Khana khane ke baad ki dua

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Bismillahirrahmanirrahim

✦ Khana khane ke baad ki dua
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الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَذَا وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلاَ قُوَّةٍ ‏‏
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✦ Sahl bin Muadh Radi Allahu Anhu se rivayat hai ki Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi wasallam ne farmaya jo shakhs khana khane ke baad ye dua padhega
to uske tamam pichle gunah maaf kar diye jayenge
Alhamdulillahillazi Atamni haza wa razaqnihi min gairi haulin minni wa la Quwwatin
(tamam tarifein us Allah ke liye hai jisne mujhe ye khana khilaya aur meri kudrat aur taqat na hone ke bawjud ye ata farmaya)
jamia Tirmizi,Jild 2,1383-Hasan
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✦ सहल बिन मुआज़ रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो शख्स खाना खाने के बाद ये दुआ पढ़ेगा
तो उसके तमाम पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाएँगे
अल्हाम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अतअमनी हाज़ा व रज़कनिही मीन गैरि हौलिन मिन्नी वा ला कुव्वातिन
(तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिए है जिसने मुझे ये खाना खिलाया और मेरी क़ुदरत और ताक़त ना होने के बावजूद ये अता फरमाया )
जामिया तिरमिज़ी, जिल्द 2,1383-हसन
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✦ Sahl bin Muadh bin Anas Radi Allahu Anhu narrated from his father that The Prophet ﷺ said: Whoever eats food and says this (supplication) his past sins shall be forgiven.
(Alhamdulillahillazi Atamni haza wa razaqnihi min gairi haulin minni wa la Quwwatin)
(All praise is due to Allah who fed me this and granted it as provision to me, without any effort from me nor power)
Jamia Tirmizi, Book 45, 3458-Hasan

सवाल : SEX क्या है ?

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सवाल : SEX क्या है ?
🅾सवाल : ज़िना क्या है ?

🅾जवाब :अगर मर्द एक ऐसी औरत से सोहबत/ हमबिस्तरी करे जो उसकी बीवी नही है तो, ये ज़िना कहलाता है, ज़रूरी नही की साथ सोने को ही ज़िना कहते हैं, बल्की छूना भी ज़िना एक हिस्सा है और किसी पराई औरत को देखना आँखों का ज़िना है।

🅾ज़िना को इस्लाम में एक बहुत बड़ा गुनाह माना गया है, और इस्लाम ने ऐसा करने वालो की सज़ा दुनिया में ही रखी है. और मरने के बाद अल्लाह इसकी सख्त सज़ा देगा।

🅾ज़िना के बारे में कुछ हदीस और क़ुरान की आयत देखिये।हज़रत मुहम्मद ( सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फ़रमाया मोमिन (मुस्लिम) होते हुए तो कोई ज़िना कर ही नही सकता।(Bukhari Sharif, Jild:3, Safa:614 Hadees:1714)

🅾अल्लाह क़ुरान में फ़रमाता है और (देखो) ज़िना के पास भी ना जाना, बेशक वो बेहयाई है और बुरी राह है”(Al-quraan : Al-Isra: A-32)

🅾ज़िना की सज़ा और अज़ाब: अगर ज़िना करनेवाले शादी शुदा हो तो खुले मैदान में पत्थर मारमार कर मार डाला जाये और अगर कुंवारे हो तो 100 कोड़े मारे जाये।(Bukhari Sharif Jild Safa:615/615 Hadees:1715)

🅾आज कल देखने में आया है की इस गुनाह में बहोत से लोग शामिल हैं, खास करके उस बाज़ार मे जहां औरते और मर्द जाते है किसका हाथ किसको लग रहा हे कहा लग रहा हे कुछ मालुम नही होता, चाहे लड़का हो या लड़की.और फिर इस गुनाह को करने के बाद अपने दोस्तों को बड़ी शान से सुनाते हैं, बल्कि उनको भी ऐसा करने की राय देते हैं।

🅾अगर कोई कुंवारा लड़का या लड़की कोई ग़लत काम करता है तो इसका गुनाह इसके माँ बाप को भी मिलता है क्योंकी उन्होंने उनकी जल्दी शादी नही की जिसकी वजह से वो गलत काम करने लगे,
और शादी की उम्र होने के बाद भी माँ बाप उनकी शादी ना करे तो अल्लाह नाराज होजाता हे और उनके घर की बरकत खत्म होजाती हे अल्लाह उन माँ बाप से क़यामत के दिन हिसाब मांगेगा

🅾और एक जगह अल्लाह ने क़ुरान में फ़रमाया की पाक दामन लड़कियां, पाक दामन लड़को के लिए हैं,

🅾इसका मतलब यह है की अगर आप अच्छी हैं तो अल्लाह आपको भी अच्छी बीवी या दूल्हा देगा और ख़राब हैं तो समझ लीजिये।

🅾इंसान जो भी ग़लत काम करता है उसकी क़ीमत उसके बच्चो, माँ या बहन को इस दुनिया में ही चुकानी पड़ती है,

🅾इमाम शाफ़ई रहमतुल्लाह कहते हैं के ज़िना एक क़र्ज़ है, अगर तू यह क़र्ज़ लेगा तो तेरे घर से यानी तेरी बहन बहु बेटी से वसूल किया जायेगा।

🅾दोस्तों इस कबीरा गुनाह की और भी सज़ायें हैं, इसलिए खुद भी बचो और अपने दोस्तों को भी बचाओ,

🅾अगर आपने अपने सेक्स का क़िस्सा अपने दोस्त/सहेली को सुनाया और उसके दिल में भी ऐसा करने की बात आ गई और उसने वो काम कर लिया तो उसका गुनाह आपको भी मिलेगा, क्योंकि आपने ही उसको ग़लत रास्ता दिखाया है.और आपके दोस्त आगे भी जितने लोगो को ग़लत रास्ता दिखायेंगे उन सबका गुनाह आपकेखाते में आएगा।

🅾सबके घर मे बहु, बहन, बेटी, माँ हैं, अगर आप दूसरे की तरफ तांक झांक करोगे तो आपका घर भी महफूज़ नही रहेगा,

🅾अल्लाह हम सबको इस बड़े गुनाह से बचाए।

🅾आज आप यह मेसेज अगर किसी 1 को भी शेयर करदें तो आप सोच भी नही सकते कितने लोग”अल्लाह” से तौबा कर लेंगे

🅾इंशा अल्लाह.हदीस :-जब तुम अपने बिस्तर पर जाओ तो सुराः फ़ातिह और सूरह इखलास को पढ़ लिया करो, तो मौत के अलावा हर चीज़ से बेखौफ हो जाओगे.

🅾वह दिन क़रीब है जब आसमान पे सिर्फ एक सिताराहोगा.

🅾 तौबा का दरवाज़ा बंद कर दिया जायेगा.

🅾क़ुरआन के हरूफ मिट जायेंगे ,

🅾सूरज ज़मीन के बिलकुल पास आ जायेगा.

🅾हुज़ूर सलल्लाहू अलैह वसल्लम ने फ़रमाया “बे नूर हो जाये उसका चेहरा जो कोई मेरी हदीस को सुन कर आगे न पोहचाए.😪😪😪

हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) के कथन (199 – 212)

199

आप (अ.स.) ने एक बार आम लोगों की भीड़ को देख कर फ़रमायाः

ये वो लोग हैं जो अगर इकट्ठा हो जाते हैं तो छा जाते हैं और जब फैल जाते हैं तो पहचाने नहीं जाते।

एक दूसरी जगह यही बात इस प्रकार कही गई हैः

ये वो लोग हैं कि जब इकट्ठा हो जाते हैं तो हानि पहुँचाते हैं और जब फैल जाते हैं तो लाभदायक होते हैं।

आप (अ.स.) से कहा गया कि इन लोगों के एकत्र होने से होने वाली हानि के बारे में तो जानते हैं किन्तु इन के फैल जाने से क्या लाभ होता है, तो फ़रमायाः

विभिन्न प्रकार के काम करने वाले लोग अपने अपने कारोबार की ओर लौट जाते हैं और लोग इस से लाभ उठाते है। राज मिस्त्री लोग अपने द्वारा बनाए जाने वाले भवनों की ओर लौट जाते हैं, कपड़ा बुनने वाले लोग अपने काम की जगह की ओर और नानबाई अपनी रोटी बनाने की जगह की तरफ़ लौट जाते हैं।

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आप (अ.स.) के सामने एक अपराधी लाया गया तो उस के पीछे पीछे तमाशाइयों का हुजूम भी था, जिस को देख कर आप (अ.स.) ने फ़रमायाः

ऐसे चेहरों पर फिटकार हो जो केवल बुरे अवसरों पर ही नज़र आते हैं।

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हर इनसान के साथ दो फ़रिश्ते होते हैं जो उस की रक्षा करते हैं और जब मौत का समय आता है तो उस के और मौत के बीच से हट जाते हैं। और बेशक इंसान की निर्धारित आयु उस के लिए मज़बूत ढाल है।

202

तलहा व ज़ुबैर ने आप (अ.स.) से कहा कि हम इस शर्त पर आप की बैअत करते हैं कि इस हुकूमत में आप के शरीक होंगे, तो आप (अ.स.) ने फ़रमायाः

नहीं, बल्कि तुम शक्ति पहुँचाने और हाथ बँटाने में शरीक और कमज़ोरी और कठिनाई के अवसर पर सहायक होगे।

203

आप (अ.स.) ने फ़रमायाः अल्लाह का तक़वा इख़तियार करो (अर्थात अपने मन और कर्मों को पवित्र कर लो) क्यूँकि तुम जो कुछ कहते हो वो उस को सुनता है और अगर तुम कोई बात अपने दिल में छिपा कर रखो तो वो जानता है। और उस मौत की ओर बढ़ने की तैयारी करो कि अगर तुम उस से भागो गे तो वो तुम को पा लेगी और अगर ठहर जाओगे तो तुम को पकड़ लेगी और अगर तुम उस को भूल जाओ गे तो वो तुम को याद रखे गी।

204

किसी व्यक्ति का तुम्हारे उपकार के बदले तुम्हारा कृतज्ञ न होना तुम को उपकार करने से हतोत्साहित न कर दे। क्यूँकि कभी कभी ऐसा भी होता है कि तुम्हारे उपकार की वो व्यक्ति सराहना करता है जिस ने उस उपकार से कोई लाभ ही न उठाया हो। और उस अकृतज्ञ व्यक्ति ने तुम्हारे हक़ को जितनी हानि पहुँचाई हो तुम उस से कहीं अधिक उस सराहना करने वाले की सराहना से प्राप्त कर लो गे। और अल्लाह उपकार करने वालों को दोस्त रखता है।

205

हर पात्र (बरतन) उस में रखी गई चीज़ की वजह से तंग हो जाता है, किन्तु ज्ञान का पात्र एक ऐसा पात्र है कि उस में जितना ज्ञान भरा जाता है वो उतना ही विशाल हो जाता है।

206

शालीन (बुर्दबार) व्यक्ति को अपनी शालीनता (बुर्दबारी) का पहला प्रतिफल यह मिलता है कि लोग जाहिल व्यक्ति के ख़िलाफ़ उस के तरफ़दार हो जाते हैं।

207

अगर शालीन (बुर्दबार) नहीं हो तो बुर्दबार बनने की कोशिश करो क्यूँकि ऐसा कम ही होता है कि कोई व्यक्ति ख़ुद को लोगों के एक विशेष समूह जैसा दिखाने की कोशिश करे और वो उन जैसा न हो जाए।

208

आप (अ.स.) ने फ़रमायाः जिस ने अपने आप का हिसाब किया उस ने लाभ उठाया और जो इस काम से बेपरवा रहा उस ने नुक़सान उठाया, और जो डरा वो सुरक्षित हो गया और जिस ने उपदेश ग्रहण किया वो देखने वाला हो गया और जो देखने वाला हो गया वो समझ गया और जिस ने समझ लिया उस ने ज्ञान प्राप्त कर लिया।

209

यह दुनिया मुँहज़ोरी दिखाने के बाद हमारी तरफ़ झुकेगी, उसी तरह जिस तरह काटने वाली ऊँटनी अपने बच्चे की तरफ़ झुकती है। फिर आप (अ.स.) ने क़ुरान शरीफ़ की एक आयत की तिलावत फ़रमाई जिस का अर्थ हैः

“हम चाहते हैं कि जो लोग ज़मीन पर कमज़ोर कर दिए गए हैं उन पर एहसान करें और उन को इमाम बनाएँ और उन्हीं को इस ज़मीन का वारिस बनाएँ।”

210

आप (अ.स.) ने फ़रमाया, अल्लाह का तक़वा इख़तियार करो (अर्थात अपने मन व कर्मों को पवित्र कर लो) उस व्यक्ति की तरह जो कमर कस कर तैयार हो गया और जिस ने समय पर कोशिश की और अल्लाह की बन्दगी के रास्ते पर डरता हुआ मगर तेज़ी से आगे बढ़ा और जिस ने अपने कर्मों और अपनी आख़िरी मन्ज़िल (गन्तव्य) पर नज़र रखी।

211

दानशीलता (सख़ावत) मान मर्यादा की रक्षक है, बुर्दबारी मूर्ख के मुँह का तसमा है, क्षमा करना सफ़लता की ज़कात है (अर्थात सफ़लता के लिए क्षमा करना ज़रूरी है), ग़द्दारी करने वाले को भूल जाना ही उस का बदला है। परामर्श (मशवरा) लेने का अर्थ सही रास्ता पा जाना है। जो व्यक्ति केवल अपनी राय पर भरोसा करता है ख़ुद को ख़तरे में डालता है। धैर्य (सब्र) विपत्तियों को दूर करता है। व्याकुलता (व्यक्ति के बुरे) समय की सहायता करती है। सबसे बड़ी दौलत आकांक्षाओं से हाथ उठा लेना है। बहुत सी बुद्घियाँ अमीर लोगों की वासनाओं की दास हो जाती हैं। अनुभव अल्लाह की मेहरबानी से ही प्राप्त होता है। दोस्ती एक तरह की रिश्तेदारी है। जो तुम से दुखी हो उस पर विश्वास मत करो।

212

इंसान की ख़ुदपसंदी उस की अक़ल की दुश्मन है।

About naming of doubt as such and disparagement of those in doubt

Doubt is named doubt because it resembles truth. As for lovers of Allah, their conviction serves them as light and the direction of the right path (itself) serves as their guide; while the enemies of Allah, in time of doubt call to misguidance in the darkness of doubt and their guide is blindness (of intelligence). One who fears death cannot escape it nor can one who fears for eternal life secure it.

कुंडे की नियाज़ की हक़ीक़त।।

22 रज्जब उल मुरज्जब इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की नियाज़।।

हिजरी 122 रज्जब की 22 तारीख़ की रात यानी 21 का दिन गुजार कर 22 की रात बा वक़्त ए नमाज़ ए तहज्जुद अल्लाह तआला ने सैय्यदना इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम को मक़ाम ए ग़ौसियत ए कुब्रा अता फरमाया।।

सुबह 22 रज्जब को आपने अल्लाह तआला की जानिब से ये अज़ीम नेमत मिलने पर बतौर ए शुक्र अदा करने के लिए नियाज़ करवाई जो दूध और चावल मिलाकर बनाई गई जिसे हम खीर कहते हैं।।

आप ख़ानदान ए रसूल सल्लम के चश्म ओ चिराग़ थे, आप के घर में टूटी चटाई और मिट्टी के बर्तन ही थे इसी पर आप शाकिर ओ साबिर थे, आप ने मिट्टी के पियाले में नियाज़ रख कर अपने दोस्त ओ अहबाब को बुला कर फरमाया कि आज रात अल्लाह तआला ने मुझे मक़ाम ए ग़ौसियत ए कुब्रा अता फ़रमाया है इसी का शुक्र अदा करते हुए ये नियाज़ आप लोगों को पेश करता हूं।।

आप के शाहब ज़ादे इमाम मूसा क़ाज़िम अलैहिस्सलाम और आप के दीगर मुसाहेबीन ने पूछा कि इस में हमारे लिए क्या फायदा है?

आप ने फरमाया कि रब्बे काबा की कसम अल्लाह तआला ने जो नेमत मुझे अता फरमाई है जिस का मैं शुक्र अदा करता हूं नियाज़ की शक्ल में इसी तरह इसी तारीख में जो भी शुक्र अदा करेगा और हमारे वसीले से जो दुआ मांगेगा तो अल्लाह तआला उसकी मुराद ज़रूर पूरा फरमाएगा और दुआ ज़रूर कबूल होगी क्योंकि अल्लाह तआला अपने शुक्र गुज़ार बन्दों को मायूस नहीं करता।।

कुंडे का फातिहा 22 रज्जब उल मुरज्जब को ही करें।
22 रज्जब ना ही आप के विशाल की तारीख़ है और ना ही विलादत की तारीख है, बल्कि इस दिन आपको मक़ाम ए ग़ौसियत ए कुब्रा अता की गई थी इसी खुशी में हम ये नियाज़ करते हैं।

~ रेफरेंस ~
ये ऊपर लिखी बात इन किताबों से साबित है।

📚 मिन्हाज उस सालेहीन।
✍ सैयदना इमाम मोहि उद्दीन इब्ने अबू बकर बगदाद।

📚 कशफुल असरार।
✍सैयदना इमाम अब्दुल्लाह बिन अली अस्फाहनी।

📚 मदाम ए असरार अहले बैत।
✍ सैयदना इमाम मोहम्मद बिन इस्माईल मुतक्की।

📚 मखजन ए अनवार ए विलायत।
✍ सैयदना इमाम बरहन उद्दीन अस्कलनी।

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22 रजब सैय्यदना इमाम जाफ़र सादिक़ अला जददेही व अलैहिस्सलाम की नियाज़ के मुताल्लिक़ उल्मा ए अहलेसुन्नत की गवाही
ये सब उल्मा ए हक़ सिर्फ़ दो चार किताबें पढ़ने पढ़ाने वाले नही बल्कि अपने वक़्त के इमाम अमीर शैखुल हदीस मुफ़्ती मुहक़्क़िक़ मुहद्दिस हकीमुल उम्मत हैं ये सब इस बात को क़ुबूल करते हैं कि 22 रजब को नियाज़ ए इमाम जाफ़र सादिक़ दिलाई जाती है और ये नियाज़ अहलेसुन्नत में बहुत ही मशहूर और मारूफ़ है