
कर्बला के 63वें शहीद हज़रते जिनादा बिन हरस अल-सलमानी
आप क़बीला-ए-मदहज की एक शाख मुराद के ब-मुराद र्ट्ज़न्द थे। आपको सलमानी खानदान के एतवार से कहा जाता था आप कूफ़े के रहने वाले और आले मोहम्मद के दोस्त दारो में से थे। आप की शीअत बहुत मशहूर थी और, आप हज़रत अली अलै० के असहाबे ख़ास में से थे। आपने जनाबे मुस्लिम इब्ने अकील की कूफे में पूरी रिफाकत की और उनकी हिमायत में अपना फ्रीज़ा अदा किया। वहा से रात के वक़्त रवाना हो कर ख़िदमते इमाम हुसैन में हाज़िर हुये और त-हयांत साथ रहे।
करबला में यौमे आशूर निहायत दिलेरी के साथ जंग की और नरगे में घिर गये। आप को बचाने के लिये हज़रत अब्बास तशरीफ ले गये और वापस ले गये। प्यास के गल्बे ने बेचैन कर रखा था। फिर दोबारा मैदान में जा कर शहीद हो गये।

