Hadith:Khair Ul Bareeyah

He Who Doe’s Not Say:
Mawla Ali Al Murtaza (عليه السلام)‎
Is Khair Ul Bareeyah
(the best of creation), commits infidelity.

~ Holy Prophet Muhammad (صلى الله عليه وآله وسلم)‎

References:
Tareekh Damishq, Asakir, vol.42 pg.373
Kanz ul Ummal, Hindi, vol.11 pg.414 #33046
Yanabi al Mawaddah, Qanduzi, vol.1 pg.290
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اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَ عَلَی اٰلِ سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَ بَارِکْ وَ س٘لِّمْ

रक़्स करना

हज़रत अली (रादिअल्लाहु अन्हु) फ़रमाते हैं कि मैं, जाफ़र और ज़ैद के साथ हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास गया। हुज़ूर ने ज़ैद से फ़रमाया कि तुम मेरे आज़ादकरदाह हो (अंता मौलाय)। जिसपर ज़ैद एक पैर पर उछाल-उछालकर (हजाला) हुज़ूर के चारों ओर (ख़ुशी) से घूमने लगे। उसके बाद हुज़ूर ने जाफ़र से फ़रमाया कि तुम मेरी तख़लीक़ और मेरे आदाब में मेरी याद दिलाते हो, जिसपर जाफ़र ने भी ज़ैद के पीछे उछलना शुरू कर दिया। उसके बाद हुज़ूर ने हज़रत अली से फरमाया कि तुम मुझसे हो और मैं तुमसे हूँ। इसके बाद आपने भी जाफ़र के पीछे वैसा ही करना शुरू कर दिया।

हवाला:-
[मुसनद अहमद बिन हम्बल, जिल्द 1, साफ नंबर 537, हदीस नंबर 857]

◆ इमाम बयहक़ी इस हदीस की शराह बयान् करते हुए फ़रमाते हैं कि इस हदीस से (ख़ुशी में) उछलने (या रक़्स करने) पर सहीह ‘सबूत’ और ‘जायज़ होना’ साबित होता है जिसमें (ख़ुशी से) खड़े हो जाना, या ख़ुशी में उछलना है, और ‘रक़्स करना’ भी इसी की तरह है जोकि जायज़ है- और अल्लाह ही इसके बारे में खूब जनता है।

Hadith Jis Ne Tumhari Itteba Na Ki

Hazrat Huzaifa رضی اللہ تعالی عنہ Se Riwayat Hai Farmate Hai ke

Rasool Allah صلی اللہ علیہ و آلہ وسلم ne Maula Ali علیہ السلام se Farmaya
Maine Apne Aur Apni Ummat ke Darmiyan Tujhe Ala’mat banaya Hai,Pas Jis Ne Tumhari Itteba Na Ki us Ne Kufr Kiya..

“Tareeq Ibne Asaqir, Jild 45, Safah 296, Hadees Number, 9763”