दरबार ए मुस्तफ़ा में मकाम ऍ अली

दरबार ए मुस्तफ़ा में मकाम ऍ अली

पहली हदीस

रावीयान ए हदीस, इस्माईल बिन मसऊद अल्-बसरी, खालिद बिन अल्-हारिस, शुबह, अबु इस्हाक़।

हज़रत अल्-अला बिन इरार से रिवायत है कि एक आदमी ने हज़रत इब्न ए उमर रज़िअल्लाहु अन्हो से हज़रत उसमान रज़िअल्लाहु अन्हो के बारे में पूछा तो आपने फरमाया कि, “हज़रत उस्मान रज़िअल्लाहु अन्हो, उन लोगों में से थे, जो दो लश्करों के टकराने के दिन पुश्त फेरकर भाग गए, पस अल्लाह ने उनके गुनाहों को माफ़ फरमा दिया फिर उन्होंने लगज़िश की तो उन्हें शहीद कर दिया गया।

फिर उस शख्स ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम के बारे में पूछा तो आपने फरमाया, “उनके बारे में ना पूछें, क्या तू नहीं देखता की रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के पास उनका क्या मक़ाम है । “

दूसरी हदीस

रावीयान ए हदीस, हिलाल बिन अल्-अला बिन हिलाल, हुसैन बिन अय्यश, जुहैर बिन मुआविया, अबु इस्हाक़, अल्-अला बिन इरार ।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़िअल्लाहु अन्हो से पूछा कि, “आप मुझे हज़रत अली अलैहिस्सलाम और हज़रत उस्मान रजिअल्लाहु अन्हो के मुतालिक कुछ बताएँगे?”

उन्होंने फरमाया कि, “हज़रत अली अलैहिस्सलाम तो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के घराने से ताल्लुक रखते हैं, इसके अलावा मैं आपसे उनके मुताल्लिक़ कोई बात नहीं कर सकूँगा। हाँ हज़रत उस्मान रज़िअल्लाहु अन्हो ने जंग ए उहद ( ओहद) के रोज़ एक अजीम गुनाह किया, अल्लाह तआला ने उन्हें माफ़ फरमा दिया और उन्होंने तुम्हारे दरमियान एक छोटा सा गुनाह किया और तुमने उन्हें क़त्ल कर दिया।”

तीसरी हदीस-

रावीयान ए हदीस, अहमद बिन सुलेमान अर्-रहावी, उबैदिल्लाह बिन मूसा, अबु इस्हाक़ ।

हज़रत अल्-अला बिन इरार कहते हैं कि मैंने, हज़रत अली अलैहिस्सलाम और हज़रत उस्मान रज़िअल्लाहु अन्हो के मुताल्लिक, हज़रत इब्न ए उमर रज़िअल्लाहु अन्हो से पूछा, जबकि उस वक्त वो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम की मस्जिद में थे। उन्होंने जवाब दिया, “हज़रत अली अलैहिस्सलाम के मुताल्लिक़ मुझसे कुछ ना पूछो क्योंकि वो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के अक़रब और उनके घराने से हैं, मस्जिद के सहन में जब सबके दरवाज़े बंद कर दिए गए तब सिर्फ़ मौला अली अलैहिस्सलाम का दरवाज़ा ही बस खुला था, इसके अलावा मैं और कुछ नहीं कह सकता। हाँ, जब मुसलमानों और कुफ्फ़ार के बीच उहद में जंग चल रही थी तब हज़रत उस्मान रज़िअल्लाहु अन्हो ने वहाँ से भागकर बड़ा गुनाह किया था लेकिन अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर

दिया और जब तुम्हारे दरमियान उन्होंने छोटी सी ख़ता की तो तुमने उन्हें क़त्ल कर दिया।”

चौथी हदीस-

रावीयान ए हदीस, इस्माईल बिन याकूब बिन इस्माईल, मूसा ( मुहम्मद बिन मूसा बिन अ’यून), अता बिन साइब ।

हज़रत साद बिन उबैदह कहते हैं कि, एक आदमी, हज़रत इब्न ए उमर के पास आया और उसने आपसे हज़रत अली अलैहिस्सलाम के मुताल्लिक़ पूछा तो आपने फरमाया, “उनके बारे में मैं तुझे कुछ नहीं बताऊँगा लेकिन उनके घर की तरफ़ देख कि वो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के घरों में से है।”, उस आदमी ने कहा, “मैं उनसे बुग्ज़ रखता हूँ।”, हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़िअल्लाहु अन्हो ने फरमाया, “अल्लाह त’ आला तुझसे बुग्ज़ रखे।”

पाँचवी हदीस

रावीयान ए हदीस, हिलाल बिन अल्-अला बिन हिलाल, हुसैन बिन अय्यश, ज़ुहैर बिन मुआविया, अबु इस्हाक़

हज़रत अब्दुर्-रहमान बिन खालिद ने कुसम (कुसाम) इब्न ए अब्बास रज़िअल्लाहु अन्हो से पूछा, “हज़रत अली अलैहिस्सलाम, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के कहाँ से वारिस हो गए ? “

फरमाया कि, “हज़रत अली अलैहिस्सलाम हम सबसे पहले रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से मिलने (यानी आपने रसूलुल्लाह का साथ और तौहीद ओ रिसालत

की पहली गवाही दी थी) वाले थे और हम सबसे ज्यादा आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से ताल्लुक रखने वाले थे।”

जैद बिन जबा’लह ने भी ये ही हदीस बयान की है लेकिन उनके मुताबिक हदीस के रावी, अब्दुर रहमान बिन खालिद की बजाय, खालिद बिन कुसम हैं।

छटवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, हिलाल बिन अल्-अला, उबैदिल्लाह बिन अम्र अर्-राकी, ज़ैद बिन अबु अनीसह, अबु इस्हाक़।

हज़रत खालिद बिन कुसम रज़िअल्लाहु अन्हो से पूछा गया कि, “हज़रत अली अलैहिस्सलाम, तुम्हारे दादा हज़रत अब्बास रज़िअल्लाहू अन्हो को छोड़कर, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के वारिस कैसै हैं, हालाँकि वो तुम्हारे चचा हैं?”

तो उसने कहा कि “हज़रत अली अलैहिस्सलाम हम सबसे पहले रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से मिलने वाले और हम सबसे ज्यादा आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से ताल्लुक रखने वाले हैं।”

सातवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, , अल ईज़ार बिन हुरैस । अब्दुर्र [-रहीम, अम्र बिन अब्दह बिन मुहम्मद, बिन अबु इस्हाक़

हज़रत नो मान बिन बशीर रजिअल्लाहु अन्हो कहते हैं कि हज़रत अबु बकर रजिअल्लाहु अन्हो ने रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से मिलने की इजाज़त तलब की और जब आप मिलने पहुँचे तो देखा की हज़रत आयशा रजिअल्लाहु अन्हा, रसूलुल्लाह के सामने खड़े होकर, ऊँची आवाज़ में बोलकर, आपसे लड़ रही थीं और कह रही थीं कि मुझे मालूम है आप मेरे बाबा से नहीं बल्कि अली से ज्यादा मुहब्बत करते हो। जैसे ही अबु बकर रजिअल्लाहु अन्हो ने ये सुना तो हज़रत आयशा रजिअल्लाहु अन्हा को थप्पड़ मारने की नियत से बहुत गुस्से में उनकी तरफ़ बढ़े और कहा कि मैं देख रहा हूँ तेरी आवाज़, रसूलुल्लाह की आवाज़ से ज्यादा बुलंद है, लेकिन रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने उन्हें रोक दिया और वो गुस्से की हालत में ही वहाँ से चले गए। आपके जाने के बाद रसूलुल्लाह ने अम्मा आयशा से फरमाया, “ऐ आयशा ! तुमने देखा मैंने किस तरह तुम्हें इस आदमी से बचाया?”

कुछ दिनों बाद हज़रत अबु बकर ने दोबारा हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से मिलने की इजाज़त तलब की, जब तक आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम और अम्मा आयशा रजिअल्लाहु अन्हा में सुलह हो चुकी थी। हज़रत अबु बकर ने रसूलुल्लाह से कहा, हमें भी सुलह में शामिल कर लीजिए जिस तरह आपने जंग में शामिल किया था। रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, “हाँ, हमने शामिल कर लिया।”

आठवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, मुहम्मद बिन आदम बिन सुलेमान, यहया बिन अब्दुल मलिक बिन ग़निय्यह, अबु इस्हाक़ अश्-शय’ बानी ।

हज़रत जुमय (इब्न ए उमर) रज़िअल्लाहु अन्हो बयान करते हैं कि जब मैं छोटा था तब मैं, अपनी वालिदा के साथ हज़रत आयशा रज़िअल्लाहु अन्हा के घर गया। मैंने उनके सामने हज़रत अली अलैहिस्सलाम का ज़िक्र किया तो अम्मा आयशा रज़िअल्लाहु अन्हा ने फरमाया, “मैंने किसी मर्द को रसूलुल्लाह का इतना महबूब नहीं देखा जितने अली थे और किसी औरत को रसूलुल्लाह का इतना महबूब नहीं देखा जितनी अली की जौजा (फातिमा
सलामुल्लाह अलैहा) थीं।”


नौवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, अम्र बिन अली अल्-बसरी, अब्दुल अजीज़ बिन अल् ख़त्ताब, मुहम्मद बिन इस्माईल बिन रजा अज़ू-ज़बीदी, अबु इस्हाक़ अश्-शय बानी ।

हज़रत जुमय बिन उमर रज़िअल्लाहु अन्हो फरमाते हैं कि मैं अपनी वालिदा के साथ, हज़रत आयशा रजिअल्लाहु अन्हा के पास गया और आपसे हज़रत अली अलैहिस्सलाम के मुताल्लिक़ सवाल पूछा। तो अम्मा आयशा रजिअल्लाहु अन्हा ने फरमाया, “तुम मुझसे उनके मुताल्लिक़ पूछते हो, जिनसे ज्यादा कोई भी मर्द रसूलुल्लाह को महबूब नहीं था और ना उनकी जौजा से ज्यादा कोई औरत, रसूलुल्लाह को महबूब थी।”

दसवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, ज़करिया बिन यहया, इब्राहीम बिन सईद, अस्वद बिन आमिर (शजान), जाफ़र बिन ज़ियाद अल्- अह’मर, अब्दुल्लाह बिन अता ।

कि, पूछा हज़रत अबु बुरैदह कहते हैं कि एक आदमी मेरे बाबा के पास आया और उसने “रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम को तमाम लोगों में सबसे ज्यादा महबूब कौन था?”, मेरे वालिद ने जवाब दिया, “अल्लाह के रसूल सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम को औरतों में सबसे ज्यादा महबूब, हज़रत बीबी फातिमा सलामुल्लाह अलैहा और मर्दों में सबसे महबूब हज़रत अली अलैहिस्सलाम थे। “

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