
कर्बला के 57वें शहीद हज़रते अबू समामा उमरु बिन अब्दुल्लाह सेदादी
आप का पूरा नाम उमरु इब्ने अब्दुल्लाह इब्ने कैब इने शरजील इब्ने शिराजील इब्ने उमर इब्ने हाशिद इब्ने जशम इब्ने हैरदन इब्ने औफ बिन हमदान साअएदी अल-सैदावी था और कन्नियत अबू समामा थी।
आप ताबई थी। आपका शुमार हज़रत अली के असहाब में था। आपने हज़रत अली के साथ तमाम जंगों में शिरकत की थी। आप बड़े शहसवार और शियों में बड़ी अज़मतों शौकत के मालिक थे। अमीरूल मोमिनीन के बाद इमाम हुसैन की ख़िदमत में रहे।
हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील जब कूफ़े तशरीफ लाये तो आपने उनकी पूरी इमदाद की। उनके लिये असलहे ख़रीदे और दारुलअमारः पर हमले में बनी तमीम हमदान की क्यादत की हज़रते मुस्लिम की शहादत के बाद आप चंद रोज़ रू-पोश हो गये फिर इमाम हुसैन की ख़िदमत में हाज़िर हो गये।
करबला के बाद इब्ने सअद ल० ने कसीर इब्ने अब्दुल्लाह ने शअबी के जरिये से इमाम हुसैन अलै० के पास एक पैग़ाम भेजा कासिद चाहता था कि हथियार लगाऐ इमाम हुसैन से मिले मगर अबू समामा ने उस को कामयाब न होने दिया और वह बगैर पैग़ाम पहुँचाये वापस चला गया।
नमाज़े ज़ोहर के लिये आप ने ऐन हंगामा-ए-कारज़ार में इमाम हुसैन अलै० से दरख्वास्त की कि नमाज़े जमाअत होनी चाहिये। चुनान्चे इमामे मज़लूम ने नमाज़ पढ़ाई फिर जंग के मौके पर आपने कमाले म दिलेरी से शमशीर ज़नी की बिल-आख़िर आप के चचा ज़ाद भाई कैस ल० इब्ने अब्दुल्लाह अल-साअएदी ने आप को शहीद कर दिया।

