Waqia Badaz Shahdat

उम्मुल मोमिनीन सय्यदा उम्मे सलमा फ़रमातीं हैं मैंने शहादते हुसैन पर जिन्नातों को रोते और नौहा करते देखा
इमामे अहलेसुन्नत जलालुद्दीन सुयूती-तारीख़ुल ख़ुल्फ़ा 304

अल्लामा जलालुद्दीन सियुती अलैहिर्रहमा अपनी किताब तारिख़ुल ख़ुल्फा में तहरीर फरमाते हैं :-
कूफियों का ग़दर
आप(ईमाम हुसैन अलैहिस्सलाम) की शहादत के बाद 7 दिन तक दीवारों पर धूप का रंग ज़ाफरानी मालूम होता था-
सितारे एक दूसरे पर टूट कर गिरते थे-
सूरज को ग्रहण लग गया था-
आपके शहीद होने के 6 महीने बाद तक आसमान के किनारे सुर्ख रहे और वो सुर्खी आज तक मौजूद है हालांकि हज़रते ईमाम हुसैन रदीअल्लाह तआला अन्हु की शहादत से पहले उसका नामों निशान भी ना था-
कहते हैं उस दिन बैतुल मुक़द्दस में जो भी पत्थर उठाया जाता उसके नीचे से ताज़ा ख़ून निकलता था-
और लश्करे मुख़ालिफ में जितना कसम(सामान) था सब राख़ हो गया-
उन ज़ालिमों ने अपने लश्कर में एक ऊंट ज़िबाह किया तो उसके गोश्त से आग के शोले निकलते थे जब उन्होंने उसे पकाया तो वो कोयले की तरह सियाह हो गया। तारीख़ुल ख़ुल्फा


[: عَنْ أُمِ حَكِيْمٍ قَالَتْ : قُتِلَ الْحُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ ، وَأَنَا يَوْمَئِذٍ جُوَيْرِيَةٌ ، فَمَكَثَتِ السَّمَاءُ أَيَّامًا مِثْلَ الْعَلَقَةِ. ( رواه الطبراني والبيهقي. وقال الهيثمى : رواه الطبراني ورجاله إلى أم حكيم رجال الصحيح.)
______________________ حضرت ام حكيم رضي الله عنها سے مروی ہے، آپ بيان كرتی ہیں کہ حضرت امام حسين بن علی عليهم السلام کو جب شہيد كيا گیا تب میں چھوٹی بچی تھی ، اس وقت آسمان کئ دن تک ایک جمے ہوئے خون کے لوتھڑے کی طرح سرخ رہا. ( اسے امام تبرانی اور بیہقی نے روایت کیا ہے، امام ہیشمی نے فرمایا : اسے امام تبرانی نے روایت کیا ہے، اور اس کے راوی حضرت ام حكيم تک صحیح ( مسلم) کے راوی ہیں… _______________________

Hazrat Umme Hakeem Razi Allahu Anha Se Marwi Hai , Aap Bayan Karti Hain Ke Hazrat Imam Hussain Ibne Ali Alaihimussalam Ko Jab Shahheed Kiya Gaya Tab Mai Chooti Bachhi Thi , Us Waqt Aasman Kaii Din Tak Ek Jamee Howe Khoon Ke Lothre Ki Tarha Surkh Raha . ( Isse Imam Tabrani Aur Baihaqi Ne Riwayat Kiya Hai , Imam Haishami Ne Farmaya : Isse Imam Tabrani Ne Riwayat Kiya Hai , Aur Iske Raawi Hazrat Umme Hakeem Tak Sahih ( Muslim ) Ke Raawi Hain … { Tabrani Fii Mujam Al Kabeer : 113/3 , Ar Qaqm / 2836 . } { Baihaqi Fii Dalaail Un Nubuwah : 472/6 . }.

Labbaik Ya Hussain Alaihissalaam.

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