हज़रते नईम इब्ने अजलान अन्सारी अलैहिस्सलाम

⚫हज़रते नईम इब्ने अजलान अन्सारी अलैहिस्सलाम

आप क़बीला ख़ज़रज के चश्मों चराग थे। आप के दो भाई और थे। एक का नाम नज़र और दूसरे का नाम नोमान था ये तीनो भाई अमीरुल मोमिनीन हज़रते अली अलै० के असहाब में से थे। इन लोगो ने जंगे सिफ़्फ़ीन में बड़ी जवाँ मर्दी का सबूत दिया था शुजाअत उन के घर की लौंडी थी ये शायर भी थे। नज़र और नोमान वाक्या-ए-करबला से पहले वफात पा चुके थे। और नईम जंगे करबला में शरीक हुऐ।

नईम का शुमार हुसैनी वफादारों में था आपको जब पता चला कि फर्ज़न्दे रसूल इमाम हुसैन अलै० आज़िमे इराक़ हैं तो आप कूफ़े से निकलकर हज़ की ख़िदमत में आहाज़िर हुए और आशुरे के दिन पहले हमले में शहीद हो गये।

📝72 तारे, अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

कर्बला के चौथे शहीद हज़रते इमरान इब्ने कअब अल-अशजई

कर्बला के चौथे शहीद हज़रते इमरान इब्ने कअब अल-अशजई

आप का पूरा नाम् इमरान इब्ने काब इब्ने हारिस अल-अशजई था। आप निहायत शुजा और बे-इन्तेहा दीनदार थे। आप ने इमाम हुसैन अ० का जिस वक़्त से साथ इख़्तेयार किया है आख़िर दम तक उसी पर कायम रहे। यहाँ तक कि आप ने सुबहे आशूर जंगे मगलूबा में जामे शहादत नोश फरमाया।

कर्बला के पांचवें शहीद हज़रते खज़ला इब्ने उमर अल-शीबानी

🔰कर्बला के पांचवें शहीद हज़रते खज़ला इब्ने उमर अल-शीबानी

आप इमामे हुसैन अलै० के वफ़ादरों में थे। आप इमामे हुसैन अलै० पर कुरबान होने को तय्यार रहते थे। आले मोहम्मद की ख़िदमत में जान कुरबान करने में खुशी महसूस करते थे। सुबहे आतूर जो दुश्मन की तरफ से कयामत खेज़ हमला हुआ था जनाबे ख़ज़ला इसी में शहीद हो गये थे।

कर्बला के छठवें शहीद हज़रते कासित बिन ज़ुहैर अल-तग़लबी अलैहिस्सलाम

💠 कर्बला के छठवें शहीद हज़रते कासित बिन ज़ुहैर अल-तग़लबी अलैहिस्सलाम

आप का पूरा नाम कासित इब्ने ज़ुहैर इब्ने हारिस तग़लबी है। आप हज़रत अमीरूल मोमिनीन के असहाब में से थे। इन की बहादुरी के कारनामे मशहूर हैं। जंगे जमल व सिफ़्फ़ीन और नहरवान में आपने पूरी जाँबाज़ी की है और बड़ी बे-जिगरी से लड़े हैं। आप को जब ये मालूम हुआ कि र्ज़न्दे रसूल इमाम हुसैन अलै० करबला में पहुँच गये है तो आप रात के वक़्त कूड़े से रवाना हो कर वारिदे करबला हुऐ और आप ने सुबहे आशूर इमाम हुसैन अलै० पर जान दे दी।

कर्बला सातवें शहीद हज़रते करदूस बिन जु़हैर-अल-तगलबी)

💠कर्बला सातवें शहीद हज़रते करदूस बिन जु़हैर-अल-तगलबी)

आप का नाम कदूस इब्ने जुहैर हरस अल-तगुलबी था आप को कर्श भी कहते थे। आप सित इब्ने जुहैर के हकीकी भाई थे और असहाबे अमीरुल मोमिनीन में आप का शुमार था। आप के एक भाई और थे जिनका नाम मस्कृत इब्ने जुहैर था। यह भी सहाबी-ए-अमीरुल मोमिनीन थे। एक रिवायत की बिना पर ये तीन भाई एक साथ ब-वक़्ते शब करबला पहुँचे थे और यौमे आशूर एक ही साथ शहीद हुऐ थे।