AhleBayt Kaun aur unke Fazail

सुवाल : अहले बैत سلام لله عليهم किन अफ़राद को कहा जाता है ? और इन के क्या क्या फ़ज़ाइल हैं ?

जवाब : हुज़ूर ताजदारे मदीना صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم के नसब ओर क़राबत के लोगोँ को अहले बैत कहा जाता है। अहले बैत में प्यारे आक़ा صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم की अज्वाजे मुतह्हरात ओर ह़ज़रते सय्यिदतुना ख़ातूने जन्नत बीबी फ़ातेमा ज़हरा हज़रते सय्यिदुना मौला अली ओर हज़रते सय्यिदुना इमामे हसन व हज़रते सय्यिदुना इमामे हुसैन عَلَيْهِمُ الصَّلوةُوالسَّﻻَم सब दाखिल हैं। अहले बैते किराम سلام لله عليهم से अलाह عَزَّوَ جَلَّ ने नापाकी को दूर फ़रमाया इन्हें ख़ूब पाक किया ओर जो चीज़ इन के मर्तबे के लाइक़ नहीं उस से इन के परवरदीगार ने इन्हें महफूज़ रखा।

उम्मुल मुअमिनीन हज़रत आइशा सिद्दीक़ा سلام الله عليها बयान करते हैं कि हुज़ूर नबी-ए-अकरम صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم सुबह के वक़्त एक ऊनी मुनक्क़श चादर ओढ़े हुए बाहर तशरीफ लाए तो आप के पास हज़रत हसन बिन अली رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا आयें तो आप صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم ने उन्हें उस चादर में दाखल कर लिया, फिर हज़रत हुसैन رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ आएं और वोह भी उन के हमराह चादर में दाखिल हो गायें, फिर सैयदा फ़ातिमा سلام الله عليها आएँ और आप صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم ने उन्हें भी उस चादर में दाखल कर लिया, फिर हज़रत अली كَرَّمَاللهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم आएं तो आप صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم ने उन्हें भी चादर में ले लिया। फिर आप صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم ने ये आयते मुबारका पढ़ी : “अहले बैत ! तुम से हर क़िस्म के गुनाह का मैल (और शक व नुक़्स की गर्द तक) दूर कर दे और तुम्हें (कामिल) तहारत से नवाज़ कर बिलकुल पाक साफ़ कर दे।
[مسلم فى الصحيح، كتاب : فضائل الصحابة، باب : فضائل أهل بيت النبيصَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم ، ٤/١٨٨٣، ٢٤٢٤ ]

अहले बैत سلام لله عليهم पर दोज़ख की आग हराम की। सदका इन पर हराम किया गया क्यूंकि सदक़ा देने वालों का मैल होता है। अव्वल गुरौह जिस कि हुज़ूर शफ़ीए महशर صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم सफ़ाअत फ़रमाएंगे वोह आप صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم के अहले बैत سلام لله عليهم हैं। अहले बैतسلام لله عليهم की मुहब्बत फ़राइज़े दीन से है, और जो इन से बुग्ज़ रखे वोह मुनाफ़िक़ है। अहले बैत سلام لله عليهمकी मिषाल हज़रते सय्यिदुना नूह عَلَيْهِ السَّلَام की किश्ती की तरह है जो इस में सुवार हुवा उस ने नजात पाई ओर जो इस से कतराया, हलाक व बरबाद हुवा। अहले बैते किराम سلام لله عليهم अल्लाह عَزَّوَ جَلَّ की वोह मजबूत रस्सी है जिसे मज़बूती से थामने का हमें हुक्म मिला है। चुनान्चे एक हदीष शरीफ़ है कि आक़ाए मुअज़्ज़्म ताजदारे अ-रबो अजम صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم का फ़रमाने मुकर्रम है कि “मैं तुम में दो चीज़ें छोड़ता हू जब तक तुम इन्हें न छोड़ोगे हरगिज़ गुमराह न होगे, एक किताबुल्लाह ओर एक मेरी आल ।
[سنن الترمذي، كتاب المناقب أهل بيت النبي، الحديث: ٣٨١١، ج ٥، ص ٤٣٣ [

इसी तरह एक और मक़ाम पर इरशाद फ़रमाया कि अपनी अवलाद को तीन खस्लतें सिखाओं :
﴾1﴿ अपने नबी صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم की मुहब्बत
﴾2﴿ अहले बैत عَلَيْهِمُ السَّلَام की मुहब्बत और
﴾3﴿ क़ुरआने पाक की क़िराअत।
[الجامع الصغير، حرف الهمزه، الحديث : ٣١١، ج ١، ص ٢٥ ]
ग़रज़ येह कि अहले बैत किराम عَلَيْهِمُ السَّلَام के फ़ज़ाइल बे शुमार हैं। अमीरुल मुअमिनीन हज़रते सय्यिदुना मौला अली मुश्किल कुशा كَرَّمَاللهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم से रिवायत है कि रसूलुल्लाह صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم ने इरशाद फ़रमाया : जो मेरी इतरत (अहले बैत) व अन्सार और अरब का हक़ न पहचाने वोह तीन हाल से खाली नहीं या तो मुनाफ़िक़ है या हमारी या हैज़ी बच्चा।
[شعب الإيمان، باب في تعظيم النبي…الخ، فصل في الصلاة على النبي، الحديث : ١٦١٤، ج ٢، ص ٢٣٢]
क़ुरआने मजीद से षाबित है कि नब्बिये करीम, साहिबे कौषरो तस्नीम عَلَيْهِ اَفْضَلُ الصَّلوٰةِ وَالتَّسْلِيْم की मुक़दष बीबिया عَلَيْهِمُ السَّلَام मर्तबे में सब से ज़ियादा है ओर इन का अज़ सब से बढ़ कर है। दुन्या जहान की ओंरतो में कोई इन की हमसर ओर हम मर्तबा नही। अगर किसी को एक नेकी पर दस गुना षवाब मिले तो इन्हें बीस गुना, क्युकि इन के अमल में दो जिहतें है, एक अल्लाह عَزَّوَ جَلَّ की बन्दगी ओर इताअत और दुसरे नबिय्ये पाक, साहिबे लौलाक صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم की रिज़ाजोई व इताअत, लिहाज़ा इन्हें औरों से दुगना षवाब मिलेगा।
[हमारा इस्लाम, अहले बैते किराम عَلَيْهِمُ السَّلَام, हिस्सा : 03, स.113.]
उम्मुल मुअमिनीन हज़रते सय्यिदतुना आइशा सिदीक़ा سلام الله عليها पर एक बार ख़ौफ़ व ख़शिय्यत का गलबा था, आप गिर्या व ज़ारी फ़रमा रही थीं, हज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह बिन अब्बास رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا ने अर्ज़ किया : या उम्म्ल मुअमिनिन رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا ! क्या आप येह गुमान रखती हैं कि अल्लाह عَزَّوَ جَلَّ ने जहन्नम की एक चिंगारी को मुस्तफ़ा صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم का जोड़ा बनाया, उम्मुल मुअमिनिन رضي الله تعالى عنهن ने फ़रमाया : فرجت عنى فرج لله عنك तुम ने मेरा ग़म दूर किया अल्लाह عَزَّوَ جَلَّ तुम्हारा ग़म दूर करे।
[الآثار لابى يوسف، باب الغزو والجيش، فوالله لرسول الله اكرم على الله من ان يزوجه جمرة، الحديث : ٩٢٥، ج ٢، ص ٤٥٩، المقتبة علشاملة ]
सुवाल : पन्जतन पाक किन ह़ज़रात को कहा जाता है ?
जवाब : पन्जतन पाक से मुराद हुज़ूरे अक़दस صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم , ह़ज़रते सय्यिदुना मौलाए काएनात मौला अली, ह़ज़रते सय्यिदुना इमामे हसन ओर ह़ज़रते सय्यिदुना इमामे हुसैन عَلَيْهِمُ السَّلَام हैं।
[हमारा इस्लाम, अहले बैते किराम عَلَيْهِمُ السَّلَام, हिस्सा : 03, स.113.]
सुवाल : ह़ज़रते सय्यिदतुना बीबी फ़ातिमा سلام الله عليها के फ़ज़ाइल क्या हैं?
जवाब : हुज़ूर सुल्ताने मदीना राहते क़्ब्लो सीना साहिबे मुअतर पसीना बाइसे नुज़ूले सकीना صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم का इरशादे बा क़रीना है कि मैं ने अपनी बेटी का नाम फ़ातिमा इस लिये रखा कि तआला ने इस को ओर इस के साथ मुहब्बत रखने वालों को दोज़ख़ से ख़लासी अता फ़रमाई।
[فردوص الاخبار الديلمى، باب الالف، الحديث : ١٣٥٩،ج ١، ص ٢٠٣ ]

एक हदिषे पाक मैं है कि ह़ज़रते फ़ातिमा سلام الله عليها पाक दामन हैं, अल्लाह عَزَّوَ جَلَّ ने इन पर ओर इन की तमाम अवलाद पर दोज़ख़ को हराम फ़रमाया है।
[المعجم الكبير الطبرانى، ومن مناقب فاطمة سلام الله عليها ، الحديث : ١٠١٨، ج ٢٢، ص ٤٠٧]

एक और हदिष शरीफ़ मे है कि : फ़ातिमा मेरा जुज़्व है, जो इन्हें न गवार, वोह मुझे न गवार, ओर जो इन्हें पसन्द वोह मुझे पसन्द।
[المستدرك على الصحيحين، كتاب معرفة الصحابة، باب دعاء ضفع الفقراء واداء الدين، الحديث : ٤٨٠١، ج ٤، ص ١٤٤ ]

इसी तरह एक और हदिषे पाक में है कि रहमत वाले आक़ा صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم ने फ़रमाया : ए फ़ातिमा ! तुम्हारे ग़ज़ब से ग़ज़बे इलाही عَزَّوَ جَلَّ होता है ओर तुम्हारी रिज़ा से अल्लाह عَزَّوَ جَلَّ राज़ी।
[المستدرك على الصحيحين، كتاب معرفة الصحابة، نداء يوم المحشر غضوا ابصاركم…الخ، الحديث : ٤٧٨٣،ج ٤، ص ١٣٧ ]
और फ़रमाया : मुझे अपने अहेले बैत سلام لله عليهم में सब से ज़ियादा प्यारी फ़ातिमा है।

[المستدرك على الصحيحين، كتاب التفسير، تفسر سوره أحزاب، باب اهب أهلى على فاطمة، الحديث : ٣٦١٥، ج ٣، ص ١٩٢ ]

एक मक़ाम पर फ़रमाया “ए फ़ातिमा ! क्या तुम इस पर राज़ी नहीं हो कि तुम ईमान वाली ओंरतों की सरदार हो।”

[المصنف لابن ابى شيبة، كتاب الفضائل، باب ماذكر فى فضل فاطمة…الخ، الحديث : ٢،ج ٧، ص ٥٢٦]

सुवाल : ह़ज़रते सय्यिदुना इमामे हसन व ह़ज़रते इमामे हुसैन رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا के क्या फ़ज़ाइल हैं ?
जवाब : हुज़ूर आक़ाए दो जहान, रहमते आ-लमिय्यान, सरवरे कौनो मकान صَلَّى الله تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَالِه وَسَلَّم के फ़रामीने अ-ज़मत निशान हैं कि
﴾1﴿ हसन व हुसैन رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا दुन्या में मेरे दो फूल हैं।
[سنن ترميذي، كتاب المناقب، باب مناقب ابى محمد الحسن بن على… الخ، الحديث : ٣٧٩٥، ج ٥، ص ٤٢٧ ]

﴾2﴿ जिस ने इन दोनों (हसन व हुसैन رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا) से मुहब्बत की उस ने मुझ से मुहब्बत की और जिस ने इन से अदावत की उस ने मुझ से अदावत की।
[المستدرك على الصحيحين، كتاب معرفة الصحابة، باب ذكر شان الاذان، الحديث : ٣٧٩٣، ج ٥، ص ٤٢٦ ]

﴾3﴿ हसन व हुसैन رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا जन्नती जवानों के सरदार हैं।
[سنن ترميذي، كتاب المناقب، باب مناقب ابى محمد الحسن بن على …الخ، الحديث : ٣٧٩٣، ج ٥، ص ٤٢٦ ]

﴾4﴿ जिस शख्स ने मुझ से मुहब्बत की और इन दोनों के वालिद ओर वालिदा ह़ज़रते सय्यिदुना मौलाए काएनात मौला अली, ह़ज़रते सय्यिदतुना बीबी फ़ातिमा ज़हरा رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا से महब्बत रखी वोह मेरे साथ जन्नत में होगा।
[سنن ترميذي، كتاب المناقب، باب مناقب على بن ابى طالب، الحديث : ٣٧٥٤، ج ٥، ص ٤١٠ ]
अल ग़रज़ अहेले बैत किराम سلام لله عليهم हम अहेले सुन्नत व जमाअत के पेश्वा हैं। जो इन से मुह़ब्बत न रखेगा वोह बारगाहे इलाही عَزَّوَ جَلَّ से मरदूद व मलऊन है। हज़राते हसनैन करीमैन عَلَيْهِمُ السَّلَام यकीनन आ’ला दरजे के शहीदों में से किसी की शहादत का इन्कार करने वाला गुमराह बद दीन है।

[हमारा इस्लाम, अहले बैते किराम عَلَيْهِمُ السَّلَام, हिस्सा : 03, स.115.]

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