हज़रत उस्मान बिन हुनैफ रदीअल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि__ एक नाबीना (अंधा) शख्स नबी ﷺ कि बारगाह मे हाज़िर हुआ और बोला आप मेरे लिए दुआ किजिए कि अल्लाह अज्जवजल मुझे शिफा अता फरमाये.
तो आप ﷺ ने फरमाया अगर तुम सब्र करो तो ये तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर होगा और अगर तुम चाहो तो मै तुम्हारे लिए दुआ करु.
तो उसने कहा ‘आप दुआ किजिए.’
आप अलैहीस्सलाम ने फरमाया__ जाओ, अच्छी तरह वूज़ु करो और फिर 2 रकात नमाज़ पढो और फिर इस तरह दुआ करो,”ऐ अल्लाह अज्जवजल मै तुझसे सवाल करता हु और तेरी तरफ रुख करता हु और मुहम्मद ﷺ नबी ए रहमत ﷺ के वसिले से तुझसे दुआ करता हुं,ऐ मुहम्मद ﷺ मैने अपनी हाज़त के लिए आप के वसिले से अल्लाह कि तरफ रुख किया,ऐ अल्लाह अज्जवजल ये वसिला कुबूल फरमा!
कट गया कुम्बा मुसीबत सर पे आई लूट गई। हो गई भाई भतीजो से जुदाई लूट गई।
इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम के शहीद होने के 2 रोज़ बाद यानी 12 वे चांद बीबी ज़ैनबे कुबरा टूटा हुवा खंजर लेकर खेमे के पास रखी हुई शहीदों की लाशकि निगरानी कर रहे थे रातका वक़्त था अंधेरे में कुछ दिख पाना मुमकिन न था इतने में कोई लाशो के करीब चलता हुवा आया सैयदा ज़ैनब ने डांटते हुवे कहा के खबरदार कोई भी हो करीब आया तो मैं अली की बेटी हु उसका कत्ल कर दूंगी ऐसे में एक ख़ातूनकी आवाज़ है के बीबी मैं हज़रते हूर की बीबी हु करीब आई और कहा मैं हज़रते हूरकी बीबी हु मैन उमर बिन सअद लानती से कहा के बीबियों को पानी देदे वरना सब प्यास के मारे मर जायेंगे आज 5 दिन हो गए है उन्होंने पानी नही पिया उसने आने दिया और आप सब के लिए मैं पानी लेकर आई हूं सैयदा ज़ैनब ने कहा अय हूरकी बीबी जब मेरा असगर प्यास के मारे तड़प रहा था तब क्यों पानी न लाई जब मेरी कासिम अली अकबर प्यासे शहीद हो गए तब पानी क्यों न लाई तू ये पानी वापस लेजा जब हूरकी बीबी ने सैयदा फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलयहा का वसीला दिया तो मान गई और खुले आसमान के नीचे बैठी हुई बीबियोंके पास गई और सैयदा सकीना बिन्ते इमामे हुसैन बेहोश पड़ी हुई थी कुछ पानीके खतरे युनके मुह पर डाले आप होशमें आई और बीबी ज़ैनब ने कहा बेटा पानी पी लो इतना सुनते ही बीबी सकीना ने पूछा क्या मेरे चचा अब्बास आ गए..
😢 बीबीया रोने लगी सैयदा जैनब ने कहा नही ये पानी हूरकी बीवी लेकर आई है और मेरे नाना की सुन्नत है के जब कोई चीज़ खाई पी जाए तो जो सबसे छोटा हो उसे पहले देते है इतना सुनकर बीबी सकीना प्याली में पानी लेकर जहां सब लाश रखी हुई थी उस तरफ दौड़ी बीबी ज़ैनब ने पकड़ा और पूछा कहा जा रही हो वहां शहीदोंकी लाशें पड़ी हुई है बीबी सकीना कहने लगी फूफी जान आपने तो कहा के जो छोटा हो उसको पहले पानी दिया जाए तो अली असगर को पानी पिलाने जा रही हु
😢 बीबिया रोने लगी और बीबी ज़ैनबने बीबी सकीना से कहा बेटी अली असगर साहिबे हौज़ कौशर से कौशर पीकर सैराब हो चुका है अब उसको दुनिया के पानी की कोई ज़रूरत नही।
जो लोग ताज़ीया शरीफ को मआज़ अल्लाह हराम कहते हैं यह उन्की ज़िम्मेदारी है के वो बताऐं के यह कुरआन शरीफ की किस आयत के मुखालिफ़ है और कोई भी हो अदना हो या आला कभी साबित नही कर सकते ऐसे लोगों के लिए अल्लाह तआला ने कुरआन शरीफ मे आयतें नाज़िल करके इनकी और इनके मकाम की पहचान बता दी है व मन लम यहकुम बेमा अनज़ला अल्लाहो फ़ ऊलाएका हुमुल काफ़ेरून ० और जो अल्लाह के नाज़िल किए पर हुक्म ना करे (यानी अपना हुक्म चलाए) वो लोग काफ़िर हैं व मन लम यहकुम बेमा अनज़ला अल्लाहो फ़ उलाएका हुमुल ज़ालेमून ० और जो अल्लाह के नाज़िल किए पर हुक्म ना करें (और अपने मनगढ़ंत हुक्म चलाऐं) वही लोग ज़ालिम है
व मन लम यहकुम बेमा अनज़ला अल्लाहो फ़ उलाएका हुमुल फ़ासेकून० और जो अल्लाह के नाजिल किए पर हुक्म ना करे (यानी अपने दुनीयावी इल्म से लोगों को गुमराह करे) वही लोग फ़ासिक़ हैं
अब फ़ासिकों , ज़ालिमों , काफ़िरों का मकाम ठिकाना ज़हन्नम है
अब चाहे अदना हो या आला हो जो भी हो और वो अल्लाह के रसूल स.अ.व.के नवासे मौला अली अ.स.के शहजादे सैयदा बीबी बतूल स.म.अ. के जिगर के टुकड़े और जन्नत के नौ जवानों के सरदार इमाम हसन अ.स.के भाई इमाम हुसैन अ.स. जिनकी आल पाक सुलतानुल अज़म ख्वाजा गरीब नवाज़ र.अ.है यानी हुसैनी निसबत से बनी ताजीयों को मआज़ अल्लाह हराम कहते है और उसे अल्लाह की किताब कुरआन शरीफ़ से अपनी बात को सही साबित नही करते पाते हैं अगर वो हलाली नुतफ़े से होगें तो ऊपर लिखी आयतों मे खूब गौरो फ़िक्र करके बारगाह ए पंजतन पाक मे इंशाअल्लाह तौबा कर लेगें लेकिन जो हराम नुतफें से होगें वो अपनी हठधर्मी मे डटे रहेंगें अल्लाह तआला ने ऐसे लोगों के बारे मे फ़रमाया है व जअलना मिम बैने ऐदीहिम सददन व मिन ख़लफ़ेहिम सददन फ़अग़शैनाहुम फ़हुम ला युबसेरून० और हमने उनके आगे दीवार बना दी और उनके पीछे एक दीवार और उन्हे ऊपर से ढाकं दिया तो उन्हे कुछ नही सूझता (कि वो कुरआन शरीफ मे अल्लाह के नाज़िल किए हलाल को हलाल समझें और हराम को हराम समझें और अपने मनगढ़ंतं इल्म से हलाल को हराम और हराम को हलाल न बताऐं ) जो हलाली लोग होगें वो इस पैगाम को पढ़कर गौरो फिक्र कर इस बात के सही या गलत होने की बात ज़रूर लिखेंगे़ ताके लोगों को सही बात मालूम हो सके और जो हरामी नुतफ़े की पैदाइस वाले होगें वो ताजिया शरीफ के बारे मे कुछ गलत बोलने के पहले अपने और अपने मकाम के बारे मे सोचने पर मजबूर होगें हक बात बोलना सिर्फ़ दुनीयावी डिगरी लिए लोगों की जिम्मेदारी नही है किसी ने हर किसी को इमाम हुसैन अ.स.का पैगाम अपने अशआर मे दिया है के वो सर कटा के ये पैगाम दे गए हैं हमें जियो तो हक के लिए और मरो तो हक के लिए के मेरे गम मे ना मसरूफ़ बैन हो जाना अगर कहीं हको बातिल की जंगं छिड़ जाऐ तो उस मकाम पे तुम भी हुसैन हो जाना
मै समझता हूँ के इस ग्रुप मे सारे मिम्बर सुम्मुन बुकमुन उमयुन शायद नही है इंशाअल्लाह अपनी अच्छी राय से ज़रूर कुछ ना कुछ लिखेगें ला इकरा फिददीन दीन मे कोई जबरदस्ती नहीं
हज़रत हुर्र (Hazrat Hurr) का जिक्र पहले गुज़रा ! आपने पढा कि हजरत हुर्र (Hazrat Hurr) रजियल्लाहु तआला अन्हु मर्दे सईद और खुशनसीब थे ! लशकर इब्जे सअद में हज़रत हमाम हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु के साथ लडने आये थे !
मगर उनकी तकदीर में कुछ और ही लिखा था ! हजरत इमाम आली मकाम रजियल्लाहु तआला अन्हु के असहाब व अंसार जब यजीदिंयों के साथ लडते हुए शहीद हो चुक थे !
हजरत इमाम रजियल्लाहु तआला अन्हु के पास भाई, भतीजों, भान्जो, लडकों और तीन खादिमों के और कोई बाकी न रहा ! तो यह सूरते हाल देखकर हज़रत इमाम बे-इख्यियार रो पडे ! और पुकार उठे ! है कोई हमारी फ़रयाद सुनने और मदद करने वाला ?
यह दर्दनाक आवाज़ सुनकर हजरत हुर्र (Hazrat Hurr) रजियल्लाहु तआला अन्हु के कानों में पडी ! तो कलेजा दहल गया ! और फौरन अपने घोडे की लगाम दोजख की तरफ़ से फेरकर जन्नत की तरफ़ कर ली !
यानी लशकर इब्ने सअद से घोडा दौडाकर हज़रत इमाम की खिदमत में हाजिर हो गये ! और रकाब का बोसा देकर अर्ज किया: हुजूर मेरा कुसूर माफ़ करें ! मेरी तौबा कुबूल होगी या नहीं ?
इमाम रजियल्लाहु तआला अन्हु ने उनके सर पर दस्ते मुबारक फेरकर फ़रमाया ! अल्लाह तआला अपने बंदों की तौबा कूबूल फ़रमाता है ! में तुमसे खुश हूं ! हजरत यह बशारत सुनकर लशकरे इमाम में शामिल हो गये !
(तजकिरा सफा 73 )
हज़रत हुर्र रजियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत हज़रत हुर्र (Hazrat Hurr) रजियल्लाहु तआला अन्हु यजीदी लशकर से निकलकर हुसैनी लशकर में आ मिले ! इस तरह उन्होंने अपने आपको आग से बचाकर जन्नत ख़रीद ली थी !
आप बहुत बडे बहादुर और दिलेर थे ! इब्ने सअद के लशकर के आप सिपहसालार थे ! इब्ने सअद ने जब उन्हें हुसैनी लशकर में मिलते हुए देखा तो वह बहुत घबराया ! और सफ़वान से कहने लगा ! तू जा ! और हुर्र को समझाकर वापस फेर वरना सर तन से जुदा कर ला !
चुनांचे सफ़वान ने हुर्र से आकर कहा कि तुम मर्दाना आकिल होकर यजीद जैसे अजीम हाकिम की रिफाकत छोडकर हुसेन की तरफ़ क्यो चले आये ? चलो वापस चलो ।
हजरत हुर्र (Hazrat Hurr) रजियल्लाहु तआला अन्हु ने फ़रमाया: अब में वापस नहीं जा सकता ! सफवान ने पूछा क्यो ? तो फ़रमाया :
क्यो छोड़ के दीन फौज में गुमराह के आऊं
हाकिम को हंसाऊं मैं, मुहम्मद को रुलाऊं
क्या हाकिमे दुनिया का तो एहसास करूं मैं
और जोहरा के रोने का न कुछ पास करूं मैं
ऐ सफ़वान ! यजीद नापाक है ! ओंर हुसेन पाक हैं ! और रैहाने मुस्तफा हैं ! सफ़वान ने गुस्से में आकर हुर्र के नेजा मारा !
हज़रत हुर्र (Hazrat Hurr) ने नेजा तोड़ डाला ! और फिर उसे एक नेजा मारा ! जो उसक सीने के पार हो गया ! और वह जहन्नम सिधार गया !
यह सूरते हालत देखकर सफ़वान के भाई दौडे !
हज़रत हुर्र (Hazrat Hurr) ने उन्हें भी मार डाला और फिर खुद वहां से फिरकर हज़रत इमाम के पास आकर अर्ज-की ! हुजूर अब तो आप मुझसे राजी हैं ! फ़रमाया में तुझसे राजी हू ! तू आजाद है ! जैसा कि तेरी मां ने तेरा नाम रखा है ! हज़रत हूर्र (Hazrat Hurr) ! यह खुशखबरी सुनकर फिर मैदान में आये !
जिस तरफ़ हमला किया कुश्तो के पुश्ते लगा दिये ! एक यजीदी ने आकर आपके घोडे को जख्मी कर दिया ! आप पैदल ही लड़ने लगे ! इमाम ने दूसरा घोडा भेज दिया !
हजरत हुर्र उस पर सवार हो गये ! लेकिन उन जालिमों ने एक दम हल्ला बोल दिया ! हज़रत हुर्र ने एक बार और खिदमत इमाम में हाजिर होने का इरादा किया ! कि गेब से आवाज आयी अब न जाओं ! हुरे तुम्हारी मुन्तजिर हैं ! हज़रत हुर्र (Hazrat Hurr) रजियल्लाहु तआला अन्हु ने वहीँ से अर्ज की या इब्ने रसूलल्लाह ! यह गुलाम आपके नाना जान के पास जा रहा है ! कुछ फ़रमाइये तो कह दूं !
इमाम ने रो रोकर फरमाया हम भी तुम्हारे पीछे आ रहे हैं ! उसके बाद हजरत हुर्र Hazrat Hurr रजियल्लाहु तआला अन्हु जालिमों के मुतावातिर हमलों से निढाल होकर गिर पडे ! और इमाम को आवाज दी !
हज़रत इमाम आवाज सुनकर दौडे ! और हुर्र को उठाकर लशकर में से ले आये ! जानू मुबारक पर उनका सिर रखकर चेहरे का गर्द व गुबार साफ़ करने लगे !
हज़रत हुर्र (Hazrat Hurr) ने अपनी आंखें खोलीं ! और अपना सिर इमाम के जानू पर देखकर मुस्कराए ! और जन्नत को सिधारे ! इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन (तज़किरा सफा 75 , सिर्रुश शहा दतैन सफा 22 )
सबक :
जिनका नसीब अच्छा हो वह किसी न किसी वक्त गुमराही से निकलकर हिदायत की तरफ़ आ जाते हैं !
हज़रत हुर्र (Hazrat Hurr) रजियल्लाहु तआला अन्हु अपने नाम के मुताबिक वाकई जहन्नम से आजादी हासिल करके जन्नत के मालिक बन गये ! और यह दर्स दे गये कि दुनिया चंद रोजा है !
एक दिन आखिर मरना है ! फिर क्यों न ऐसी मौत मरा जाये जिससे अल्लाह व रसूल खुश हों ! और आकबत दुरुस्त हो जाये !
फिर आज अगर कोई कहलाये हुसैनी और न नमाज पढे ! न दाढी रखे ! भंग पिये, चरस पिये, और बुजुर्गों की तौहीन करे !
गोया कहलाये हुसैनी और काम यजीदियों के करे तो उसके मुतअल्लिक क्यों न कहा जाये ! कि यह हुसैनी लशकर से हटकर यजीदी लश्कर में जा मिला है !
Hazrat Abdullah ibne Abbas RadiAllahu Anhuma bayan karte hain ke mai Huzoor Nabi-e-Akram SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ki Khidmat me baitha tha ke Usman bin Affan RadiAllahu Anhu Hazir hue. Jab Wo Huzoor Nabi-e-Akram SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ke Kareeb hue to Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ay Usman! Tumhe Shaheed kiya jayega darhalanke (is haal me ke) me Tum Surah Baqrah ki Tilawat karrahe hoge aur Tumhara Khoon is Aayat “Fasayak Fee Kumullahu Wahuwas Sami ul Aleem” par girega. Aur Qayamat ke Roz Tum sataye hue par Hakim banakar Uthaye jaoge! Aur Tumhare is Muqaam wa Martabe par mashriq wa magrib waale rashq karenge aur Tum Rabiah aur Mazar ke logo ke barabar logo ki Shafa’at karoge!”
Imam Hakim, Mustadrak, 3/110, Hadees no. 4555
Ye Wohi Quran e Majid hai jisme se Aap Shahadat ki Raat Tilawat karrahe they aur Aapka Mubarak Khoon Aaj bhi Uspe hai.
Allahumma Salle Ala Sayyedina wa Maulana Muhammadiw wa Ala Aalihi wa Sahbihi wa Baarik wa Sallim.