हज़रत अली से गर्मी और सर्दी दूर होने की खुसूसियत

हज़रत अली से गर्मी और सर्दी दूर होने की खुसूसियत

हदीस-

रावीयान ए हदीस, मुहम्मद बिन यहया बिन अय्यूब बिन इब्राहीम, हाशिम बिन मुख़ल्लद बिन इब्राहीम, अय्यूब बिन इब्राहीम, मुहम्मद बिन यहया, इब्राहीम बिन मैमून, अबु इस्हाक़ अल्-हम्दानी ।

हज़रत अब्दुर्रहमान बिन अबु लैला बयान करते हैं कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम, शदीद गर्मी में हमारे पास तश्र‘ीफ़ लाए तो आप सर्दी का लिबास ज़ेब तन किए हुए थे और सर्दी में हमारे पास तश्र’ीफ़ लाए तो आप गर्मी का लिबास पहने हुए थे। आपने पानी मँगवाकर पिया और अपनी पेशानी से पसीना साफ़ किया। जब वो घर को लौट गए तो मैंने अपने वालिद से पूछा कि, “आपने अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम को देखा कि वो सर्दियों में हमारे पास आए तो गर्मियों का लिबास पहने हुए थे और गर्मियों में आए तो सर्दियों का लिबास ज़ेब तन किए हुए थे।”, अबु लैला कहते हैं कि मैं ना समझ सका कि ये क्या मामला है।

चुनाँचे वो अपने बेटे अब्दुर रहमान का हाथ पकड़कर, हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पास आए और जो बात उनके दरमियान हुई थी वो मौला ए कायनात, हज़रत अली करम अल्लाहु वज्हुल करीम की खिदमत में अर्ज कर दी।

हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने मेरी तरफ़ पैगाम भेजा तो मैं आशूब चश्म में मुब्तिला था। आपने मेरी आँखों में अपना लुआब ए दहन मुबारक लगाकर फरमाया, “आँखें खोलो”, मैंने अपनी आँखें खोली तो उस वक्त से लेकर आज तक मुझे कभी कोई तकलीफ़ नहीं हुई और आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने मेरे लिए दुआ फरमाई, “ऐ अल्लाह इस से सर्दी और गर्मी की तकलीफ़ को दूर फरमा दे। पस मुझे आज के दिन तक कभी सर्दी और गर्मी की तकलीफ़ नहीं हुई।”

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