
हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आखिरी वक्त में सहाबा इकराम से फरमाया एक कागज कलम लाओ कि मैं एक तहरीर लिख दूं जिसके बाद तुम कभी गुमराह ना होगे।
लेकिन हजरत उमर बिन खत्ताब ने कहा कि हमारे लिए अल्लाह का कुरान काफी है और इस वक्त हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमारी की हालत में बोल रहे हैं।
कुछ और सहाबा इकराम ने कहा कागज कलम देना चाहिए लेकिन हजरत उमर की बात को लोगों ने ज्यादा तवज्जो दी और वहां पर झगड़ा शुरू हो गया यह झगड़ा देख कर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तमाम सहाबा से कहा यहां से चले जाओ।
अब तमाम मुसलमानों से सवाल है?
ऐसी कौन सी चीज जो हुजूर लिखवाना चाहते थे लेकिन सहाबा इकराम की नादानी की वजह से वह तहरीर नहीं लिखी जा सकी जिसकी वजह से इस्लाम में 73 फिरक्के बने
सही बुखारी हदीस नंबर 114
जब नबी करीम (सल्ल०) के मर्ज़ में शिद्दत हो गई तो आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि मेरे पास लिखने का सामान लाओ ताकि तुम्हारे लिये एक तहरीर लिख दूँ ताकि बाद में तुम गुमराह न हो सको। इस पर उमर (रज़ि०) ने ( लोगों से) कहा कि उस वक़्त आप (सल्ल०) पर तकलीफ़ का ग़लबा है और हमारे पास अल्लाह की किताब क़ुरआन मौजूद है जो हमें (हिदायत के लिये) काफ़ी है। इस पर लोगों की राय मुख़्तलिफ़ हो गई और शोर-ग़ुल ज़्यादा होने लगा। आप (सल्ल०) ने फ़रमाया, मेरे पास से उठ खड़े हो, मेरे पास झगड़ना ठीक नहीं। इस पर इब्ने-अब्बास (रज़ि०) ये कहते हुए निकल आए कि बेशक मुसीबत बड़ी सख़्त मुसीबत है (वो चीज़ जो) हमारे और रसूलुल्लाह (सल्ल०) के और आपकी तहरीर के बीच रुकावट हो गई।

