिश फरमाता है सिवाये शिर्क करने वाले और कीना रखने वालों के_*

*📚📕 इब्ने माजा,जिल्द 1,हदीस 1390*

*फुक़्हा* – *_बाज़ रिवायतों में मुशरिक,जादूगर,काहिन,ज़िनाकार और शराबी भी आया है कि इनकी बख्शिश नहीं होगी या ये कि तौबा कर लें_*

*📚📕 बारह माह के फज़ायल,सफह 406*

*फुक़्हा* – *_जो इस रात में 2 रकात नमाज़ पढ़ेगा तो उसे 400 साल से भी ज़्यादा का सवाब अता किया जायेगा_*

*📚📕 नुज़हतुल मजालिस,जिल्द 1,सफह 132*

*फुक़्हा* – *_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि एक नफ्ल रोज़े का सवाब इतना है कि अगर पूरी रूए ज़मीन भर सोना दिया जाए तब भी पूरा ना होगा_*

*📚📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 95*

*फुक़्हा* – *_अगर इस रात पानी में बैर की 7 पत्ती को जोश देकर उसे ग़ुस्ल करे तो इन शा अल्लाह तआला पूरा साल जादू और सहर से महफूज़ रहेगा_*

*📚📕 इस्लामी ज़िन्दगी,सफह 77*