कर्बला के 64वें शहीद हज़रते आबिस इब्ने शबीब अल-शाकरी

कर्बला के 64वें शहीद हज़रते आबिस इब्ने शबीब अल-शाकरी

आपका पूरा नाम और नसब आबिस इब्ने अबी शबीब इब्ने शाकेरी इब्ने रबीया इब्ने मालिक इब्ने सअब इब्ने माविया इब्ने कसीर इब्ने मालिक इब्ने जशम इब्ने हाशिद हमदानी शाकरी था। आप कबीला-ए-बनी शाकिर की यादगार थे। आप निहायत बहादुर, रईस, आबिदे जिन्दादार और अमीरूल मोमिनीन के मुख़लिस तरीन मानने वाले थे। आपके क़बीले बनी शाकिर पर अमीरूल मोमिनीन को बड़ा ऐतेमाद था। इसी वजहा से आपने जंगे सिफ़्फ़ीन में प्रमाया था कि अगर क़बीला-ए-बनी शाकिर के एक हज़ार अफ्राद मौजूद हों तो दुनिया में इस्लाम के सिवा कोई मज़हब बाकी न रहेगा ।

जब जनाबे मुस्लिम इब्ने अकील कूफ़े पहुँचे थे आपने सबसे पहले मद्द का यकीन दिलाया था और उनके कूफा के दौरान क्याम में उनकी पूरी मद्द की थी। फिर जनाबे मुस्लिम का ख़त लेकर मक्का-ए-मोअज़्ज़मा इमाम हुसैन अलै० के पास गये और उन्हीं के हमराह करबला-ए-मोअल्ला पहुँचे।

यौमे आशूरा जब आप मैदान में तशरीफ लाये और मुबारज़ तलबी की तो कोई भी आप के मुकाबले के लिए न निकला। बिल आख़िर आप पर एजतेमाई तौर पर पथराओ किया गया। फिर बेशुमार अफ्राद ने मिलकर हमला करके शहीद कर दिया। इसके बाद सर काट लिया।

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