कर्बला के 43वें शहीद हज़रते नाफेअ इने हिलाल-अल-जमली

कर्बला के 43वें शहीद हज़रते नाफेअ इने हिलाल-अल-जमली

आप का पूरा नाम नाऊ इब्ने हिलाल इले नाअ इब्ने हमल इब्ने सअद अल-अशीरा इब्ने मदहज अल-जमली था। आप बुजुर्गे कौम और शरीफुफ्स थे। मिल्लत की सरदारी और रियासत आप की खानदानी विरासत थी। आप बहादुर, कारी-ऐ-कुरआन, रावी-ऐ-हदीस और मुंशी-ए-कामिल थे आप को हज़रत अली अलै० के असहाब में भी होने का शरफ हासिल था आप ने जंगे जमल, सिफ़्फ़ीन और नहरवान में शिरकत की थी। कूड़े में जनाबे मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत से ब्ल ही आप इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में पहुँच गये थे। लश्करे हुर्र से मुलाकात के बाद सय्यदुश शोहदा ने जिस खुतबे में ये फमाया था कि तुम लोग चले जाओ यह लोग सिर्फ मेरा खून बहाना चाहते है। इस का जवाब असहाब में जुहैर ने सबसे पहले दिया था उन के बाद नाफेअ इब्ने हिलाल ने ही एक तवील तक़रीर में जॉनिसारी का यकीन दिलाया था।

करबला में पानी बन्द हो जाने के बाद हुसूले आब में आपने भी काफी जद्दो-जेहद की थी। एक दो बार हज़रते अब्बास अलै० के साथ भी सई-ए-आब में गये थे। आपने अपने तमाम तीर ज़हर में बुझाऐ हुये थे बारहाँ दुश्मनों को तीर से मार कर तलवार से हमला करने लगे और बेशुमार दुश्मनों को ज़ख़्मी कर दिया बिल आख़िर शिम्र ने आप को शहीद कर दिया।

📝72 तारे अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

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