Barkat e Sadaat part-1





अल्लाह फरमाता है:

قل لا اسئلكم عليه أجرا إلا المودة في القربي

ऐ महबूब! फरमा दीजिए मैं तुम से कुछ नहीं मांगता, इतना ज़रूर कहता हूँ कि मेरे करीबों से मुहब्बत करो।

हमारे रसूलुल्लाह
का इर्शाद है कि:
चार शख़्स ऐसे हैं जिन की में कयामत के दिन में शफाअत करूंगा अगर्चे वह तमाम एहले ज़मीन के गुनाहों जितने गुनाह लेकर आऐं (1) मेरी आल की तक्रीम करने वाला (2) उनकी हाजात पूरी करने वाला (3) उनके कामों में दौड़ धूप करने वाला (4) ज़बान और दिल से उनको चाहने वाला। (अल् सवाईक मेहरका)

मज़ीद इर्शाद फरमाते हैं:
मुझसे मुहब्बत करो अल्लाह की वजह से और मेरे एहले बैत मुहब्बत करो मेरी मुहब्बत की वजह से। (किताबुल शिफा) से
आले अतहार की वजह से दोज़ख़ से रिहाई का परवाना और अज़ाबे हथ से अमान की दलील है…. अल्लाह अल्लाह सब ईमान वालों ने अपने महबूब की औलाद को अपनी औलाद से महबूब तर रखा।

सैयदना सिद्दीक अकबर फरमाते हैं कि:
खुदा की कुसम में अपने करीबों से ज्यादा हुज़ूर के एहले बैत को अज़ीज़ रखता हूँ। (सहीह बुखारी)

सैयदना फारूक आज़म ने अपने लख्ते जिगर अब्दुल्लाह की निस्बत हसनैन करीमेन रिज़वानुल्लाहि तआला अलैहिम अजमईन को दोगुना माले गुनीमत दिया (अल् रियाजुल नज़रा) और एक दफा इमाम हसन से फरमाया कि:
अल्लाह के बाद तुम्हारी बरकत से हमें इज्ज़त व अज़मत अता
सैयदना अबु हुरैराने इमाम हुसैन के पाए अक्दस अपने कपड़े से पोंछे और कहा कि:
अल्लाह की क़सम ! जितने आपके फज़ाइल में जानता हूँ लोग में जान लें तो आपको कंधों पर उठाए फिरें। (इज़हारुल सआदत)

इमाम शाफई फरमाते हैं कि:
एहले बैत! तुम्हारी मुहब्बत को अल्लाह ने कुरआन में फर्ज़ करार दिया है। हमारी शान के लिए यही काफी है कि जिसने तुम पर दुरूद न पढ़ा इसकी नमाज़ नहीं होगी।

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