29 Shawwal Youm e wiladat Hazrat Abu Talib Alahissalam

Main Hoon ABU TALiB(A.S), Meri Pehchan Yehe Hai •
• Kehtay Ho NABOWAT Jisay, Godi Main PaLi Hai •

• Paida Howa Ghar Mai Mere, PAYGHAMBAR’e Akhir(SAWW) •
• Baitay Ki WiLadat Meray, KABBAY Main Ho’e Hai •

• Ghar Me He NABOWAT Mere, Ghar Me He iMAMAT •
• Jo MALKA’e Jannat(S.A) Hay, Baho Mujh Ko MiLi Hai •

• Kiya Hai Mera Eman? Ab Pocho KHUDA Say •
• Bachpan Me NABOWAT Mere, Seenay Pay PaLi Hai •

• QURAN Mai Mojod Hai, Mere Naam Ka Surah •
• PaLa Hai MUHAMMAD(SAWW) Ko, Sanad Tab Ye MiLe Hai •

• Ae Khaliq-e-Qura’an teray Quran ki aayat •
• Ayi na thi dunya mein magar Maine perhi Hai •

• Talwaar ke saaye main sulaya hai Ali(A.S) ko •
• Tab ja k Muhammad(SAWW) ki kahin jaan bachi Hai •

• Jo HUM Bhi Na Hotay, Tu Ye KABA Bhi Na Hota •
• KABBAY KI Ye Bunyad, Mere Jad Ne Rakhi Hai •

• Fatwa tou lagate ho magar yaad ye rakhna •
• Parday se ik Aulaad(A.J) Meri dekh rahi Hai •

यौम ए विलादत
मोहसिन ए इस्लाम सरकार अबु तालिब अलैहिस्सलाम मुबारक़ हो,

आ तुझ को बताऊ में इऱफान ए अबु तालिब
क़ौनैन में फैला है फैज़ान ए अबु तालिब
बच्चों का लहू देकर परवान चढ़ाया है
है दीन ए मोहम्मद पर एहसान ए अबु तालिब
चालीस बरस जिसकी हर आन तिलावत की
चेहरा ए मोहम्मद है क़ुरआन ए अबु तालिब
ज़ात ए मोहम्मद पर क़ुरबान मैं हो जाऊं
ता’ज़ीस्त रहा एक ही अरमान ए अबु तालिब
इस्लाम की ख़ातिर सब क़ुरबान घराना है
हसनैन ओ अली ज़फर पहचान ए अबु तालिब
तू शेब ए अबु तालिब पर ग़ौर तो कर सय्यद
सरकार की ख़िदमत है ईमान ए अबु तालिब
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

ईद मीलादुन इमरान इब्न अब्दुल मुत्तलिब
अ.स.
29 सव्वाल मुकर्रम
21जूनबरोज इतवार
(Sunday) को है

जनाब इमरान उर्फ़ अबू तालिब अ.स. वाक्या ए फ़ील से 35 साल पहले मक्का मोकर्रमा मे
29 सव्वाल मुकर्रम 556 ई० कमरी और 536 ई०शमसी को
जनाब सैयदअब्दुल मुत्तलिब अ.स. के घर मे जनाब बीबी फातमा बिन्त अमरू बिन आइज़ स.अ.की गोद ए पाक मे तशरीफ लाए
रसूल अल्लाह स.अ.व. के वालिद ए मोहतरम जनाब अब्दुल्लाह अ.स.और अबू तालिब अ.स. एक ही माँ बीबी फातमा स.म.अ. से सगे भाई हैं और
वालिद ए मोहतरम अब्दुल मुत्तलिब से 12 भाई हैं
और जनाब मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ.व. और मौला अली अ.स. दोनो के दादा साहब
जनाबअब्दुल मुत्तलिब अ.स.और दादी जनाब बीबी फ़ातमा स.अ. हैं
जनाब हज़रत इमरान इब्न अब्दुल मुत्तलिब उर्फ अबू तालिब अलैहिस्सलाम का ज़िक्र

कुरान शरीफ
पारा 3
सूरा आल ए इमरान आयत 33,34
इन्नल्लाहस्तफा़ आदमा व नूहन व आला इब्राहीमा व आला इमराना अलल आलमीना ० 33
ज़ुर्रीयतन बाज़ोहा (बादोहा) मिन बाज़ (बाद)• वल्लाहो समीउन अलीम ०34

तर्जूमा :- अल्लाह ने तमाम आलमीन मे चुन लिया हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को और हज़रत नूह अलैहिस्लाम को
हजरत इब्राहीम अ.स. और इब्राहीम की औलाद अ.स. को
हजरत इमरान अ.स. और हजरत इमरान की औलाद अ.स. को
और ये एक दूसरे की ज़ुर्रीयत यानी एक दूसरे की औलाद से हैं
और अल्लाह सुन्ने जानने वाला है

उर्दू हिन्दी वगैरह मे एक के बाद दो मे जमअ
(बहु वचन)का सीगा कहलाता है
लेकिन अरबी मे तीन के बाद चार मे जमअ का सीगा आता है
और कुरान मे अल्लाह तआला ने आयत मे आले इमरान का ज़िक्र यानी जमअ का सीगा है

कुरान पाक मे तीन इमरान अलैहिस्सलाम का ज़िक्र है

1- हजरत इमरान
अलैहिस्सलाम
जिनके दो बेटे
हजरत मूसा और हजरत हारून अलैहिस्सलाम हैं

2– हजरत इमरान अलैहिस्सलाम
बीबी मरयम सलामुल्ला अलैहा के वालिद और हज़रत मूसा अ.स.
के नाना जिनकी सिर्फ एक बेटी बीबी मरयमऔर उनका सिर्फ एक बेटा हजरत ईसा अलैहिस्सलाम हैं
3— हजरत इमरान उर्फ़ अबू तालिब अलैहिस्सलाम
मौला अली अ.स.
के वालिद
और इनके शहज़ादे 12 इमामैन अलैहिस्सलाम
जिनकी नस्ल ए पाक क्यामत तक रहेगी
1- जनाब इमाम मौला अली इब्ने इमरान उर्फ़ अबू तालिब अ.स.
2 – जनाब इमाम हसन इब्ने मौला अली अ.स.
3-जनाब इमाम हुसैन इब्ने मौला अली अ.स.
4- जनाब इमाम ज़ैनुल आबदीन इब्ने इमाम हुसैन अ.स.
5 – जनाब इमाम बाक़र इब्ने इमाम ज़ैनुल आबदीन अ.स.
6- जनाब इमाम ज़ाफ़र सादिक़ इब्ने इमाम बाक़र अ.स.
7- जनाब इमाम मूसा काज़िम इब्ने इमाम ज़ाफ़र सादिक़ अ.स.
8-जनाब इमाम अली रज़ा इब्ने इमाम मूसा काज़िम अ.स.
9 – जनाब इमाम तक़ी इब्ने अली रज़ा अ.स.
10 – जनाब इमाम नक़ी इब्ने इमाम तक़ी अ.स.
11 – जनाब इमाम हसन असकरी इब्ने इमाम नक़ी अ.स.
12 – जनाब इमाम महदी इब्ने इमाम हसन असकरी अ.स.

आयत का शाने नज़ूल
हजरत इमरान उर्फ अबू तालिब अलैहिस्सलाम पर होता है जिनकी औलाद 12 इमामैन और उनकी औलाद पाक हैं
जो एक दूसरे की ज़ुर्रीयत यानी नस्ल ए पाक से हैं

रहमतललिल आलमीन हजरत मुहम्मद मुसतफा़ सललल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :- अव्वलना मुहम्मद
आख़िरना मुहम्मद
औसतना मुहम्मद
कुल्लोना मुहम्मद
मेरा पहला भी मुहम्मद है आखिर वाला भी मुहम्मद है और
बीच वाले भी मुहम्मद हैं
ये सबके सब मुहम्मद हैं
स.अ.व.

अल्लाह तआला ने शहर ए मक्का शरीफ की कसमऔर अपने महबूब हजरत मोहम्मद स.अ.व. की कसम और मौला अली अ.स. और उनके वालिद जनाब अबू तालिब की कसम खाई है
पारा 30 सूरा अलबलद
आयत 1,2,3
ला उक़सेमो बेहाज़ा अलबलद ०1
मुझे इस शहर (मक्का) की कसम
वा अनता हिल्लुन बेहाज़ा अलबलद ०2
के ऐ महबूब तुम्हारी कसम के आप इस शहर मे तशरीफ फरमा हो
वा वाललेदिन वमा वलद०3
और बाप
( जनाब इमरान अ.स.) और उसके बेटे
(अली अ.स.) की कसम
तफ़सीर 2- मक्का मुकर्रमा की कसम
3 – इस आयत से मालूम हुआ के ये अज़मत मक्का मोकर्रमा को सैयद ए आलम स.अ.व. की रौनक अफ़रोजी की बदौलत हासिल हुई है

आयत बेहाज़ा यानी
वो वालिद और उसका बेटा जो उस वक्त मौजूद हैं
वो ज़ात सिर्फ़ जनाब अबू तालिब अ.स. और मौला अली अ.स. हैं
क्यों आल ए इमरान की आयत के मुताबिक अल्लाह इन्हे तमाम आलमीन मे चुन लिया है

बारगाह ए हजरत इमरान उर्फ़ अबू तालिब अ.स.
मे जनाब साइम चिश्ती र.अ.का कलाम
सरापा दीन सरापा वफ़ा अबू तालिब
रसूले पाक के मिदहत सरा अबू तालिब

खुदा की पाक अमानत संभालने वाले
हिसारे साहे रिसालत बने अबू तालिब

खुदा के नूर के जलवों को लेके दामन मे
खुदा का दीन बचाते रहे अबू तालिब
रसूल ए पाक की रहमत नवाज़ ने आई
ज़बान ए इश्क से जब भी कहे अबू तालिब

खुदा ने उनको फिरासत भी दी बसीरत भी
अमल की शान बड़ाते रहे अबू तालिब

वो शैख वादीए बतहा अरब का मर्दे गयूर
रईसे मक्का बड़ो से बड़े अबू तालिब

अज़ल से शाने रिसालत के वो मुसददिक़ थे
दलील बनके रिसालत.के थे अबू तालिब

गुलामी शाहे दो आलम की रात दिन ऐसी
मिली किसी को ना तेरे सिवा अबू तालिब

तवाफ़े खाना ए महबूब रात भर कर करना
अजी़म तर है ये पहरा तेरा अबू तालिब

तुम्हारे सुल्ब मे नूरे अली फ़िरोज़ाँ था
तुम्हीं हो महवते नूरे ख़ुदा अबू तालिब

तुम्हीं शजर हो समरदार बागे हासिम के
तुम्हीं से सजरा ए इतरत चला अबू तालिब

तुम्हारे अज़्म ने ज़ुलमत को सर निगूँ रख्खा
तुम्हारे ज़ोर से बातिल मिटा अबू तालिब

तुम्हारी गोद मे ईंमा की जान पलती रही
तुम्हारे घर से ही ईंमा मिला अबू तालिब

मिसाल इसकी यक़ीनन मुहाल है साइम
हुऐ हुज़ूर पे जैसे फ़िदा अबू तालिब
–—————————
इस्लाम की बातें तो सभी करते हैं लेकिन
ये सच है के हक का इन्हे इरफ़ान नही है

इस दौर के बू जहल हैं वो
ए अबू तालिब
जिसका तेरे ईमान पे ईमान नही है

नात कहना शायरों को आपने सिखला दिया
ऐ अबू तालिब ये हम पर आपका अहसान है

ए अबू तालिब तेरा इस्लाम पर अहसान है
तुझ पे जो तोहमत लगाऐ वक्त का शैतान है

कुफ़्र का धब्बा तेरे दामन मे आ सकता नही
तेरे घर मे एक दर्जन बोलता कुरआन है

ख्वाजा ए अजमेर ने जिसको कहा
दीन अस्त हुसैन
वो हुसैन इब्ने अली पोता अबू तालिब का है

शाहे रिसालत के इकराम का
जशन मनाता है जो इमरान का
खुश रहते हैं उससे प्यमबर
उस पे रहती है नज़रे हैदर
घर मे उसके खुशींयाँ होंगीं
जशन जो इनका मनाले
के दामन थाम ले इनका
अबू तालिब को तू मनाले

जब हम
सरकार सैयद मुईनुददीन हसन ख्वाजा गरीब नवाज़ र.अ. की
सरकार सैयद मुहियुददीन अब्दुल कादिर जीलानी गौस पाक र.अ. की
सरकार सैयद बदिउददीन जिंदा शाह मदार र.अ.की
सरकार सैयद हसनैन करीमैन अ.स.की
सरकार मौला अली अ.स. की
सरकार सैयद रहमतुललिल आलमीन हजरत मोहम्मद स.अ.व. की यौम ए विलादत बड़ी शौनो शौकत और अहतराम से मनातें हैं
तो उसी शान शौकत व अहतराम के साथ जिन्हे अल्लाह और उसके रसूल ने तमाम आलमीन मे चुन लिया है
जनाब सरकार सैयद इमरान इब्न अब्दुल मुत्तलिब अ.स. की यौम ए विलादत 29 सव्वाल मुकर्रम को
(21जून बरोज इतवार)
इनका ज़िक्र करके
इनकी महफिल सजा के इनके नाम का लंगर सबील बाट के
इनके नाम से किसी ज़रूरत मंद की ज़रूरत पूरी करके
नज़्रो नियाज़ पेश करके
अपने अहलो अयाल और अपने दोस्त अहबाब को इनका ज़िक्र बताकर
अपने घरों मे
अपने मोहल्ले मे
खानकाहों मे
इमाम बाड़ो मे
वलीयों के दरबारों मे
मदरसों मे
मस्जिदों में
इनकी याद मनाकर इनकी यौम ए विलादत मनाऐं
और अल्लाह व उसके रसूल स.अ.व.और पंजतन पाक इमामैन अ.स. व तमाम औलीया अल्लाह के करम से फ़ैजयाब होकर
नेक व जाइज़ दीनी व दुनयावी मुरादें हासिल करें
( वक्त औरहालात के मुताबिक )
इलाही ता बुवद खुर्शीदो माही
चराग ए चिश्तीया रा रौशनाई

साबीत है तेरा यू ही इमान अबू तालिब
घर में तेरे उतरा है कुर्आन अबू तालिब

फैली है जमाने में इस्लाम की नेअमत है
है तेरे ही बच्चों का फैजान अबू तालिब

हर एक पे अहेशान है सरकारे दो आलम का
आका पे तुम्हारे है एहसान अबू तालिब

जन्नत पे तुम्हारे ही बच्चों की हुकूमत है
रोकेगा तुम्हें कैसे रिजवान अबू तालिब

हसनैन तेरे बच्चे जहेरा तेरी बहू है
बेटा हर एक वली का सुल्तान अबू तालिब

🖋 सैयद शजर अली मदारी मकनपुरी

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