कर्बला के 44वें शहीद हज़रते उमर इब्ने क़रज़ा अल-अन्सारी

कर्बला के 44वें शहीद हज़रते उमर इब्ने क़रज़ा अल-अन्सारी

आप का पूरा नाम और नसब ये है :- ‘उमर इब्ने करज़ा इब्ने कअब इब्ने उमर इब्ने आएज़ ज़ैद इब्ने मनात इब्ने सलबा इब्ने कअब इब्ने अल-ख़ज़रज अल अनसारी अल कूफी अल ख़जरजी कूफ़ी था।

आप के वालिदे माजिद जनाब करज़ा अनसारी रसूल स० के सहाबी थे आप से ऑ हज़रत की बहुत सी हदीसे हैं। ऑ हज़रत के बाद आपको हज़रत अली अ० के सहाबी होने का शरफ हासिल हुआ। आप मदीने मुनव्वर से कूफ़े आकर मुकीम हुऐ और जंगे जमल-ओ-सिफ्फीन और नहरवान में आप ने हज़रत की बैअत में जंग की आपको अमीरूल मोमिनीन ने फारस का हाकिम बना दिया था। सन 51 हिजरी में आपकी वफात हुई कूफ़े में सबसे पहले हज़रत अली अ० के बाद आप का नौहा पढा गया। करज़ा ने कई औलादे छोड़ीं जिस में सब से ज़्यादा मशहूर उमर इब्ने करज़ा थे।

जनाबे उमर इब्ने करज़ा ने रास्तों की बन्दिश से पहले इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में ब-मकाम करबला अपने को पहुँचा दिया था। आप करबला में उमरे सअद के पास पैग़ामात पहुँचाया करते थे।

आप इमाम हुसैन अलै० से इजाज़त लेकर यौमे आशूरा मैदाने जंग में आये और आप ने रजज़ पढ़ कर ज़बरदस्त हमला किया और काफी ज़ख़्मी होकर इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ जब इमाम हुसैन अलै० पर दुश्मनों ने हमला कर दिया तो आप तीरो को सीने पर लेने लगे यहाँ तक कि शहीद हो गये। (ज़िक्र-अल-अब्बास सफहा न०२२३)

📝72 तारे अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

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