
मेरा मौला “बे” का नुक़्ता है बा-हुक्म-ए-किबरिया
ताकी उन को मज़हर-ए-ज़ात-ए-ज़ली कहना पड़े
इसलिए बिस्मिल्लाह वाजिब कर दिया हर काम मे
जो बशर अल्लाह कहे पहले अली अलेहिसलाम कहना पड़े,
कोई भी नेक काम करने के लिए बिस्मिल्लाह पढ़ना जरूरी है, क़ुरआन और नमाज़ पढ़ने के लिए बिस्मिल्लाह पहले जरूरी, बिस्मिल्लाह के लिए “बे” जरूरी ओर “बे” के लिए “बे” का नुक्ता होना जरूरी, अब बिस्मिल्लाह के “बे” का नुक्ता अली है अब पढ़ के दिखा बिना अली के क़ुरआन ओर नमाज़

