

एक पैग़ाम अहलेसुन्नत वल जमाअत के नाम
पंजतन पाक अलैहमुस्सलाम अहलेबैत ए अतहार से बुग्ज़ो इनाद ( दुश्मनी ) रखने वाले नाम निहाद जाली पीर और जाहिल मोलवी गली गली कूचा कूचा घूम रहे हैं उनसे होशियार रहो
किसी के भी हाथ पर बैअत ( मुरीद ) होने से पहले अहलेबैत ए अतहार के मुताल्लिक़ उसका अक़ीदा पता करो क्यों की……👇👇👇👇👇
सैय्यदना अली इब्ने अबी तालिब कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम के वसीले और फैज़ के बग़ैर कोई भी दर्जा ए विलायत को नही पंहुचा सकता
सिलसिला ए नक़्शबन्दीया के शैख़ व मुफ़स्सिर हज़रत अल्लामा क़ाज़ी सनाउल्लाह पानीपती रहमतुल्लाह अलैह अपनी तफ़्सीर में रक़म तराज़ ( लिखते ) हैं : 👇
وكان قطب الارشاد كمالات الولاية على عليه السلام ما بلغ احد من الامم السابقة درجة الاولياء الا بتسط روحه.
“हज़रत सैय्यदना अली कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम कमालात ए विलायत के क़ुत्बे इरशाद हैं
साबिक़ा ( अगले ज़माने की ) उम्मतों में से भी कोई भी सैय्यदना अली कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम के वसीले व फैज़ के बग़ैर दर्जा ए विलायत को नही पंहुचा
( यानी बग़ैर हज़रत मौला अली के वसीले व फैज़ के बग़ैर कोई वली नही बना )
हवाला – तफ़्सीर ए मज़हरी 02/122
शैख़ उल मशाईख़ अहमद सरहिंदी जो मुजद्दिद ए अल्फ़े सानी के लक़ब से मशहूर हैं और सिलसिला ए नक़्शबन्दीया के जलीलुल क़द्र बुज़ुर्ग हैं आप अपने मकतूब शरीफ़ 123 में फ़रमाते हैं : 👇👇👇
“हज़रत अमीरुल मोमिनीन (सैय्यदना अली इब्ने अबी तालिब कर्रम अल्लाहो वजहुल करीम) अपने जस्दे उनसरी में आने से क़ब्ल ( पहले ) भी इस मक़ाम पर फ़ाईज़ थे” .
{ बा हवाला ख़साइस अली सफ़ह 489 अज़ अल्लामा ज़हूर अहमद फ़ैज़ी }

