कर्बला के 62वें शहीद हज़रते उमर बिन जिनादहे अन्सारी

कर्बला के 62वें शहीद हज़रते उमर बिन जिनादहे अन्सारी

आप अपने वालिदे माजिद जिनादः के हमराह मक्का-ए-मोअज़्ज़मा होते हुऐ करबला पहुँचे आप कमसिन थे आपकी मादरे गिरामी आपके साथ ही थीं जनाबे जिनादः की शहादत के बाद माँ ने बेटे को आलाते हर्ब से आरास्ता करके इज़्ने जिहाद की ख़ातिर इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में भेजा। इमाम हुसैन अलै० ने फरमाया की बेटा अभी-अभी तुम्हारे बाप ने शहादत पाई है। मैं तुम्हें मैदान की इजाज़त देकर कैसे तुम्हारी माँ को नाराज़ और रंजीदा कर सकता हूँ उसने अर्ज़ की मौला ! मुझे मेरी माँ ने तय्यार करके भेजा है। इस के बाद इमाम हुसैन अलै० ने जंग की इजाज़त दी और उमर इब्ने जिनादः मैदान में जाकर शहीद हो गये।

आपकी शहादत के बाद दुश्मनों ने आपका सर काट कर ख़यामे हुसैनी की तरफ फेका उमर इब्ने जुनादः की माँ ने सर को उठा कर आँखों पर बोसे दिये और फिर उस को वापिस फेक कर कातिल कै सीने पर दे मारा और वह कत्ल हो गया।

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