Hadith 7496

एक पैग़ाम अहलेसुन्नत वल जमाअत के नाम

एक पैग़ाम अहलेसुन्नत वल जमाअत के नाम

पंजतन पाक अलैहमुस्सलाम अहलेबैत ए अतहार से बुग्ज़ो इनाद ( दुश्मनी ) रखने वाले नाम निहाद जाली पीर और जाहिल मोलवी गली गली कूचा कूचा घूम रहे हैं उनसे होशियार रहो

किसी के भी हाथ पर बैअत ( मुरीद ) होने से पहले अहलेबैत ए अतहार के मुताल्लिक़ उसका अक़ीदा पता करो क्यों की……👇👇👇👇👇

सैय्यदना अली इब्ने अबी तालिब कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम के वसीले और फैज़ के बग़ैर कोई भी दर्जा ए विलायत को नही पंहुचा सकता

सिलसिला ए नक़्शबन्दीया के शैख़ व मुफ़स्सिर हज़रत अल्लामा क़ाज़ी सनाउल्लाह पानीपती रहमतुल्लाह अलैह अपनी तफ़्सीर में रक़म तराज़ ( लिखते ) हैं : 👇

وكان قطب الارشاد كمالات الولاية على عليه السلام ما بلغ احد من الامم السابقة درجة الاولياء الا بتسط روحه.

“हज़रत सैय्यदना अली कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम कमालात ए विलायत के क़ुत्बे इरशाद हैं
साबिक़ा ( अगले ज़माने की ) उम्मतों में से भी कोई भी सैय्यदना अली कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम के वसीले व फैज़ के बग़ैर दर्जा ए विलायत को नही पंहुचा
( यानी बग़ैर हज़रत मौला अली के वसीले व फैज़ के बग़ैर कोई वली नही बना )

हवाला – तफ़्सीर ए मज़हरी 02/122

शैख़ उल मशाईख़ अहमद सरहिंदी जो मुजद्दिद ए अल्फ़े सानी के लक़ब से मशहूर हैं और सिलसिला ए नक़्शबन्दीया के जलीलुल क़द्र बुज़ुर्ग हैं आप अपने मकतूब शरीफ़ 123 में फ़रमाते हैं : 👇👇👇

“हज़रत अमीरुल मोमिनीन (सैय्यदना अली इब्ने अबी तालिब कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम) अपने जस्दे उनसरी में आने से क़ब्ल ( पहले ) भी इस मक़ाम पर फ़ाईज़ थे” .

{ बा हवाला ख़साइस अली सफ़ह 489 अज़ अल्लामा ज़हूर अहमद फ़ैज़ी }

तलबीना में ताकत ही ताकत

तलबीना में ताकत ही ताकत

सेहत सही रखने का नुस्ख़ा

एक बार जरूर पढ़ें👇

रसूलल्लाह ﷺ के घर वालों में से जब कोई बीमार होता था तो हुक्म होता के उसके लिए तल्बीना तैयार किया जाए, फिर फरमाते थे कि तल्बीना बीमार के दिल से गम को उतार देता है,
और उसकी कमज़ोरी को यूं उतार देता है जैसे के तुम में से कोई अपने चेहरे को पानी से धोकर उससे गंदगी उतार देता है।
📚इब्ने माजा )

हज़रत आयशा रज़ीअल्लाहू तआला अन्हा से रिवायत है के..

तल्बीना दिल को मजबूत करता है।
📚बुखारी)

तल्बीना बीमार के हृदय (दिल) को राहत पहुंचाता है,और उदास की उदासी दूर करता है।
📚बुखारी, व मुस्लिम शरीफ़)

हज़रत आयशा सिद्दीक़ा रज़ीअल्लाहू तआला अन्हा मय्यित के घर वालों और रोगी के लिए तल्बीना का आदेश, सूचना जारी करतीं।📙मुत्तफ़िक़ अलैह)

आज की नई साइंस रिसर्च ने यह साबित किया है कि
(जौ🌾) एक औषधीय गुण तथा स्वास्थ्य वर्धक लाभदायक अनाज है।

जौ में दूध के मुकाबले में 10 गुना अधिक कैल्शियम होता है और पालक से ज्यादा फौलाद मौजूद होता है उसमें तमाम जरूरी विटामिन्स भी पाए जाते हैं,तलबिना के सेवन से इम्युनिटी पॉवर बढ़ती है,
इंसान के लिए परेशानी और थकान के लिए भी तल्बीना फ़ायदे बख़्श है,

हुज़ूर अलैहिस्सलाम फरमाते हैं:
यह मरीज के दिल की तमाम बीमारियों का इलाज है और दिल से गम को उतार देता है”.
📚बुखारी, मुस्लिम, तिर्मीजी, नसई, अहमद,)

रिवायत है के
जब कोई नबी ﷺ से भूख की कमी कि शिकायत करता तो आप ﷺ उसे तल्बीना खाने का हुक्म देते और फरमाते के खुदा की कसम जिसके कब्जा ए क़ुदरत में मेरी जान है यह तुम्हारे पेटों से गलाज़त को इस तरह उतार देता है जिस तरह तुम में से कोई अपने चेहरे को पानी से धो कर साफ कर लेता है।
नबी ए पाक ﷺ को मरीज के लिए तल्बीना से बेहतर कोई चीज पसंद न थी। उसमें जौ के लाभों फ़ायदों के साथ शहद के गुण भी शामिल हो जाते थे। उसे नीम गरम खाने, बार-बार खाने और खाली पेट खाने को ज़्यादा पसंद करते थे।(भरे पेट भी यानी हर समय,हर उम्र का व्यक्ति उसका उपयोग कर सकता है, सेहतमंद भी,बीमार भी)

नोट:
तलबीना न सिर्फ बीमारों के लिए बल्के तंदुरुस्तों के लिए भी बहुत बेहतरीन चीज है, बच्चों,वयस्कों,बूढ़ों और घर के सारे सदस्यों के लिए खुराक ‘ टॉनिक भी, दवा भी, शिफा भी और अता भी..

खासतौर पर दिल के मरीज, टेंशन,
मानसिक तनाव,
दिमागी बीमारियां,
पेट, जिगर, पट्ठे,तंत्रिका(Neural,
मसल्स) महिलाओं, बच्चों और पुरुषों की सभी बीमारियों के लिए अनोखा टॉनिक है।

(जौ”🌾) जिसे अंग्रेजी में ‘barley’ कहते हैं, उसको दूध के अंदर डाल कर 45 मिनट तक दूध में गलने दें, और उसकी खीर सी बनाएं। उसके अंदर आप चाहे तो शहद डाल दें या खजूर डाल दे। उसे तल्बीना कहेंगे।

तल्बीना बनाने की तरकीब:👇

दूध को एक जोश (उबाल) दे कर जौ🌾 डाल दे, हल्की आंच पर 45 मिनट तक पकाएं, और चमचा🥄 चलाते रहें.
जौ🌾 गल कर दूध में मिल जाए तो खजूर मसल कर मिक्स कर लें, मीठा कम लगे तो थोड़ा शहद मिला लें, ये खीर की तरह बन जाएगा।
चूल्हे से उतारकर ठंडा कर लें ऊपर से बादाम, पिस्ता काट कर छिड़क दें.
(खजूर की जगह शहद भी मिला सकते हैं)

तल्बीना के तिब्बी फायदे ओर गुण👇

उसके कई फायदे बयान किए जाते हैं👇

  1. गम डिप्रेशन
    2.मायूसी,उदासी
  2. कमर दर्द
  3. खून में हिमोग्लोबिन की शदीद कमी
  4. पढ़ने वाले बच्चों में याददाश्त की कमज़ोरी
  5. भूख की कमी
  6. वजन की कमी
    8.कोलेस्ट्रोल की अधिकता
    9.दुर्बलता
  7. दिल और आंतों की बीमारियां
    11.पेट (stomach) का वरम,सूजन
  8. अल्सर कैंसर
    13.रोग प्रतिकारक(इम्युनिटी )को बढ़ाता है
  9. जिस्मानी कमजोरी
    15.मानसिक रोग
  10. दिमागी बीमारियां
  11. जिगर
  12. पठ्ठे
  13. निढाल होना
  14. वसवसे (ऑब्सेशन)
  15. चिंता (anxiety)
    के अलावा दूसरी बेशुमार बीमारियों में लाभदायक है, और यह भी अपनी जगह एक हकीकत है के इसमें दूध से ज्यादा कैल्शियम और पालक से ज्यादा फौलाद पाया जाता है इस वजह से तल्बीना की अहमियत बढ़ जाती है
    ईसे अपने लिए सवाब ए जारीया
    की नीयत से सबको पढ़ाये,
    दोस्तो मैसेज को अपने पास ही ना रखें बल्के अपने कोनटेक्ट में सबको शेयर करें और सवाब के हक़दार बनें,

नीर शरीफ

हज़रत सय्यद मख़दूम अशरफ जहांगीर सिम्नानी रज़ियल्लाहु अन्हु की दरगाह के पास मौजूद नीर शरीफ की हकीक़त उस दौर में किछौछा शरीफ में पानी की बहुत किल्लत थी….. इसलिए हज़रत मख़दूम पाक ने अपने मकान के करीब तालाब खोदने का हुक्म दिया, इस तालाब की खुदाई का काम मलक महेमूद के सुपुर्द किया गया था…… दरवेशों की एक बड़ी जमात यहां रहती थी, अपने फराइज़ व नवाफिल से फारिग होने के बाद उनका काम था तालाब की खुदाई….. नीर शरीफ की खुदाई इस एहतमाम के साथ होती थी कि, फावड़े का हर ज़रब ज़िक्र हद्दादी यानी ला इलाह- इल्लल्लाह मुहम्मदूर रसुल अल्लाह के ज़िक्र के साथ लगता था…… इस काम में औलिया अल्लाह, दरवेशों के साथ आप हज़रत मख़दूम पाक भी खुद अपने रफका के साथ शामिल होते थे, आपकी गैर मौजूदगी में आपकी नयाबत आपके खलीफा शेख कबीर के सुपुर्द होती…… जब तालाब की खुदाई आपके मौजूदा मज़ार शरीफ के तीनों तरफ मुकम्मल हो गई तो , आप हज़रत मख़दूम अशरफ समनानी रहमतुल्लाहि अलैह ने सात बार आबे ज़मज़म शरीफ काफी मिकदार में डालकर तालाब को भर दिया….. ये आपकी बहुत बड़ी करामत है, मक्का शरीफ में आबे ज़मज़म से अपना लोटा भरते और किछौछा शरीफ में खोदे गए तालाब में डालते जाते, इस तरह सात चक्कर में आपने पूरा तालाब भर दिया….. इसलिए नीर शरीफ के पानी में ये असर पैदा हो गया के ये पानी मसहूर यानी जादू वाले, आसेब ज़दा यानी जिन्नात वाले , पागल मरीज़ और दीगर बहुत अमराज़ के लिए आबे हयात का काम करता है…. हज़रत अब्दुर रहमान चिश्ती अपनी किताब मरातुल असरार में नीर शरीफ के बारे में फरमाते हैं…
आबे आं होज हर गीज़ गंदा नमी शुवद व आसेब ज़दा शिफा बायद यानी इस हौज़ का पानी कभी गंदा नहीं होता और आसेब ज़दा शिफा पाते हैं….. इसकी तासीर की वजह से बड़े बड़े जिन्नात भी इस पानी से पनाह मांगते हैं….
📚किताब – हयाते गौसुल आलम सफा नं. 108
👑(उर्स मुबारक -27, 28 मुहर्रम शरीफ)