Hazrat Khwaja Dana Rehmatullah-Alayh

*Hazrat Khwaja Dana Rehmatullah-Alayh*

*तालीम व तरबियत के लिए दूसरी बशारत*

हज़रत ख़्वाजा हसन अता रहमतुल्लाहि तआला अलैह के विसाल फरमाने के बाद हज़रत ख़्वाजा दाना साहब के वालिदे गिरामी हज़रत हज़रत ख़्वाजा सैयद बादशाह पर्दहपोश ने अपने दुसरे हर-दिल-अज़ीज़ शागिर्द हज़रत ख़्वाजा सैयद मुहम्मद को ख्वाब में ये हुक्म दिया के वो मेरे साहब ज़ादे ख़्वाजा दाना को मज़ीद तालीम व तरबियत दें कि अभी उन में कुछ कमी है, चुनान्चे पीर व मुर्शिद का हुक्म मिलते ही हज़रतख़्वाजा सैयद मुहम्मद हज़रत ख़्वाजा दाना की तलाश में निकल पड़े. तलाश करते करते ख़ुरासान के जंगल में पहोंचे तो क्या देखते हैं कि हज़रत ख़्वाजा दाना हिरनों के टोले में जलवा अफरोज़ हैं. हरनों ने हज़रत ख़्वाजा सैयद मुहम्मद को देखा तो भागने लगे. हज़रत ख़्वाजा दाना भी चल पड़े, ये सिलसिला तीन दिन तक चलता रहा ओर हज़रत ख़्वाजा सैयद मुहम्मद की हज़रत ख़्वाजा दाना साहब से रू-ब-रू मुलाक़ात न हो सकी. आख़िर एक दिन हज़रत ख़्वाजा सैयद मुहम्मद ने इन्तेहाई आजिज़ी ओर इन्केसारी ओर मिन्नत व समाजत के बाद उनका रास्ता रोक कर फरमाया! साहब ज़ादे! में आपके वालिदे गिरामी का मुरीद हूँ, उनहोंने ख्वाब में तशरीफ़ लाकर मुझे आप की तालीम व तरबियत के लिए हुक्म दिया है ओर आप हैं कि मुझ से दूर-दूर भाग रहे हैं. चुनान्चे इतना सुनना था कि हज़रत ख़्वाजा दाना फ़ौरन रुक गए ओर उसी जगह झोंपड़ी में दोनों रहने लगे. हज़रतख़्वाजा सैयद मुहम्मद ने बड़ी मेहनत व जांफिशानी के साथ हज़रत को मुकम्मल छे(६) साल तक शरीअत, तरीक़त, हकीकत, ओर मारिफत, की मुकम्मल तालीम से आरास्ता फरमाने के बाद हज़रतख़्वाजा दाना की इजाज़त से अपने वतन लौट आये

*पीर व मुर्शिद का विसाल और खिलाफत व इजाज़त*

हज़रत ख़्वाजा हसन अता रहमतुल्लाहि तआला अलैह अपने पीर व मुर्शिद के शेह्ज़ादे हज़रत ख़्वाजा दाना साहब को १२ साल की उम्र तक मुकम्मल तअलीम व तरबियत ओर तरीक-ए ख़्वाजगाने नक्शबंद ओर इल्मे शरीअत व तरीक़त के रुमूज़ से वाकिफ फरमा दिया ओर जब वफात का वक़्त क़रीब आ गया तो जंगल में से एक हाथ लम्बी लकड़ी लाये जो असा का काम अंजाम दे सके.
ओर ख़िरका-ए मुबारकह दोनों हज़रत ख़्वाजा दाना आलैहिर्रेहमा को अता फरमाया ओर ख़िलाफत व इजाज़त मरहमत फरमाने के बअद इन अलफ़ाज़ के साथ नसीहत फरमाई कि:
अय मेरे फ़रज़न्दे अर्जुमंद! अय मेरे प्यारे अज़ीज़ कामिल बुज़ुर्ग के सच्चे ओर कामिल ख़लीफा में जो नसीहत कर रहा हूँ उसे ग़ौर से सुनना ओर इसको याद रखना.ये दुनिया मक्र व फरेब ओर फितना व फसाद कि जगह है, यह एक मुसाफिर ख़ाना है, यहाँ जो भी आता है उसे एक-न-एक दिन जाना है,न कोई रहा है न रहेगा, ये बड़ी बेवफा है, इसने किसी के साथ वफ़ा नहीं की. अय मेरे दाना बेटे! मौत का मज़ा हर ज़ीरूह को चखना है,मौत से किसी को भी मफर नहीं है,मौत का तल्ख़ पानी हर एक को पीना है, इससे बचकर कोई भी कहीं भी जा नहीं सकता है, इसलिए तुम को चाहिए कि जब मौत का वक़्त आ जाये तो अपने को परेशानी में मुब्तला न करना ओर न ही अपने दिल को हैरान ओर परेशान करना इतना फरमाकर हज़रत ख़्वाजा हसन अता रहमतुल्लाहि तआला अलैह की हालत अचानक खराब हो गयी. आपने फ़ौरन दो रकअत नमाज़ अदा की ओर सजदे की हालत में अपने ख़ालिक़े हक़ीक़ी से जा मिले. इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलयहि राजिऊन .

हज़रत हज़रत ख़्वाजा दाना रहमतुल्लाहि तआला अलैह के पीर व मुर्शिद का इन्तेक़ाल आपकी ज़िन्दगी का पहला वाक़िआ था. वालिदे गिरामी ओर वालिदा-ए मोहतरमह का साया-ए शफ़क़त तो शीर-ख़्वार्गी के दिनों ही में उठ चूका था. आप अकेले ओर जंगल का माहोल इसलिए सख्त परेशान हो गए कि क्या करें.ओर क्या न करें, रंजीदह खातिर बैठे सोच रहे थे कि अब पीरो मुर्शिद की तजहीज़ व तकफीन ओर नमाज़े जनाज़ा कैसे होगी. कि अचानक क्या देखते हैं कि क़िबले की जानिब से एक नूरानी क़ाफिला चला आ रहा है. आप देख कर बहुत खुश हुए ओर अपने परवरदिगारे आलम का शुक्र अदा कीया ओर समझ गए कि ये नूरानी जमाअत फरिश्तों की है, इस मुक़द्दस जमाअत ने हज़रतख़्वाजा सैयद हसन अता अलैहिर्रेहमा की लाश मुबारका को तालाब के साफ़ व शफ्फाफ पानी से ग़ुस्ल दिया कफ़न पहेनाया ओर नमाज़े जनाज़ा अदा की ओर हज़रत ख़्वाजा हसन अता को दफ्न करने के बअद हज़रत ख़्वाजा दाना को तसल्ली व तशफ्फी देकर ये मुक़द्दस जमाअत नज़रों से ग़ाइब हो गई. एक रिवायत ये है कि फ़रिश्ते हज़रत की लाश को अपने साथ लेकर चले गए.
मोहतरम क़ारिईन! आप ग़ौर फरमाएं! जिनका पीर इतना कामिल ओर मर्तबे वाला हो कि उसे फ़रिश्ते ग़ुस्ल व कफ़न दें ओर नमाज़े जनाज़ा अदा करें तो ऐसे पीर रोशन ज़मीर बुज़ुर्ग के मुरीद का आलम क्या होगा.?

*ख़्वाजा दाना रेह्मतुल्लाह अलैह की विलादत बा-सआदत*

क़ुत्बुल-आरिफीन हज़रत ख़्वाजा सैयद जमालुद्दीन दाना नक्शबंदी अलैहिर्रेहमा तुर्किस्तान के एक गाँव जुनूक़ में जो इरान के शहर ख्वारिज़म से चार फर्लांग बारह मील की दूरी पर वाक़े है.हिजरी ८९८ मुताबिक़ ईस्वी १४९२ को पैदा हुए आपके वालिदे गिरामी हज़रत ख़्वाजा सैयद बादशाह पर्दापोश अपने वक़्त के जैयिद सूफी ओर वालिए-कामिल थे.तसव्वुफ़ में अपने वालिदे-गिरामी हज़रत सैयद इस्माईल अलैहिर्रेहमा से जियादा शोहरत पाई ओर रूहानियत में बुलंद मक़ाम हासिल कीया.आप के मुरीदों की तादाद भी अच्छी-ख़ासी थी.दूर दराज़ इलाक़ों से तालिबाने-हक़ ओर तिश्नगाने मआरिफत हज़रत ख़्वाजा बादशाह पर्दापोश के पास आते ओर इल्मो मआरिफत से आसूदः व सेर होकर वापस जाते.फ़रज़न्दे अर्जुमंद हज़रत सैयद जमालुद्दीन दाना की पैदाइश के बाद आप ही ने बच्चे के कान में अजान व इक़ामत पढ़ी ओर नव-मौलूद बच्चे का नाम वालिदैन ने सैयद जमालुद्दीन रख दिया. लेकिन कुछ दिनों के बाद ख़्वाजा बादशाह ने अपनी बीवी से फरमाया हम ने बच्चे का नाम जमालुद्दीन रख तो दिया है मगर मुझे मालूम हुआ कि ये बच्चा अक़लमंद दाना-ए-राज़ ओर इल्मो आगही का पैकर होगा इसलिए इसके नाम के साथ लफ्ज़े दाना का इज़ाफा कर रहा हूँ चुनान्चे इसके बाद ही से ये बच्चा जमालुद्दीन दाना के नाम से याद कीया जाने लगा.हज़रत ख़्वाजा दाना अलैहिर्रेहमा के दादा हज़रत ख़्वाजा सैयद इस्माईल अलैहिर्रेहमा अपने वक़्त के उल्माए किबार ओर अवलिया-ए-आली तबार में शुमार किये जाते थे ओर जुनूक़ में सैयदों के खानदान की सरपरस्ती आपको हासिल थी आप की वालिदा माजिदा भी एक नेक खातून थीं ओर शेह्ज़ादी-ज़ादी थीं. हज़रत ख़्वाजा दाना अलैहिर्रेहमा का ख़ानदान इतना मुक्त़दिर था कि चुग़ताई बादशाह सुल्तान हुसैन मिर्ज़ा, इब्राहीम हुसैन मिर्ज़ा, शैख़ मिर्ज़ा वगैरह ने अज़-रूए अक़ीदत अपनी बेटियाँ इस ख़ानदान में बियाही थीं.

*हज़रत ख़्वाजा दाना रहमतुल्लाह अलैह की सुरत में तशरीफ़ आवरी*

हज़रत ख़्वाजा दाना रहमतुल्लाह अलैह ब-हुक्मे इलाही सुरत मुग़ल फ़रमाँ-रवा अकबर बादशाह के ज़माने में तशरीफ़ लाये.आप की तशरीफ़ आवरी से पेहले मुग़ल बादशाह अकबर का हुक्म-नामा सुरत के हाकिम अब्दुर्रेह्मान तेहरानी ओर नाज़िमे क़िलादार क़लीज खान के नाम पहुँच चूका था कि हज़रत ख़्वाजा दाना साहब का शायाने शान इस्तिक्बाल कीया जाये, चुनान्चे हाकिम ओर नाज़िमे सुरत अपने अपने रुफ्क़ा ओर उमरा के हमराह बंदरे सुरात पर आप का पुर तपाक इस्तिक्बाल कीया गया.शेहरे सुरत आप को बहुत पसंद आया.उस वक़्त सुरत एक अज़ीम बन्दरगाह था ओर यहीं से लोग हज्जे बैतुल्लाह के लिए जाया करते थे इसलिए इसको बाबुल मक्का के नाम से भी याद कीया जाता है.हाल में जो इमारत मुनिसिपल
कॉरपोरेशन के नाम से जानी जाती है ये हाजियों का मुसाफिर खाना था ओर मक्काई पुल जो नानपुरा के पास है उसका नाम मक्का पुल था.इस पुल से हज्जाजे-किराम जहाज़ में बेठ कर हरमैन-शरीफैन के लिए रवाना होते थे.हज़रत शहंशाहे सुरत ख़्वाजा दाना साहब सुरत ओर इहेलियाने सुरत से बेइन्तिहा मुहब्बत फरमाते थे हज़रत कि मुहब्बत इन अशआर से ज़ाहिर हे जो आज भी दरगाह शरीफ के बुलंद दरवाज़े पर तहरीर हे.आप ने फरमाया!
कर्द तहरीर मुसव्विरे क़ुदरत
बाद आबाद बंदरे सुरत
पए इमदाद कश्ती हाए ईं बेहेर
वतन दारेम अन्दर कुन्ज ईं शहर
बरीं ख़िदमत ज़े-हक़ गुश्तैम मामूर
चे खुश गुफ्तंद अल्मामूर माज़ूर
तर्जुमा: “मुसव्विरे क़ुदरत ने तहरीर कीया है के सुरत आबाद है ओर आबाद रहेगा यहाँ की कश्तियों की इमदाद के लिए में ने इस शेहर के गोशे में अपना वतन बनाया है.ख़ुदावन्दे करीम की जानिब से सुरत के रहने वालों की हर किस्म की ख़िदमत करने के लिए मुक़र्रर हुआ हूँ.क्या अच्छा है माज़ूरों ओर बेकसों की ख़िदमत करने के लिए मुक़र्रर हुआ हूँ” यानी ख़ुलासए कलाम ये के अल्लाह तआला के हुक्म से में हर तरह की ख़िदमत के लिए मुक़र्रर कीया गया हूँ कोई दुःख का मारा ग़रीब यतीम! मिस्कीन या बेवह या कोई हाजतमंद मेरे पास आएगा उसकी हर हाजत पूरी करूंगा.ये सख़ी दाना शहंशाहे सुरत की ज़ाते गिरामी है कि आज भी आप के मज़ारे पुर अनवार पर हर क़िस्म के लोग जोक़ दर जोक़ हाज़िर होते हैं ओर अपनी दिली मुरादें हासिल करते हैं.किसी को औलाद मिल रही है तो किसी की ग़रीबी ओर तंगदस्ती दूर हो रही है तो कोई ला-इलाज बीमारी में मुब्तिला बीमार,शिफा पा रहा है तो किसी को इल्मे ज़ाहिरी व बातिनी से नवाज़ा जा रहा है.अल्गर्ज़ आप की बारगाह में जो भी रोता हुआ आता है वो हँसता हुआ जाता है.इन्शाअल्लाह ये फैज़ क़यामत तक जारी व सारी रहेगा.
_*क़ुत्बुल-आरिफीन हज़रत ख़्वाजा सैयद जमालुद्दीन दाना नक्शबंदी अलैहिर्रेहमा*_

हज़रत शहंशाहे सुरत ख़्वाजा दाना साहब सुरत ओर इहेलियाने सुरत से बेइन्तिहा मुहब्बत फरमाते थे हज़रत कि मुहब्बत इन अशआर से ज़ाहिर हे जो आज भी दरगाह शरीफ के बुलंद दरवाज़े पर तहरीर हे.आप ने फरमाया.!

*कर्द तहरीर मुसव्विरे क़ुदरत*
*बाद आबाद बंदरे सुरत*
*पए इमदाद कश्ती हाए ईं बेहेर*
*वतन दारेम अन्दर कुन्ज ईं शहर*
*बरीं ख़िदमत ज़े-हक़ गुश्तैम मामूर*
*चे खुश गुफ्तंद अल्मामूर माज़ूर*

*_तर्जुमा: “मुसव्विरे क़ुदरत ने तहरीर कीया है के सुरत आबाद है ओर आबाद रहेगा यहाँ की कश्तियों की इमदाद के लिए में ने इस शेहर के गोशे में अपना वतन बनाया है.ख़ुदावन्दे करीम की जानिब से सुरत के रहने वालों की हर किस्म की ख़िदमत करने के लिए मुक़र्रर हुआ हूँ.क्या अच्छा है माज़ूरों ओर बेकसों की ख़िदमत करने के लिए मुक़र्रर हुआ हूँ”_*
*नसब नामह पिदरी(Nasab Naamah Pidri)*

*हज़रत सैयद जमालुद्दीन अल-मअरूफ बह ख़्वाजा दाना साहब नक्शबंदी अलयह-रहमतो रिदवान का नसब नामह*

१.हज़रत सैयदिना मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलयहे-वसल्लम
२.हज़रत सैयदिना अली करमल्लाहू वजहुल करीम
३.हज़रत सैयद जाफ़रे सानी रहमतुल्लाह अलैह
४.हज़रत सैयद अली असग़र रहमतुल्लाह अलैह
५.हज़रत सैयद इस्माईल रहमतुल्लाह अलैह
६.हज़रत सैयद अब्दुल्लाह रहमतुल्लाह अलैह
७.हज़रत सैयद सुलेमान रहमतुल्लाह अलैह
८.हज़रत सैयद मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैह
९.हज़रत सैयद हसन रहमतुल्लाह अलैह
१०.हज़रत सैयद अहमद मशहूर ब ख्वाजा अता रहमतुल्लाह अलैह
११.हज़रत सैयद अब्दुल्लाह ज़र बख्श रहमतुल्लाह अलैह
१२. हज़रत ख़्वाजा सैयद विलायत रहमतुल्लाह अलैह
१३.हज़रत ख़्वाजा सैयद कुरैश रहमतुल्लाह अलैह
१४.हज़रत ख़्वाजा सैयद इस्माईल रहमतुल्लाह अलैह
१५.हज़रत ख़्वाजा सैयद बादशाह पर्दह-पोश रहमतुल्लाह अलैह
१६. हज़रत ख़्वाजा सैयद जमालुद्दीन दाना नक्शबंदी रिद्वानुल्लाही त आला अलय्हिम अजमईन.

(हवाला:तजकिरतुल इन्साब सफह:१३८)
*शजरह-ए-तय्यबह(Shajra-E-Tayyabah)*

*खानदाने नक्शबंदीयह आलियाह जमालीयह रिद्वानुल्लाही तआलाअलय्हिम अजमईन*

अय खुदा अपनी तू ज़ाते किब्रिया के वास्ते
साहिबे लौलाक अर्शे मुत्तुका के वास्ते
क़ल्ब रोशन कर मेरा ओर सिद्क़ की तोफीक़ दे
यारे ग़ारे हल-अता शम्सुद्दुहा के वास्ते
दे मुझे सोज़े जिगर ओर इश्क़े कामिल कर अता
हज़रते सलमाने बा-हिल्मो हया के वास्ते
बे-खुदो सर-मस्त कर ऐसी पिला इरफां की मै
हज़रते क़ासिम फ़क़ीह साहिब सबआ के वास्ते
नूरे बातिन कर अता बेहरे तरीक़त नक्शबंद
जाफ़रे सादिक़ इमामुल अवलिया के वास्ते
रख मुझे साबित क़दम ओर ज़ोह्दो तक़वा कर अता
इत्तिक़ाए बायज़ीदे बाख़ुदा के वास्ते
मिन-अरिफ की रम्ज़ से यारब मुझे आगाह कर
बुल-हसन खर्क़ानी ख़ुत्बुल गोसियह के वास्ते
चश्मे बीना कर अता ओर दे सफाई क़ल्ब में
ख़्वाजा-ए तोसी अली-ए बासफा के वास्ते
भरदे रग-रग में मेरी या रब तो नूरे मअरिफत
युसुफ हमदानी आरिफे पारसा के वास्ते
मोरिदे फैज़े इलाही वाकिफे इसरारे हक़
अब्दुल-ख़ालिक़ ग़ज्दे वानी मुक़तदा के वास्ते
दिल से ज़ुल्मत दूर कर ओर खोल दे बाबे हिजाब
हज़रते आरिफ मुहम्मद पारसा के वास्ते
दे मुझे तोफीक़ या रब अपने जिक्रो शुग्ल की
हज़रते महमूद ज़ाकिर रहनुमा के वास्ते
ख़ल्क़ की ख़िदमत का या रब दे मुझे इज़्ज़ो शरफ
हज़रते रामेतनी ख़ुत्बुल-उला के वास्ते
जाम इरफां का पिला ओर खोल दे राज़े ख़फी
ख़्वाजा बाबा शनास हक़ आश्ना के वास्ते
हुब्बे दुनिया दूर कर ओर अपनी उल्फत दे मुझे
हज़रते सैयद कुलाले बा-सफा के वास्ते
रेहरवे राहे शरीअत ओर तरीक़त पर मुझे
रखना शाहे नक्शबंद एहले तुक़ा के वास्ते
रख मुअत्तर या इलाही बूए वेहदत से दिमाग़
हज़रते अत्तार बा-सिद्क़ो सफा के वास्ते
उकदह ला-हल को हल कर अपने लुत्फो आम से
ख़्वाजा-ए याकूबे चरखी हक़-नुमा के वास्ते
आफ़ताबे दीने मिल्लत माह्ताबे हैरियत
शाह उबैदुल्लाह क़ुत्बुल अवलिया के वास्ते
माअसियत से दे अमां ओर खातिमा बिल-ख़ैर कर
हज़रते ख़्वाजा हसन सैयद अता के वास्ते
हाफ़िज़े हुज्जाज कअबा बन्दरे बाबुल हरम
शाह जमालुद्दीन दाना रहनुमा के वास्ते
रास्ता दिखला मुझे सब्रो रज़ा का या ख़ुदा
ख़्वाजा सैयद अबुल-हसन सिद्क़ो सफा के वास्ते
नज़अ में मुझ को बचाना या ख़ुदा शैतान से
ख़्वाजा-ए सैयद मुहम्मद मुक़तदा के वास्ते
क़ब्र रोशन कर मेरी यारब तुफैले ख़्वाजगान
ख़्वाजा-ए नूरुल-हसन नूरे ख़ुदा के वास्ते
मम्बए जूदो अता दरयाए फैज़े सरमदी
ख़्वाजा-ए फैज़ुल-हसन काने सखा के वास्ते
गव्हरे दरयाए वेहदत मअदने इसरारे हक़
ख़्वाजा हज़रत सैयदे नूरुल-उला के वास्ते
गुलशने सज्जाद्गाने मसनदे ख़्वाजा जमाल
ता-अबद फूले-फले ख़ैरुलवरा के वास्त
सुन ख़ुदा फ़रियाद अब इस उम्मते महबूब की
अज़-पए पीराने शजरह अवलिया के वास्ते
बरकतो रेहमत के या रब खोल दरवाज़े तमाम
ख़्वाजगाने नक्शबंद ओर अम्बिया के वास्ते
दीनो दुनिया में इलाही आबरू रखना मेरी
असफिया व अज़किया व अत्किया के वास्ते
गव्हरे मक़सूद से भर दामने वासिफ ख़ुदा
अज़ बराए पंजतन आले-अबा के वास्ते

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s