
Hadith Kanzul Ummal jild 7 safa 115 no 18883



हुज़ूर का निकाह हज़रत अबु तालिब अलैहि सलाम ने पढ़ाया और महेर भी ख़ुद ही अदा किया
इमाम जौज़ी ने रिवायत किया
इमाम बदरुद्दीन हल्बी ने रिवायत किया
शैख़ अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी ने रिवायत किया
इमाम सुहैली ने रिवायत किया
अल्लामा ज़हनी दहलान ने रिवायत किया
अल्लामा इब्ने ख़ल्दून ने रिवायत किया
और भी दीगर मुहद्दिसीन ने रिवायत किया और इसमें कोई इख़्तिलाफ़ भी नही है के
आक़ा सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम का निकाह हज़रत अबु तालिब ने सय्यदा खदिजतुल कुबरा सलामुल्लाह अलैहा से पढ़ाया
निकाह का ख़ुत्बा हज़रते अबु तालिब ने ख़ुद पढ़ा
और जो महेर मुक़र्रर हुआ 12 औकिया और 20 ऊँटनियों का ये महेर भी हज़रते अबु तालिब ने ख़ुद अपनी जेब से अदा किया
ग़ौर तलब बात ये भी है कि
जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का निकाह हज़रते हव्वा से हुआ तो महेर की अदायगी के लिए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया की मेरे हबीब पर दुरूद पढ़ो यही तुम्हारा महेर है
लोगों ज़रा दयानत से सोचो
ठंडी तबियत से सोचो
हज़रते आदम का निकाह हो तो महेर मुस्तफ़ा पे दुरूद का रखा जाये अल्लाह को इसके सिवा कोई महेर गवारा नही क्योकि इसी सल्ब से नबियों को आना है
और जब मुस्तफ़ा का निकाह हो तो महेर माज़अल्लाह किसी काफ़िर की जेब से क़ुबूल कर लिया जाये ?????
शर्म नही आती तुम्हे ऐसा अक़ीदा रखते हुए
हज़रते अबु तालिब अलैहिस्सलाम ने सिर्फ़ निकाह का ख़ुत्बा ही नही पढ़ा
बल्कि मुस्तफ़ा की तरफ़ से महेर भी ख़ुद अदा किया
हज़रते सय्यदा ख़दिजतुल कुबरा सलामुल्लाह अलैह मेरे आक़ा की पहली रफ़ीक़े हयात
ताजदारे कायनात सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम की सारी औलाद की माँ है
अरे ये सय्यदा फ़ातिमा सलामुल्लाह अलैहा की माँ है
हसनैन करीमैन की नानी हैं
हुज़ूर हमेशा सय्यदा ख़दिजतुल कुबरा को याद किया करते थे
अल्लाह को कैसे गवारा होगा की किसी काफ़िर से अपने हबीब सय्यदुल अम्बिया के निकाह का ख़ुत्बा पढ़ाये और महेर भी अदा कराए
फिर सोचो
आदम अलैहिस्सलाम का महेर मुस्तफ़ा पर दुरूद पढ़ना
और मुस्तफ़ा का महेर कोई काफ़िर अदा करे ??? ताज्जुब की बात है
नही हरगिज़ ऐसा नही ये अक़ीदा दुरुस्त नही
ये अज़्मते मुस्तफ़ा का मामला है ज़रा सोच सम्भल कर बात करो होश के नाख़ून लो
हम वो जमाअत हैं जो हुज़ूर की नालैन शरीफ़ का भी अदब ओ एहतेराम करते हैं उसे कभी हम सिर्फ़ जूता नही कहते
क्या हो गया उन लोगों को जो कलमा नबी का पढ़ते है और ऐसे ऐतराज़ भी करते है
दावत ए तौहीद हज़रते अबु तालिब के घर से दी गयी
इश्आत ए इस्लाम हज़रते अबु तालिब के घर से हुई
इस्लाम की इब्तेदा पहली दावत पहली मजलिस हज़रते अबु तालिब के घर से हुई
और जब इस्लाम के तहफ़्फ़ुज़ के लिए ख़ून बहाना हुआ तो इसी घर ने कुर्बानियां पेश की
जिसमे 6 माह का मासूम भी शामिल है और
56 साल का ताजदार भी
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद वा आले मुहम्मद,
🙇🏻♂
जनाब हज़रत इमरान इब्न अब्दुल मुत्तलिब उर्फ अबू तालिब अलैहिस्सलाम का ज़िक्र
कुरान शरीफ पारा 3 सूरा आल ए इमरान आयत 33,34
इन्नल्लाहस्तफा़ आदमा व नूहवँ व आला इब्राहीमा व आला इमराना अलल आलमीना 33
ज़ुर्रैंयतन बादोहा मिन बाद वल्लाहो समीउन अलीम ०34
तर्जूमा :- अल्लाह ने चुन लिया आदम अलैहिस्सलाम और नूह अलैहिस्लाम को और इब्राहीम व इब्राहीम की औलाद और इमरान व इमरान की औलाद.अलैहिस्सलाम को
तमाम आलमीन मे और ये एक दूसरे की ज़ुर्रीयत यानी एक दूसरे की औलाद से
और अल्लाह सुन्ने जान्ने वाला है
उर्दू हिन्दी वगैरह मे एक के बाद दो मे जमअ (बहु वचन)का सीगा कहलाता है
लेकिन अरबी मे तीन के बाद चार मे जमअ का सीगा आता है और कुरान मे अल्लाह ने आयत मे आले इमरान का ज़िक्र यानी जमअ का सीगा है
कुरान पाक मे तीन इमरान अलैहिस्सलाम का ज़िक्र है
1 इमरान
हजरत मूसा अलैहिस्सलाम के वालिद जिनके दो बेटे हजरत मूसा और हजरत हारून अलैहिस्सलाम
2 इमरान ईसा अलैहिस्सलाम की माँ बीबी मरयम सलामुल्ला अलैहा के वालिद जिनकी सिर्फ एक बेटी बीबी मरयमऔर उनका सिर्फ एक बेटा ईसा अलैहिस्सलाम
3इमरान इब्न अब्दुल मुत्लिब मौला अली अलैहिस्सलाम के वालिद
और इनके बारह इमामैन औलाद जिनकी क्यामत तक नस्ले पाक है,
(तेरी नस्ले पाक से है बच्चा बच्चा नूर का
तू है ऐने नूर तेरा सब घराना नूर का )
1 इमाम मौला अली इब्ने इमरान अबू तालिब अ.स.
2 इमाम हसन इब्ने मौला अली इब्न इमरान अबू तालिब अ.स.
3 इमाम हुसैन इब्ने मौला अली इब्ने इमरान अबू तालिब अ.स.
4 इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्ने इमाम हुसैन इब्ने मौला अली इब्ने इमरानअबू तालिब अ.स.
5 इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्न इमाम हुसैन इब्ने मौला अली इब्न इमरान अबू तालिब अ.स.
6 इमाम ज़ाफ़र सादिक़ इब्ने इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन ईब्न इमाम हुसैन इब्ने मौला अली इब्न इमरान अबू तालिब अ.स.
7 इमाम मूसा काज़िम इब्ने इमाम ज़ाफ़र सादिक़ इब्ने इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्ने इमाम हुसैन इब्न मौला अली इब्ने इमरान अबू तालिब अ.स.
8 इमाम अली रज़ा इब्ने इमाम मूसा काज़िम इब्ने इमाम जाफ़र सादिक़ इब्ने इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्न इमाम हुसैन इब्न मौला अली इब्ने इमरान अबू तालिब अ.स.
9 इमाम तक़ी इब्ने अली रज़ा इब्ने इमाम मूसा काज़िम इब्न इमाम ज़ाफ़र सादिक इब्ने इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्ने इमाम हुसैन इब्न इमाम मौला अली इब्न इमाम इमरान अबू तालिबअ.स.
10 इमाम नक़ी इब्ने इमाम तक़ी इब्ने इमाम अली रज़ा इब्ने इमाम मूसा काज़िम इब्ने इमाम जाफ़र सादिक़ इब्ने इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्ने इमाम हुसैन इब्ने इमाम मौला अली इब्ने इमरान अबू तालिब अ.स.
11 इमाम हसन असकरी इब्ने इमाम नक़ी इब्ने इमाम तक़ी इब्ने इमाम अली रज़ा इब्ने इमाम मूसा काज़िम इब्ने इमाम जाफ़र सादिक इब्ने इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्ने हुसैन इब्ने मौला आली इब्ने इमरान अबू तालिब अ.स.
12 इमाम महदी इब्ने इमाम हसन असकरी इब्ने इमाम नक़ी इब्ने इमाम तक़ी इब्ने इमाम अली रज़ा इब्ने इमाम मूसा क़ाज़िम इब्ने ज़ाफ़र सादिक इब्ने इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्ने इमाम हुसैन इब्ने मौला अली इब्ने इमरान अबू तालिब अ.स.
आयत का शाने नज़ूल
हजरत इमरान उर्फ अबू तालिब अलैहिस्सलाम पर होता है जिनकी औलाद 12 इमामैन हैं
जो एक दूसरे की ज़ुर्रीयत यानी औलाद से हैं
रहमतललिल आलमीन मुहम्मद मुसतफा़ सललल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :- अव्वलना मुहम्मद
आख़िरना मुहम्मद
औसतना मुहम्मद
कुल्लोना मुहम्मद
मेरा पहला भी मुहम्मद है आखिर वाला भी मुहम्मद है
बीच वाले भी मुहम्मद हैं
ये सबके सब मुहम्मद हैं

सरापा दीन सरापा वफ़ा अबू तालिब
रसूले पाक के मिदहत सरा अबू तालिब
खुदा की पाक अमानत संभालने वाले
हिसारे साहे रिसालत बने अबू तालिब
खुदा के नूर के जलवों को लेके दामन मे
खुदा का दीन बचाते रहे अबू तालिब
खुदा ने उनको फिरासत भी दी बसीरत भी
अमल की शान बड़ाते रहे अबू तालिब
वो शैख वादीए बतहा अरब का मर्दे ग्यूर
रईसे मक्का बड़ो से बड़े अबू तालिब
अज़ल से शाने रिसालत के वो मुसददिक़ थे
दलील बनके रिसालत.के थे अबू तालिब
गुलामी शाहे रिसालत की रात दिन ऐसी
मिली किसी को ना तेरे सिवा अबू तालिब
तवाफ़े खाना ए महबूब रात भर कर करना
अजी़म तर है ये पहरा तेरा अबू तालिब
तुम्हारे सुल्ब मे नूरे अली फ़िरोज़ा था
तुम्हीं हो महवते नूरे ख़ुदा अबू तालिब
तुम्हीं शजर हो समरदार बागे हासिम के
तुम्हीं से सजराए इतरत चला अबू तालिब
तुम्हारे अज़्म ने ज़ुलमत को सर निगूँ रख्खा
तुम्हारे ज़ोर से बातिल मिटा अबू तालिब
तुम्हारी गोद मे ईंमा की जान पलती रही
तुम्हारे घर से ही ईंमा मिला अबू तालिब
मिसाल इसकी यक़ीनन मुहाल है साइम
हुऐ हुज़ूर पे जैसे फ़िदा अबू तालिब
–—————————
इस्लाम की बातें तो सभी करते हैं लेकिन
ये सच है के हक का इन्हे इरफ़ान नही है
इस दौर के बू जहल हैं वो
ए अबू तालिब
जिसका तेरे ईमान पे ईमान नही है
नात कहना शायरों को आपने सिखला दिया
ऐ अबू तालिब ये हम पर आपका अहसान है
ए अबू तालिब तेरा इस्लाम पर अहसान है
तुझ पे जो तोहमत लगाऐ वक्त का शैतान है
कुफ़्र का धब्बा तेरे दामन मे आ सकता नही
तेरे घर मे एक दर्जन बोलता कुरआन है
ख्वाजा ए अजमेर ने जिसे कहा दीन अस्त हुसैन
वो हुसैन इब्ने अली वो पोता अबू तालिब का है
✍بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
उस ज़माने में सहाबा किराम मुनाफिकाें आैर माेमिनाें की पहचान इस तरह किया करते थे कि जिसके चेहरे पर हज़रत माैला अली अलैहिस्सलाम के नाम से मराेड़ व सिकुड़न आ जाये 😏 ताे वाे मुनाफिक़ है और जिसका चेहरा हज़रत माैला अ़ली अलैहिस्सलाम के नाम से खुशी आैर मशर्रत से खिल उठे 😊 वाे मोमिन है
✍🏻 हज़रत माैला अ़ली अलैहिस्सलाम से रिवायत है
हुजूर अलैहिस्सलाम ने मुझसे अहद फरमाया कि तुझसे मोमिन ही मुहब्बत करेगा आैर तुझसे बुग्ज़ रखने वाला मुनाफि़क़ ही हाेगा ।
📚 इब्ने माजा -1/72
📚 तिर्मिज़ी -2/718
✍🏻 हज़रत उम्मे सलमा (रज़िअल्लाहु तआला अन्हा) फरमातीं हैं
हुजूर अलैहिस्सलाम फरमाया करते थे कि किसी मुनाफिक़ की हज़रत माैला अ़ली से मुहब्बत नहीं हाे सकती आैर काेई मोमिन हज़रत माैला अ़ली से बुग्ज़ नहीं रख सकता ।
📚 तिर्मिज़ी -2/712