नमाज़ के अज़ीमुश्शान फ़वाइद

नमाज़ के अज़ीमुश्शान फ़वाइद

हज़रत अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत है कि रसूल ए पाक ने इरशाद फ़रमाया नमाज़ दीन के लिए सुतून का दर्जा रखती है और इसकी अदाइगी से दस बरकात हासिल होती हैं,

1 दुनिया और आख़िरत में चहरा मुनव्वर रहता है,
2 क़ल्बी व रूहानी मुशर्रत हासिल होती है,
3 क़ब्र मुनव्वर हो जाती है,
4 मैदाने अमल में नेकियों का पलड़ा भारी हो जाता है,
5 जिस्म इमराज़ (बिमारियों) से महफ़ूज़ रहता है,
6 दिल में सोज़ो गुदाज़ पैदा होता है,
7 बहिश्त (जन्नत) में हूरो ग़िलमां मिलते हैं,
8 दोज़ख़ की आग और रोज़े महशर की तमाज़त आफ़ताब से निजात मिल जाती है,
9 ख़ुदा ए क़ुद्दूस की ख़ुशनूदी हासिल होती है,
10 जन्नत में ख़ुदा ए पाक के दीदार की सआदत हासिल होती है,

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़ी अल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत है कि एक रोज़ रसूल ए पाक ने नमाज़ का ज़िक्र करते हुए इरशाद फ़रमाया के

जो शख़्स नमाज़ की हिफ़ाज़त करेगा तो यह उसके लिए क़यामत में रोशनी और बुरहान बनेगी और जो नमाज़ की मुहाफ़िज़त नहीं करेगा तो उसके लिए रोशनी, निजात और बुरहान नहीं होगी और वो क़यामत के रोज़ क़ारून, फ़िरऔन, हामान और उबइ बिन ख़ल्फ़ की मअयत में होगा,

📗मिशकात शरीफ़

हज़रत सय्यदना हसन की रिवायत है कि रसूल ए पाक ने इरशाद फ़रमाया नमाज़ पढ़ने वाले के लिए तीन सआदतें मख़सूस हैं- अव्वल यह के उसके पांव के नाखूनों से लेकर सर की मांग तक आसमान से रहमतों और बरकतों का नुज़ूल होता रहता है दूसरे यह के उसके क़दमों से लेकर फ़िज़ा ए आसमानी तक फ़रिश्ते उसकी मुहाफ़िज़त (हिफ़ाज़त) करते रहते हैं तीसरे यह के एक फ़रिश्ता आवाज़ देता है कि अगर उसे ख़ुदा के साथ अपना मालूम हो जाए के में इस हालत में ख़ुदा के बहुत क़रीब हूँ तो यह नमाज़ में इस क़दर मुस्तग़रक़ हो जाए तो फ़िर उसे छोड़ कर किसी और जानिब मुतवज्जह ना हो,

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