
कर्बला के 35वें शहीद हज़रते अदहम इब्ने अमीतुल अब्दी
आप बसरा के रहने वाले थे। आपने कूफ़े में सुकूनत इख़्तेयार कर ली थी आप निहायत मोतमिद किस्म के शिया थे। मारिया कृबतीया के मकान में जहाँ शिया जमा हुआ करते थे और बाहमी मशविरे हुआ करते थे। वहाँ यह भी पाबन्दी से जाते और मशवरे से लोंगो को आगाह करते थे। एक दिन यज़ीद बिन सबीत ने कहा कि मैं अनक्रीब इमाम हुसैन की इमदाद के लिये मक्का-ऐ-मोअज्ज़मा जाऊँगा यह सुन कर आप ने भी इज़हारे ख़्याल किया और कहा, बेशक जाना चाहिये, और सुनो ! मैं भी तुम्हारे हमराह चलूँगा चुनान्चे यह हज़रात कूफ़े से रवाना होकर मक्का-ऐ-मोअज़्ज़मा पहुँचे और इमाम हुसैन अ० के हमराह ही करबला आये। उन्होने कमाले दिलेरी से यौमे आशूरा जाने अज़ीज़ इमाम हुसैन अ० पर कुर्बान कर दी।
📝72 तारे अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

