शराब नोशी

*_हर नशा आवर चीज़ हराम है और हर तरह की शराब हराम है_*

*📕 मुस्लिम,जिल्द 2,सफह 168*

*_जिस चीज़ की कसरत नशा दे उसका थोड़ा हिस्सा भी हराम है अगर चे उतने से नशा ना हो_*

*📕 अत्तमहीद,जिल्द 1,सफह 252*

*_जो दुनिया में शराब पीता है वो जन्नत में उससे महरूम रहेगा_*

*📕 बुखारी,जिल्द 2,सफह 836*

_*बेशक जन्नत में शराब होगी मगर ऐसी नहीं जैसी कि हम दुनिया में देखते हैं कि इधर हलक से नीचे उतरी और उधर आदमी इंसान से जानवर बना नहीं बल्कि वहां की शराब के बारे में खुद मौला फरमाता है*_

*_उन पर दौरा होगा निगाह के सामने बहती शराब के जाम का.सफ़ेद रंग पीने वालों के लिए लज़्ज़त.ना उसमे खुमार है और ना उससे उनका सर फिरे_*

*📕 पारा 23,सूरह सफ्फात,आयत 45–47*

*_वो जाम जिसमे ना बेहूदगी है और ना गुनहगारी_*

*📕 पारा 27,सरह तूर,आयत 23*

*_और उन्हें उनके रब ने सुथरी शराब पिलाई_*

*📕 पारा 29,सूरह दहर,आयत 21*

*ये होगी जन्नत की शराब जिसके पीने से ना तो नशा होगा और ना पेट में दर्द होगा ना इंसान बहकेगा और ना गाली गलौच की नौबत आयेगी बल्कि इसके पीने से मुश्क की तरह खुश्बूदार पसीना निकलेगा,आईये अब दुनिया की शराब पर वापस लौटते हैं*

*_शराब का आदी बुत परस्त की तरह है_*

*📕 मुसनद अहमद,जिल्द 1,सफह 272*

*_तीन आदमी जन्नत में नहीं जायेंगे 1.मां-बाप का नाफरमान 2.आदी शराबी 3.दय्यूस यानि वो मर्द जिसकी बीवी बेपर्दा घूमती हो और ये मना ना करता हो_*

*📕 मजमउज़ ज़वायेद,जिल्द 4,सफह 327*
*📕 निसाई,जिल्द 2,सफह 331*

*_जो शराब पीता है मौला उसका कोई अमल कुबूल नहीं करता ना नमाज़ और ना कोई दुआ_*

*📕 कंज़ुल उम्माल,जिल्द 5,सफह 365*

*_चोर जब चोरी करता है तो वो मोमिन नहीं रहता ज़ानी जब ज़िना करता है तो वो मोमिन नहीं रहता शराबी जब शराब पीता है तो वो मोमिन नहीं रहता_*

*📕 बुखारी,जिल्द 2,सफह 1001*

*यानि अगर ये काम जायज़ समझकर किया तो ईमान से महरूम हो जाता है*

*_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि मेरे रब ने अपनी इज़्ज़त की कसम खाई है कि जो कोई दुनिया में जितने घूंट शराब का पीयेगा तो मैं उसे उतना ही जहन्नम का खौलता पानी पिलाऊंगा_*

*📕 तिब्रानी,जिल्द 8,सफह 232*

*_अगर ये पानी ‘हमीम’ होगा तो इसके बारे में आता है जैसे ही ये मुंह के करीब आयेगा इंसान के चेहरे की खाल गल कर इसमें गिर जायेगी और जब वो इसे पियेगा तो वो पानी आंत को काटता हुआ पीछे के मक़ाम से निकल जायेगा और अगर ये पानी ‘गस्साक’ होगा तो इसके बारे में आता है कि अगर इसका एक डोल दुनिया में डाल दिया जाए तो पूरी दुनिया वाले सड़ जायें,बहरहाल जहन्नम और जहन्नम की तमाम चीज़ें बेहद तकलीफ देह है मौला अपने हबीब के सदक़े में तमाम मुसलमानो को एक आन के लिए भी जहन्नम में दाखिल ना करे-आमीन_*

*_शराब पीने वाले पिलाने बनाने वाले बेचने वाले ले जाने वाले उसकी कीमत खाने वाले सब पर अल्लाह की लानत है_*

*📕 अलमुस्तदरक,जिल्द 4,सफह 145*

*_शराबी को सलाम ना करो और जब वो बीमार हो जाए तो उसकी इयादत ना करो_*

*📕 बुखारी,जिल्द 2,सफह 925*

*_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि बेशक अल्लाह ने उस चीज़ मे शिफा नहीं रखी है जो मेरी उम्मत पर हराम की गई हो_*

*📕 तफसीरे क़ुरतबी,जिल्द 2,सफह 231*

*_शराब से बचो कि ये तमाम बुराइयों की जड़ है_*

*📕 कशफुल खिफा,जिल्द 1,सफह 459*

Hadith The 14 Najeeb

The 14 Najeeb Hazrat Musayyab Bin Nujbah (RadiAllahu Ta’ala Anhu) Hazrat Mawla Ali (عليه السلام) Se Riwayat Karte Hain Ki Huzoor Nabi e Kareem (صلى الله عليه وآله وسلم)‎ Ne Farmaya : Har Nabi Ko Saat-07 Najeeb Ata’ Kiye Gaye Jab Ki Mujhe Chawdah-14 Najeeb Ata’ Kiye Gaye. Raawi Kehte Hain Ki Hum Ne Hazrat Maula Ali Se Puchha Ki Woh Kaun Hain ? To Hazrat Mawla Ali Ne Bataaya : “Mein , Mere Dono Bete (Hasan o Hussain), Ja’far ibn Abi Talib , Hamzah ibn Abdul Mutallib, Abu Bakr, Umar, Mus’ab Bin Umayr, Bilaal, Salman, Miqdaar, Huzayfah, Ammar Aur Abd-ul-Allah Bin Mas’ood.” –. [Tirmidhi Fi As-Sunan, 05/662, Raqam-3785, Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 01/142, Raqam-1205,. Shaybani Fi Al-Ahad Wa’l-Mathani, 01/189, Raqam-244. , Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 06/215, Raqam-6047. , Ghayat-ul-Ijabah Fi Manaqib-il-Qarabah,/212, 213, Raqam-258.]

नमाज़े मुसाफ़िर

4️⃣ सवाल—– वह कौन सा हाजी है के मक्का शरीफ़ में 15 दिन ठहरने की नियत से हाज़िर हुआ उसके बावुजूद नमाज़ का क़सर करना वाजिब रहा,

4️⃣ जवाब—– वह ऐसा हाजी है जो मक्का शरीफ़ में उस वक़्त हाज़िर हुआ के योमुत्तरवियह यानी 8 ज़िल हिज्जा 15 दिन से कम रह गया तो वह 15 दिन ठहरने की नियत से हाज़िर होने के बावुजूद मुक़ीम ना हुआ बल्कि मुसाफ़िर ही रहा,

📗 बदायाउस्सनायअ् जिल्द 1 सफ़ह 98)

5️⃣ सवाल—– वह कौन लोग हैं कि एक जगह उन्होंने 15 दिन क़याम की नियत की मगर उसके बावुजूद वह मुसाफ़िर ही रहे 4.रकअत वाली फ़र्ज़ उनको 2.ही पढ़ना पड़ेगा,

5️⃣ जवाब—– इस्लामी लश्कर किसी जंगल में पड़ाव डालकर बागियों का मुहासरा करे तो 15 दिन क़याम की नियत के बावुजूद 4 रकअत वाली फ़र्ज़ उसको 2 ही पढ़ना पड़ेगा,

📗 दुर्रे मुख़्तार मअ् शामी जिल्द 1 सफ़ह 529)

6️⃣ सवाल—– किस सूरत में शरई मुसाफ़िर को 4 रकअत फ़र्ज़ पढ़ना ज़रूरी है,

6️⃣ जवाब—– मुसाफ़िर जबके मुक़ीम की इक़तदा करे तो उसको 4 रकअत फ़र्ज़ पढ़ना जरूरी है,

📗 फ़तावा आलमगीरी जिल्द 1 मिसरी सफ़ह 133)

7️⃣ सवाल—– वह कौन सी आबादी है के मुसाफिर उसमें 15 दिन ठहरने की नियत से नहीं दाखिल हुआ उसके बावुजूद उस पर 4 रकअत फ़र्ज़ पढ़ना ज़रूरी है,

7️⃣ जवाब—– मुसाफ़िर ने अपने वतने असली में 15 दिन ठहरने की नियत नहीं की उसके बावुजूद उस पर 4 रकअत फ़र्ज़ पढ़ना जरूरी है,

📓 फ़तावा आलमगीरी जिल्द 1 सफ़ह 133)
📗 अजाइबुल फ़िक़ह सफ़ह 146–147)

8️⃣ सवाल—– किस सूरत में मुसाफ़िर मुकीम के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ सकता,

8️⃣ जवाब—– 4 रकअत वाली क़जा नमाज़ मुसाफ़िर मुक़ीम के पीछे नहीं पढ़ सकता,

📗 दुर्रे मुख़्तार,
📔 शामी जिल्द 1 सफ़ह 531)

9️⃣ सवाल—– मुसाफ़िर ने मुकीम के पीछे ज़ोहर की नमाज़ पढ़ी मगर 4 रकअत पढ़ना उस पर लाज़िम नहीं हुआ, इस मसअला की सूरत क्या है,

9️⃣ जवाब—– मुसाफ़िर ने मुसाफ़िर की इक़तदा की तो इमाम को हद्स लाहिक़ हो गया (यानी रिया ख़ारिज वग़ैरह जिससे वुज़ू टूट गया) उसने मुकीम को ख़लीफा बना दिया तो इस सूरत में मुसाफ़िर ने मुकीम के पीछे ज़ोहर की नमाज़ पढ़ी मगर 4 रकअत पढ़ना उस पर लाज़िम नहीं हुआ,

📘 फ़तावा आलमगीरी जिल्द 1 मिसरी सफ़ह 91)

🔟 सवाल—– किस सूरत में मुसाफ़िर के पीछे मुकीम की नमाज़ नहीं होगी,

🔟 जवाब—– जबके मुसाफ़िर ने 4 रकअत पढ़ादी तो इस सूरत में मुकीम की नमाज़ उसके पीछे नहीं होगी अगरचे उसने क़अदा ए ऊला किया हो,, आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा बरेलवी अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान तहरीर फरमाते हैं,

मुसाफिर अगर बे नियते इकामत 4 रकअत पूरी पढ़ेगा गुनाहगार होगा और मुकीमीन की नमाज़ उसके पीछे बातिल हो जाएगी अगर 2 रकअत ऊला के बाद उसकी इक़तदा बाक़ी रखेंगे,

📚 फ़तावा रज़वियह जिल्द 3 सफ़ह 669)

1️⃣1️⃣ सवाल—– वह कौन सी चार (4) रकअत वाली नमाज़ है जिसे मुसाफ़िर को क़सर करना मना है,

1️⃣1️⃣ जवाब—– वह 4 रकअत नमाज़ सुन्नत है जिसे मुसाफ़िर को क़सर करना मना है मौका हो तो पूरी 4 रकअत पढ़े वरना सब माफ़ हैं,
हज़रत सदरुश्शरिअह रहमतुल्लाही तआला अलैह तहरीर फरमाते हैं कि,

सुन्नतों में क़सर नहीं बल्कि पूरी पढ़ी जाएगी अलबत्ता खौफ़ और रवा रवी की हालत में माफ़ हैं,

📘 बहारे शरीअत हिस्सा 4, सफ़ह 78)
📚 फ़तावा आलमगीरी जिल्द 1, मतबूआ मिस्र सफ़ह 130)
📗 अजाइबुल फ़िक़ह सफ़ह 47—4

1️⃣2️⃣ सवाल—– शरई मुसाफ़िर को मुकीम की इक़तदा के बग़ैर हालते सफ़र में 4 रकअत वाली फ़र्ज़ को 4 ही पढ़ना ज़रूरी है, उसकी सूरत क्या है,

1️⃣2️⃣ जवाब—– मुकीम होने की हालत में 4 रकअत वाली फ़र्ज़ नमाज़ क़ज़ा हो गई तो हालते सफ़र में भी उस फ़र्ज़ को 4 रकअत ही पढ़ना जरूरी है,

📘 फ़तावा आलमगीरी जिल्द 1 मिसरी सफ़ह 113)

1️⃣3️⃣ सवाल—– एक मुसाफ़िर ऐसे 5 शहर में दाखिल हुआ के जिनके दरमियान सौ 100 सौ 100, किलोमीटर का फासला है मगर मुसाफ़िर ने किसी जगह 15 दिन ठहरने की नियत नहीं की उसके बावुजूद वह हर शहर में मुकीम रहा, उसकी सूरत क्या है,

1️⃣3️⃣ जवाब—– उन शहरों में से एक शहर में तो उसका ऐसा वतन है कि जहां से वह हिजरत का इरादा नहीं रखता और बाक़ी 4 शहरों में उसकी चार बीवियां मुस्तकिल तौर पर रहती हैं तो इस सूरत में उन 5 शहरों में दाखिल हुआ और किसी जगह उसने 15 दिन ठहरने की नियत नहीं की मगर उसके बावुजूद वह हर शहर में मुकीम ही रहा,

📗 दुर्रे मुख़्तार मअ् शामी जिल्द 1 सफ़ह 532)

और बहारे शरीअत हिस्सा 4 सफ़ह 83, में है,

2 शहरों में उसकी दो औरतें रहती हों तो दोनों जगह पहुंचते ही मुकीम हो जाएगा,

📘 बहारे शरीअत हिस्सा 4 सफ़ह 83,
📗 ग़ुनियह सफ़ह 505)
📓 रद्दुल मोहतार जिल्द 1 सफ़ह 532)

1️⃣4️⃣ सवाल—– मुसाफ़िर एक ऐसे शहर में 15 दिन से कम ठहरने की नियत से दाखिल हुआ के जहां उसका वतने असली नहीं है फिर 15 दिन ठहरने की नियत के बग़ैर वह मुकीम हो गया, उसकी सूरत क्या है,

1️⃣4️⃣ जवाब—– उस शहर में मुसाफ़िर ने ऐसी औरत से शादी कर ली जिसकी सुकूनत वहां मुस्तकिल है तो इस सूरत में 15 दिन ठहरने की नियत किए बग़ैर वह मुकीम हो गया,
जैसा के हज़रत सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान तहरीर फ़रमाते हैं,

मुसाफ़िर ने कहीं शादी कर ली अगरचे वहां 15 दिन ठहरने का इरादा ना हो मुकीम हो गया,

📘 बहारे शरीअत हिस्सा 4 सफ़ह 83)
📗 ग़ुनियह सफ़ह 505)
📓 रद्दुल मोहतार जिल्द 1 सफ़ह 532)

1️⃣5️⃣ सवाल—– मुसाफ़िर अपने शहर में दाखिल हुआ मगर उस पर 4 रकअत पढ़ना वाजिब ना हुआ बलके 2.ही रकअत फ़र्ज़ पढ़ना वाजिब रहा, उसकी सूरत क्या है,

1️⃣5️⃣ जवाब—– मुसाफ़िर ने मुसाफ़िर की इक़तदा की फिर उसे हद्स हुआ (यानी वुज़ू टूट गया) तो वह अपने शहर में वुज़ू बनाने के लिए गया किसी से कलाम नहीं किया और जब वापस हुआ तो इमाम नमाज़ से फ़ारिग हो चुका था तो इस सूरत में अपने शहर में दाखिल होने के बावुजूद बना करने मैं मुसाफ़िर पर उस नमाज़ का 4 रकअत पूरी करना वाजिब ना हुआ बलके 2.ही रकअत पढ़ना वाजिब रहा,

📗 नूरुल अनवार सफ़ह 36)
📔 अजाइबुल फ़िक़ह सफ़ह 48—49)

जो ज़िक्र अहलेबैत नहीं सुन सकता

जो ज़िक्र अहलेबैत नहीं सुन सकता “नगरवधू की संतान” है हज़रत इमाम शाफ़ई फ़रमाते हैं अरबी तहरीर का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। जब हम किसी मजलिस में अली उल मुर्तज़ा हसनैन करीमैन अलैहिमुस्सलाम और हज़रत फ़ातिमतुज़्ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा का ज़िक्र करते हैं तो बाज़ लोग दूसरों का ज़िक्र छेड़ देते हैं तो बस मैं यकीन कर लेता हूं कि बेशक ये नगरवधू अर्थात रंडी की औलाद हैं जब भी लोग अली उल मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम या उनके फ़रज़नदान का ज़िक्र करते हैं तो कुछ लोग ख़सीस (घटिया) रिवायात में मशगूल हो जाते हैं और कहते हैं कि ऐ क़ौम इस आलिम को छोड़ दो ये राफज़ीयों वाली बातें करता है मैं ऐसे लोगों से अल्लाह ताला की पनाह में आता हूं जो सय्यदा फ़ातिमतुज़्ज़हरा की मोहब्बत को रिफ़्ज़ गुमान करते हैं आले रसूल (सल्लल्लाहु अलैहवसल्लम) पर मेरे रब की रहमते कामिला हो और इन जाहिलों पर उसकी लानत हो। दीवान उल इमाम उल शाफ़ई सफ़ा 238 413 तहक़ीक़ ओ तहरीर साहब्ज़ादा मख्दूम अम्मार रज़ा अलवी तर्जुमा सूफी मोहम्मद कौसर हसन मजीदी ख़ानक़ाह फैज़िया मजीदिया कानपुर नगर 10.08.20 امام شافعی فرماتے ہیں : جو ذکر اہلبیت نہی سن سکتا “رنڈی کی اولاد” (فاحشہ بدکار عورت کی اولاد) ہے: امام شافعیؒ فرماتے

वुज़ू और साइंस

بسم اللّه الرحمن الرحيم

वुज़ू और साइंस

साइंसी और तिब्बी फवाइद

वुज़ू हिफज़ाने सेहत के ज़र्रीं उसूलों में से है
यह रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में जरासीम ( किटाणु ) के ख़िलाफ़ एक बहुत बड़ी ढाल है बहुत सारे मर्ज़ सिर्फ जरासीमों की वजह से पैदा होते हैं यह जरासीम ( किटाणु ) हमें चारों तरफ से घेरे हुए हैं

हवा में ज़मीन पर और हमारे इस्तेमाल की हर चीज़ पर यह मोज़ी (नुकसान पहुंचाने वाले) जरासीम मुसल्लत हैं

जिस्म ए इंसानी की हैसियत एक क़िले (बिल्डिंग) की सी है अल्लाह तआला ने हमारी खाल की बनावट कुछ ऐसी तदबीर से फरमाई है कि जरासीम उसमें से हमारे बदन में दाख़िल नही हो सकते अलबत्ता खाल पर हो जाने वाले ज़ख़्म और मुंह और नाक के सुराख़ पर वक़्त जरासीम की ज़र्द में हैं

अल्लाह ने वुज़ू के ज़रिए ना सिर्फ इन सुराख़ों को बल्कि अपने जिस्म के हर हिस्से को जो आम तौर पर कपड़ों में ढका हुआ नहीं होता और आसानी से जरासीम की आम जगह बन सकता है दिन में पांच बार धोने का हुक्म फरमाया

इंसानी जिस्म में नाक और मुंह ऐसे आज़ा हैं जिनके ज़रिए जरासीम सांस और खाने के साथ आसानी से इंसानी जिस्म में दाख़िल हो सकते हैं
लिहाज़ा गले की सफाई के लिए ग़रारा का हुक्म दिया
और नाक को अन्दर हड्डी तक गीला करने का हुक्म दिया
बाज़ औक़ात जरासीम नाक में दाख़िल हो कर अन्दर के बालों से चिमट जाते हैं
और अगर दिन में पांच बार उसे धोने का अमल ना हो तो हम साफ हवा से भर पूर सांस भी नहीं ले सकते

उसके बाद चैहरे को तीन बार धोने की तलक़ीन फरमाई है ताकि ठन्डा पानी मुसलसल आंखों पर तैरता रहे
और आंखें जुमला (तमाम) मर्ज़ों से मेहफूज़ रहें
इसी तरह बाज़ू और पैर के धोने में भी कई तिब्बी फवाइद पोशीदा (छुपे हुए) हैं
जिनमें से हर एक की तफसील अलग अलग तौर पर बयान की जाएगी…….

इबादत और जदीद साइंस, क़िस्त 34

بسم اللّه الرحمن الرحيم

हाथों का धोना

वुज़ू करने में सबसे पहले हाथ धोए जाते हैं क्योंकि हाथों के बाद कुल्ली करनी है
और अगर हाथ जरासीम आलूदा और साफ़ नहीं होंगे तो यही जरासीम मुंह के रास्ते जिस्म में बहुत सारे मर्ज़ों का बाइस (ज़रिया) बन जाएंगे

अलग़रज़ जब हम वुज़ू के लिए हाथों को धोते हैं तो उंगलियों के पोरों में से निकलने वाली शुआएं एक ऐसा हलक़ा बना लेती हैं जिसके नतीजे में हमारे अन्दर गरदिश करने वाला बरक़ी निज़ाम तेज़ हो जाता है
और बरक़ी रोजस के ( electricrays ) एक हद तक हाथों में सिमट आती है इस अमल से हाथ ख़ूबसूरत हो जाते हैं
सही तरीक़े पर वुज़ू करने से उंगलियों में ऐसी लचक पैदा हो जाती है जिस से आदमी के अन्दर तख़लीक़ी
सलाहियतों को केनूस पर मुन्तक़िल करने की ख़ुफिया सलाहियतें बेदार हो जाती हैं

मुख़्तलिफ़ चीज़ों में हाथ डालते रहने से हाथों में मुख़्तलिफ़ कीमयावी अजज़ा और जरासीम लग जाते हैं
अगर हाथ सारा दिन धोए जाएं तो जल्द ही हाथ इन जिल्दी (स्किन) अमराज़ (मर्ज़ों) में मुब्तला हो सकते हैं
हाथों की गर्मी, दाने, जिल्दी सोज़िश, ऐगज़िमा, फफोंदी की बीमारियां, खाल की रंगत तब्दील हो जाना वगैरह
जब हम हाथ धोते हैं तो उंगलियों के पोरों से शुआएं निकल कर एक ऐसा हलक़ा बनाती हैं जिस से हमारा अन्दरूनी निज़ाम मुतहर्रिक हो जाता है
और एक हद तक बरक़ी रो हमारे हाथों में सिमट आती है इस से हमारे हाथों में हुस्न (ख़ूबसूरती) पैदा हो जाता है

कुल्ली करना👇

कुल्ली और ग़रारा करने से नमाज़ी टांसलज़ और गले के बे शुमार मर्ज़ों से बच जाता है
हत्ता के गले में बार बार पानी पहुंचाना आदमी को गले के कैंसर से बचाता

हवा के ज़रिए ला तादाद मोहलिक जरासीम नीज़ ग़िज़ा के अजज़ा हमारे मुंह और दांतों में लुआब के साथ चिपक जाते हैं
चुनान्चे वुज़ू में मिसवाक और कुल्लियों के ज़रिए मुंह की बहतरीन सफाई हो जाती है
अगर मुंह को साफ न किया जाए तो इन अमराज़ का ख़तरा पैदा हो जाता है एडज़ कि इसकी इब्तिदाई अलामात में मुंह का पकना भी शामिल है,
मुंह के कनारों का फटना,
मुंह में फफोंदी की बीमारियां और छाले वग़ैरह,

इबादत और जदीद साइंस किस्त 36

بسم اللّه الرحمن الرحيم

चहरा धोना

चहरे का धोना बे शुमार अमराज़ से महफ़ूज़ रखता है मसलन चहरे के उज़लात में चमक और खाल में नरमी और लताफत पैदा हो जाती है गर्दो ग़ुब्बार साफ़ हो कर चहरा बा रोनक़ व पुर कशिश और बा रुअब हो जाता है

दोराने ख़ून कमो बेशी हो कर एअतिदाल की शक्ल पैदा हो जाती है आंख के उज़लात को तक़वियत पहुँचती है चमक ग़ालिब आ जाती है आंखें पुर कशिश ख़ूबसूरत और पुर ख़ुमार हो जाती हैं चहरे पर तीन बार हाथ फ़ेरने से दिमाग़ पुर सुकून हो जाता है

मोजूदा दोर में हर तरफ़ ऐटमी धमाके हो रहे हैं माहिरीन बार बार ख़बरदार कर रहे हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा दरख़्त लगाए जाएं और आलूदगी को कम किया जाए चहरे और खुले आज़ा को धोया जाए वरना यह कैमीकल्ज़ जो धुएं गरदो ग़ुब्बार और धूल की शक्ल में चहरे पर जमते रहते हैं उनका वाह़िद इलाज सिर्फ और सिर्फ वुज़ू है धुएं में कई ख़तरनाक कैमीकल्ज़ मसलन शीशा वग़ैरह होते हैं जो मुस्तक़िल या कुछ अर्से के लिए खाल पर जमे रहें तो खाल के मर्ज़ और ऐलर्जी वग़ैरह के मर्ज़ पैदा हो जाते हैं चहरा धोने से चहरे पर दाने नही निकलते या फिर उनके निकलने की शरह कम हो जाती है माहिरीन हुस्नो सेहत इस बात पर मुत्तफि़क़ हैं कि तमाम किरीमें उबटन और लोशन चहरे पर दाग़ छोड़ते हैं हुस्न और ख़ूबसूरती के लिए चहरे का कई बार धोया जाना अज़ हद ज़रूरी है

चहरे के ऐलर्जी के मरीज़ अगर चहरे को वुज़ू के वक़्त अच्छी तरह धोएं तो ऐलर्जी के नुक़सानात कम हो जाते हैं मेहकमा माहोलयात के माहिरीन इस बात पर मुत्तफि़क़ हैं कि ऐलर्जी से बचने के लिए चहरे को बार बार धोया जाए और ऐसा सिर्फ वुज़ू के ज़रिए ही मुमकिन है

चहरा धोने से चहरे का मसाज हो जाता है और दोराने ख़ून चहरे की तरफ़ रवां हो जाता है मज़ीद यह के जमी हुई मैल और गर्द उतर जाती है जिस से चहरे का हुस्न बढ़ जाता है चहरे को तीन बार धोने की हिकमत यह है कि पहले चहरे पर पानी डाल कर मैल को नरम करें दुसरी बार पानी से उस पर से मैल उतर जाएगी और तीसरी बार धोने से चहरा धुल कर साफ़ व शिफ़ाफ़ हो जाता है

एक लोहार को एक डाक्टर कह रहा था कि आप जब भट्टी बन्द करके जाएं तो पहले आंखों पर तीन बार पानी के छींटे मार लिया करें इस से छोटे छोटे ज़र्रात साफ़ हो जाते हैं और आइन्दह आप की आंखों को नुक़सान नहीं पोंहचेगा आंखों के डाक्टर आंखें आ जाने पर यही इलाज तजवीज़ करते हैं कि आप आंखों को पानी से धोएं बीमारी के बाद जो आपने आंखों को धोना ही है तो बीमारी से पहले ही धोलें ताकि बीमारी के दर्द से बचा जा सके और डाक्टर की फ़ीस से भी….

चहरे की क्रीमें और वुज़ू

आज कल लोग चहरे की खाल को मुलायम और ख़ूबसूरत रखने के लिए बहुत सी क्रीमें इस्तेमाल करते हैं लेकिन जो जवान है वो क्रीम ना भी लगाए तो अच्छा ही लगता है अगर आपकी क्रीम खाल को अच्छा करती है तो आप बढ़िया से बढ़िया क्रीम लाएं और 90 साला बूढ़े को लगाएं तो यह क्रीम उस बूढ़े के चहरे का कुछ नही कर सकेगी क्योंकि उस बूढ़े का चहरा झुर्रियों के ज़द में आ चुका है और उन झुर्रियों का इलाज वुज़ू के पास है जिसके अन्दर static electricity का एक तवाज़ुन मोजूद होता है और एक सेहत मन्द जिस्म की fhysiology का इस बर्क़ी तवाज़ुन से गहरा रिश्ता है फिज़ाई हालात इस तवाज़ुन को बुरी तरह मुतअस्सिर करते हैं नतीजतन आदमी कई क़्सम की नफ़सियाती बीमारियों का शिकार हो जाता है खाल के मर्ज़ चहरे पर झुर्रियाँ आ जाना static electricity के अदमे तवाज़ुन की वजह से है यह आजकल acupuncture के ज़रिए से इसके तवाज़ुन को ठीक करते हैं बिजली और पानी मिल कर किया करते हैं यह बताने की ज़रूरत नहीं है यही वजह है रसूल ए पाक ने फ़रमाया वुज़ू तमाम ख़ताओं को धोकर दूर कर देता है जिस्म पर पानी पड़ते ही वो static electricity पूरे जिस्म में दोड़ जाती है खाल की बीमारी और चहरे की झुर्रियाँ दूर करने में वुज़ू का बड़ा हाथ है खाल के नीचे नज़दीक तरीन छोटे छोटे पठ्ठे काम करना छोड़ देते हैं और वक़्त से पहले ही झुर्रियाँ पड़ना शुरू हो जाती हैं इन wrinkles का आगाज़ चहरे से ही होता है अब आप समझ गए होंगे कि नमाज़ियों के चहरे क्यों चमकदार होते हैं ? यह सब वुज़ू का कमाल है वुज़ू का माना ही पाकीज़गी और ख़ूबसूरती है हमारे यहाँ करोड़ों रुपये कासमेटिकस पर ख़र्च किया जाता है फिर फायदा सिफर, याद रखिये दस गुना ज़्यादा ख़र्च भी वुज़ू की बरकात का मुक़ाबला नहीं कर सकता

अमेरीकन कोंसल की मेम्बर लेडी बेचर ने अजीब व ग़रीब इनकिशाफ़ किया है कि मुसलमानों को किसी क़िस्म के कीमयावी लोशन की ज़रूरत नहीं है इनके इस्लामी वुज़ू से चहरा साफ़ हो जाता है और कई मर्ज़ों से बच जाता है

मेडिकल के उसूल के मुताबिक़ वुज़ू में चहरा धोने से भोंएं पानी से तर हो जाती हैं और अगर भोंओं में नमी रहे तो आंखों की एक ऐसी ख़तरनाक बीमारी से इंसान बच जाता है जिसमें आंख के अन्दर ( रतूबते ज़ुजाजिया ) कम या ख़तम हो जाती है और मरीज़ आहिस्ता आहिस्ता आंखों की रोशनी से महरूम हो जाता है…..