Waseela e Wali Allah

हज़रत सय्यदना जुनैद बग़दादी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु एक मर्तबा दरियाये दज्ला पर या अल्लाह या अल्लाह कहते हुए मिस्ल ज़मीन के चलने लगे, तभी एक शख्स आया, उसे भी पार जाने की ज़रुरत थी मगर वहां कश्ती कोई ना थी, जब उसने हज़रत को जाते देखा तो कहा कि मुझे भी साथ लेते चलिये, आपने उससे कहा या जुनैद या जुनैद कह और साथ चल, उसने या जुनैद या जुनैद कहा और पानी पर चलने लगा, बीच रास्ते उसे शैतान ने बहका दिया कि खुद तो या अल्लाह या अल्लाह कहते हैं और मुझसे या जुनैद या जुनैद कहलवाते हैं, लिहाज़ा उसने या जुनैद छोड़कर या अल्लाह कहना शुरू किया और फौरन डूबने लगा, तो चिल्लाया कि हज़रत बचाइये, आपने फरमाया कह या जुनैद या जुनैद, जैसे ही उसने या जुनैद कहना शुरू किया फिर से पानी पर चलने लगा, तब हज़रत जुनैद बग़दादी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि ऐ नादान अभी तू जुनैद तक तो पहुंचा नहीं और ख़ुदा तक पहुचंने की हवस रखता है।

📕 अलमलफूज़, हिस्सा 1, सफह 94
📕 महफिले औलिया, सफह 179

सबक़:- आज भी बहुत सारे लोग नबी या वली के वसीले के बग़ैर खुदा तक पहुचंने की कोशिश मे लगे हैं मगर जिस तरह वो बग़ैर वसीला पानी मे गर्क हुआ वैसे ही ये भी जहन्नम में गर्क हो जायेंगे और अगर दुनिया से बग़ैर वसीले के चला गया तो फिर वहां कोई बचाने वाला भी ना होगा।

मौला अली अ०स० और ज़ुल्फ़िक़ार.

मौला अली अ०स० और ज़ुल्फ़िक़ार..

एक दफा मौला अली कहीं बैठें थें, तो एक सहाबी मौला के पास आके अर्ज़ करने लगे,
मौला मैंने सुना है कि आपकी जो तलवार है “ज़ुल्फ़िकार” ये पहाड़ को भी चीर देती है!
क्या ये बात सही है?
मौला अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया,
हाँ सही है।
सहाबी ने कहा मौला आप अपनी तलवार कुछ वक़्त के लिये मुझे देंगे मैं आज़मा कर देखना चाहता हूँ।
मौला अली अलैहिस्सलाम ने उसे अपनी तलवार दे दिया।
उस सहाबी ने तलवार को अपने हाथ में ले कर अपनी पूरी ताकत लगा के दीवार पे मारा पर दीवार को कुछ भी नही हुआ।
तो उस ने मौला से कहा कि आप तो कह रहें थें कि पहाड़ को भी चीर सकती है पर यहां तो दीवार भी नही चीर सकी।।
मौला ने मुस्कुराते हुए फरमाया,
मैंने तुम्हें अपनी तलवार दी है अपना हाथ नही, ज़ुल्फ़िकार तभी ज़ुल्फ़िकार है जब ज़ुल्फ़िकार अली के हाथ में हो वरना ये सिर्फ एक लोहे का टुकड़ा है और कुछ नही।⚔️⚔️⚔️❣️❣️❣️
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#__दुश्मन_का_ज़ोर_बढ़_चला_है_या_अली__मदद
⚔️ #_ज़ुल्फ़िक़ार__हैदरी_फ़िर_बे__नियाम__हो ⚔️

हज़रते अमीर खुसरो र० और बूअली शाह कलंदर र० का खूबसूरत वाक़िआ..

*हज़रते अमीर खुसरो र० और बूअली शाह कलंदर र० का खूबसूरत वाक़िआ..*हज़रते अमीर खुसरो हज़रते महबूबे इलाही ख़्वाजा निजामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह के मुरीद है एक बार हज़रते महबूबे इलाही ने फरमाया:
ऐ खुसरो हर जुमेरात के दिन हज़रते बूअली शाह कलंदर के यहां महफिल होती है, आप इस महफिल में शिरकत किया कीजिए पीरो मुर्शिद का हुक्म था.
हज़रते अमीर खुसरो ने जाना शुरू कर दिया एक जुमेरात की महफिल में हज़रते बूअली शाह कलंदर ने फरमाया खुसरो हमने कभी भी अल्लाह के नबी स०अ०व० की कचहरी में (दरबार) में तुम्हारे पीर महबूबे इलाही को नहीं देखा….
यह बात सुनकर हजरत अमीर खुसरो बहुत परेशान हो गए आपको अपने पीर से बेहद मोहब्बत थी और जैसा कि हर मुरीद को अपने पीर से बेहद मोहब्बत होती है, अमीर खुसरो को भी थी? आप काफी परेशान रहने लगे..
एक दिन हज़रते महबूबे इलाही ने फरमाया: खुसरो, परेशान दिखते हो क्या बात है?
अमीर खुसरो ने फरमाया: सय्यदी ऐसी कोई बात नहीं.
मगर पीर ने मुरीद के बेचैनी दिल का हाल जान लिया था पूछने लगे बताओ क्या बात है? किस बात से परेशान हो?
हज़रत अमीर खुसरो ने पूरा माजरा बता दिया इस पर हज़रते महबूबे इलाही ने फरमाया कि अगली बार जब हज़रते बूअली शाह कलंदर ऐसा कुछ फरमाएं तो उनसे अर्ज करना कि आप मुझे अल्लाह के नबी स०अ०व० की कचहरी (दरबार) में पहुंचा दे मैं अपने शैख को खुद ही तलाश कर लूंगा…
हजरत अमीर खुसरो बहुत खुश हो गए कुछ दिन बाद फिर हज़रते बूअली शाह कलंदर ने ऐसा ही फरमाया तो आपने कहा हज़रत आप मुझे अल्लाह के नबी स०अ०व० की कचहरी (दरबार) में पहुंचा दें मैं अपने शैख को खुद ही तलाश कर लूंगा.. तो हजरत बूअली शाह कलंदर मुस्कुराए और आपके सीने पर हाथ रखा तो जब आंखें बंद की तो दिल की आंख खुल गई और हज़रत अमीर खुसरो बारगाहे महबूबीयत यानी बारगाहे रिसालत में पहुंच गए और पहुंचकर हर वली अल्लाह का चेहरा देखने लगे मगर हज़रते महबूबे इलाही नजर ना आए. इतने में अल्लाह के रसूल ने फरमाया ऐ खुसरो किसको तलाश करते हो?
अमीर खुसरो ने फ़रमाया हुजूर अपने शैख को तलाश करता हूं. कुर्बान जाए मेरे आका ने फरमाया इससे ऊपर वाली कचहरी (दरबार) में जाओ तो आप उससे ऊपर वाली कचहरी (दरबार)में चले गए वहां भी मेरे आका मौजूद थे हजरत अमीर खुसरो फिर हर वली अल्लाह चेहरा देखने लगे मगर आपको आपके शैख नजर ना आए. अल्लाह के हबीब ने यहां भी अमीर खुसरो से मुखातिब हुए फरमाया खुसरो किसे तलाश करते हो? अर्ज की हुजूर अपने शैख को तलाश करता हूं फरमाया इससे ऊपर वाली कचहरी मंज़िल में जाओ इस तरह करते करते अमीर खुसरो सातवीं कचेहरी (मनजील) जो के आखिरी कचहरी (मंज़िल) तक पहुंच गए और हर वली का चेहरा देखने लगे हर मंजिल के साथ साथ इन्हें अपने पीर को देखने की तड़प बढ़ती जा रही थी वहां भी अल्लाह के नबी स०अ०व० मौजूद थे और आप के बिल्कुल करीब एक बुजुर्ग थे और इनके बिल्कुल पीछे एक और बुजुर्ग, नबी स०अ०व० ने इनसे फरमाया कि कभी पीछे भी देख लिया कीजिए तो जैसे ही उन्होंने पीछे देखा तो वह हज़रते महबूबे इलाही थे और इनके बिल्कुल आगे जो बुजुर्ग थे वलियों के सरदार हजरत गौसे आजम पीराने पीर थे हजरत अमीर खुसरो ने इतने दिनों की परेशानी के बाद अपने शैख का यह मकाम देखा तो वलियों के दरमियान में से अपने शैख तक पहुंचने की कोशिश की यहां साथ ही हजरते बूअली शाह कलंदर ने अपना हाथ उठा लिया और आप साथ ही फिर इसी दुनिया ए फानी में आ गए लेकिन आप वजद में थे झूमते झूमते अपने शैख के आस्ताने तक आए और यह कलाम लिखा..नमी दानम के आखिर चूं मनम दीदार.ये सारे वाकिये में कुछ बातें बहुत अहम है एक यह है कि जिस तरह अल्लाह के हबीब स०अ०व० हर कचहरी (मंज़िल) में मौजूद है इसी तरह आप हर जगह मौजूद है और अपने हर उम्मती का अहवाल और नाम तक जानते हैं जभी तो अमीर खुसरो का नाम लेकर मुखातिब हुए दूसरी यह कि हजरते बूअली शाह कलंदर अमीर खुसरो को उनके शैख उनके पीर का मकाम दिखाना चाहते थे..
यह वाकिये में हज़रत अमीर खुसरो की सबसे बड़ी खुश किस्मती यह है के हुजूर स०अ०व० सात मर्तबा मुखातिब हुए और सात मर्तबा अल्लाह के रसूल स०अ०व० का दीदार हुआ.. अल्लाहु अकबर…
इससे बढ़कर एक उम्मती के लिए खुश किस्मती क्या हो सकती है? मालिक हमें भी अपने नबी स०अ०व० के बारगाह में कुबुल फरमाए आमीन…
मोहे अपने ही रंग में रंग दो निजाम…🙏🏻🙇🏻‍♂️

Hadith Azmat e Hazrat Fatima Salam Allahi Alaih

Huzoor Nabi Akram ﷺ ne farmaya:

===>“Meri jaan ke 3 mein se 2 hissey FATIMA hain” “isliye jisne Fatima ko Dukh pohunchaya….usne mujhe Dukh pohunchaya”

Sahih Bukhari 3:1361: #3510

===>“Aye Fatima (Salam Allahi Alaih), teri Narazgi se ALLAH naraz hojata hai”

Hakim al-Mustadrak 3:167:4730

===>“Fatima meri jaan hai…Jo usey Aziyat de…wo Mujhe ﷺ aziyat deta hai”

Sahih Muslim 4:1903:2449

===>“Aye Ali, Aye Fatima, Aye Hasan aur Hussain (Alaihimussalam) !..Jo tumse jung karega..mai us sey Jung karunga. Aur jo tumse dosti aur salamti ka haath badhayega…ussey mai dosti karunga.

Jamey Tirmidhi 5:699: 3870

===>“Jo Meri Ahl-e-Bait se Bugz rakhe wo Munafiq hai”

Ahmad bin Hambal: 2:661: 1126

===>“Meri Ahl-e-Bayt! Humse koi munafiq, kabhi Muhabbat nahi kar sakta…aur koi Momin humse kabhi bugz nahi karsakta”

~ Ibn e Abi Shaiba 6:372: 32116

===>“O meri Ahl-e-Bayt! Koee ek shaks aisa nahi, jo tumse Bughz rakhe aur Allah usey pakad ke Jahannum mein na daldey”

Hakim al-Mustadrak 3:162: 4717