Hadith on Dushmane Ahle Bayt

Dushmane Ahle Bayt hone ki wajah se Allah Ta’aala Uski Ibadat ko Radd Farmakar use Yahudiyo ke Saath Uthayega.

📝Hadrat Jabir Bin Abdullah رضی اللہ تعالی عنهما riwayat Bayan Karte hain ke Rasool Allah Ne Hume Khutba Irshad Farmaya ,Aap صلی اللہ تعالی علیه وآله وسلم farma rahe they

‎من أبغضنا أھل البیت حشرہ اللہ یوم القیامته یهودیا. فقلت : یا رسول اللہ صلی اللہ تعالی علیه وآله وسلم! و ان صام و صلی؟ قال: و ان صام و صلی.

Ya’ani Jisne Hum Ahle Bayt ke Saath Bugz rakha to Roze Qayamat Uska Hashr Yahuduiyo ke saath hoga. Maine Arz kiya Ya Rasool Allah صلی اللہ تعالی علیه وآله وسلم! Agarche wo Roza rakhe aur Namaz bhi Padhe? Aap صلی اللہ تعالی علیه وآله وسلم ne Farmaya : Haa Agarche wo Roza rakhe aur Namaz bhi Padhe uske bawajud Dushmane Ahle Bayt hone ki wajah se Allah Ta’aala Uski Ibadat ko Radd Farmakar use Yahudiyo ke Saath Uthayega.

📚References:-

📚”Mu’jamal Awsat Jild 4 Hadeeth Number 4002″

📚”Majmuah Az-Zawaid Jild 9 Safah 172″

इमाम हसन अलैहिसलाम की शहादत पर मुआविया ने क्या कहा ???

इमाम हसन अलैहिसलाम की शहादत पर मुआविया ने क्या कहा ??? गौर से पढीये और ज्यादा से ज्यादा share कीजिये।

सहाबी अल मिक़्दाम इबने मदिकारीब और एक दूसरा शख्श बनु असद से मुआविया से मिलने गए।

मुआविया ने अल मिक़्दाम से कहा “क्या तुम जानते हो की हसन इबने अली फौत हो चुके ??”

हज़रत मिक़्दाम ने कहा “इन्ना लिल्लाहे व इन्ना अलैहि राजिऊन”

जो की किसी भी मुसलमान के गुज़र जाने पर हम पढ़ ते है, ये तो फिर भी नवासा इ रसूल थे। पर मुआविया को ये बात पसंद न आयी

और मुआविया बोल पड़ा “क्या तुम हसन का मरना इस्लाम के लिए मुसीबत समाज ते हो ??”

हज़रात मिक़्दाम ने कहा “क्यों ना समझु जब की ये हकीकत है की अल्लाह के पैगम्बर हसन और हुसैन को अपनी गोद में रखते और कहते की हसन मुझ से है और हुसैन अली से”

अल्लाहु अकबर !!!! अल्लाहु अकबर !!!!

तब उसने कहा “वो तो आग का अंगारा था, जो अल्लाह ने बुझा दिया”
नऊज़ुबिल्लाह मीन ज़ालिक

तब हज़रात इ मिक़्दाम ने कहा आज मैं तुझे तेरी हकीकत बताऊंगा चाहे तुझे गुस्सा आये और वो बताऊंगा जो तुझे सुन न पसंद नहीं।

फिर कहा “मुआविया मैं सच बोलू तो सच बताना और जुठ बोलू तो जुठ, क्या तूने नहीं सुना की अल्लाह के पैगम्बर ने सोना पहन ने से मना फ़रमाया था????”

मुआविया ने कहा “हा”

फिर हज़रात इ मिक़्दाम ने कहा “तुझे अल्लाह की कसम, क्या नबी ने रेशम के कपडे पहन ने से मना नहीं फ़रमाया ???” मुआविया ने फिर कहा “हा”

फिर हज़रात इ मिक़्दाम ने कहा “तुझे अल्लाह की कसम, क्या नबी ने जानवर की खाल के कपडे पहन ने से और उस पर बैठना मना नहीं फ़रमाया ???” मुआविया ने फिर कहा “हा”

हज़रत मिक़दाम ने कहा “ये तीनो हराम काम तेरे घर में होते मैंने देखा है।”

फिर मुआविया ने हज़रत मिक़्दाम को 200 दिरहम दिए और कहा “मैं जानता हु तुम से नहीं बच सकता” हज़रत मिक़्दाम ने वो उसी वक़्त गरीबो में बाँट दिए।

अब आप खुद सोचिये, हुज़ूर सलल्लाहो अलैहिवसल्लम ने जो काम हराम कहा ऐसे तीन काम मुआविया के घर में हो रहे है और इमाम हसन की शहादत पर खुसी मन रहा है। ये कैसा सहाबी है ?????

  • सुनन अबू दाऊद जिल्द 4, हदीस न. 4131, सफा न. 193
  • तारीख इ मसूदी जिल्द 1, हिस्सा 2, सफा न. 365-66
  • तज़किरा अल खवास सफा न. 245

👇👇👇👇👇👇

Imam Hasan AlaihisSalam ki shahadat pe Muwayia ne kya kia

जब मुआविया को खबर मिली की अमीरुल मोमिनीन इमाम हसन इब्ने अली अलैहिस्सलाम शाहिद हो चुके हैं, उसने उची आवाज़ में तकबीर बुलंद की और शुक्र का सजदा किया।

  • Rabi’ ul Abrar, Volume 4 pages 186 & 209
    By Allamah Zamakshari (Ehle Sunnat)

Scan Page
👇👇👇👇👇👇👇
Yahi riwayat ke aur bhi hawale ehle sunnat ki kai aur moatbar kitabo me hay

👇👇👇👇

  1. Akhbar al Tawaal, page 221,
  2. Dhikr Hasan
    Aqd al Fareed, Volume 1 page 225 Dhikr Hasan
  3. al Imama wa al Siyasia, page 159 Dhikr Hasan
  4. Tarikh Khamees, Volume 2 page 294
  5. Hayat al Haywaan, Volume 1 page 84 Dhikr Hasan
  6. Tadhkiratul Khawaas, page 123 Dhikr Hasan
  7. Nuzlul Abrar by Allamah Badkashani al-Harithi, page 85 Dhikr Hasan
  8. Muruj al Dhahab, Volume 3 page 8, Wafaat Hasan
  9. Habeeb al Syaar, Volume 1 page 19 Dhikr Hasan
  10. Maqatil Hasnayn, Volume 1 page 140
  11. Tayseer al Bari fee Sharh Sahih Bukhari as per ‘Maula aur Mu’awiya’ page 332
  12. Dhurat ul Ma’arif, Volume 4 page 756 Dhikr Yazeed
  13. Rabi’ ul Abrar, Volume 4 pages 186 & 209
  14. Tareekh Abul Fida
    Wafayat al-A’ayan, by Ibn Khalakan, Vol 2 page 67

हज़रत शैख़ कुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी रहमतुल्लाह अलैह

हज़रत शैख़ कुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी अल
कड़वी:-
आप का नाम मुहम्मद, अमीरे कबीर और कुतुबउद्दीन आपके अलक़ाब और कुन्नियत अबुल हसन है! आपके सन् विलादत के मुताल्लिक अलग अलग क़ौल पाए जाते हैं! लेकिन सही ये है कि आपकी विलादत सन् ५५१ (551) हिजरी में मदीना मुनव्वरा में हुई!
आपके वालिद माजिद शैख़ुल आलम इमामुल आईम्मा व असफ़िया हज़रत सैय्यद रशीदउद्दीन अहमद अल मदनी अल ग़ज़नवी रहमतुल्लाह अलैह हैं जो अपने इल्मी हल्क़ा के साथ सरज़मीने मदीना से बग़दाद तशरीफ़ लाएं! उस वक़्त बग़दाद में शैख़ मोहीउद्दीन अब्दुल क़ादिर गिलानी रहमतुल्लाह अलैह की ज़ात मर्ज ख़लायक बनी हुई थी! जिस वक़्त हुज़ूर ग़ौसे आज़म को शैख़ अहमद मदनी के आमद की ख़बर मिली उस वक़्त अपनी ख़ानकाह से निकल कर आपका ख़ैर मख़दम किया और आपको अपनी ख़ानकाह में ठहराया! हज़रत शैख़ रशीदउद्दीन अहमद मदनी और हज़रत शैख़ मोहीउद्दीन अब्दुल क़ादिर गिलानी सादात हसनी और औलाद अब्दुल्लाह अल महज़ हसनी हुसैनी अलैहिस्सलाम से हैं! हज़रत शैख़ मोहीउद्दीन अब्दुल क़ादिर गिलानी ने अपनी बड़ी हमशीरह बीबी उम्मे ज़ैनब को हज़रत शैख़ रशीदउद्दीन अहमद मदनी की ज़ौजियत में दे दिया जिन के बत्न से हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी पैदा हुएं! चुनाँनचे हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी की परवरिश इन्हीं जलीलुल कद्र उलेमा व औलिया के आग़ोशे रहमत व शफ़क़त में परवान चढ़ी और अवाएल में तालीमों तरबियत भी अपने वालिद शैख़ रशीदउद्दीन अहमद अल मदनी और अपने मामू शैख़ मोहीउद्दीन अब्दुल क़ादिर गिलानी से पाई और इनके विसाल के बाद शैख़ ज़ियाउद्दीन अबुनजीब सोहरवर्दि के सामने ज़ानु-ए-तलम्मुज़ हुएं लेकिन मुकम्मल तसकीन हज़रत शैख़ नज्मउद्दीन कुबरा रहमतुल्लाह अलैह से हासिल हुई और कुबराविया फ़िरदौसिया रंग आप पर ग़ालिब रहा चुनाँनचे हज़रत शैख़ नज्मउद्दीन कुबरा फ़िरदौसी रहमतुल्लाह अलैह ने आपको ख़िरका व ख़लाफ़त से सरफ़राज़ फ़रमाया!

हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी रहमतुल्लाह अलैह वस्ल के इमाम, मक़ामे समदियत और सिद्दीक़ियत पर फ़ाएज़ ऐसे मक़बूल बारगाहे इलाही बुज़ुर्ग हैं कि ज़ाहिर और पोशीदा तामाम औलिया आपके हुज़ूर सरे ख़म तसलीम रखते हैं! आपको आपके वालिद हज़रत शैख़ रशीदउद्दीन अहमद मदनी और आपके मामू हज़रत शैख़ मोहीउद्दीन अब्दुल क़ादिर गिलानी से आबाई बैअत व ख़लाफ़त और सज्जादा हज़रत इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम भी हासिल है! इन तमाम ऐज़ाज़ो इकराम के अलावा आप ग़ाज़ी व फ़ातेह मारकाए हिंद भी हैं! आपको हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के बारगाह से फ़तेह व नुसरत, फ़रोग़ दीने हक़ और हिंदल वली होने की बशारत भी हासिल हुई! आपसे जारी होने वाला सिलसिला कुबराविया कबीरिया क़ुतबिया कहलाया और हिंद व सिंध में फैल गया लेकिन इस सिलसिले के मशाऐख़उज़ाम बेमिस्ल सिफ़अतों के हामिल होने के बावजूद अम्र मख़फ़ी के तहत पसे पर्दा रहें (इस मौज़ू पर मज़ीद मालूमात के लिए फ़कीर की तसनीफ़ “चिराग़ ख़िज़्र” का मुताला करें)!

जैसा कि ऊपर ज़िक्र हो चुका है कि हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी रहमतुल्लाह अलैह को हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम के जानिब से हिंदुस्तान जाने का हुक्म और फ़तेह की बशारत मिली जिसके तहत आप मदीना मुनव्वरा से अपने तीनों शहजादों और तमाम मुरीदों के हमराह बग़दाद व ग़ज़नी होते हुए हिंदुस्तान तशरीफ़ लाएं और सरज़मीने दिल्ली पहुँचे जहाँ सुल्तान क़ुतुबउद्दीन ऐबक़ की हुकूमत थी जिसने आपकी आमद पर आपके हुरमत व तौक़ीर के ख़ातिर आपकी राहों में अपनी पलकें बिछा दिया और आपके दस्त हक़ परस्त पर बैअत होकर आपके हल्क़ा ए इरादत में शामिल हो गया! दिल्ली से होते हुऐ आप अपने फरज़न्दों व मुरीदों कि जिसमें कुतुबउद्दीन ऐबक भी शामिल था और उसके तमाम फौजी लशकरों के साथ राजा जय चँद राठौर पर हमलावर हुएं जिसकी हुकूमत हिन्दुस्तान के मरकज़ कन्नौज व कड़ा पर थी और जिसके हुकूमत की हद् बनारस तक थी! लिहाज़ा आपने बशारते नबवी के तहत राजा जय चँद राठौर के तमाम छोटे बड़े हुकूमती इलाकों को फतेह करते हुए पाये तख़्त “कन्नौज” को भी फतेह कर लिया और फिर उसके दारूल सल्तनत (राजधानी) “कड़ा” पर हमलावर होकर उसे अपनी हुकूमत में शामिल करके परचम इस्लाम को बुलन्द किया और इस बशारते नबवी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को भी पूरा कर दिया “कि सरज़मींने हिंद पर इस्लाम का परचम मेरे फ़रज़न्द क़ुतुबउद्दीन के हाथों फैरेगा”!

हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी रहमतुल्लाह अलैह ने सरज़मीने कड़ा में फ़रोग़ उलूम दीन के लिए हिंदुस्तान की सबसे पहली दर्सगाह व ख़ानकाह की संग बुनियाद रखी जिससे हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की ये भी बशारत पूरी हुई “कि हिंदुस्तान में इस्लाम की इशाअत मेरे फ़रज़न्द क़ुतुबउद्दीन पर मुनहसिर है”!

हिंदल वली हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी अल कड़वी रहमतुल्लाह अलैह और हिंदल वली शैख़ मोईनउद्दीन संजरी अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह एक ही वक़्त में हिंदुस्तान तशरीफ़ लाने वाले, सरकार अलैहिस्सलाम से हिंदल वली की बशारत पाने वाले, शैख़ नज्मउद्दीन कुबरा फ़िरदौसी से फ़ैज़याफ़्ता, हुज़ूर ग़ौसे आज़म के भांजे और आपस में ख़लेरे भाई लगते थें!

किताब “तबक़ात नासरी” में हैं कि हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी अल कड़वी रहमतुल्लाह अलैह सुल्तान बहराम शाह बिन सुल्तान अलतमश के अहदे हुकूमत सन् ६३७ (637) हिजरी में देहली के शैख़ुल इस्लाम के मंसब पर फ़ाएज़ हुएं और सुल्तान नासिरउद्दीन महमूद के अहदे हुकूमत सन् ६५३ (653) हिजरी में सुबुग्दोश हुएं!

हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद मदनी रहमतुल्लाह अलैह का विसाल सन् ६७७ (677) हिजरी में सर ज़मीने “कड़ा” पर हुआ और वहीं आपका मज़ार मुबारक मर्ज ख़लायक ख़ासो आम है!

आपसे सिलसिला फ़िरदौसिया का कुबराविया कबीरिया क़ुतबिया सिलसिला आगे बढ़ा!

सिलसिला व ख़ानदान कुबराविया कबीरिया क़ुतबिया से इस कसरत से जलीलुल क़द्र औलिया का ज़हूर हुआ कि दूसरे सिलसिला व ख़ानदान में ढूंढने से न मिलेगा जैसे-

  • हज़रत शैख़ निज़ामउद्दीन हसन मदनी (कड़ा)
  • हज़रत शैख़ क़वामउद्दीन महमूद मदनी (देहली)
  • हज़रत शैख़ ताजउद्दीन मदनी (बदायूं)
  • हज़रत शैख़ रुक़्नउद्दीन मदनी (कड़ा)
  • हज़रत शैख़ सद्रउद्दीन मदनी (कड़ा)
  • हज़रत शैख़ काज़ी क़ुतुबउद्दीन (बदायूं)
  • हज़रत शैख़ काज़ी अलाउद्दीन (बदायूं)
  • हज़रत शैख़ अलाउद्दीन जवेरी (बुलंद शहर)
  • हज़रत शैख़ अहमद पीर जनम (पंजाब)
  • हज़रत शैख़ शम्सउद्दीन मौलाना ख़्वाजगी (कड़ा)
  • हज़रत शैख़ अबुजाफ़र अमीर माह बहराइची (बहराइच)
  • हज़रत शैख़ तक़िउद्दीन झूँस्वी (झूँसी इलाहाबाद)
  • हज़रत शैख़ ज़ियाउद्दीन मुफ़स्सिर ज़ाहिद (कड़ा)
  • हज़रत शैख़ तक़ि अंसारी (सिंध)
  • हज़रत शैख़ फ़ज़्लउल्लाह गोशाएँ क़ुतबी (बारह दरी बिहार शरीफ़)
  • हज़रत शैख़ महमूद क़ुतबी (बारह दरी बिहार शरीफ़)
  • हज़रत शैख़ नसीरुद्दीन क़ुतबी (बारह दरी बिहार शरीफ़)
  • हज़रत शैख़ मुत्तकी क़ुतबी (बारह दरी बिहार शरीफ़)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद नक़ी क़ुतबी (बारह दरी बिहार शरीफ़)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद तक़ि क़ुतबी दरवेश बेरिया (बारह दरी बिहार शरीफ़)
  • हज़रत शैख़ निज़ामुद्दीन क़ुतबी (बारह दरी बिहार शरीफ़)
  • हज़रत शैख़ अहलउल्लाह क़ुतबी (बाड़ह)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद जाफ़र क़ुतबी (बाड़ह)
  • हज़रत शैख़ ख़लीलउद्दीन क़ुतबी (मुनिमाबाद पटना)
  • हज़रत शैख़ मख़दूम मुहम्मद मुनिम पाक (पटना)
  • हज़रत शैख़ अहमद क़ुतबी (माल्तीपुर बँगाल)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद सालेह क़ुतबी (फ़तेहपुर)
  • हज़रत शैख़ बाबउल्लाह क़ुतबी ( पाटी गली मानिकपुर)
  • हज़रत शैख़ ख़लील क़ुतबी (मानिकपुर)
  • हज़रत शैख़ क़ुतुबउद्दीन सानी क़ुतबी (जायस)
  • हज़रत शैख़ अलाउद्दीन क़ुतबी (नसीराबाद)
  • हज़रत शैख़ अलमउल्लाह क़ुतबी (तकिया रायबरेली)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद अद्ल उर्फ़ शाह लाला क़ुतबी
    (रायबरेली)
  • हज़रत शैख़ काज़ी हसन क़ुतबी (अझवा)
  • हज़रत शैख़ फ़ैज़उल्लाह क़ुतबी ( कौराली सोराम)
  • हज़रत शैख़ मीर अली क़ुतबी (रुदौली)
  • हज़रत शैख़ लाल मुहम्मद क़ुतबी (हंसवा)
  • हज़रत शैख़ अब्दुल रसूल क़ुतबी उर्फ़ सैय्यद औमरी (खागा फ़तेहपुर)
  • हज़रत शैख़ पीर क़ुतबी (मुनिमाबाद रायबरेली)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद अली क़ुतबी ( टोंक राजस्थान)
  • हज़रत शैख़ अहमद मुहाजिर मदनी क़ुतबी (रोनी मलाबा)
  • हज़रत शैख़ ताजउद्दीन सानी क़ुतबी (आज़मगढ़)
  • हज़रत शैख़ मख़दूम ग़ुलाम अशरफ़ अली क़ुतबी (आमडारी)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद अबुसईद क़ुतबी (हमीरपुर)
  • हज़रत शैख़ इस्माईल क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत शैख़ जलालुद्दीन जलाल क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत शैख़ हमज़ा क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत शैख़ अब्दुल रसूल क़ुतबी दरवेश (कोर्रह सादात)
  • हज़रत सुल्तानुल औलिया शैख़ पीर मुहम्मद क़ुतबी (टीले वाली मस्जिद लखनऊ) :- आप मशाऐख़ उज़ाम मुवाहिदे अकबर, बुज़ुर्ग आलीशान, क़वी हाल, बुलन्द हिम्मत, तर्क व तजरीद में कामिल, करामते इश्क से मुज़ईयन, इख़लाक पसन्दीदा में दस्तगीरी रखने वाले, मक़ामे तमकीन पर फ़ाएज़, फ़र्दे वक़्त हैं! आप सादात
    हसनी क़ुतबी और अकाबिर कोर्रह सादात से हैं! आपकी विलादत सन् १०२७ (1027) हिजरी में मड़ियाँव जौनपुर में हुई! आप मादरज़ाद वली हैं! कम उमरी से ख़्वारिको आदात सरज़द होने लगें थें जिनकी धूम हर सू आलम थी! कम उमरी में ही आपके वालिदा का साया सर से उठ गया! आपके वालिद बुज़ुर्गवार और चचा मोहतरम ने तालीमों तरबियत किया और आपके वालिद बुज़ुर्गवार ने ख़िरका व ख़लाफ़ते कबीरिया क़ुतबिया से सरफ़राज़ फ़रमाया! बाद विसाल वालिद मोहतरम आपने मानिकपुर का क़स्द किया और मानिकपुर पहुँचे वहाँ हज़रत शाह अब्दुल्लाह सय्याह दख्खनी से मुलाक़ात हुई जिन्होंने आपको ख़िरका व ख़लाफ़ते चिश्तिया से आरास्ता किया! हज़रत शैख़ राजू क़त्ताल से भी सुलूक का ताल्लुक क़ायम हुआ जिन से ख़िरका व ख़लाफ़त सोहरवर्दिया व क़ादिरिया हासिल किया! दिल्ली में अल्लामा हैदर से भी तरबियत पाया! लखनऊ में कारी अब्दुल क़ादिर उमरी से भी फ़ैज़याब हुएं! आपने तकमील मनाज़िले सुलूक और हुसूल इजाज़तो ख़लाफ़त के बाद लखनऊ में ही मस्नदे सुलूको इरशाद को आरास्ता किया जिस से ख़ल्क कसीर फ़ैज़याब हुई! आप का विसाल १३ (13) जमादिउल सानी सन् १०८३ (1083) हिजरी में लखनऊ में हुआ और वहीं एक टीले पर आपका मज़ार मुबारक मर्ज ख़लायक ख़ासो आम है! जिस टीले पर आपकी दरगाह बनी हुई है वो आपके नाम के मुनास्बत से “टीला शाह पीर मुहम्मद” से मशहूर है! आपका तज़किरह किताब “बहर ज़ख़्ख़ार” “नुज़हतुल ख़वातिर” और दीगर तारीख़ों में मिलता है!
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत शैख़ ग़ुलाम मीर क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत शैख़ फ़तेह मुहम्मद क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत शैख़ मुहम्मद हाशिम क़ुतबी (कोर्रह सादात)
    आपने मानिकपुर में हज़रत शैख़ राजे इब्राहीम से ख़िरका व ख़लाफ़ते चिश्तिया हुसामिया हासिल किया!
  • हज़रत शैख़ करीम बख़्श क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत मीर सैय्यद मुहम्मद महदी बख़्श क़ुतबी (कोर्रह सादात)
  • हज़रत अल्लामा ए ज़मन मीर सैय्यद शाह अबुल हसन क़ुतबी शहीद (ख़ानकाह मानिकपुर)
    आपको चिश्तिया हुसामिया करीमिया से भी ख़लाफ़त व इजाज़त हासिल थी! आपके क़ायम मक़ाम व जानशीन आपके बिरादरे असग़र हज़रत सैय्यद शाह इस्माईल क़ुतबी थें!
  • हज़रत शाह अबुसईद क़ुतबी उर्फ़ मुल्लन मियाँ सज्जादा नशीन ख़ानकाह मानिकपुर! आप अपने वालिद व चचा दोनों के जानशीन हुएं हैं!
  • हज़रत सैय्यद शाह ज़किउद्दीन क़ुतबी सज्जादा
    नशीन ख़ानकाह मानिकपुर! आप अपने बिरादरे अकबर
    हज़रत शाह अबुसईद क़ुतबी के जानशीन हुएं!
    आपको तमाम सलासिल से ख़लाफ़त व इजाज़त हासिल थी!
  • हज़रत शाह जुनैद अहमद क़ुतबी सज्जादा नशीन ख़ानकाह मानिकपुर!
  • हज़रत सैय्यद शाह मोहीउद्दीन क़ुतबी (ख़ानकाह मानिकपुर)! आपको आबाई सिलसिले के फ़ैज़ के साथ साथ उवैसी तरीक पर हज़रत शाह पीर क़ासिम जो हुसामिया चिश्तिया सिलसिले के बहुत बुलन्द पाये वली गुज़रे हैं की रूह पाक से फ़ैज़ हासिल है!
  • हज़रत हकीम सैय्यद शाह शम्सउद्दीन क़ुतबी (इलाहाबाद)! आपको आबाई सिलसिले के फ़ैज़ के साथ साथ अशरफ़िया चिश्तिया सिलसिले से ख़लाफ़त व इजाज़त हासिल है!
  • फ़क़ीर अमीर सैय्यद क़ुतुबउद्दीन मुहम्मद आक़िब क़ुतबी (कड़ा शरीफ़)! इस फ़कीर को आबाई सिलसिले के फ़ैज़ के साथ साथ ओवैसी तरीक पर ख़लाफ़त अमीरिया से सरफ़राज़ किया गया है! लिहाज़ा अब इस फ़कीर पर दोनों सिलसिला यकजा होकर क़ुतबिया अमीरिया हो गया! खुलासा इस अम्र का किताब “चिराग़ ख़िज़्र” में मुलाहिज़ा फ़रमाऐं!
  • इन तमाम बरगुज़ीदह हस्तियों के अलावा सिलसिला फ़िरदौसिया कुबराविया से बिलवास्ता या बिलावास्ता तौर पर तरबियतयाफ़्ता और फ़ैज़याफ़्ता बुज़ुर्गों में हज़रत ख़्वाजा मोईनउद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत मुजद्दिद अल्फ़सानी रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत शाह नेमतउल्लाह वली रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत जलालउद्दीन सुर्ख़ पोश बुख़ारी रहमतुल्लाह अलैह भी शामिल हैं!

Sajjadanashen Mir Qutubuddin Muhammad al Hasani urf Aquib Miyan