
मूसा अलैहिस्सलाम का तमांचा
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के पास जब मलकुल मौत हाज़िर हुए तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने मलकुल मौत को एक ऐसा तमांचा मारा कि मलकुल-मौत की आंख निकल आयी। मलकुल-मौत फौरन वापस पलटे और अल्लाह के हुजूर अर्ज करने लगेः इलाही! आज तो तूने मुझे एक ऐसे अपने बंदे की तरफ भेजा है जो मरना ही नहीं चाहता। यह देख! कि उसने मुझे तमांचा मार कर मेरी आंख निकाल दी है। खुदा तआला ने मलकुल-मौत की आंख दुरुस्त फ़रमा दी और फ़रमायाः मेरे बंदे मूसा के पास फिर जाओ और एक बैल साथ लेते जाओ। मूसा से कहना कि अगर तुम और जीना चाहते हो तो इस बैल की पुश्त पर हाथ फेरो। जितने बाल तुम्हारे हाथ के नीचे आ जायेंगे उतने ही साल ज़िन्दा रह लेना । चुनांचे मलकुल मौत बैल लेकर फिर हाज़िर हुए और अर्ज़ करने लगेः हुजूर! इसकी पुश्त पर हाथ फेरिये। जितने बाल आपके हाथ के नीचे आ जायेंगे उतने साल आप और जिन्दा रह लें । हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया और उसके बाद फिर तुम आ जाओगे? अर्ज़ किया, हा! तो फ़रमाया, फिर अभी चलो।
(मिश्कात शरीफ सफा ४६६) सबक़ : अल्लाह के नबीयों की यह शान है कि चाहें तो मलकुल-मौत को भी तमांचा मार दें। उसकी आंख तक निकाल दें। नबी वह होता है जो मरना चाहे तो मलकुल-मौत करीब आता है अगर न मरना चाहे तो मलकुल-मौत वापस चला जाता है। हालांकि अवाम की मौत इस शेर के मिस्दाक होती है कि :
लाई हयात आए कजा ले चली, चले । अपनी खुशी न आये न अपनी खुशी चले । हिकायत-७२

