
Dars Kitab Chiragh-e-Khizr Part-3








*بِسْمِ اللٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ*
इरशादे बारी तआ़ला है:
“और जिस ने बुख़्ल किया और (राह़े ह़क़ में माल ख़र्च करने से) बे परवा रहा। और उस ने (यूँ) अच्छाई (या’नी दीने ह़क़ और आख़िरत) को झुटलाया। तो हम अ़न क़रीब उसे सख़्ती (या’नी अ़ज़ाब की त़रफ़ बढ़ने) के लिये सुहूलत फ़राहम कर देंगे (ताकि वोह तेज़ी से मुस्तह़ीक़े अ़ज़ाब ठॅहरे)। और उस का माल का उस के किसी काम नहीं आएगा जब वोह हलाकत (के गढ़े) में गिरेगा।”
[अल्लैल, 92: 8_11]
ह़ुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
“दो ख़स़्लतें मोमिन में जम्अ़ नहीं हो सकतीं, बुख़्ल और बद ख़ुल्क़ी।”
[तिरमिज़ी, अस्सुनन, रक़म: 1962]