
Madine ke moti 40






♥हदीस : रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) फरमाते है..!!
“आए लोगो! अपनी औरतो को सिंगार वाला लिबास पहनकर गैर महरमो के सामने निकलने से मना करो,”
✿हदीस : रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने इरशाद फरमाया–
“अपने शौहर के सेवा दुसरो के लिए जिनत के साथ दामन घसीटते हुवे (इतराकर) चलने वाली औरत क्यामत के अंधेरो की तरह है, जिसमे कोई रौशनी न हो”
*जो औरत गैर मर्दो पर अपनी जिनत जाहीर करने के लिए दामन घसीटते हुवे चलेगी क्यामत के दिन ओ नुर से महरूम और अंधेरे मे होगी”
♥अल कुरआन : “आए इमान वालो! अपनी औरतो से कह दो की अपनी नजर बचा कर रहे और अपनी शर्मगाह की हिफाजत करे और अपने सिंगार को जाहीर न करे सिवा उतना जितना खुला रहता है और दुपट्टे अपने सिनो पर डाले रखे, और अपना सिंगार जाहीर न करे सिवा अपने शौहर पर”
♥अल कुरआन “आए औरतो! अपने घरो मे ठहरी रहो और जमाना-ए-जाहीलियत की तरह अपने आपको दिखाती न फिरो,
नमाज कायम करो और जकात अदा करो अल्लाह और उसके रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु अलैही वसलल्लम) के हुक्मो की पाबन्दी करो”
♥अल कुरआन : “आए रसुलल्लाह (सलल्लल्लाहु अलैही वसलल्लम) अपनी बिवीयां और बेटीयों और मुस्लमान औरतों से फरमा दो के अपनी चादरों का एक हिस्सा अपने मुंह पर डाले रखे”
(सुरह-ए-अहजाब, आयत-59,)
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दुआओं 🤲🏻 में याद रखियेग

अलीयुवं वलीयुल्लाह की दलील अहलेसुन्नत की किताब से
अबदुल्लाह इबने सलाम से रेवायत है कि मैंने आंहज़रत सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम की ख़िदमत में अर्ज़ किया : या रसूलल्लाह मुझको लेवाए हम्द की तारीफ़ और उसकी कैफ़ियत से आगाह फ़रमाइये। फ़रमाया उसका तूल हज़ार बरस की राह के बराबर होगा और उसका सुतून सुर्ख़ याक़ूत का, और उसका क़ब्ज़ा सफ़ेद मोती का, और उसका फरैहरा सब्ज़ ज़मुरर्द का होगा और उसके तीन गेसू होंगे एक गेसू मशरिक़ में होगा और दूसरा मग़रिब में होगा, और तीसरा वसते दुनिया में, उसके ऊपर तीन सतरें लिखी होंगी
पहली सतर बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
और दूसरी सतर अलहम्दो लिल्लाहे रब्बिल आलमीन
और तीसरी सतर ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुर रसूलुल्लाह अलीयुवं वलीयुल्लाह होगी
हर सतर की लम्बाई हज़ार दिन की राह के बराबर होगी। मैंने अर्ज़ किया या रसूल्लाह आपने सच फ़रमाया। अब ये फ़रमाइये उस अलम को कौन उठायेगा? फ़रमाया उसको वो शख़्स उठायेगा जो दुनिया में मेरा अलम उठाता है यानी अली इब्ने अबी तालिब अ.स. कि जिसका नाम अल्लाह तआला ने ज़मीन और आसमान की पैदाइश से पहले लिखा है। मैंने अर्ज़ किया आपने सच फ़रमाया। अब ये फ़रमाइये आपके उस अलम के साये में कौन लोग होंगे? फ़रमाया : मोमेनीन, औलियाअल्लाह, और ख़ुदा के शीआ, और मेरे शीआ, और मेरे मोहिब, और अली के शीआ और उसके मोहिब और अनसार यानी यारो यावर उस अलम के साये में होंगे। पस उनका हाल बहुत अच्छा है और उनका बहुत नेक है। और अज़ाब है उस शख़्स के लिए जो अली के बारे में मुझको झुटलाये या अली को मेरे बारे में झुटलाये। या उस मरतबे में अली से झगड़ा करे जिसमें ख़ुदावन्दे मूतआल ने उसको क़ायेम किया है।
(किताब मवददतुल क़ुरबा, हज़रत सैय्यद अली हमेदानी शाफ़ेई सुन्नीयुल मज़हब, मवददते हफ़तुम, पेज नः 56)