Hadith Abu Dawood: 4799

(Qayaamat ke din momin ke) Taraazu mein achchhe akhlaaq se bhari koi cheez na hogi.
(Abu Dawood: 4799)

Hadith Tirmizi: 2396

Hazrat Anas Raziyallahu Anhu riwaayat Karte hain ke Rasullullah ﷺ ne irshaad farmaaya: Jitni Aazmaish Sakht hoti hai uska badla bhi utna hi bada milta hai aur Allah Ta’ala jab kisi qaum se mohabbat karte hain to usko Aazmaish mein daalte hain. Phir jo us Aazmaish par raazi raha Allah Ta’ala bhi usse raazi ho jaate hain aur jo naraaz hua Allah Ta’ala bhi usse naraaz ho jaate hain. (Tirmizi: 2396)

Hadith Fazail e Imam Hasan Alaihissalam Imam Hussain Alaihissalam

*रसूल अल्लाह स.अ.व.स. ने फ़रमाया :- हसन व हुसैन अलैहिस्सलाम जन्नत के नोजवानों के सरदार हैं, और उन के वालिद (हज़रत अली अलैहिस्सलाम ) उन से बेहतर हैं।*

सुनन इब्ने माजा # 118

*रसूल अल्लाह स.अ.व.स. ने फ़रमाया:-हुसैन मुझसे हैं और में हुसैन से हूँ, अल्लाह उस शख़्स से मोहब्बत करता है, जो हुसैन अलैहिस्सलाम से मोहब्बत करता है।*

जामे तिरमिज़ी#3775

*रसूल अल्लाह स.अ.व.स. ने फ़रमाया:-जिसने हसन अलैहिस्सलाम व हुसैन अलैहिस्सलाम से मोहब्बत की उसने मुझसे मोहब्बत की,और जिसने इन दोनों से दुश्मनी की उसने मुझसे दुश्मनी की।*

सुनन इब्ने माजा#143

*रसूल अल्लाह स.अ.व.स. ने इमाम हसन व इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को देखा तो फ़रमाया:”ए अल्लाह में इन दोनों से मोहब्बत करता हूँ, तू भी इन दोनों से मोहब्बत फ़रमा।”*

जामे तिरमिज़ी#3782

अशरा ए मुहर्रम में दूसरों का ज़िक्र छेड़ देने वाला लानती है !

अशरा ए मुहर्रम में दूसरों का ज़िक्र छेड़ देने वाला लानती है !

हम अपने बुज़ुर्गों से पूछे या अपनी किताबों में देखे तो पता चलता है कि बुज़ुर्गाने-दीन वा उल्मा ए हक़ अहलेसुन्नत एक मोहर्रम से आशूरा तक बल्कि इससे ज़्यादा दिनों तक सिर्फ़ और सिर्फ़ शोहदा ए कर्बला अहलेबैत ए अतहार अलैहमुस्सलाम का ही ज़िक्र करते थे

मगर पिछले चन्द सालों से सुन्नियों के भेस में नासबी, ख़ारजी मोलवियों ने अहलेबैत के अलावा दीगर हज़रात का ज़िक्र करना शुरू कर दिया है और हद तो ये हो गयी की इन्होंने ऐसों के फ़ज़ाइलो मनाक़िब बयान करना शुरू कर दिए जिनके कोई फ़ज़ाइल हैं ही नही (नऊज़बिल्लाह)

ऐसे लोग सुन्नीयत का चोला ओढ़ कर दीन ओ सुन्नियत के ठेकेदार बन बैठे
नावासिब ओ ख़वारिज के बारे में इमाम शाफ़ई रदिअल्लाहो अन्हु अपने दीवान में लिखते हैं की : 👇

إذا في مجلس ذكروا عليا وسبطيه وفاطمة الزكية
فأجرى بعضهم ذكرى سواهم فأيقن إبن سلقلقيه
إذاذكروا عليا أو بنيه تشاغل بالروايات الدنية
وقال تجاوزوا يا قوم عنه فهذا من حديث الرافضيه
برئت إلى المهيمن من أناس يرون الرفض حب الفاطمية
على آل الرسول صلاة ربي ولعنته لتلك الجاهلية

“ यानि उल्मा ए हक़ जब किसी महफ़िल में सैय्यदना अली अल-मुर्तज़ा, हसनैन करिमैन और सय्यदा फ़ातिमा (रदिअल्लाहो अन्हुम) का ज़िक्रे ख़ैर करते हैं तो बाज़ लोग दूसरों का ज़िक्र छेड़ देते हैं पस मैं यक़ीन कर लेता हूँ की बेशक ये बद-ज़ात है ”

“जब भी लोग सैय्यदना अली और उनकी औलाद ए किराम (रदि अल्लाहो अन्हुम) का ज़िक्र करते हैं तो कुछ लोग ख़सीस रिवायत में मशगूल हो जाते हैं, और कहते हैं: ऐ क़ौम इस आलिम को छोड़ दो…ये राफ़ज़ी की सी बातें करता है……मैं ऐसे लोगों से अल्लाह जल्ला जलालहु की पनाह में आता हूँ जो फ़ातिमियाह ( सय्यदा फ़ातिमा की औलादों) की मोहब्बत को रिफ़्ज़ गुमान करते हैं…आले रसूल अलैहमुस्सलाम पर मेरे रब का सलाम हो,और इन जाहिलों पर उसकी लानत हो ”

हवाला 📚📚
दीवान अल-इमाम शाफ़ई 412,413