Aftab e Ashraf 18

आपके अहले ख़ाना- आप तीन भाई थे! आपके बड़े भाई का इस्मे गिरामी सैय्यद शाह जमील अशरफ़ जायसी था! मंझले भाई सैय्यद शाह सिराज अशरफ़ के नाम से जाने जाते थे जिनके बेटे हज़रत सैय्यद मेराज अशरफ़ जायसी क़िब्ला आपके ख़लीफ़ा और जानशीन हुएं! आप सबसे छोटे थे! आपकी चार हमशीरगान भी थीं जिनका इस्मे गिरामी ये है. सैय्यदा आबिदा ख़ातून (आप रिश्ते में मुसन्निफ़ की बड़ी अम्मा लगती थीं, इन्हीं के आगोशे शफ़क़त में मुसन्निफ़ ने परवरिश पाई है) सैय्यदा आसिया ख़ातून, सैय्यदा आसमा ख़ातून और सैय्यदा मुहम्मदुन्निसा!

आपके वालिद हज़रत सैय्यद हुजूर अशरफ़ अशरफ़िउल जीलानी के छोटे भाई यानी आपके चचा मोहतरम का इस्मे गिरामी हज़रत सैय्यद गुलाम यूसुफ़ अशरफ़ अशरफ़िउल जीलानी उर्फ बब्बू मियां जायसी था जिनकी सिर्फ एक ही दुख़्तर बीबी सैय्यदा ख़ातून थीं जो इस किताब के मुसन्निफ़ की और मुझ ब्लॉगर की हक़ीक़ी दादी थीं!(42)

हज़रत सैय्यद शाह जलाल अशरफ़ जायसी रहमतउल्लाह अलैह एक मजजूब और वली.ए. कामिल थे! आप अपने अस्लाफ़ की रौशन तस्वीर थे और अपने जदे अमजद हज़रत सैय्यद मख़दूम अशरफ़ जहांगीर सिमनानी किछौछवी रहमतउल्लाह अलैह के हद दर्जा मुशाबेह थे! जिस तरह आपके जद बुजुर्गवार ने तख़्त सिमनान को छोड़ा और सल्तनत को ठोकर मार कर लिबासे दरवेशी जेबतन फ़रमाया उसी तरह आपने भी अपनी तमाम जायदाद को ठोकर मार कर दरवेशाना ज़िन्दगी बसर किया! जिस तरह आपके जद अमजद ने दुनिया तर्क कर के तन्हाई अख्तियार कर ली थी उसी तरह आप भी तारीकुददुनिया थें! अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से मेरी यही दुआ है कि वो इस ख़ाकसार मुसन्निफ़ को हमेशा बारह इमाम चौदह मासूमीन और चारों पीरां सरकार गौस पाक, सरकार अमीर पाक, सरकार मदार पाक, और सरकार ख़्वाजा पाक, के सदले और तुफ़ैल हज़रत की रूहानी फैज़ से मुस्तफ़ीज़ और मुस्तफ़ैद करता रहे और ईमान के साथ ज़िन्दगी और मौत अता करे अमीन या रब्बुल आलमीन!

दुआ का तालिब. अमीर सैय्यद शाह क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद आक़िब हसनी क़ुत्बी और अमीर सैय्यद शाह अहमद शफाई हसनी क़ुत्बी

हज़रत सैय्यद जलाल अशरफ रहमतउल्लाह अलैह के खानदान ददिआल और ननिआल का तारीखी पसमंज़र। हुजूर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की शहज़ादी हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा सलामउल्लाह अलैहा का निकाह हज़रत सैय्यदना मौला अली अलैहिस्सलाम से हुआ जिनसे आपके दो शहज़ादियाँ और तीन शहज़ादे तवल्लुद हुएं!

(1) हज़रत सैय्यदना इमाम आली मक़ाम इमाम हसन अलैहिस्सलाम (2) हज़रत सैय्यदना इमाम आली मक़ाम इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम (3) हज़रत सैय्यदना मोहसिन अलैहिस्सलाम
(4) हज़रत सैय्यदा बीबी ज़ैनब सलामउल्लाह अलैहा और (5) हज़रत सैय्यदा बीबी उम्मे कुलसूम सलामउल्लाह अलैहा!

बन्ने अकदस से तीन शहज़ादे

(1) हज़रत सैय्यदना इमाम मुहम्मद नपसे ज़किया शहीद अलैहिस्सलाम
(2) हज़रत सैय्यदना इब्राहीम बाखेमीरी शहीद अलैहिस्सलाम (3) हज़रत सैय्यदना मूसा अल जौन अलैहिस्सलाम पैदा हुएं! हज़रत सैय्यदना इमाम मुहम्मद नपसे ज़किया शहीद अलैहिस्सलाम अपने वालिद हज़रत सरकार सैय्यदना अब्दुल्लाह अल महज़ अलैहिस्सलाम के ख़लीफ़ा और जानशीन हुएं! खानदाने अहले बैते नबूवत के तमाम तबलंकात आप ही के पास मौजूद थे और जुल्फिकार. ए. अली अलैहिस्सलाम भी आप ही के पास मौजूद थी! आप ही तहरीक अल्वी के बानी हैं और आप ही ने अब्बासियों के जुल्म के खिलाफ खुरूजो कयाम किया! हज़रत इमाम अबु हनीफ़ा रजिअल्लाह तआला अन्हु और हज़रत इमाम मालिक रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने आप से इल्म हासिल किया और आपके दस्ते पाक पर बैअत किया और आपके रफाक़त में फ़तवा दिया जिसके ऐवज़ हज़रत इमाम अबु हनीफ़ा रज़िअल्लाह तआला अन्हु को ज़हर दे दिया गया और हज़रत इमाम मालिक रज़ियल्लाह तआला अन्हु का बाजू कटवा दिया गया! हज़रत इमाम मुहम्मद नपसे ज़किया अलैहिस्सलाम के दस्ते हक़ परस्त पर आपके तमाम अहले खाना (सादात अल्वी हसनी हुसैनी) ने और तमाम अहले मक्का मदीना और हिजाज़ ने बैअत किया! सं १४५ हिजरी में बड़ी बेदर्दी के साथ अब्बासी ख़लीफ़ा जाफ़र अल मंसूर ने आपको शहीद करवा दिया!

हज़रत सैय्यदना इमाम नपसे ज़किया शहीद अलैहिस्सलाम की शादी हज़रत सैय्यदा उम्मे सलमा बिन्त हज़रत सैय्यदना मुहम्मद इब्न हज़रत सैय्यदना हसन मुसन्ना इब्न हज़रत इमाम सैय्यदना हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम से हुई जिनके बत्ने अक़दस से पाँच औलादें तवल्लुद हुई।

(1) हज़रत सैय्यदना सरकार अब्दुल्लाह अल अशतर उर्फ अब्दुल्लाह शाह ग़ाज़ी रहमतउल्लाह अलैह

(2) हज़रत सैय्यदना हसन अल अशतर उर्फ मिसरी शाह ग़ाज़ी रहमतउल्लाह अलैह

(3) हज़रत सैय्यदना अलीरहमतउल्लाह अलैह (4) हज़रत सैय्यदा ज़ैनब (5) हज़रत सैय्यदा फातिमा

हज़रत सैय्यदना सरकार अब्दुल्लाह अल अशतर उर्फ अब्दुल्लाह शाह साज़ी रहमतउल्लाह अलैह ने अपने वालिद हज़रत इमाम मुहम्मद नपसे ज़किया अलैहिस्सलाम से बैअत की और अपने वालिद के जानशीन होकर पैगामे हुसैन अलैहिस्सलाम पहुंचाने के लिए सरज़मीने मदीना से सरज़मीने सिंध तशरीफ़ लाएं जहाँ सन १५३ हिजरी में अब्बासी मवर्नर सफीह बिन अमरु से जंग करते हुए आपने जामे शहादत नोश फरमाया! आपका मज़ार मुबारक क्लिपटन करांची पाकिस्तान में समुन्द्र के किनारे मर्जए खलायक खासो आम हैं! आपकी पहली शादी आपके चचा के बेटी से मदीना मुनव्वरा में हुई थी जिनके बत्ने अकदस से आपके एक शहज़ादे हज़रत सैय्यदना मुहम्मद अल असगर सानी रहमतउल्लाह अलैह पैदा हुए जिनके नस्ले पाक से खानवादा-ए-कुतबिया कबीरिया का आलीशान घराना फ़ैज़ बख्श खलायक है और जो हज़रत सैय्यदना जलाल अशरफ रहमतउल्लाह अलैह का ननिआली ख़ानदान है! हज़रत अब्दुल्लाह शाह गाजीरहमतउल्लाह अलैह की दूसरी शादी सिंध के राजा की बेटी से हुई जो बतौर खिदमत आपके निकाह में दाखिल थीं जिनके शिकम से आपके एक बेटे हज़रत हसन अल अशतर रहमतउल्लाह अलैह पैदा हुए जो लावल्द फौत हुए!

हज़रत सैय्यदना मूसा अल जौन अलैहिस्सलाम जो हज़रत सरकार इमाम सैय्यदना मुहम्मद नफ्स ज़किया अलैहिस्सलाम के हक़ीक़ी छोटे भाई थे और आप ही के मुरीदो ख़लीफ़ा भी थे! आप बड़े मुत्तक़ी परहेज़गार थें!

आप अपने दोनों भाईयों हज़रत सैय्यदना मुहम्मद नफ़्स ज़किया अलैहिस्सलाम और हज़रत सैय्यदना इब्राहीम बाखेमीरी अलैहिस्सलाम के शहादत के बाद रोहपोश होकर गुमनामी की ज़िन्दगी गुज़ारते रहें और इसी हालत में विसाल फरमा गयें! आपकी नस्ले पाक से तमाम खानवादा-ए-जीलानिया और अशरफिया फ़ैज़ बख्शख़लायक है और जो हज़रत सैय्यदना जलाल अशरफ रहमतउल्लाह अलैह का ददिआली खानदान है!

इस ऐतबार से हज़रत सैय्यद जलाल अशरफ रहमतउल्लाह अलैह का सिलसिला-ए-नसब तरफ़ैन से हज़रत सरकार सैय्यदना इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम तक इस तरह से पहुँचता है. ।

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