
कर्बला के 54वें शहीद हज़रते हज्जाज इब्ने मसरूक अल मदहजी
आप का पूरा नाम हज्जाज इब्ने मसरूक इब्ने जअफ इब्ने सअद अशीरा था। आप क़बीला मदहज के एक अज़ीम फर्द थे। आप का शुमार हज़रत अली अ० के खास शियों में था। आप कूफ़े में रहते और हज़रत अली अ० की ख़िदमत करते थे।
इमामे हुसैन अलै० की मक्के से रवानगी के वक़्त हज्जाज भी कूफ़े से रवाना हुये और मन्ज़िले कस बनी मकातिल में शरफे मुलाकात हासिल किया। जब अब्दुल्लाह इब्ने हुर्र जअफी (जिन का खेमा कस इब्ने मकातिल में पहले से नस्ब था) को दावते नुसरत देने के लिये इमामे हुसैन अलै० खुद के खेमे में तशरीफ ले गये तो हज्जाज आप के हमराह थे।
जनाबे हज्जाज यौने आशूरा इमामे हुसैन अलै० कि ख़िदमत में हाज़िर हो कर अर्ज की मौला ! मरने की इजाज़त दीजिये’। इमामे हुसैन अलै० ने इज़्ने जिहाद अता फरमाया और हज्जाज मैदान में तशरीफ लाये और नबर्दआज़माई शुरू की आप ने 15 दुश्मनों को कत्ल करने के बाद हाज़िरे ख़िदमते इमाम हुये और थोड़ी देर मौला की ख़िदमत में ठहर कर मैदाने जंग में फिर तशरीफ लाये और अपने “गुलामे मुबारक़” की मईयत में दुश्मनों से लड़ते रहे। आखिरकार एक सौ पचाँस (150) दुश्मनों को कत्ल कर के शहीद हो गये।
📝72 तारे अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

