इब्ने जौज़ी का क़सम खा कर गवाही देना……

इब्ने जौज़ी का क़सम खा कर गवाही देना……

इमाम ए अहलेसुन्नत इब्ने जौज़ी ने लिखा कि अबु लहब काफ़िर जिसकी मज़म्मत कुरआन में वारिद है जब उसको विलादत ए रसूल की ख़ुशी मनाने में अपनी लौंडी को आज़ाद करने का ये बदला मिला के वो दोज़ख़ में भी एक रात के लिए फ़रहत मसर्रत से हमकिनार होता है तो उन मुसलमानों के हाल पर गौर किया जाए जो आप की विलादत पर ख़ुशी का इज़हार करते और आप की मुहब्बत में ख़र्च करते हैं, मेरी जान की क़सम ! शब ए विलादत में इज़हारे मसर्रत के सबब अल्लाह अपने फ़ज़लों करम से ख़ुशी मनाने वालों को जन्नत में दाख़िल करेगा, मुसलमान हमेशा से महफ़िल ए मिलादुन्नबी से मुनक़्क़िद करते आए हैं, महफ़िल के साथ ही दावतें देते खाने वगैरा पकवाते और ग़रीबों को तोहफ़े बाटते ख़ुशी का इज़हार करते और दिल खोल कर ख़र्च करते है और विलादत बा-सआदत पर कुरआन ख़्वानी करते और अपने मकानों को सजाते हैं इन तमाम अफ़आल ए हसना की बरकत से उन लोगों पर अल्लाह की बरकतों का नुजूल होता रहता है

अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी उर्दू तर्जुमा “मोमिन के माह व साल” सफ़ह 85