Day: September 11, 2021
Quran Hadith aur Ahle Sunnat ki kitaboon ki Roshni mein Fazail aur daleel::Ali Waliullah..
क़ातिलीन ए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का अंजाम पार्ट 2

अमर सअद का अंजाम
खौली के बाद अमर सअद पेश किया गया। यह वही नाबकार है जिसने करबला में अहले बैत पर पानी बन्द किया था और नन्हें-नन्हें बच्चों को पानी के लिए तड़पाया था। यह बदबख़्त जब मुख़्तार के सामने हाज़िर किया गया तो उस पर नज़र पड़ते ही मुख्तार की आंखों से चिंगारियां बरसने लगीं।
मुख़्तार ने कहा ऐ दुश्मने आले रसूल बता तुझे क्या सज़ा दूं तूने ही तो अहले बैत पर पानी बन्द किया था। उसने कहा कि उसका ज़िम्मेदार इने ज़्याद है। मैंने तो सिर्फ हुक्म की तामील की थी। यह सुन कर मुख्तार की आंखें सुर्ख हो गई। इसी दर्मियान खबर मिली कि सद का बेटा हफस जो करबला में इमाम पाक के खिलाफ अपने बाप की मदद कर रहा था गिरफ्तार करके लाया गया। मुख्तार ने हुक्म दिया कि उसे फौरन मेरे सामने हाज़िर किया जाए। जब वह मुख्तार के सामने लाया गया तो मुख्तार ने जल्लाद को हुक्म दिया कि इने सअद के
करके नोके नेज़ह पर बुलन्द करके नाचा था। जब मुख़ार के सामने पकड़ कर लाया गया तो मारे खौफ के कांपने लगा। उसे देखते ही मुख्तार की आंखें सुर्ख हो गई। और मुख्तार के सीने में गज़ब की आग भड़क उठी। मुखलार ने जल्लाद को हुक्म दिया कि इस लईन के दोनों हाथ काट डालो। जब उसके दोनों हाथ काट डाले गये तो दोनों पांव काटने का हुक्म दिया, तक्लीफ की शिद्दत से वह ज़मीन पर तड़पने लगा। मुख्तार ने कहा तेरी लगाई हुई आग मुसलमानों के सीनों में भड़कती रहेगी। अभी तेरे आमाल की सज़ा काफी नहीं है। उसके बाद मुख्तार ने खोली के घर वालों को इकट्ठा किया। और उन्हीं के सामने उस नाबकार को तड़पा कर कत्ल कर दिया और फिर उसे जिन्दा जला दिया। मुख़्तार उस वक्त तक उसके लाश के पास खड़ा रहा जब तक उसकी लाश जल कर खाक न (तारीखे तबरी, स. 502, अल-हुसैन स. 165) हो गई।
अमर सअद का अंजाम
खौली के बाद अमर सअद पेश किया गया। यह वही नाबकार है जिसने करबला में अहले बैत पर पानी बन्द किया था और नन्हें-नन्हें बच्चों को पानी के लिए तड़पाया था। यह बदबख़्त जब मुख़्तार के सामने हाज़िर किया गया तो उस पर नज़र पड़ते ही मुख्तार की आंखों से चिंगारियां बरसने लगीं।
मुख़्तार ने कहा ऐ दुश्मने आले रसूल बता तुझे क्या सज़ा दूं तूने ही तो अहले बैत पर पानी बन्द किया था। उसने कहा कि उसका ज़िम्मेदार इने ज़्याद है। मैंने तो सिर्फ हुक्म की तामील की थी। यह सुन कर मुख्तार की आंखें सुर्ख हो गई। इसी दर्मियान खबर मिली कि सद का बेटा हफस जो करबला में इमाम पाक के खिलाफ अपने बाप की मदद कर रहा था गिरफ्तार करके लाया गया। मुख्तार ने हुक्म दिया कि उसे फौरन मेरे सामने हाज़िर किया जाए। जब वह मुख्तार के सामने लाया गया तो मुख्तार ने जल्लाद को हुक्म दिया कि इने सअद के
सामने ही उसके बेटे का सर तन से जुदा कर दो ताकि उस नाबकार को मालूम हो जाए कि इमाम पाक के दिल पर हजरत अली अकबर और हज़रत अली असगर की तड़पती हुई लाश देख कर क्या गुज़रती थी जल्लाद ने जूं ही उसके बेटे की गर्दन पर तलवार चलाई इने सअद चिल्ला उठा। अभी वह अपना सर पीट ही रहा था कि मुख्तार का हुक्म हुआ कि इने सअद की भी गर्दन मार दी जाए। उस नाबकार की गर्दन को जल्लाद ने उड़ा दिया और दोनों बाप बेटे का सर मुख़्तार मुहम्मद हनफीया रज़ि अल्लाहु अन्हु के पास भेज दिया। ने हज़रत
(तारीखे तबरी, स. 507, नक्शे करबला, स. 70)
क़ातिलीन ए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का अंजाम पार्ट 1

यज़ीद की कब्र
सबसे पहले मुख्तार ने यज़ीद की कब्र खुदवाई हुई हड्डियां निकली मुख्तार ने उन हड्डियों को दोबारा जलप उसके बाद मुख्तार ने हुक्म दिया कि जितने भी लोग करबला में इमाम आली मकाम रज़ि अल्लाहु अन्हु की शहादत में शामिल थे उन सबको फौरन ही मेरे रू-ब-रू हाज़िर किया जाए। मुख्तार का हुक्म सुनते ही कूफा के दरो दीवार लरज़ उठे। मुख्तार की आंखें गुस्से से सुर्ख थीं। मुख्तार ने ऐलान किया और कहा कि इमाम हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हु के
126 रज़वी किताब घर मा बदे करबला खिलाफ तलवार उठाने वाला अगर एक शख्स भी किसी के घर में मिल गया तो उसकी दीवारें उखाड़ फेंकूगा और उसकी नस्लों को जला के खाक करवा दूंगा। मुख्तार ने कहा कि अगर मैं तमाम कूफा वालों को कत्ल कर दूं तब भी इमाम हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हु के खून के एक कतरे की कीमत अदा नहीं हो सकती।
मुख्तार ने कहा कि मैं खुदा से अहद कर चुका हूं कि जब तक मुख्तार की तलवार कातिलाने हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हु को फिन्नार न कर देगी मैं चैन से न बैलूंगा। मुख्तार ने हुक्म दिया कि सारे लोगों को पकड़-पकड़ कर मेरे सामने हाज़िर किया जाए।
मुख्तार के इस ख़ौफ़नाक ऐलान से अहले कूफा कांप गये और मैदाने करबला में जुल्म व सितम करने वाले यज़ीदी कुत्ते पहाड़ों और जंगलों में छुपने लगे। मगर शायद वह यह नहीं जानते थे कि कहरे इलाही जब करवट लेता है तो कौमे लूत को नीस्त व नाबूद कर देता है, कौमे लूत को सह-ए-हस्ती सह-ए-हस्ती से मिटा देता है और बस्तियों की बस्तियां उजाड़ देता है। मुख़्तार की फौज ने हर तरफ़ धावे बोल दिए और कातेलीने इमाम की हर जगह तलाश शुरू कर दी। फिर क्या था कि जगह-जगह करबला के जालेमीन पकड़े जाने लगे किसी को पहाड़ की खोह से, किसी को जंगल से, किसी को सहरा से पकड़-पकड़ कर मुख्तार के सिपाही लाने लगे और मुख्तार सक्फी के दरबार में पेश करने लगे।
शिम्र का अंजाम
मुख्तार के सामने सबसे पहले शिम्र पेश किया गया। यह वही बदबख्त है, जिसने हजरत सैय्यदना इमाम हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हु की गर्दन पर तल्वार चलाई थी और शहीद किया था। इमाम पाक की शहादत के बाद एक गांव में भाग गया था और जा कर एक झाड़ी में छुप गया था। मुख्तार के जासूसों ने उसे पकड़ कर मुख्तार के दरबार में पेश किया। शिम्र मारे खौफ के कांपने लगा। मुख्तार ने गरजते हुए शिम्र से कहा ओ नाबकार तुझे ज़रा भी गैरत न आई तूने अपने नापाक
हाथों से सैय्यदा के लाल को ज़िबह कर दिया और काबा की दीवार ढा दिया, चिरागे हरम को बुझा दिया। तेरा जिस्म जला कर राख हवा में उड़ा दी जाए। तब भी इमाम आली मकाम के खून का बदला नहीं हो सकता मुख्तार ने जलाल में आकर तलवार उठाई। शिम्र ने कहा कि मैं प्यास से बेचैन हूं, एक बूंट पानी पिला दे। मुख्तार ने कहा ओ नाबकार! तू वह वक्त याद कर जब तूने अहले बैत पर बाइस हजार सिपाहियों का पहरा बिठा दिया था।
अहले हरम और उनके बच्चे बच्चियां तीन रोज़ पानी के एक-एक कतरे को तरस गये। तुझे हरगिज़-हरगिज़ पानी नहीं मिल सकता जहन्नम का खौलता हुआ पानी तेरे इंतज़ार में है। यह कहकर मुख़्तार ने उसके हाथ पैर काट डाले और उसके सर को जिस्म से जुदा कर दिया और नश को कुत्तों के सामने फेंक दिया। (शामे करबला)
हुरमला का अंजाम
अभी शिम्र की लाश तड़प ही रही थी कि इतने में शोर हुआ कि हुरमला पकड़ कर लाया गया है यह वही नाबकार है जिसने हज़रत अली असगर के गले पर तीर मारा था। जब हुरमला मुख्तार के रू-ब-रू पेश किया गया तो मुख्तार की निगाहों में करबला का मन्ज़र घूमने लगा। मुख्तार मारे गज़ब के कांपने लगा। और जल्लाद को हुक्म दिया कि पहले हुरमला के गले पर तीरों की बारिश की जाए और आखिरी तीर ऐसा मारो कि गले के आर पार हो जाए। चुनांचे तीरों की बारिश से हुरमला हलाक हो गया और जहन्नम जा पहुंचा। लाश कुत्तों के सामने डाल दी गई। (तबरी)
खौली का अंजाम
हुरमला के बाद खौली गिरफ्तार करके लाया गया। यह वही ज़ालिम और बेरहम है जिस नाबकार ने हज़रत इमाम आली मकाम रज़ि अल्लाहु अन्हु के सीने में बरछी मारी थी और सरे अक्दस को तने पाक से जुदा
करके नोके नेज़ह पर बुलन्द करके नाचा था। जब मुख़ार के सामने पकड़ कर लाया गया तो मारे खौफ के कांपने लगा। उसे देखते ही मुख्तार की आंखें सुर्ख हो गई। और मुख्तार के सीने में गज़ब की आग भड़क उठी। मुखलार ने जल्लाद को हुक्म दिया कि इस लईन के दोनों हाथ काट डालो। जब उसके दोनों हाथ काट डाले गये तो दोनों पांव काटने का हुक्म दिया, तक्लीफ की शिद्दत से वह ज़मीन पर तड़पने लगा। मुख्तार ने कहा तेरी लगाई हुई आग मुसलमानों के सीनों में भड़कती रहेगी। अभी तेरे आमाल की सज़ा काफी नहीं है। उसके बाद मुख्तार ने खोली के घर वालों को इकट्ठा किया। और उन्हीं के सामने उस नाबकार को तड़पा कर कत्ल कर दिया और फिर उसे जिन्दा जला दिया। मुख़्तार उस वक्त तक उसके लाश के पास खड़ा रहा जब तक उसकी लाश जल कर खाक न (तारीखे तबरी, स. 502, अल-हुसैन स. 165) हो गई।
Maula Ali ka illm:: मख़्फी रंग और लतीफ़ जिस्म

एक दफा खुत्बे के बीच, मेरे मौला अली ने फरमाया कि “उसके अलावा हर देखने वाला मख़्फ़ी रंगों और लतीफ़ जिस्मों को देखने से नाबीना होता है”
ये क्या अजीब बात कही मौला ने, हम इंसान तो रंगों को देख सकते हैं, फिर ये छिपे हुए रंग क्या होते हैं जो इंसान नहीं देख सकता?
जब विज्ञान ने खोज़ की तो पाया कि जो उजाला या प्रकाश हमें सफेद दिखाई देता है, वह दरअसल अपने अंदर सात रंगों को समेटा हुआ है। अगर आगे चलकर इन सात रंगों में भी ये पता चल जाए कि दरअसल सात रंग हमें प्रिज्म से दिखते हैं पर अब फलाँ मशीन ईजाद हो गई है जिससे इन सात रंगों में भी इनके अलग-अलग रंग देखे जा सकते हैं मसलन के तौर पर गहरा हरा, हल्का हरा, फिरोजी वगैरह, तो भी मुझे रत्ती भर भी ताज्जुब नहीं होगा क्योंकि मेरे मौला आज से तकरीबन 1400 साल पहले ही सब बता गए हैं।
बहरहाल, आज जितना विज्ञान को पता है, उस पर ही बात करते हैं, जो सफेद उजाला या लाईट हमें दिखता है अगर उसकी तजल्ली या किरण को हम प्रिज़म से गुजारें तो हमें सात रंग दिखते हैं, कभी-कभी बारिश के मौसम में, जब बरसात के बाद धूप निकलती है तब भी सात रंगों की लकीरें आसमान में दिखने लगती हैं जो कि कमान के आकार की होती हैं।
इंसान 380 nm से 700 nm तक की रेंज देख पाता है लाईट की वेव्स के अलावा भी और कई ऐसी वेव्स हैं जो इंसान देख नहीं सकता। रोज़मर्रा में इंसान उजाले में छिपे इन रंगों को देख नहीं सकता और ना जाने और कितने रंग ऐसे छिपे हैं जिन्हें इंसान देखने से कासिर और नाबीना है।
इसी तरह अगर लतीफ़ जिस्मों की बात करें तो हम पाएँगे कि . खोज़ भी कुछ सालों पहले ही हुई है, जिससे पता चला कि हम जो देख पाते हैं इससे छोटे भी कीड़े, बैक्टीरिया, वायरस वगैरह मौजूद हैं। मक्खी, मच्छर, जुएँ से भी बारीक ऐसे कीड़े मौजूद हैं जिन्हें ना हम आँखों से देख सकते हैं, ना ही ये बता सकते हैं कि ये नर हैं या मादा। ये महीन से कीड़े भी अपनी नस्लें आगे बढ़ाते हैं, रिजूक पाते हैं और हम उनके वजूद से भी बेख़बर ना ही उन्हें देख पाते हैं और ना ही हम उनकी आवाज़ ही सुन सकते हैं।
एक दफा फिर से पढ़कर देखिए, मौला का ये कौल, जो उन्होंने उस वक्त कहा था, जब दुनिया ने इस बारे में दूर-दूर तक कोई तसव्वुर भी नहीं किया था, “उसके अलावा हर देखने वाला मख्रफी रंगों और लतीफ़ जिस्मों को देखने से नाबीना होता है।”

