21 Ramzan Youm e shahdat Maula Ali عليه السلام

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1. As per Hazrat Ali (R.A)'s famous saying, revenge is not to harm the person who has caused you pain.. but the fix the reason you got caught off guard.

Image by Asen Bayat

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Hazrat Ali Quotes in Hindi

 हज़रत अली के अनमोल वचन

 

QuoteIn Hindi : किसी ने हजरत अली से पुछा. दोस्त और भाई में क्या फर्क है.? हजरत अली ने फरमाया “भाई सोना है और दोस्त हीरा है” उस आदमी ने कहा “आप ने भाई को कम कीमतऔर दोस्त को ज्यादा कीमती चीज़ से क्यू तशबीह दी “? तो हजरत अली ने फरमाया “सोनेमें दरार आ जाये तोउस को पिघला कर बिलकुल पहले जैसा बनाया जा सकता है. जब की हीरे में एक दरार भी आ जाये तो वोकभी भी पहले जैसा नही बन सकता.

Quote 2 In Hindi : नमाज़ की फ़िक्र अपने ऊपर फ़र्ज़ करलो..!! खुदा की कसम दुनिया की फ़िक्र से आज़ाद हो जाओगे,और क़ामयाबी तुम्हारे क़दम चूमेंगी… ( हज़रत अली रदियल्लाहु ता आला अन्हू )

Quote 3 In Hindi : नेक लोगों की सोहबत से हमेशा भलाई ही मिलती हे क्यों के..हवा जब फूलो से गुज़रती हे तो वो भी खुश्बुदार हो जाती हे…! हज़रत अली

Quote 4 In Hindi : “अपने जिस्म को ज़रूरत से ज़्यादा न सवारों,क्योंकि इसे तो मिट्टी में मिल जाना है,सवॉरना है तो अपनी रूह को सवॉरों क्योंकि इसे तुम्हारे रब के पास जाना है” हज़रत अली

Quote 5 In Hindi : किसी ने हजरत अली रज़ी. से पूछा के जिनकी माँ नही होती उनके बच्चों को दुआ कौन देता है? आप फरमाया के कोई झील अगर सुख भी जाए तो मिट्टी से नमी नही जाती इसी तरह माँ के इन्तेकाल के बाद भी अपनी औलाद को दुआ देती रहती है. हज़रत अली (Hazrat Ali Quotes in Hindi)

Quote 6 In Hindi : जब गुनाह के बावजूद अल्लाह की नेअमते मुसलसल तुझे मिलती रहे तो तु होशियार हो जाना के तेरा हिसाब करिब और सख्त तरिन है हज़रत अली

Quote 7 In Hindi : तुम जो एक गाली मज़ाक और गुस्से में देते है उससे तुम्हारी कब्र में एक उससे बनता है

हज़रत अली

Quote 8 In Hindi : अगर कोई शख्स अपनी भूख मिटाने के लिए रोटी चोरी करे तो चोर के हाथ काटने के बजाए बादशाह के हाँथ काटे जाए। हज़रत अली

Quote 9 In Hindi : “जो लोग सिर्फ तुम्हे काम के वक़्त याद करते हे उन लोगो के काम ज़रूर आओ क्यों के वो अंधेरो में रौशनी ढूँढ़ते हे और वो रौशनी तुम हो” हज़रत अली

 Quote 10 In Hindi : हमेशा समझोता करना सीखो क्यूंकि थोडा सा झुक जाना किसी रिश्ते का हमेशा के लिए टूट जाने से बेहतर है हज़रत अली (Hazrat Ali Quotes in Hindi)

Quote 11 In Hindi : एक ज़माना ऐसा भी आएगा कि लोग अपने रब को भुल जाएंगे,लिबास बहुत क़ीमती पहन कर बज़ार में अकड़ कर चलेंगे और इस बात से बेखबर होंगे के उसी बाज़ार में उन का कफन मौजूद है । हज़रत अली

Quote 12 In Hindi :        जाहिल के सामने अक़्ल की बात मत करो पहले वो बहस करेगा फिर अपनी हार देखकर दुश्मन हो जायेगा हज़रत अली

Quote 13 In Hindi : जब नेमतों पर शुक्र अदा किया जाए तो वह कभी ख़त्म नही होती । हज़रत अली

Quote 14 In Hindi : कोई गुनाह लज्जत के लिए मत करना क्यो की लज्जत खत्म गुनाह बाकी रहेगा और कोई नेकी तकलीफ की वजह से मत छोड ना क्यो की तखलीफ खत्म हो जायेगी पर नेकी बाकी रहेगी हज़रत अली

Quote 15 In Hindi : हमेशा ज़लिमो का दुश्मन और मज़लूमो का मददगार बन कर रहना… हज़रत अली (Hazrat Ali Quotes in Hindi)

Quote 16 In Hindi : दुनिया अमल की जगह है, मौत के बाद हम को और तुम्हे पता चलेगा । हज़रत अली

Quote 17 In Hindi :

बुरे मर्द की पहचान

1 तकब्बूर करेगा।

2.अकड के बोलेगा।

  1. दिखावा ज्यादा करेगा।

4.बदजुबान होगा।

  1. अकड कर चलेगा।
  2. खानदान में सबको जलील करेगा।
  3. अपने पैसे पर नाज करेगा।
  4. अपने सेहत पर नाज करेगा।
  5. बुजुर्गों को जलील करके खुश होगा।
  6. अपनी जवानी के किस्से ज्यादा सुनाया करेगा।
  7. हासिद होगा।
  8. मां बाप का नफरमानहोगा।

-हजरत अली

  • ●●

बुरी औरत की पहचान

  1. अपने आप को ढांप कर नहीं रखेगी।
  2. अपने खाविंद की नफरमानी करेगी।

3.बदजुबान होगी।

  1. बालों की नुमाईश करेगी।

5.खानदान भर में अपने आपको आकिल ख्याल करेगी।

6.दुसरों को बात न करने देगी।

  1. नींद उसे बहुत अजीज होगी।

8.अपनी आवाज को बहुत बुलंद करके बात करेगी।

  1. कपड़े बारीक और दिखावे वाले पहनेंगी।
  2. पीठ पिछे अपने खानदान की बुराई करेगी।
  3. बाजारों के चक्कर लगाने की शौकीन होगी

-हजरत अली

Quote 18 In Hindi : तुम्हारे नफ्स की कीमत जन्नत है, इसे जन्नत से कम कीमत पे ना बेचना..-हजरत अली

Quote 19 In Hindi :   ज़िल्लत उठाने से बेहतर है तकलीफ उठाओ .हज़रत अली

Quote 20 In Hindi : कभी भी अपनी जिस्मानी ताकत और दौलत पर भरोसा न करना क्युँकि बीमारी और ग़रीबी आने में देर नही लगती…!! हज़रत अली (Hazrat Ali Quotes in Hindi)

Quote 21 In Hindi : इंसान मायूस और परेशान इसलिए होता है, क्योंकि वो अपने रब को राज़ी करने के बजाये लोगों को राज़ी करने में लगा रहता है। हज़रत अली

Quote 22 In Hindi : अगर दोस्त बनाना तुम्हारी कमज़ोरी है,,,”तो”तुम दुनिया के सबसे ताक़तवर इंसान हो… । हज़रत अली

Quote 23 In Hindi : इख़्तियार ,ताक़त और दौलत ऐसी चीजें हैं जिनके मिलने से लोग बदलते नहीं नक़ाब” होते हैं। हज़रत अली

Quote 24 In Hindi : दोस्तों के ग़म में शामिल हुवा करो हर हाल में लेकिन खुशियों में तब तक न जाना जब तक वो खुद ना बुलाये…. हज़रत अली

Quote 25 In Hindi : “इंसान की ज़ुबान उसकी अक्ल का पता देती है और आदमी अपनी ज़ुबान के नीचे छुपा होता है !!” हज़रत अली (Hazrat Ali Quotes in Hindi)

Quote 26 In Hindi :   इन्सान का अपने दुश्मन से इन्तकाम का सबसे अच्छा तरीका ये है कि वो अपनी खूबियों में इज़ाफा कर दे !! हज़रत अली

Quote 27 In Hindi : ” रिज्क के पीछे अपना इमान कभी खराब मत करो” क्योंकि नसीब का रीज़क इन्सान को ऐसे तलाश करता है जैसे मरने वाले को मौत” हज़रत अली

Quote 28 In Hindi : गरीब वो है जिसका कोई दोस्त न हो। -हज़रत अली

Quote 29 In Hindi : जो इनसान सजदो मे रोता है। उसे तक़दीर पर रोना नहीं पड़ता। -हज़रत अली

Quote 30 In Hindi कभी तुम दुसरों के लिए दिल से दुवा मांग कर देखोतुम्हें अपने लिए मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी .. हज़रत अली (Hazrat Ali Quotes in Hindi)

Quote 31 In Hindi : किसी की बेबसी पे मत हंसो ये वक़्त तुम पे भी आ सकता है -हज़रत अली

 Quote 32 In Hindi : किसी की आँख तुम्हारी वजह से नम न हो क्योंकि तुम्हे उसके हर इक आंसू का क़र्ज़ चुकाना होगा हज़रत अली

Quote 33 In Hindi : जब मेरा जी चाहता है के मैं अपने रब से बात करूँ तो मैं नमाज़ पढ़ता हूँ. हज़रत अली      

Quote 34 In Hindi : “जिसको तुमसे सच्चा प्रेम होगा, वह तुमको व्यर्थ और नाजायज़ कामों से रोकेगा” –हज़रत अली

Quote 35 In Hindi : पूर्ण विश्वास के साथ सोना संदेह की स्थिति में नमाज़ पढ़ने से बेहतर है हज़रत अली         

Quote 36 In Hindi : किसी का ऐब (बुराई) तलाश करने वाले मिसाल उस मक्खी के जैसी है जो सारा खूबसूरत जिस्म छोड सिर्फ़ ज़ख्म पर बैठती है हज़रत अली

Quote 37 In Hindi : राज्य का खजाना और सुविधाएं मेरे और मेरे परिवार के उपभोग के लिए नहीं हैं, मै बस इनका रखवाला हूँ- हज़रत अली              

Quote 38 In Hindi : अगर किसी के बारे मे जानना चाहते हो तो पता करो के वह शख्स किसके साथ उठता बैठता है .. हज़रत अली

Quote 39 In Hindi : इल्म की वजह से दोस्तों में इज़ाफ़ा (बढ़ोतरी) होता है दौलत की वजह से दुशमनों में इज़ाफ़ा होता है । हज़रत अली

 Quote 40 In Hindi :

  • सब्र को ईमान से वो ही निस्बत है जो सिर को जिस्म से है.
  • दौलत, हुक़ूमत और मुसीबत में आदमी के अक्ल का इम्तेहान होता है कि आदमी सब्र करता है या गलत क़दम उठता है.
  • सब्र एक ऐसी सवारी है जो सवार को अभी गिरने नहीं देती।
  • ऐसा बोहोत कम होता है के जल्दबाज़ नुकसान न उठाये , और ऐसा हो ही नही सकता के सब्र करने वाला नाक़ाम हो.
  • सब्र – इमान की बुनियाद, सखावत (दरियादिली) – इन्सान की खूबसूरती, सच्चाई – हक की ज़बान, नर्मी – कमियाबी की कुंजी, और मौत – एक बेखबर साथी है .  हज़रत अली

 (Hazrat Ali Quotes in Hindi)

 Quote 41 In Hindi :

जब तुम्हरी मुख़ालफ़त हद से बढ़ने लगे, तो समझ लो कि अल्लाह तुम्हें कोई मुक़ाम देने वाला है -हज़रत अली

 Quote 42 In Hindi :

झूठ बोलकर जीतने से बेहतर है सच बोलकर हार जाओ। -हज़रत अली

 Quote 43 In Hindi :

दौलत को क़दमों की ख़ाक बनाकर रखो क्यूकि जब ख़ाक सर पर लगती है तो वो कब्र कहलाती है। —हज़रत अली

 Quote 44 In Hindi :

खुबसुरत इंसान से मोहब्बत नहीं होती बल्कि जिस इंसान से मोहब्बत होती है वो खुबसुरत लगने लगता है हज़रत अली

 Quote 45 In Hindi :

हमेशा उस इंसान के करीब रहो जो तुम्हे खुश रखे लेकिन उस इंसान के और भी करीब रहो जो तुम्हारे बगैर खुश ना रह पाए ( हज़रत अली )

 Quote 46 In Hindi :

जिसकी अमीरी उसके लिबास में हो वो हमेशा फ़कीर रहेगा और जिसकी अमीरी उसके दिल में हो वो हमेशा सुखी रहेगा हज़रत अली

 Quote 47 In Hindi :

“जो तुम्हारी खामोशी से तुम्हारी तकलीफ का अंदाज़ा न कर सके उसके सामने ज़ुबान से इज़हार करना सिर्फ़ लफ्ज़ों को बरबाद करना है” -हज़रत अली

 Quote 48 In Hindi :

जहा तक हो सके लालच से बचो लालच में जिल्लत ही जिल्लत हज़रत अली

 Quote 49 In Hindi :

मुश्किलतरीन काम बहतरीन लोगों के हिस्से में आते हैं. क्योंकि वो उसे हल करने की सलाहियत रखते हैं “ हज़रत अली

 Quote 50 In Hindi :

“कम खाने में सेहत है, कम बोलने में समझदारी है और कम सोना इबादत है” -हज़रत अली

 Quote 51 In Hindi :

“अक़्लमंद अपने आप को नीचा रखकर बुलंदी हासिल करता है और नादान अपने आप को बड़ा समझकर ज़िल्लत उठाता है।” -हज़रत अली

(Hazrat Ali Quotes in Hindi)


Hazrat Ali quotes in Hinglish

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Quote1 in hindi : kisi ne hajarat Ali se puchha. dost aur bhai mein kya phark hai.? hajarat Ali ne pharamaaya “bhai sona hai aur dost hira hai” us aadami ne kaha “aap ne bhai ko kam kimataur dost ko jyaada kimati chiz se kyoo tashabih di “? to hajarat Ali ne pharamaaya “sonemen daraar aa jaaye tous ko pighala kar bilakul pahale jaisa banaaya ja sakata hai. jab ki hire mein ek daraar bhi aa jaaye to vokabhi bhi pahale jaisa nahi ban sakata.

Quote 2 in hindi : namaaz ki fikr apane oopar farz karalo..!! khuda ki kasam duniya ki fikr se aazaad ho jaoge,aur qaamayaabi tumhaare qadam choomengi… ( hazarat Ali radiyallaahu ta aala anhoo )

Quote 3 in hindi : nek logon ki sohabat se hamesha bhalai hi milati he kyon ke..hava jab phoolo se guzarati he to vo bhi khushbudaar ho jaati he…! hazarat Ali

Quote 4 in hindi : “apane jism ko zaroorat se zyaada na savaaron,kyonki ise to mitti mein mil jaana hai,savorana hai to apani rooh ko savoron kyonki ise tumhaare rab ke paas jaana hai” hazarat Ali

Quote 5 in hindi : kisi ne hajarat Ali razi. se poochha ke jinaki maan nahi hoti unake bachchon ko dua kaun deta hai? aap pharamaaya ke koi jhil agar sukh bhi jae to mitti se nami nahi jaati isi tarah maan ke intekaal ke baad bhi apani aulaad ko dua deti rahati hai. hazarat Ali (hazrat ali Quotes in hindi)

Quote 6 in hindi : jab gunaah ke baavajood allaah ki neamate musalasal tujhe milati rahe to tu hoshiyaar ho jaana ke tera hisaab karib aur sakht tarin hai

hazarat Ali Quote 7 in hindi : tum jo ek gaAli mazaak aur gusse mein dete hai usase tumhaari kabr mein ek usase banata hai

hazarat Ali Quote 8 in hindi : agar koi shakhs apani bhookh mitaane ke lie roti chori kare to chor ke haath kaatane ke bajae baadashaah ke haanth kaate jae.

hazarat Ali Quote 9 in hindi : “jo log sirph tumhe kaam ke vaqt yaad karate he un logo ke kaam zaroor aao kyon ke vo andhero mein raushani dhoondhate he aur vo raushani tum ho”

hazarat Ali Quote 10 in hindi : hamesha samajhota karana sikho kyoonki thoda sa jhuk jaana kisi rishte ka hamesha ke lie toot jaane se behatar hai hazarat Ali (hazrat ali Quotes in hindi)

Quote 11 in hindi : ek zamaana aisa bhi aaega ki log apane rab ko bhul jaenge,libaas bahut qimati pahan kar bazaar mein akad kar chalenge aur is baat se bekhabar honge ke usi baazaar mein un ka kaphan maujood hai .

hazarat Ali Quote 12 in hindi : jaahil ke saamane aql ki baat mat karo pahale vo bahas karega phir apani haar dekhakar dushman ho jaayega

hazarat Ali Quote 13 in hindi : jab nematon par shukr ada kiya jae to vah kabhi khatm nahi hoti .

hazarat Ali Quote 14 in hindi : koi gunaah lajjat ke lie mat karana kyo ki lajjat khatm gunaah baaki rahega aur koi neki takAliph ki vajah se mat chhod na kyo ki takhAliph khatm ho jaayegi par neki baaki rahegi

hazarat Ali Quote 15 in hindi : hamesha zalimo ka dushman aur mazaloomo ka madadagaar ban kar rahana…

hazarat Ali (hazrat ali Quotes in hindi)Quote 16 in hindi : duniya amal ki jagah hai, maut ke baad ham ko aur tumhe pata chalega .

hazarat Ali Quote 17 in hindi : bure mard ki pahachaana1 takabboor karega.2.akad ke bolega.dikhaava jyaada karega.4.badajubaan hoga.akad kar chalega.khaanadaan mein sabako jAlil karega.apane paise par naaj karega.apane sehat par naaj karega.bujurgon ko jAlil karake khush hoga.apani javaani ke kisse jyaada sunaaya karega.haasid hoga.maan baap ka napharamaanahoga.-hajarat Ali●●buri aurat ki pahachaanapane aap ko dhaamp kar nahin rakhegi.apane khaavind ki napharamaani karegi.3.badajubaan hogi.baalon ki numaish karegi.5.khaanadaan bhar mein apane aapako aakil khyaal karegi.6.dusaron ko baat na karane degi.nind use bahut ajij hogi.8.apani aavaaj ko bahut buland karake baat karegi.kapade baarik aur dikhaave vaale pahanengi.pith pichhe apane khaanadaan ki burai karegi.baajaaron ke chakkar lagaane ki shaukin hogi-

hajarat Ali Quote 18 in hindi : tumhaare naphs ki kimat jannat hai, ise jannat se kam kimat pe na bechana..-

hajarat Ali Quote 19 in hindi : zillat uthaane se behatar hai takAliph uthao .

hazarat Ali Quote 20 in hindi : kabhi bhi apani jismaani taakat aur daulat par bharosa na karana kyunki bimaari aur garibi aane mein der nahi lagati…!! hazarat Ali (hazrat ali Quotes in hindi)

Quote 21 in hindi : insaan maayoos aur pareshaan isalie hota hai, kyonki vo apane rab ko raazi karane ke bajaaye logon ko raazi karane mein laga rahata hai.

hazarat Ali Quote 22 in hindi : agar dost banaana tumhaari kamazori hai,,,”to”tum duniya ke sabase taaqatavar insaan ho… .

hazarat Ali Quote 23 in hindi : ikhtiyaar ,taaqat aur daulat aisi chijen hain jinake milane se log badalate nahin naqaab” hote hain.

hazarat Ali Quote 24 in hindi : doston ke gam mein shaamil huva karo har haal mein lekin khushiyon mein tab tak na jaana jab tak vo khud na bulaaye….

hazarat Ali Quote 25 in hindi : “insaan ki zubaan usaki akl ka pata deti hai aur aadami apani zubaan ke niche chhupa hota hai !!” hazarat Ali (hazrat ali Quotes in hindi)

Quote 26 in hindi : insaan ka apane dushman se intakaam ka sabase achchha tarika ye hai ki vo apani khoobiyon mein izaapha kar de !!

hazarat Ali Quote 27 in hindi : ” rijk ke pichhe apana imaan kabhi kharaab mat karo” kyonki nasib ka rizak insaan ko aise talaash karata hai jaise marane vaale ko maut”

hazarat Ali Quote 28 in hindi : garib vo hai jisaka koi dost na ho. –

hazarat Ali Quote 29 in hindi : jo inasaan sajado me rota hai. use taqadir par rona nahin padata. –

hazarat Ali Quote 30 in hindi : kabhi tum dusaron ke lie dil se duva maang kar dekhotumhen apane lie maangane ki jaroorat nahin padegi .. hazarat Ali (hazrat ali Quotes in hindi)

Quote 31 in hindi : kisi ki bebasi pe mat hanso ye vaqt tum pe bhi aa sakata hai –

hazarat Ali Quote 32 in hindi : kisi ki aankh tumhaari vajah se nam na ho kyonki tumhe usake har ik aansoo ka qarz chukaana hoga

hazarat Ali Quote 33 in hindi : jab mera ji chaahata hai ke main apane rab se baat karoon to main namaaz padhata hoon.

hazarat Ali Quote 34 in hindi : “jisako tumase sachcha prem hoga, vah tumako vyarth aur naajaayaz kaamon se rokega” –

hazarat Ali Quote 35 in hindi : poorn vishvaas ke saath sona sandeh ki sthiti mein namaaz padhane se behatar hai

hazarat Ali Quote 36 in hindi : kisi ka aib (burai) talaash karane vaale misaal us makkhi ke jaisi hai jo saara khoobasoorat jism chhod sirf zakhm par baithati hai

hazarat Ali Quote 37 in hindi : raajy ka khajaana aur suvidhaen mere aur mere parivaar ke upabhog ke lie nahin hain, mai bas inaka rakhavaala hoon-

hazarat Ali Quote 38 in hindi : agar kisi ke baare me jaanana chaahate ho to pata karo ke vah shakhs kisake saath uthata baithata hai ..

hazarat Ali Quote 39 in hindi : ilm ki vajah se doston mein izaafa (badhotari) hota hai daulat ki vajah se dushamanon mein izaafa hota hai .

hazarat Ali Quote 40 in hindi :sabr ko imaan se vo hi nisbat hai jo sir ko jism se hai.daulat, huqoomat aur musibat mein aadami ke akl ka imtehaan hota hai ki aadami sabr karata hai ya galat qadam uthata hai.sabr ek aisi savaari hai jo savaar ko abhi girane nahin deti.aisa bohot kam hota hai ke jaldabaaz nukasaan na uthaaye , aur aisa ho hi nahi sakata ke sabr karane vaala naaqaam ho.sabr – imaan ki buniyaad, sakhaavat (dariyaadili) – insaan ki khoobasoorati, sachchai – hak ki zabaan, narmi – kamiyaabi ki kunji, aur maut – ek bekhabar saathi hai .

hazarat Ali (hazrat ali Quotes in hindi) Quote 41 in hindi :jab tumhari mukhaalafat had se badhane lage, to samajh lo ki allaah tumhen koi muqaam dene vaala hai –

hazarat Ali Quote 42 in hindi :jhooth bolakar jitane se behatar hai sach bolakar haar jao. –

hazarat Ali Quote 43 in hindi :daulat ko qadamon ki khaak banaakar rakho kyooki jab khaak sar par lagati hai to vo kabr kahalaati hai. —

hazarat Ali Quote 44 in hindi :khubasurat insaan se mohabbat nahin hoti balki jis insaan se mohabbat hoti hai vo khubasurat lagane lagata hai

hazarat Ali Quote 45 in hindi :hamesha us insaan ke karib raho jo tumhe khush rakhe lekin us insaan ke aur bhi karib raho jo tumhaare bagair khush na rah pae ( hazarat Ali )

Quote 46 in hindi :jisaki amiri usake libaas mein ho vo hamesha fakir rahega aur jisaki amiri usake dil mein ho vo hamesha sukhi rahega

hazarat Ali Quote 47 in hindi :”jo tumhaari khaamoshi se tumhaari takAliph ka andaaza na kar sake usake saamane zubaan se izahaar karana sirf laphzon ko barabaad karana hai” –

hazarat Ali Quote 48 in hindi :jaha tak ho sake laalach se bacho laalach mein jillat hi jillat

hazarat Ali Quote 49 in hindi :mushkilatarin kaam bahatarin logon ke hisse mein aate hain. kyonki vo use hal karane ki salaahiyat rakhate hain ”

hazarat Ali Quote 50 in hindi :”kam khaane mein sehat hai, kam bolane mein samajhadaari hai aur kam sona ibaadat hai” -hazarat Ali Quote 51 in hindi :”aqlamand apane aap ko nicha rakhakar bulandi haasil karata hai aur naadaan apane aap ko bada samajhakar zillat uthaata hai.” -hazarat Ali(hazrat ali Quotes in hindi)

 

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शेर-ए-मैसूर ‘टीपू सुल्तान’ के इतिहास को मनमाने ढंग से तोडा-मरोडा गया है : प्रो.बी.एन.पाण्डेय

टीपू सुल्तान भारत के इतिहास में एक ऐसा योद्धा भी था जिसकी दिमागी सूझबूझ और बहादुरी ने कई बार अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. अपनी वीरता के कारण ही वह ‘शेर-ए-मैसूर’ कहलाए. इस पराक्रमी योद्धा का नाम टीपू सुल्तान था. टीपू की बहादुरी को देखते हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें विश्व का सबसे पहला राकेट आविष्कारक बताया था.

टीपू सुल्तान का जीवन

टीपू सुल्तान का जन्म मैसूर के सुल्तान हैदर अली के घर 20 नवम्बर, 1750 को देवनहल्ली में हुआ. वर्तमान में यह जगह बैंग्लोर सिटी के उत्तर से 30 किलोमीटर दूर है. टीपू सुल्तान का पूरा नाम फतेह अली टीपू था. उनके पिता हैदर अली मैसूर राज्य के सैनिक थे. उन्होंने बहुत ही जल्दी दक्षिण में अपनी शक्ति का विस्तार आरंभ कर दिया था. इस कारण अंग्रेजों के साथ-साथ निजाम और मराठे भी उसके शत्रु बन गए थे. शुरुआत से ही हैदर अली ने अपने पुत्र टीपू सुल्तान को काफी मजबूत बनाया और उन्हें हर तरह की शिक्षा दी.

टीपू ने 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेज़ों के विरुद्ध पहला युद्ध जीता था. टीपू काफी बहादुर होने के साथ ही दिमागी सूझबूझ से रणनीति बनाने में भी बेहद माहिर थे. अपने शासनकाल में भारत में बढ़ते ईस्ट इंडिया कंपनी के साम्राज्य के सामने वह कभी नहीं झुके और अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया. मैसूर की दूसरी लड़ाई में अंग्रेजों को शिकस्त देने में उन्होंने अपने पिता हैदर अली की काफी मदद की. उन्होंने अंग्रेजों ही नहीं बल्कि निजामों को भी धूल चटाई. अपनी हार से बौखलाए हैदराबाद के निजाम ने टीपू से गद्दारी की और अंग्रेजों से मिल गया. मैसूर की तीसरी लड़ाई में जब अंग्रेज टीपू को नहीं हरा पाए तो उन्होंने टीपू के साथ मेंगलूर संधि की लेकिन इसके बावजूद अंग्रेजों ने उन्हें धोखा दिया.

फिर जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने हैदराबाद के साथ मिलकर चौथी बार टीपू पर हमला किया तब अपनी कूटनीतिज्ञता और दूरदर्शिता में कमी की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. आखिरकार 4 मई सन् 1799 ई. को मैसूर का शेर श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए शहीद हो गया.

मैसूर के शेर के नाम से मशहूर टीपू सुल्तान न सिर्फ बहादुर थे बल्कि एक कुशल योजनाकार भी थे. उन्होंने अपने क्षेत्र में छोटे से शासनकाल में विकास के अनेक कार्य किए. टीपू सुल्तान ने कई सड़कों का निर्माण कराया और सिंचाई व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए. उन्होंने जल भंडारण के लिए कावेरी नदी के उस स्थान पर एक बांध की नींव रखी, जहां आज कृष्णराज सागर बांध’ मौजूद है. टीपू ने अपने पिता द्वारा शुरू की गई ‘लाल बाग परियोजना’ को सफलतापूर्वक पूरा किया. उन्होंने आधुनिक कैलेण्डर और नई भूमि राजस्व व्यवस्था की भी शुरुआत की.
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book : इतिहास के साथ यह अन्याय!! प्रो. बी. एन. पाण्डेय–भूतपूर्व राज्यपाल उडीसा एवं इतिहासकार उडीसा के भूतपूर्व राज्यपाल, राज्यसभा के सदस्य और इतिहासकार प्रो. विश्म्भरनाथ पाण्डेय ने अपने अभिभाषण और लेखन में उन ऐतिहासिक तथ्यों और वृतांतों को उजागर किया है जिनसे भली-भांति स्पष्ट हो जाता है कि इतिहास को मनमाने ढंग से तोडा-मरोडा गया है।
इतिहास को मनमाने ढंग से तोडा-मरोडा गया है।

जब में इलाहाबाद में 1928 ई. में टीपु सुलतान के सम्बन्ध में रिसर्च कर रहा था, तो ऐंग्लो-बंगाली कालेज के छात्र-संगठन के कुछ पदाधिकारी मेरे पास आए और अपने ‘हिस्ट्री-ऐसोसिएशन‘ का उद्घाटन करने के लिए मुझको आमंत्रित किया।ये लोग कालेज से सीधे मेरे पास आए थे।उनके हाथों में कोर्स की किताबें भी थीं, संयोगवश मेरी निगाह उनकी इतिहास की किताब पर पडी।मैंने टीपु सुलतान से संबंधित अध्याय खोला तो मुझे जिस वाक्य ने बहुत ज्यादा आश्चर्य में डाल दिया, वह यह थाः

‘‘तीन हज़ार ब्राहमणों ने आत्महत्या कर ली, क्योंकि टीपू उन्हें ज़बरदस्ती मुसलमान बनाना चाहता था।
इस पाठ्य-पुस्तक के लेखक महामहोपाध्याय डा. परप्रसाद शास्त्री थे जो कलकत्‍ता विश्वविद्यालय में संस्कृत के विभागाघ्यक्ष थे।मैंने तुरन्त डा. शास्त्री को लिखा कि उन्होंने टीपु सुल्तान के सम्बन्ध में उपरोक्त वाक्य किस आधार पर और किस हवाले से लिखा है।कई पत्र लिखने के बाद उनका यह जवाब मिला कि उन्होंने यह घटना ‘मैसूर गज़ेटियर‘ (Mysore Gazetteer) से उद्धृत की है।मैसूर गज़टियर न तो इलाहाबाद में और न तो इम्पीरियल लाइबे्ररी, कलकत्‍ता में प्राप्त हो सका।तब मैंने मैसूर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति सर बृजेन्द्र नाथ सील को लिखा कि डा. शास्त्री ने जो बात कही है उसके बारे में जानकारी दें।उन्होंने मेरा पत्र प्रोफेसर श्री मन्टइया के पास भेज दिय

इंसाफ़ पसंद बादशाह ‘सुलतान ग़यासुद्दीन’ की अदालत का ऐसा फ़ैसला जिसकी मिसाल नही मिलती

तइंसाफ पसंद हुकुमरान- इंसाफ का एक ऐसा वाक़या जिसकी मिसाल नही मिलती.

एक बार सुलतान ग़यासुद्दीन तीर चलाना सीख रहें थें के उनका निशाना चुक गया और वो तीर एक बेवा औरत के इकलौते बच्चे को जा लगा. जिस्से मौक़े पर ही उसकी मौत हो गई सुलतान को ये पता न चल सका.

उस बच्चे की मां इंसाफ के लिये अदालत पहुंच गई. क़ाज़ी सिराजउद्दीनसिराजुद्दीन ने औरत से पुछा क्या हुआ तुम क्युं रो रही होहो. औरत ने रोते हुए सुलतान के ख़िलाफ शिकायत लिखवाई सुलतान के तीर से मेरा इकलौता बच्चा हलाक हो गया है मुझे इंसाफ चाहिये..?

औरत की शिकायत सुन्ने के बाद क़ाज़ी ने सुलतान को एक ख़त लिखा के आपके तीर से एक बच्चा हलाक हो गया फौरन अदालत में हाज़िर हो जाओ. ख़त लिख कर एक प्यादे के हांथों ख़त भेज दिया.

प्यादा सुलतान के दरबार में हाज़िर हुआ और ये ख़त सुलतान के हांथों में देते हुए बोला क़ज़ी सिराजुद्दीन ने आपको अदालत में बुलाया है.

ये सुन कर सुलतान फौरन उठे एक छोटी सी तलवार अपने आस्तीन में छुपाई और उस प्यादे के साथ ही चल पडें.

उधर क़ाज़ी सिराजुद्दीन ने भी एक कोडा अपनी गद्दी के नीचे छुपा रखा था.

सुलतान अदालत पहुंचे क़ाजी साहब नें उस औरत और सुलतान के बेयान बारी बारी सुना और फिर अपना फैसला सुनाया
क़ाज़ी साहब कहने लगे सुलतान के हांथों बच्चे का क़तल हुआ है इस लिये ख़ुन का बदला ख़ुन होता है अब या तो सुलाह उस औरत को माल दौलत जायदाद के बदले राज़ी करले या फिर अपनी मौत के लिये तय्यार रहे.

फैसला सुन्ने के बाद सुलतान उस औरत के पास गए और ढेर सारा माल के बदले औरत को राज़ी कर लिया और उस बच्चे का ख़ुन माफ करवा लिया.
फिर क़ाज़ी ने उस औरत से पुछा क्या आप राज़ी हो गई हैं औरत ने कहा हां मैं राज़ी हुं.

अब क़ाज़ी सिराजुद्दीन अपनी जगह से उठें और सुलतान के एहतराम में अपनी जगह पर बैठाया. 
सुलतान ने आस्तीन से तलवार निकाल कर दिखाते हुए कहा अगर आज आप मुझ पर ज़रा सा भी नरमी दिखाते तो मैं इसी तलवार से आपकी गर्दन उडा देता.

तब क़ाज़ी ने भी गद्दी के नीचे से कोड़ा निकालते हुए कहा अगर आज आपने अदालत का फैसला मानने से ज़रा सा भी इंकार करते तो मैं इसी कोड़े से आपकी ख़बर लेता. 
बेशक आज हम दोनों का इमतेहान था ।।।

भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी शेर-ए-मैसूर_टीपू_सुल्तान ‘हिंदू मंदिरों के रखवाले थे’

18 वीं सदी के उत्तरार्ध में देश में एक ऐसा योद्धा भी जन्मा जिसने सबसे पहले अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिए संघर्ष किया और मैसूर की रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी. इस शासक का नाम टीपू सुलतान के नाम से इतिहास में दर्ज है. शेर-ए -मैसूर के नाम से जाने वाले टीपू सुल्तान की आज पुण्य तिथि है.इस मौके पर उनके जीवन से जुड़े अतीत के कुछ पन्ने पलटने का प्रयास करते हैं.

टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवंबर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली में हुआ था. उनका पूरा नाम सुलतान फतेह अली खान था. उनकी माँ का नाम फातिमा फ़क़रुन्निसा था.उनके पिता हैदर अली खान भी नवाब थे जिनके संरक्षण में टीपू ने बचपन से युद्ध कला की शिक्षा ली थी. मात्र 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने पिता के साथ अंग्रेजों से पहली लड़ाई जीती थी. टीपू सुल्तान विद्वान,योग्य शासक और योद्धा था. वह महत्वाकांक्षी होने के साथ ही कुशल सेनापति भी था. अंग्रेजों के हाथों हुई अपने पिता की पराजय का वह बदला लेना चाहता था. टीपू के साहस से अंग्रेज भी भयभीत थे.टीपू में उन्हें नेपोलियन की तस्वीर दिखती थी. अनेक भाषाओँ के ज्ञाता टीपू सुल्तान ने अपने पिता के कार्यकाल में ही प्रशासनिक और सैनिक युद्ध विद्या सीखना शुरू कर दिया था.

टीपू सुल्तान के बारे में कहा जाता है कि वह एक कट्टर मुस्लिम शासक था. लेकिन राम के नाम की अंगूठी पहनता था .टीपू एक बेहतरीन तलवारबाज था. उसकी तलवारबाजी के कई किस्से चर्चित हैं. जिद्दी और अभिमानी टीपू देशी राजाओं को तुच्छ समझता था.लेकिन फ्रांसीसियों पर बहुत भरोसा करता था.निरंकुश और स्वेच्छाचारी होने पर भी वह अपनी प्रजा का ध्यान रखता था. पानी के भंडारण के लिए कावेरी के तट पर उसने बांध की नींव रखी थी जो आज का कृष्णराज बाँध है. पूर्व राष्ट्रपति मरहूम एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें विश्व का पहला रॉकेट आविष्कारक बताया था. टीपू सुल्तान का पलक्कड़ का किला बहुत मशहूर है.हिन्दू मंदिरों को उन्होंने सोने – चांदी के बर्तन भेंट किए.वह अपने पिता के समान दूरदर्शी और कूटनीतिज्ञ थे.

मंगलौर संधि – उन दिनों जब टीपू सुल्तान का अंग्रेजों के प्रति विरोध बढ़ता गया तो अंग्रेजों ने टीपू से मार्च 1784 में मंगलौर संधि कर ली जो मात्र एक दिखावा थी. दरअसल यह मैसूर युद्ध के अंत की शुरुआत थी. धोखा देने में माहिर अंग्रेजों ने यह संधि इसलिए कर ली क्योंकि यह उन्हें कालांतर में लाभ दिलाने वाली थी.1786 में लार्ड कार्नवालिस भारत का गवर्नर जनरल बनकर भारत आया.कुछ दिनों बाद अंग्रेजों ने निजाम और मराठों से संधि कर ली. इससे उनकी ताकत में इजाफा हुआ तो टीपू ने फ्रांसीसियों से हाथ मिलाया. अंग्रेजों के इस संयुक्त मोर्चे ने युद्ध की घोषणा कर दी. तृतीय मैसूर युद्ध दो साल तक चला जिसमें अंग्रेज विजयी हुए. 1782 में श्री रंग पटट्नम संधि के साथ युद्ध खत्म हुआ. इस संधि में टीपू ने अपने राज्य का आधा हिस्सा और तीस लाख पौंड अंग्रेजों को दिए. सबसे बड़ा हिस्सा बीच का प्रदेश निजामों को दिया गया. वहीं कुछ हिस्सा मराठों को भी मिला. यह अंग्रेजों की दूरंदेशी ही चौथे युद्ध की बुनियाद बनी. .अंग्रेजों की सीमा तुंगभद्रा तक पहुँच गई.

इस बीच सात साल बीत गए. हालाँकि टीपू के कई शुभ चिंतकों ने उनसे समझौता करने की सलाह भी दी. लेकिन टीपू का कहना था कि ‘ शेर कीएक दिन की जिंदगी गीदड़ के एक हजार साल से बेहतर होती है’.कहते हुए कोई भी समझौता करने से इंकार कर दिया. उधर अंग्रेज किसी भी तरह टीपू को खत्म कर निर्बाध शासन करना चाहते थे.इसलिए श्रीरंगपट्ट्नम में आखिर चौथा युद्ध 1799 में लड़ा गया. जहाँ अपने राज्य की रक्षा करते हुए टीपू सुल्तान 4 मई 1799 को वीर गति को प्राप्त हुए. एक ऐसा योद्धा जिसने सबसे पहले अंग्रेजों से लोहा लिया वह श्री रंगपट्ट्नम की ज़मीन में दफ़न हो गया.लेकिन उसके साहस के किस्से आसमान में आज भी गूंजते हैं.

टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद उनका सारा खजाना अंग्रेज ले गए. कहा जाता है कि जब टीपू की मौत हुई तो उनकी सुंदर और कीमती अंगूठी उनकी ऊँगली काटकर ले गए. लन्दन के ब्रिटिश म्यूजियम में टीपू सुल्तान की सभी चीजें सजी हुई है. इसमें टीपू की वह प्रसिद्ध भारी भरकम तलवार भी शामिल थी. जिसे बरसों बाद लीकर किंग विजय माल्या ने 2003 में नीलामी में खरीदा और भारत का गौरव वापस लाए, इस बेशकीमती तलवार की रत्नजड़ित मूठ पर बाघ की आकृति अंकित है जो टीपू के शासनकाल का प्रतीक चिन्ह था. इसीलिए उन्हें ‘ टाइगर ऑफ़ मैसूर ‘ कहा जाता था.
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मैसूर के कपड़े की पहचान है उसकी उत्कृष्टता. भारत में कुछ जगहों के कपड़े खास मशहूर हैं. उनमें मैसूर की साड़ियों की खास ही धमक है, पर जानते हैं, किसके चलते मैसूर के कपड़ों की धाक जमी?

उस वक्त के गजट से निकले तथ्य इसकी गवाही देते हैं. टीपू सुल्तान आज हमारे बीच नहीं हैं. नहीं हैं तब भी उनके नाम पर नेता पॉलिटिक्स खेल रहे हैं, होते तो भी शायद उन्हें नहीं बख्शते.

वैसे तो लेख का विषय आज के बेहद विवादित और चर्चित विषयों से बुना गया है. तथ्यों के आधार पर लेखक का विश्वास है कि दो शताब्दी पहले ये मुद्दे भारतीयों के लिए बेहद फायदेमंद थे.

खैर, आज से 217 साल पहले (4 मई, 1799) दुनिया से कूच कर गए टीपू से आज भी हमारा जुड़ाव वैसा ही है. यकीन नहीं होता न? पर है. और वो जुड़ाव है उसकी विरासत के जरिए. एक नजर उन खास चीजों पर जिनके जरिए टीपू की विरासत आज भी हमारे बीच सुरक्षित है.

मैसूर के कपड़े को खास बनाने का श्रेय टीपू को ही जाता है

मैसूर क्षेत्र में रेशम के कीड़े पालने के व्यवसाय की शुरुआत टीपू ने ही करवाई थी. मैसूर गजट में ये बात दर्ज है.

टीपू सुल्तान ने बंगाल से शहतूत के पेड़ लगाने की कला सीखी और अपने राज्य में 21 अलग-अलग केंद्रों पर इसकी ट्रेनिंग देनी शुरू की. आगे चलकर ये उद्योग मैसूर का सबसे प्रमुख उद्योग बना.

आज सभी जानते हैं कि मैसूर का रेशम (सिल्क) देश भर में अपनी गुणवत्ता के चलते जाना जाता है. टीपू ने न सिर्फ बाहर से कपास के आयात पर रोक लगाई बल्कि इस बात का भी पूरा ख्याल रखा कि हर बुनकर को कपड़े तैयार करने के लिए अच्छी मात्रा में कपास मिलता रहे.

टीपू ने गन्ने की खेती के लिए चीनियों की मदद ली
बड़ी मात्रा में मैसूर में गन्ने की खेती में भी टीपू सुल्तान का ही योगदान माना जाता है. गजट के हिसाब से इसकी खेती के लिए टीपू सुल्तान ने चीनी विशेषज्ञों की मदद ली थी. जिनके संरक्षण में अच्छी गुणवत्ता के गुड़ और शक्कर का उत्पादन होता था.

टीपू का स्टेट भी ड्राइ स्टेट हुआ करता था
टीपू ने बहुत सी लड़ाइयां लड़ीं. जिनमें अंग्रेजों से लड़ी चार बड़ी लड़ाइयां भी शामिल हैं. अपनी लड़ाइयों के बीच टीपू को जो थोड़ा सा शांति का वक्त मिला उस दौरान उसने कई समाजसुधार के काम भी किए. इनमें से एक था शराबबंदी.

टीपू का गाय कनेक्शन
पालतू जानवरों और खेती का गहरा रिश्ता रहा है. टीपू सुल्तान ये बात समझते थे इसलिए उन्होंने जानवरों की अच्छी नस्लें तैयार करने पर भी खासा योगदान दिया. ‘हल्लीकर’ और ‘अमृत महल’ नस्ल की गायों की प्रजाति का विकास उनके इन कदमों का ही परिणाम माना जाता है.

कहा जाता है कि देशी नस्ल की गायों का प्रयोग वो पहाड़ियों पर हथियार चढ़ाने में भी करते थे. यानी जिस गाय के नाम पर देशभर में आज नेता पॉलिटिक्स-पॉलिटिक्स खेल रहे हैं, उस गाय से टीपू का बड़ा ही खास रिश्ता था.

भारत की देसी रॉकेट टेक्नोलॉजी
टीपू सुल्तान के मिसाइल कारखाने को अब संग्रहालय में बदल दिया गया है वर्तमान इतिहासकार मानते हैं कि भारत में मिसाइल या रॉकेट टेक्नोलॉजी का प्रारंभिक ज्ञान टीपू और हैदर अली का ही लाया हुआ था. ये आजकल के आधुनिक मिसाइल और रॉकेट की तरह ही हुआ करते थे. अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाइयों में टीपू ने इन रॉकेट का खुलकर प्रयोग किया था.

इनमें से कुछ आज भी इंग्लैण्ड के रॉयल आर्टिलरी म्यूजियम में सुरक्षित हैं. ‘दरिया दौलत’, जो कि टीपू का गर्मियों का महल हुआ करता था, श्रीरंगपट्टन्नम में है. यहां पर जो पेटिंग्स मिलती हैं उनसे साफ पता चलता है कि युद्ध में बड़े स्तर पर टीपू ने मिसाइलों का इस्तेमाल किया था.

टीपू के श्रीरंगपट्न्नम के महल में एक अहाता है जहां से इन मिसाइलों को लॉन्च किए जाने के सुबूत भी मिलते हैं.

डीआरडीओ के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने भी इस जगह का दौरा किया था. साथ ही कई बार उन्होंने उसके अच्छे रखरखाव की गुजारिश भी की है. यहां पर एक मिसाइल म्यूजिम बनाए जाने का भी सुझाव है.

‘मेक इन इंडिया’ से सदियों पहले टीपू ने चलाया था ‘मेक इन मैसूर’ अभियान
टीपू को पश्चिमी विज्ञान और तकनीकी से बहुत लगाव था. उसने कई बंदूक बनाने वाले, इंजीनियर, घड़ी बनाने वाले घड़ीसाज और दूसरे तकनीकी विशेषज्ञों को फ्रांस से मैसूर बुलाया. उसने मैसूर में ही कांसे की तोप, गोले और बंदूकें बनानी शुरू कीं जिन पर ‘मेड इन मैसूर’ लिखा होता था.

पाकिस्तान भी कहता है ‘लव यू टीपू’
पाकिस्तान में भी टीपू सुल्तान का सम्मान कम नहीं है. टीपू सुल्तान के नाम पर पाकिस्तान ने पाकिस्तान नेवी शिप का नाम ‘पीएनएस टीपू सुल्तान’ रखा था.

भारत की ही तरह पाकिस्तान में भी टीपू पर टीवी सीरियल बन चुका है. इसके अलावा पाकिस्तानी पोस्टल सर्विसेज ने 1979 में अपनी आजादी के पुरोधा सीरीज में उसकी तस्वीर वाला डाक टिकट भी निकाला था.

 

टीपू सुल्तान को ये बातें भी बनाती हैं खास
हाल में ही आई ‘केट ब्रिटलबैंक’ की किताब ‘लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान’ की माने तो टीपू सुल्तान अपने वक्त में ब्रिटेन में भारत का सबसे डरावना इंसान माना जाता था. माने ब्रिटेन में लोग उस वक्त उसका बहुत भय मानते थे इसीलिए जब टीपू की मौत हुई तो वहां पर खुशियां मनाई गईं.

टीपू ही था जिसने अग्रेजों के शासन के खतरे को गहराई से भांपा था और इसके लिए उसने अंग्रेजों से चार युद्ध भी लड़े थे. यही कारण है कि उसे भारतीय उपमहाद्वीप का पहला ‘फ्रीडम फाइटर’ कहा जाता है.

टीपू ने ऑटोमन और फ्रेंच सम्राटों के पास मदद की मांग के लिए दूत भेजे.

टीपू ने ‘ख्वाबनामा’ नाम की एक किताब भी लिखी थी. इसमें वो अपने सपनों के बारे में लिखा करता था. वो इन सपनों को अपनी लड़ाइयों के नतीजों से जोड़कर तुलना करता था.

हिंदू मंदिरों और प्रतीकों का संरक्षक टीपू
टीपू सुल्तान के मुख्यमंत्री ‘पुरनैय्या’ एक हिंदू थे, उनके दरबार में बहुत से मुख्य अधिकारी हिंदू ही थे.

टीपू ने कई हिंदू मंदिरों को संरक्षण दिया था. श्रीरंगपट्टन्नम में स्थित ‘श्रीरंगनाथ का मंदिर’ उनमें से एक है. ‘श्रृंगेरी मठ’ भी उनके संरक्षण में ही था जिसके स्वामी को उन्होंने ‘जगद्गुरु’ कहा.

टीपू बाहर से आया कोई आक्रमणकारी नहीं था. टीपू इसी धरती का बेटा था. दक्षिण भारत में वो अपने खानदान की तीसरी पीढ़ी से था.

आज लोग टीपू सुल्तान के शासन की तमाम तरह से व्याख्या करते हैं. कुछ उसे हिंदुओं का संरक्षक बताते हैं तो कुछ विरोधी. कुछ इस हद तक भी चले जाते हैं कि उसे कट्टर मुस्लिम और हिंदुओं का नरसंहार करने वाला कहते हैं.

पर बता दें पर ये एक तथ्य है कि टीपू ने शासन के चिह्नों के रूप में बड़ी मात्रा में सूरज, शेर और हाथी का प्रयोग किया. जो साधारणत: हिंदू प्रतीक माने जाते हैं.

टीपू सुल्तान की कब्र (पीछे हैदर अली की कब्र है) टीपू सुल्तान की कब्र (पीछे हैदर अली की कब्र है)

चलते-चलते
टीपू की मौत के 217 साल बाद भी सारे इतिहासकार उसके इन प्रयोगों की सफलता पर सहमत होते हैं. वो मानते हैं कि आज भी टीपू के सामाजिक-आर्थिक सुधार फल-फूल रहे हैं.

भले ही आज टीपू को लेकर कितने भी भ्रम फैलाए जा रहे हों पर इस पंक्ति पर विश्वास करें – ‘जो तथ्य है, वो सत्य है और सामने अभिव्यक्त है’ तो एक तथ्य ये भी है कि टीपू सुल्तान उन कुछेक भारतीय शासकों में से है जो कि अंग्रेजों से ना डरे, ना उनके सामने रुके बल्कि अंग्रेजों का सामना करते हुए युद्ध के मैदान में वीरगति को प्राप्त हुए.

Mola Ali(a.s.) ki shadat ka pase manzar

फ़िर 19 रमज़ानुल मुबारक शब जुमा को इब्ने मुलजिम अपने साथियों शबेब और दरवान के साथ मस्जिदे कूफ़ा मे आया और छुपकर बैठ गया, थोड़ी देर बाद शेरे ख़ुदा हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु तशरीफ़ लाएँ और ”अय्योहन्नास अस्सलात अस्सलात” का ऐलान फ़रमाते हुए दाख़िले मस्जिद हुए शबेब ने लपक कर तलवार चलाई मगर वार ख़ाली चला गया और हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु आगे बढ़ गएँ, दूसरे लम्हें दुश्मने ख़ुदा इब्ने मुलजिम ने आगे बढ़कर पूरी क़ूवत से आप रज़िअल्लाह तआला अन्हु की पुर नूर पेशानी पर वार किया, और साथ ही चिल्ला कर कहा ”अल हुक्मुलिल्लाही वला लका या अली वला सहाबिका” यानी ऐ अली हुक्म सिर्फ़ अल्लाह का होता है, तू या तेरे दोस्तो का नही, तलवार का ज़ख्म बहुत गहरा था और ऐसी जगह लगा था कि जहां रोज़े ख़न्दक अमरु बिन अब्दूद के तलवार का ज़ख़्म लगा था, इस वाक़ेआ अज़ीम के बाद दरवान भागकर अपने घर आगया और अपने अहबाब से ज़िक्र किया तो उन्होंने इसको क़त्ल कर डाला, शबेब फ़रार होने मे कामियाब हो गया, जबकि इब्न मुलजिम गिरफ़्तार हो गया!

अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने ज़ख़्मी हो जाने के बाद अपनी हमशीरा उम्मे हानी रज़िअल्लाह तआला अन्हा के बेटे जूदह बिन हुबैरह को नमाज़ पढ़ाने पर मामूर फ़रमाया, बाद नमाज़ फज्र आपको उठाकर घर लाया गया, अबतक सूरज निकल आया था, इब्ने मुलजिम को मश्के बांध कर पेश किया गया, हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने इससे दरयाफ़्त फ़रमाया कि ऐ दुशमने ख़ुदा तुझको किस चीज़ ने मेरे क़त्ल के लिये आमादा किया? जवाबन इब्ने मुलजिम बोला मैने इस तलवार को चालीस रोज़ तक तेज़ किया था और अल्लाह तआला के हुज़ूर दुआ किया था कि इससे वोह शख़्स मारा जाए जो शर्रे ख़ल्क है, इसपर आपने इरशाद फ़रमाया कि मै देख रहा हूँ कि तू भी इसी से क़त्ल किया जाएगा! फ़िर हाज़रीन से फ़रमाया, अगर मै जाबिर ना हुआ, तो मेरे बाद मेरे क़ातिल को मार डालना, जैसा की इसने मुझे क़त्ल कर दिया और अगर मै बच गया तो जैसा मुनासिब समझूंगा वैसा करूंगा, फिर फ़रमाया ऐ बनु अब्दुल मुत्तलिब लोगों को मुसलमानों कि ख़ूँरेज़ी की तरग़ीब न देना और ये सैलाब न उठाना कि अमीरुल मोमिनीन क़त्ल कर दिये गए हैं, बल्कि सिर्फ़ मेरे क़ातिल को क़त्ल करना, हाज़िरीन मजलिस पर गिरयाँ तारी थी, फिर आपने अपने शहज़ादे इमाम हसन रज़िअल्लाह तआला अन्हु को मुख़ातिब करके फ़रमाया, ऐ हसन (रज़िअल्लाह तआला अन्हु) अगर मै इस ज़ख़्म से मर जाऊँ, तो तुम भी इस बदबख़्त को तलवार से ऐसा ही एक वार करना बाक़ी और तक़लीफ़ न देना क्योंकि मैने रसूल अल्लाह सलल्ललाहो अलैहे वसल्लम से सुना है ”इय्याकुम वल मसलहुन” फिर आप रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने अहले ख़ाना ख़ुसूसन हसनैन करीमैन रज़िअल्लाह तआला अन्हुमा को वसीअतें फ़रमाईं दीगर हाज़रीन को भी वसीअतें फ़रमाईं, और इक्कीस रमज़ानुल मुबारक को आपका विसाल हो गया, आख़िरी कलाम जो आपके ज़ुबान मुबारक से निकला था वो لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰهِؕ था!

हज़रत हसन और हज़रत हुसैन और अब्दुल्लाह बिन जाफ़र रज़िअल्लाह तआला अन्हुमा ने आपको ग़ुस्ल दिया, हज़रत हसन रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और दारुल इमारत कूफा मे आपको रात के वक़्त दफ़्न कर दिया गया, हज़रत अबु बक़्र बिन अयाश फ़रमाते हैं कि हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु की क़ब्र अनवर को इसलिये ज़ाहिर नही किया गया कि कही बदबख़्त ख़ारजी इसकी भी बेहुरमती न करे- (तारीख़ अल ख़ुलेफा,अल अल्लामा जलालउद्दीन सियूती)

मशहूर ये है कि आपका मज़ार मुबारक नजफ़े अशरफ़ मे है और मरजए ख़लायक है!

रौज़ामुबारक हज़रत मौला अली शेरे ख़ुदा रज़िअल्लाह अन्हु (नजफ़े अशरफ़)

Najf e Ashraf

Paighambar e Islam ne peshingoi farmai thi Ki ‘ALI (a.s) ki dadhi sar ke khoon se rangeen hogi’. Ek martaba Hazrat Ali bimar hue unhe dekhne ke liye gai the Halat e Saqeem dekh kar Paighambar se kehne lage ki shayad Ali na bachenge. Aapne farmaya abhi Ali ko maut nahi aegi Ali duniya ke tamam Ranjo gham uthane ke bad talwar se shaheed honge.

On the 19th of the month of Holy Ramadan (Mah e Ramzan) of the year 40 A.H, Imam Ali (pbuh) came to the mosque in Kufa for his morning prayers. Imam Ali (pbuh) gave the call for prayer (Azaan) and became engaged in leading the congregation. Abd-al-Rahman ibn Muljam pretending to pray, stood just behind Imam Ali (pbuh), and when Imam Ali (pbuh) was in a state of prostration, Abd-al-Rahman ibn Muljam dealt a heavy stroke with his sword, inflicting a deep wound on Imam Ali’s (pbuh) head.

This was the time when Imam Ali (as) uttered his famous words : “Fuzto warab-il-Kaaba” – “By the Rab of Kaaba, I am successful”.

Holy Prophet Muhammad (pbuh) had prophesied the assassination of Imam Ali (pbuh) and his issues. Regarding Imam Ali (pbuh) Holy Prophet Muhammad (pbuh) had said, “O Ali! I see before my eyes thy beard dyed with the blood of thy forehead.”

They assassinated Imam Ali (pbuh) at his finest time – the hour of standing before Allah, the Exalted, during a prayer of submission, in the best of days, while fasting during the month of Ramadan (Mah e Ramzan); during the most glorious Islamic duties, while preparing to wage jihad, and in the highest and most pure divine places, the Mosque of Kufa.

May joy be to Amir al-Muminin Imam Ali bin Abi Talib (pbuh) and a blessed afterlife!

Imam Ali (pbuh) suffered from his wound for three days, and He (pbuh) passed away on 21st of the month of Ramadan (Mah e Ramzan) at an age of 63 years.

During these three days, he (pbuh) entrusted his son, Imam Hasan (pbuh) with the Imamate of guiding the nation ideologically and socially. During those three days, as during all his life, he never ceased remembering Allah, praising Him, and accepting Him and His ordinance.

Likewise, he continued giving pieces of advice and directions leading to good, pointing to the right, defining the way to guidance, explaining the course for deliverance, calling for the observance of Allah’s ordinances, and warning against following one’s ill desires and set-backs from not carrying out the divine message.

The following is one piece of advice offered to his sons, Imam Hasan (pbuh) and Imam Hussain (pbuh), as well as to his people, the nation and coming generations:

“I advise you to fear Allah, and not to run after (the pleasure of) the world, even if it may run after you. Do not be sorry for anything from it which you have been denied. Say the truth and act for (Allah’s) reward. Be an enemy of the oppressor, and be a helper of the oppressed.”

“I advise you, my children, my household and all those who may receive my message, to fear Allah, to arrange your affairs well, to maintain good relations among yourselves, for I have heard your grandfather (pbuh) saying: ‘Good relations are better than prayer and fasting in general.'”

“(Fear) Allah when handling matters of orphans. Do not let them starve, nor allow them to be lost as long as you are there.”

“(Fear) Allah in respect to your neighbors, for they were the trust of your Prophet (pbuh). He went on asking us to take care of them, so much that we thought he would make them heirs (of our heritage).”

“(Fear) Allah in respect to the Holy Quran, (take care that) no one may excel you in following its tenets.”

“(Fear) Allah in respect to prayer, as it is the pillar of your religion.”

“(Fear) Allah in respect to your Lord’s House (Kaaba), do not forsake it so long as you live, because if you do you will not be looked upon with respect.”

“(Fear) Allah in respect to Jihad, fight with your wealth, your lives and your tongues, in the way of Allah.”

“Have mutual liaison and give-and-take. Beware of turning your faces from, and of renouncing, one another. Do not abandon bidding good and forbidding evil, lest vicious people may overrule you, and then in such a case, your invocations will not be responded to (by Allah).”

Then he said: “O, Banu Abdul Muttalib, certainly I do not want you to wade through the blood of the Muslims, crying: Amir al-Muminin was murdered. You certainly kill for me no one but my killer.”

“Wait till I die by this stroke of him (Abd-al-Rahman ibn Muljam), then strike a single stroke against him, and do not disfigure his body, for I had heard the Holy Prophet (pbuh) saying: ‘Avoid mayhem even with a rabid dog.'”

Such was the heroic end of this great man! The loss to the Mission and the nation was the gravest after the loss of the Holy Prophet (pbuh).

By the death of Imam Ali (pbuh) the nation lost:

A heroism that had become the song of the time;

A courageous history that has never dreamt of its like;

A wisdom no one can fathom, save Allah;

A purity, the like of which was only in the prophets;

An abstinence from the pleasures of life that could be attained only by the nearest to Allah;

An eloquence such as to be the echo of Book; and

A jurisprudence, and a thorough knowledge of the laws of religion, that made him the ‘gateway of the city’ of the Prophet’s knowledge, and the authority to whom the Islamic nation referred in all its affairs.

Peace be upon Amir al-Muminin the day he was born, the day he was martyred on his altar, and the day he shall be raised alive.

Praise be to Allah, Lord of the worlds.