14 सफर उल मुजफ्फर 38 हिजरी यौम ए शहादत हजरत मुहम्मद इब्ने अबू बकर सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो)

14 सफर उल मुजफ्फर 38 हिजरी यौम ए शहादत हजरत मुहम्मद इब्ने अबू बकर सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो)

हज़रत मुहम्मद बिन अबू बकर सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो) आप उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा (रजी अल्लाह अन्हा) के भाई हैं.
खिलाफ़ते रशीदा के ख़लीफ़ा ए अव्वल के यानी हज़रत अबू बकर सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो) के साहबज़ादे हैं.

हज़रत अबू बकर सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो) की वफ़ात के बाद हज़रत मुहम्मद बिन अबू बकर (रजी अल्लाह अन्हो) की परवरिश मौला ए कायनात हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) की देख-रेख में हुई.

मौला अली  ने आपको मिस्र का हाकिम मुक़र्रर किया था.
लेकिन  मौला अली की शहादत के बाद अमीरे शाम यज़ीद के बाप मुआविया) ने मिस्र पर उमरू बिन अलआस के ज़रिये हमला किया जिसमें हज़रत मुहम्मद बिन अबू बक्र को शिकस्त हुई.

मुआविया के हुक्म की तामील में उन्हें पकड़ पर मुर्दा गधे की खाल में बाँधा गया और आग में जलाकर आपको बड़े ही ज़ालिमाना और दर्दनाक तरीके से शहीद कर दिया गया. उस वक़्त आप रोज़े की हालत में थे.

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैही राजिऊन

उम्मुल मोमिनीन सैय्यदा आयशा र.अ. को जब हज़रत मुहम्मद बिन अबू बकर र.अ. की शहादत की ख़बर हुई तो आप बोहत रोईं और उसके बाद ज़िन्दगी भर अपने कभी भुना हुआ गोश्त नहीं खाया..
आप फ़रमाती हैं कि मैं उसे अपना भाई और बेटा समझती हूँ..

इमाम मुहम्मद बिन जरीर तबरी कि रिवायत के मुताबिक उम्मुल मोमिनीन सैय्यदा आयशा र.अ. हर नमाज़ के बाद अमीरे शाम (यज़ीद के बाप) और उमरू बिन अलआस के लिये बददुआ किया करती थीं.

1. मुहम्मद बिन अब्दुल बर्र – अल इस्तिआब जि.1 स.349
2. मुहम्मद बिन जरीर तबरी – तबरी – जि.4 स.79
3. इब्ने असीर – अलकामिल जि.3 स.180
4. इब्ने खल्दून – खल्दून जि.2 स.182
5. इब्ने कसीर – अल्बिदाया वन्निहाया बाब शहादत मुहम्मद