हज़रते अबू हुरैरा से रिवायत हैरसूलल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि एक शख़्स ने सदक़ा देने का इरादा किया
▶️और अपना सदका ले कर खुप्या तरीके से निकला लेकिन रात की तारीकी में बजाए किसी फ़कोर को देने के एक चोर के हाथ में दे दिया जो चोरी के
इरादे से घूम रहा था सुब्ह को लोगों में चर्चा हुवा कि किसी ने रात में एक चोर को सदका दे दिया उस आदमी ने चर्चा सुन कर कहा कि इलाही
तेरे ही लिए सब तारीफ़ है आज मैं फिर सदक़ा दूंगा लेकिन , वोह अपना
▪️सदक़ा ले कर रात में निकला तो एक जिनाकार औरत अपने गाहक की तलाश में चक्कर लगा रही थी उस ने उस को कोई मिस्कीन औरत समझ
कर सदक़ा दे दिया फिर सुब्ह को लोगों में चर्चा हुवा कि रात में कोई शख्स एक ज़ानिया को सदका दे गया तो उस शख्स ने चर्चा सुन कर कहा कि ऐ
अल्लाह तेरे ही लिए सब तारीफ़ है आज मैं फिर सदक़ा दूंगा
▪️लेकिन , फिर येह शख्स रात में छुप कर सदके का माल ले कर चला तो एक मालदार शख्स रात में कहीं जा रहा था तो उस ने उस मालदार को
मिस्कीन समझ कर सदक़ा दे दिया सुब्ह को फिर इस का चर्चा होने लगा कि कोई शख्स रात में बहुत बड़े मालदार को सदका दे कर चला गया
जब उस ने येह सुना तो निहायत ही अपसोस के साथ येह कहा कि या
अल्लाह तेरे ही लिए हम्द है, अपसोस कि मेरा सदका एक चोर
▪️एक ज़ानिया, एक मालदार के हाथ में पड़ गया हालांकि हर रात मैं अपना सदक़ा उन सभों को मिस्कीन समझ कर देता रहा इसी अफ्सोस में रन्जीदा हो कर येह शख्स सो गया
▪️तो ख्वाब में देखा कि एक
फ़रिश्ते ने आ कर येह कहा कि तू ने चोर के हाथ में सदक़ा दे दिया तो
शायद वोह चोरी से बच जाए और तौबा कर ले और तेरा सदक़ा
ज़ानिया को मिल गया तो शायद वोह जिनाकारी से बच जाए और तौबा
कर ले और तू ने मालदार के हाथ में सदका दे दिया तो शायद वोह इब्रत
हासिल करे और खुद भी अपना माल खुदा की राह में खर्च करने
लगे
📚मिश्कात, जि. 1 स. 165
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